Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 38

by Story With Sanjana September 3, 2026
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Pasandida Aurat Season 3 – 38

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

प्राची के कहने पर विक्रम ऑफिस से निकल गया और मुंबई के ट्रेफिक से झुंझकर प्राइम मॉल विले पार्ले पहुंचा जहा प्राची उसका इन्तजार कर रही थी। विक्रम ने अपनी गाड़ी को पार्क किया और प्राची के पास आया तो प्राची ने अपनी कलाई पर बंधी घडी दिखाते हुए गुस्से से कहा,”पुरे 40 मिनिट लेट हो तुम विक्रम ! तुम इतना केयरलेस कैसे हो सकते हो ?”

“सॉरी ट्रेफिक इतना ज्यादा था कि टाइम लग गया , वैसे तुमने मुझे यहा क्यों बुलाया है ? वो भी इस सस्ते से मॉल में,,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने मॉल को देखकर कहा जो कि उसकी नजर में सस्ता था !
“ओह्ह्ह ऑन विक्रम ये इतना बुरा भी नहीं है , आओ चलते है”,प्राची ने कहा
“कहा ?”,विक्रम ने हैरानी से पूछा

“ओह्हफो ! तुम सवाल बहुत करते हो ?”,प्राची ने झुंझलाकर कहा
“तुम जवाब क्यों नहीं देती ?”,विक्रम ने भी झुंझलाकर कहा तो इस बार प्राची ने उसकी बांह थामी और उसे अंदर ले जाते हुए कहा,”जल्दी ही तुम्हे तुम्हारे सारे सवालो के जवाब मिल जायेंगे”
विक्रम को आख़िरकार हार माननी पड़ी और वह प्राची के साथ अंदर चला गया। प्राची विक्रम को लेकर फूलों वाले एक सेक्शन में आयी और फिर चुनचुन के ढेर सारे फूल और बुके लेने लगी।

विक्रम को कुछ समझ नहीं आ रहा था ना ही उसे ये पता था कि प्राची इतने बुके और फूल क्यों खरीद रही है ? वह तो बस हैरान परेशान था कि इतने फूलो का प्राची आखिर करने क्या वाली है ?
प्राची ने एक साथ 150 बुके का आर्डर दिया और उन्हें पैक करने को कहा। वह विक्रम को अपने साथ लेकर एक आर्ट गैलरी की तरफ चली आयी और वहा रखे ग्रीटिंग्स देखने लगी
“प्राची ! आज कोई स्पेशल डे है क्या ?”,विक्रम ने पूछा

प्राची एक कार्ड हाथ में थामे विक्रम की तरफ पलटी और ख़ुशी से चहककर कहा,”हाँ स्पेशल तो है”
प्राची ने हाथ में पकड़ा कार्ड विक्रम के हाथ में थमाया और दूसरी तरफ जाकर दूसरे कार्ड्स देखने लगी। विक्रम ने हाथ में पकडे कार्ड को देखा जिस पर बहुत ही खूबसूरत शब्दों में लिखा था “I Love You Sweetheart”
इसे पढ़कर विक्रम को एक पल के लिए लगा जैसे प्राची आज उसे ही परपोज़ करने वाली है वरना वह उसे क्यों बुलाती ?

कही ना कही विक्रम के मन में पहली मुलाकात  प्राची के लिए भावनाये थी लेकिन प्राची किसी और को चाहती है ये जानकर विक्रम ने अपनी भावनाये कभी जाहिर नहीं की।
आज प्राची को इतना खुश देखकर विक्रम के मन में वो भावनाये फिर से जागने लगी और उसे लगने लगा कि हो ना हो प्राची ये सब उसके लिए कर रही है। अब तो वह प्राची से चिढ़ने के बजाय ख़ुशी ख़ुशी उसके साथ ये सब खरीदने लगा ! मॉल में दोनों को कब दो घंटे बीत गए उन्हें पता ही नहीं चला।

