Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 9

by Story With Sanjana January 30, 2026
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Pasandida Aurat Season 2 – 9

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी को अपनी परवाह करते देखकर अवनि को एकदम से बीता हुआ कल याद आ गया जब ऐसे ही वह शाम सिद्धार्थ के साथ बैठकर खाना खा रही थी और खाना अटकने पर सिद्धार्थ ने उस पर ध्यान देने के बजाय उसे ही सबके सामने डांट दिया था। अवनि की आँखों में नमी उभर आयी ये देखकर पृथ्वी ने बहुत ही प्यार से कहा,”अरे मैं आपको डांट नहीं रहा,,,,,आप खाना खाइये” पृथ्वी वापस अपनी जगह आ बैठा और अवनि भी धीरे धीरे अपना खाना खाने लगी।

खाना खाने के बाद इस बार पृथ्वी ने खाने के बर्तन नकुल से धुलवाए क्योकि अभी कुछ देर पहले वह पृथ्वी के हाथ में झाड़ू देखकर उसका कुछ ज्यादा ही मजाक उड़ा रहा था। इसके बाद तीनो ने मिलकर घर के बचे हुए हिस्से की भी सफाई की और ये करते करते शाम के 4 बज चुके थे। नकुल अपने घर चला गया।

अवनि ने देखा साफ सफाई में कपडे गंदे हो चुके है तो उसने , हाथ मुँह धोया और कपडे बदल लिए। अवनि बाहर आयी तो देखा हॉल के सोफे पर बैठा किसी सोच में डूबा था। अवनि उसके पास आयी और कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी”

“हाँ , हाँ कहिये ना , कुछ चाहिए आपको ?”,पृथ्वी ने चौंककर कहा
“पृथ्वी ! क्या तुमने सच में मेरे साथ यहाँ रहने का मन बना लया है ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने सुना तो उठा और अवनि के सामने आकर कहा,”अवनि ! जब तक आई बाबा मुझे माफ़ नहीं कर देते और आपको अपना नहीं लेते हमे यही रहना पडेगा ,, आप फ़िक्र मत करो मैं उन्हें मना लूंगा,,,,,,,,,,,,,,लेकिन आपने ऐसा क्यों पूछा ?’

“क्योकि मुझे नहीं लगता हमे  रोज रोज नकुल को इस तरह परेशान करना चाहिए , रोज रोज बाहर का खाना सही नहीं होता , मैं कह रही थी अगर तुम किचन का सामान ले आओ तो मैं खाना घर पर ही बना लिया करूंगी”,अवनि ने झिझकते हुए कहा

“आप खाना बनाएंगी ?”,पृथ्वी ने पूछा
“हाँ क्यों नहीं ? तुमने मुझसे शादी की है और अब ये मेरी जिम्मेदारी है कि मैं तुम्हे शिकायत का मौका ना दू”,अवनि ने कहा

“मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है , मैं कपडे बदलकर आता हूँ फिर D-मार्ट चलते है आपको जो जो सामान चाहिए आप ले लेना”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी।

अवनि ने बुक रेंक में रखी डायरी निकाली और उसके आखरी पन्ने पर किचन के सामान की लिस्ट बनाने लगी ताकि खरीदारी करते वक्त उसे सब याद रहे। अवनि ने एक ही दिन में पृथ्वी के इस कबाड़खाने को घर तो बना ही दिया था अब बारी थी किचन की जिसे अवनि ने पहले ही साफ कर दिया बस जरूरत का सामान नहीं था और वही लेने वह पृथ्वी के साथ जाने वाली थी।

पृथ्वी अपने शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए कमरे से बाहर आया और अवनि से कहा,”चले ?”
अवनि ने डायरी का पन्ना फाड़ा और पृथ्वी की तरफ आकर कहा,”हम्म्म”
पृथ्वी की नजर अवनि की सुनी माँग पर पड़ी तो उसने कहा,”एक मिनिट मैं अभी आया”
पृथ्वी हॉल में दिवार पर लगे छोटे से मंदिर की तरफ आया जहा “माँ” की तस्वीर के सामने सिंदूर रखा था।

पृथ्वी ने अपनी चुटकी से उसे उठाया और अवनि के सामने आकर उसकी माँग में लगाकर कहा,”आपकी माँग सुनी क्यों है ? शायद आप लगाना भूल गयी पर मैं नहीं भूलूंगा,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी , आखिर क्या था ये लड़का ? इतना साफ दिल इतना मासूम कोई कैसे हो सकता है ?

अवनि को अपनी तरफ देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”इतना हक़ तो आप मुझे दे सकती है ना ?”
अवनि बोलना चाहती थी लेकिन शब्दों ने उसका साथ नहीं दिया , अपनी ने अपनी बड़ी बड़ी पलकें झपका दी तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा और कहा,”चलिए चलते है”

पृथ्वी अवनि को साथ को लेकर फ्लेट से बाहर चला आया। बिल्डिंग में रहने वाले कुछ लोगो ने पृथ्वी के साथ एक अनजान लड़की को देखा तो आपस में बाते करने लगे लेकिन पृथ्वी से पूछने की हिम्मत किसी ने नहीं की क्योकि पृथ्वी इस बिल्डिंग में रहने वालो से कभी ज्यादा बात नहीं करता था। पृथ्वी वॉचमेन के सामने से जैसे ही गुजरा उन्होंने कहा,”अरे पृथ्वी बेटा ! कही बाहर गए थे क्या दो दिन से दिखाई नहीं दिए ?”

“हाँ काका बाहर गया था”,पृथ्वी ने कहा और देखा वॉचमेन अवनि को देखकर उलझन में है तो पृथ्वी ने कहा,”ये मेरी “बायको” है काका”
“”काय म्हणतोयस ? तुमचं लग्न कधी झालं ? (क्या कह रहे हो ? तुम्हारी शादी कब हुई ? )”,वॉचमेन ने हैरानी से कहा

“ही खूप मोठी गोष्ट आहे, मी तुम्हाला नंतर सांगेन ( वो एक लम्बी कहानी है बाद में बताऊंगा )”,पृथ्वी ने काका को मराठी में जवाब दिया जो अवनि के सर के ऊपर से गया।

“हो बरोबर”,काका ने कहा और अवनि की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए वहा से चले गए
“तुम दोनों क्या बातें कर रहे थे ?”,अवनि ने पृथ्वी से पूछा
“आपको मराठी नहीं आती ?”,पृथ्वी ने अवनि के साथ चलते हुए उसकी तरफ देखकर पूछा
अवनि ने ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने कहा,”कोई बात नहीं मैं आपको सीखा दूंगा , आप जल्दी ही सीख जाएँगी”  
“ठीक है,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और दोनों ख़ामोशी से साथ साथ चलने लगे। चलते हुए पृथ्वी बार बार अवनि को देखता और सामने देखकर मुस्कुराने लगता ये देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो ?”
“मैं बस खुद को यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा हूँ कि आप मेरे साथ है,,,,,,,,मैं आपको बता नहीं सकता मुझे आपके साथ चलते हुए कितना अच्छा लग रहा है,,,,,,,कितना प्राउड फील हो रहा है”,पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए कहा
“साथ चलने में कैसा प्राउड पृथ्वी ?”,अवनि ने कहा

“अरे मैडम जी ! आप नहीं समझोगे , जिसे लाखो लोग पढ़ना पसंद करते है वो मेरे साथ है क्या मुझे इस बात पर गर्व नहीं होना चाहिए,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो हल्का सा मुस्कुरा दी।  चलते चलते पृथ्वी के दिमाग में एक ख्याल आया और उसने कहा,”अच्छा अवनि ! मैं आपको थोड़ी सी मराठी अभी बोलना सीखा देता हूँ ताकि आप किसी से मिलो और वो आपसे कुछ कहे तो आप जवाब दे सको”

“हम्म्म ठीक है ! वैसे मुझे बोलना क्या होगा ?”,अवनि ने कहा
“मैं बताता हूँ ना , अगर कोई आपसे पहली बार मिले और आपको हाय हेलो कहे तो आपको जवाब में कहना है “”पृथ्वी माझा नवरा आहे , आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी क्योकि “पृथ्वी” नाम के अलावा उसे कुछ समझ नहीं आया था।

अवनि को अपनी तरफ देखते पाकर पृथ्वी ने वही लाइन फिर दोहराई लेकिन इस बार धीरे धीरे “”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही.”
“चलो बोलो”,पृथ्वी ने कहा

“लेकिन इसका मतलब क्या है ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी अपना सर खुजाने लगा और बहुत सोचने के बाद कहा,”अह्ह्ह इसका मतलब है “मैं पृथ्वी के साथ रहती हूँ , आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”ओह्ह्ह तो इसका ये मतलब है , मैं इसे जरूर सीखूंगी “क्या तुम एक बार फिर से बताओगे ?”
“आपको कहना है ‘”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही” ठीक है , अब बोल के बताईये”,पृथ्वी ने कहा

“”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”,अवनि ने अटकते हुए धीरे धीरे कहा लेकिन जब पृथ्वी ने सुना तो उसके दिल को जो सुकून मिला है वो सिर्फ पृथ्वी ही जानता है।

ख़ुशी उसकी आँखों और होंठो की मुस्कुराहट में झलक रही थी। उसने अवनि का सर दो बार थपथपाया और कहा,”बहुत अच्छे ! आप तो बहुत जल्दी सीख गयी”
जवाब में अवनि मुस्कुरा दी और फिर पृथ्वी की कही बात को मन ही मन दोहराते हुए आगे बढ़ गयी ताकि वह उस बात को याद कर सके जो पृथ्वी ने उसे सिखाई थी।