प्राची ने आखिर में वही ग्रीटिंग कार्ड खरीदा जो उसने विक्रम को थमाया था प्राची विक्रम के साथ बाहर चली आयी। जो बुके उसने खरीदे थे वो उसने पहले ही विक्रम की गाडी में रखवा दिए थे क्योकि प्राची यहाँ कैब से आयी थी।

विक्रम ड्राइवर सीट पर आ बैठा और प्राची मुस्कुराते हुए उसके बगल में आ बैठी। उसने गाडी में लगे शीशे को नीचे किया और उसमे देखते हुए लिपस्टिक लगायी , अपने चेहरे को पोलिश किया और अपनी ड्रेस को थोड़ा नीचे खींचा जिस से उसके उभार दिख रहे थे। 

और इस ड्रेस में वह काफी हॉट लग रही थी। उसने अपने बालों को सेट किया और फिर अपने पर्स से परफ्यूम निकालकर लगाया। विक्रम एकटक प्राची को देखता रहा और समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर ये सब क्या है ? प्राची ने देखा विक्रम उसे ही देख रहा है तो उसने कहा,”क्या देख रहे हो ? चलो”
“कहा चलना है मैडम ?”,विक्रम ने बहुत ही अदा के साथ कहा
“एयरपोर्ट,,,,,!!!”,प्राची ने कहा

“एयरपोर्ट ? अब तुम्हे एयरपोर्ट क्यों जाना है ?”,विक्रम ने गाडी स्टार्ट करके आगे बढ़ाते हुए कहा
“पहले चलो फिर बताते हूँ”,प्राची ने कहा और विक्रम एयरपोर्ट के लिए निकल गया जो कि विले पार्ले से ज्यादा दूर नहीं था। रास्तेभर विक्रम इधर उधर की बाते करते हुए प्राची से ये जानने की कोशिश करता रहा कि उसे एयरपोर्ट क्यों जाना है और ये बुके उसने क्यों लिए है ? कुछ ही देर में गाडी एयरपोर्ट पहुंची ! प्राची गाड़ी ने नीचे उतरी उसने पहले से वहा एक स्टेण्ड मंगवाया हुआ था जिस पर वह बुके लगा सके।

उसने विक्रम की मदद से सारे बुके स्टेण्ड में लगाये और फिर विक्रम से गाडी पार्क करके आने को कहा। विक्रम वहा से चला गया तो प्राची ने अपने बैग से पेन निकाला और हाथ में पकडे कार्ड पर एक खूबसूरत नाम लिखकर उन्हें भी बुके के बीच लगा दिया और स्टेण्ड के ठीक सामने जाकर खड़ी हो गयी। विक्रम प्राची के पास आया और कहा,”अब तो बता दो तुमने ये किसके लिए किया है ?”

प्राची ने विक्रम की तरफ देखा और मुस्कुराकर कहा,”अभी पता चल जाएगा”
विक्रम हाथ बांधकर प्राची के बगल में खड़ा होकर इन्तजार करने लगा।

कुछ देर बाद एयरपोर्ट के एग्जिट गेट से अवनि और पृथ्वी अपने अपने सामान के साथ बाहर आये। दोनों के चेहरे ख़ुशी से खिले हुए थे।  विक्रम एक जरुरी फोन आने की वजह से साइड में चला गया ! वह अवनि और पृथ्वी को देख ही नहीं पाया लेकिन प्राची की चमकती निगाहे पृथ्वी पर ही थी।
पृथ्वी एक हाथ से बैग और दूसरे हाथ से अवनि का हाथ थामे जैसे ही बुके स्टेण्ड के सामने से गुजरा अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! ये फूल कितने सुंदर है ना ?”

पृथ्वी रुका और फूलों को देखकर कहा,”हाँ बहुत सुन्दर है”
फूलों के साथ ही अवनि की नजर पड़ी उनके साथ रखे उस बड़े से ग्रीटिंग कार्ड पर जिसपर पृथ्वी का नाम लिखा था। अवनि ने उस कार्ड को देखकर कहा,”यहाँ एक ग्रीटिंग कार्ड भी है और इस पर आपका नाम लिखा है”
पृथ्वी मुस्कुराया और कार्ड को उठाकर कहा,”ये जयदीप सर भी ना,,,,,,,,,,,कुछ भी करते है। लगता है फूल भी उन्होंने ही भेजे है”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराई। पृथ्वी ने कार्ड खोलकर देखा और उसमे लिखे शब्द पढ़े तो उसके होंठो की मुस्कान गायब हो गयी और चेहरे के भाव कठोर हो गए।  पलटकर देखा तो नजर सामने खड़ी प्राची पर पड़ी। प्राची पृथ्वी को देखकर मुस्कुराई और बड़ी अदा के साथ अपना हाथ हिलाया ये देखकर पृथ्वी की आँखों में गुस्से के भाव उभर आये। अवनि ने मुस्कुराते हुए पृथ्वी को एकदम गंभीर देखा तो कहा,”क्या हुआ पृथ्वी , क्या लिखा है इसमें ?”

पृथ्वी नहीं चाहता था अवनि उस कार्ड में लिखे शब्द पढ़े और उसके मन को ठेस पहुंचे। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने प्राची की तरफ देखा तो उसे पृथ्वी के परेशान होने की वजह समझ आयी।
पृथ्वी प्राची की तरफ जाने लगा तो अवनि ने उसकी कलाई पकड़ ली वह नहीं चाहती थी इस वक्त पृथ्वी प्राची से कुछ कहे या बहस करे। पृथ्वी ने धीरे से अपना हाथ अवनि के हाथ से छुड़ाया और कहा,”मैं अभी आया”

पृथ्वी ग्रीटिंग कार्ड को हाथ में लिए प्राची की तरफ बढ़ा। पृथ्वी को अपनी तरफ आते देखकर प्राची ख़ुशी से फूली नहीं समा रही थी। मुस्कुराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी और आँखों में चमक थी। विक्रम फोन जेब में रखकर प्राची की तरफ चला आया लेकिन प्राची और पृथ्वी को सामने देखकर कुछ दूर पहले ही रूक गया।

“कैसा लगा मेरा वेलकम सरप्राइज पृथ्वी ?”,प्राची ने मुस्कुराकर अपने सामने खड़े पृथ्वी से कहा
“निहायती घटिया और बकवास,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
प्राची ने सुना तो पहले हैरान हुई और फिर एकदम से मुस्कुराकर कहा,”अह्ह्ह ! सही कहा तुमने ये सच में बकवास ही था। उन फूलों की तुम से क्या बराबरी पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,,और मेरा मैसेज , क्या वो भी घटिया था ?”

पृथ्वी ने प्राची की आँखों में देखते हुए उसके सामने कार्ड के टुकड़े टुकड़े किये और प्राची के मुँह पर फेंककर कहा,”मुझे नफरत है तुम से और तुम्हारे लिखे इन शब्दों से जिनसे घटियापन की बू आती है | आइंदा अगर तुमने ऐसी कोई हरकत की तो मैं भूल जाऊंगा तुम एक औरत हो”

प्राची ने सुना तो उसके चेहरे से ख़ुशी और होंठो से हंसी एकदम से गायब हो गयी। उसे लगा उसका सरप्राइज देखकर पृथ्वी खुश हो जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ उलटा पृथ्वी ने चंद सेकेण्ड में उसे उसकी सही जगह दिखा दी। प्राची को खामोश और निराश देखकर पृथ्वी ने आगे कहा,”तुम्हे अगर लगता है ये सब करके तुम मुझे अवनि से दूर कर दोगी तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी गलतफहमी है।