दोनों सोसायटी से बाहर चले आये तभी पृथ्वी को सामने से आते नकुल के पापा दिखे। पृथ्वी को देखकर नकुल के पापा उसकी तरफ आये तो पृथ्वी ने अवनि से कहा,”ये नकुल के पापा है,,,,,,,,,!!”
“”कसा आहेस ? ( कैसे हो पृथ्वी ? )”,नकुल के पापा ने आकर कहा
“मी ठीक आहे काका ( ठीक हूँ अंकल )”,पृथ्वी ने कहा

“नकुल ने बताया मुझे सब , चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा”,पृथ्वी से कहते हुए उन्होंने अवनि की तरफ देखा और कहा,”हेलो बेटा”
अब चूँकि कुछ देर पहले ही पृथ्वी ने अवनि को मराठी में जवाब देना सिखाया था इसलिए उसने अपने हाथ जोड़े और मुस्कुरा कर कहा,”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”

पृथ्वी ने सुना तो अपने दोनों होंठो को आपस में दबाकर अपनी मुस्कुराहट को रोकने की कोशिश करने लगा , नकुल के पापा ने जब सुना तो मुस्कुराये और अवनि के सर को थपथपाकर कहा,”खुश रहो बेटा , पृथ्वी अवनि को लेकर घर जरूर आना”
“हम्म्म्म”,पृथ्वी ने कहा तो नकुल के पापा चले गए और पृथ्वी अवनि की तरफ देखकर मुस्कुराया। पृथ्वी को मुस्कुराते देखकर अवनि ने कहा,”क्या हुआ मैंने ठीक से नहीं बोला क्या ?”

“बहुत अच्छा था,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”मैं जल्दी ही सीख जाउंगी”
“हम्म्म बिल्कुल”,पृथ्वी ने कहा और सामने से गुजरती  टेक्सी को रोककर अवनि के साथ उसमे आ बैठा और दोनों वहा से निकल गए।

“ये लड़का सच में पागल हो गया है वहिनी , मैं उसे वहा समझाने गयी और वो , वो अभी भी उसी लड़की की तरफदारी कर रहा है”,रवि के घर के हॉल में बैठी नीलम ने लता और रवि जी से कहा
“दादा ऐसे किसी भी लड़की को घर कैसे ला सकते है ?”,लक्षित ने कहा
“तुम अपने कमरे में जाओ,,,,,,,,,!!”,रवि जी ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा तो लक्षित उठकर चुपचाप वहा से चला गया।

“इसे अंदर भेजने से क्या होगा दादा , बाहर सोसायटी में जब सबको ये पता चलेगा कि पृथ्वी ने आप सबके खिलाफ जाकर शादी कर ली है तो क्या इज्जत रह जाएगी इस खानदान की ,, घर के लोगो को तो हम चुप भी करवा देंगे लेकिन सोसायटी वालो का क्या ? क्या वो तरह तरह की बाते नहीं करेंगे ,,

आई को तो इस बारे में खबर तक नहीं है कि उनके लाड़ले पृथ्वी ने पुरे खानदान की नाक कटवा दी है”,नीलम भुआ ने गुस्से से कहा
“बस करो नीलम,,!!”,रवि जी ने कहा हालाँकि उनके दिमाग में भी कई तरह की बातें कई तरह के ख्याल चल रहे थे

“इन्हे कहने से क्या होगा जब हमारा अपना ही बेटा हमारे खिलाफ खड़ा हो गया। मैंने कभी सोचा नहीं था पृथ्वी ऐसा कुछ करेगा , एक लड़की के लिए वो हम सबको , अपनी आई को इस तरह से छोड़ देगा,,,,,,,,,और वो लड़की , उसे जरा भी शर्म नहीं आयी अपना घर , अपना परिवार छोड़कर यहाँ आते हुए”,लता जी ने दुखी स्वर में कहा


“घर परिवार होगा तब छोड़कर आएगी ना वहिनी , माँ बचपन में गुजर गयी और बाप जवानी में गुजर गया और ये महारानी अपनी शादी के मंडप से उठकर पृथ्वी के साथ चली आयी,,,,,,,,,,खुद तो अपने घरवालों को शर्मिंदा किया ही किया पृथ्वी को भी सबके दूर कर दिया”,नीलम ने कहा