जब अवनि मुझसे प्यार नहीं करती थी तब मैंने उसे किसी के लिए छोड़ा तो अब क्या छोडूंगा जब मैं ये जान चुका हूँ कि वो मुझसे प्यार करती है,,,,,,,,,,,,बेहतर इसी में होगा कि मुझसे और मेरी पत्नि से दूर रहो,,,,,,,,,गुड नाईट”

प्राची को एक जबरदस्त फटकार लगाकर पृथ्वी अवनि की तरफ चला गया। उसने सामने रखे बुके में से एक लाल गुलाब निकाला और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”आई लव यू”
अवनि के होंठो पर मुस्कराहट वापस लौट आयी उसने पृथ्वी से गुलाब लिया और उसकी बाँह थाम ली
“चले ?”,पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा और अवनि को साथ लेकर वहा से चला गया। प्राची गुस्से से उन्हें जाते हुए देखती रही। विक्रम ने जब देखा कि प्राची ने ये सब पृथ्वी के लिए किया है तो अंदर ही अंदर वह जलन और गुस्से की भावना से जल उठा और प्राची के पास आने के बजाय सीधा पार्किंग की तरफ चला आया।

उसने पार्किंग से अपनी गाड़ी निकाली और प्राची के सामने से गुजरते हुए स्पीड कम करके गाड़ी का शीशा नीचे किया और प्राची को देखा। प्राची ने विक्रम को गाडी में देखा , वह विक्रम की तरफ जाती इस से पहले ही विक्रम अपनी गाडी लेकर वहा से चला गया। प्राची गाडी की तरफ भागी लेकिन तब तक विक्रम वहा से जा चुका था और ये देखकर प्राची ने गुस्से से अपना पर्स जमीन पर दे मारा।

एयरपोर्ट से निकलकर पृथ्वी ने कैब बुक किया और पनवेल चलने को कहा। उसने अपने अपार्टमेंट की जगह रवि जी के घर का पता बताया। ड्राइवर ने सामान पीछे डिग्गी में रख दिया ! अवनि और पृथ्वी पिछली सीट पर आ बैठे और ड्राइवर ने गाडी आगे बढ़ा दी।

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
गिरिजा को रात का खाना खिलाकर सिद्धार्थ और जगदीश जी ने भी साथ बैठकर खाना खा लिया। जगदीश जी गिरिजा के पास आ बैठे और सिद्धार्थ किचन में बर्तन धोने लगा। ऑफिस का काम उसने वर्क फ्रॉम होम ले लिया साथ ही अपने बॉस को गिरिजा जी की तबियत के बारे में भी बता दिया जिस से उसके बॉस ने उसे बस कुछ जरुरी मीटिंग अटेंड करने और जरुरी रिपोर्ट्स बनाने का काम दिया।

सिद्धार्थ ऑफिस का काम करने के साथ साथ घर का काम भी मैनेज कर रहा था हालाँकि सब एक साथ करना उसके लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा था फिर भी वह जैसे तैसे सब कर रहा था। सिद्धार्थ को सब करते देखकर गिरिजा को दया आ रही थी तो वही जगदीश जी भी अब उस पर कम ही गुस्सा करते और छोटे मोटे कामो में उसकी मदद कर देते।

सिद्धार्थ बर्तन धोकर बाहर आया तो देखा जगदीश जी परेशान से कुछ ढूंढ रहे है। सिद्धार्थ उनके पास आया और कहा,”क्या हुआ , क्या ढूंढ रहे है आप ?”
“मेरी दवा नहीं मिल रही”,जगदीश जी ने कहा
“पापा ! वो तो आज सुबह ही खत्म हो गयी थी। आपने ही तो सारे खाली कागज फेंके थे”,सिद्धार्थ ने कहा
जगदीश जी ने सुना तो उन्हें याद आया कि सुबह वो सिद्धार्थ से दवा के लिए कहने वाले थे लेकिन कहना भूल गए थे।

जगदीश जी को उलझन में देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”आप बैठिये मैं अभी जाकर ले आता हूँ”
“अरे कोई बात नहीं बेटा सुबह ले आना”,जगदीश जी ने कहा
“कोई बात नहीं पापा मैं ले आऊंगा,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा और गाड़ी की चाबी उठाकर घर से निकल गया। जगदीश जी गिरिजा के पास चले आये और बैठकर उस से बाते करने लगे।

सिद्धार्थ तेज स्पीड में गाडी चला रहा था क्योकि रात के वक्त ट्रेफिक कम होता है ! उसके दिमाग में बस सुरभि चल रही थी साथ ही ये ख्याल कि सुरभि ने उसके साथ ऐसा क्यों किया ? जगदीश जी की दवा उसे उसी हॉस्पिटल के मेडिकल से लेनी थी जो सुरभि के अपार्टमेंट वाली रोड पर था। सिद्धार्थ ने दवा ली और गाड़ी स्टार्ट कर वहा से निकलने लगा तो सहसा ही उसे सुरभि का ख्याल फिर आया और उसने गाडी आगे बढ़ा दी।

वह जानना चाहता था आखिर सुरभि उसे इग्नोर क्यों कर रही है ? सिद्धार्थ अपार्टमेंट के बाहर पहुंचा लेकिन गार्ड ने उसे अंदर जाने नहीं दिया क्योकि 10 बजे बाद अपार्टमेंट में जाना अलाउड नहीं था।
“मुझे सिर्फ 5 मिनिट का काम है। मेरा उनसे से मिलना बहुत जरुरी है”,सिद्धार्थ ने गार्ड से कहा  

“सॉरी सर मैं अलाउ नहीं कर सकता , आप मैडम को फोन करके नीचे बुला लीजिये”,गार्ड ने कहा
“अरे फोन ही तो नहीं उठा रही है वो,,,,,,,,,,,,प्लीज यार समझो मेरी प्रॉब्लम मैं सुबह से उसे फोन कर रहा हूँ”,सिद्धार्थ ने रोआँसा होकर कहा

“आप वो 706 वाली मैडम की बात कर रहे है ?”,गार्ड ने याद करते हुए कहा
“हाँ वही सुरभि,,,,,,,,,,,,बस एक बार मुझे उस से मिलने दो , मैं 5 मिनिट में मिलकर वापस आ जाऊंगा”,सिद्धार्थ ने कहा
“पर वो तो चली गयी”,गार्ड ने कहा
“चली गई , लेकिन कहा ?”,सिद्धार्थ ने चौंककर कहा
“सुबह उसके घरवाले आये थे और उसे जबरदस्ती यहाँ से ले गए,,,,,,,,,,,ऐसा सोसायटी के लोग बात कर रहे थे तब मैंने सुना”,गार्ड ने कहा

सिद्धार्थ ने सुना तो हक्का बक्का रह गया , अब उसे समझ आया क्यों सुरभि सुबह से उसका फोन नहीं उठा रही थी और उसके मैसेज का जवाब नहीं दे रही ? सिद्धार्थ ने मायूसी से गार्ड की तरफ देखा और अपना सर हिलाकर वहा से चला गया। चलते चलते वह धीरे से खुद में ही बड़बड़ाया,”सुरभि के घरवाले उसे यहाँ से जबरदस्ती क्यों ले गए ? कही वो किसी बड़ी मुसीबत में तो नहीं ?”

सिद्धार्थ गाड़ी में आ बैठा और घर जाने के लिए निकल गया लेकिन अब एक बात की उसे तसल्ली थी कि सुरभि ने उसे धोखा नहीं दिया बल्कि वह खुद किसी मुसीबत में है।

( क्या पृथ्वी की इस जबरदस्त फटकार के बाद भी प्राची आएगी अवनि और पृथ्वी के बीच ? प्राची की इस हरकत पर क्या विक्रम करेगा उसे माफ़ ? सच्चाई जानने के बाद क्या सिद्धार्थ जाएगा सुरभि से मिलने उदयपुर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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क्रमश

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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