“इन सब में गलती अकेली उस लड़की की नहीं है नीलम पृथ्वी भी इसमें बराबर का भागिदार है , उसके बिना वो लड़की यहाँ कभी नहीं आती इसलिए तुम लोग सिर्फ उस लड़की को गलत ठहराना बंद करो,,,,,,,,गलती पृथ्वी की भी है उसने भी अपने घरवालो का सम्मान कहा रखा ? वो इतना खुदगर्ज हो गया कि ना उसे अपनी आई के आँसू दिखे ना ही अपने बाबा का सम्मान,,,,,,,, अगर वो लड़की गलत है तो सही पृथ्वी भी नहीं,,,,,,,,,,,,!!”,रवि जी ने अपनी चुप्पी तोड़कर कहा

रवि जी को अवनि की साइड लेते देखकर नीलम और लता ने हैरानी से उन्हें देखा और नीलम ने कहा,”दादा आप उस लड़की की तरफदारी कर रहे है , भूलिए मत उसी ने पृथ्वी को अपने प्यार के जाल में फंसाया और यहाँ तक चली आयी , वो बहुत ही चालाक लड़की है दादा”

“अच्छा अगर उसने पृथ्वी को फंसाया है तो फिर तुम “देवाशीष” को क्यों नहीं रोक पायी ? क्यों चला गया वो,,,,,,,!!!”,रवि जी ने गुस्से में आकर पुरानी दबी बातो को उजागर करके कहा
“देवाशीष” का नाम सुनकर नीलम का चेहरा शांत पड़ गया। 

 “देवाशीष” नीलम का पति जो कुछ सालों पहले तलाक लेकर नीलम से दूर हो गया रवि जी उसकी बात कर रहे थे। नीलम को खामोश देखकर रवि जी ने कहा,”नीलम ! अगर मर्द ठान ले तो वह अपनी पसंदीदा औरत को किसी भी हाल में अपना लेता है,,,,,,,बहाने बनाकर उसे बीच रास्ते में नहीं छोड़ता”
रवि इतना कहकर वहा से उठे और चले गए।

नीलम ख़ामोशी से खड़ी रही , लता पृथ्वी को याद करके सुबकने लगी तो नीलम उनके बगल में आकर बैठी और उन्हें दिलासा देकर कहा,”चुप हो जाईये वहिनी , ये सब उस लड़की की वजह से हो रहा है। जब से वो हमारे पृथ्वी की जिंदगी में आयी है तब से हमारा पृथ्वी हम सब से दूर हो गया है पर आप चिंता मत कीजिए , आपका पृथ्वी आपके आस जरूर आएगा।

उस लड़की को पृथ्वी की जिंदगी से कैसे निकालना है ये आप मुझ पर छोड़ दीजिये”
“पृथ्वी के बाबा ने जो कहा उसे दिल पर मत लेना , इस वक्त वो बहुत परेशान है।

पृथ्वी ने जो किया उसे लेकर उनके मन को बहुत ठेस पहुंची है , मैं तो रोकर अपना दुःख जाहिर कर भी दू लेकिन वो तो ये भी नहीं करेंगे,,,,,,,,,,,सब कितना उलझ गया है नीलम , पृथ्वी ने ऐसा क्यों किया , क्यों किया ?”,लता ने रोते हुए कहा तो नीलम ने उसने गले लगाया और उनकी पीठ सहलाते हुए कहा,”आप चिंता मत कीजिये सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी अवनि को लेकर D-मार्ट चला आया। उदयपुर में पली बढ़ी अवनि मुंबई जैसे बड़े शहर में पहली बार आयी थी हालाँकि इतनी बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स और लोगो की भीड़ देखकर वह अंदर ही अंदर घबरा भी रही थी लेकिन बाहर से उसने खुद को मजबूत रखा। पृथ्वी उसे ग्रोसरी एरिया की तरफ लेकर आया और जरूरत का सब सामान लेने को कहा। अवनि ने सभी जरुरी सामान लिए और एक एक करके उन्हें कार्ट में रखने लगी।

ग्रोसरी से निकलकर पृथ्वी और अवनि ने बाकि दूसरी जरूरतों के सामान भी लिए और जैसे ही कार्ट लेकर बिलिंग सेक्शन की तरफ जाने लगे सामने से आते जयदीप ने कहा,”अरे पृथ्वी तुम यहाँ,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने जयदीप को देखा तो मन ही मन खीज उठा क्योकि वह जयदीप के अजीब गरीब सवालो से बचना चाहता था लेकिन वह अवनि को लेकर वहा से निकलता इस से पहले जयदीप वहा आ धमका , उसने अवनि की तरफ देखा और मुस्कुराकर कहा,”हेलो अवनि”

अवनि जिसे पृथ्वी ने मराठी में जवाब देना सिखाया था मुस्कुराई और जयदीप से कहा,”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”
जयदीप ने सुना तो हक्का बक्का रह गया और हैरानी भरे स्वर में कहा,”ये तुम्हे किसने सिखाया ?”
“पृथ्वी ने”,अवनि ने मासूमियत से मुस्कुराते हुए कहा
जयदीप ने हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा तो पाया पृथ्वी दूसरी तरफ देखते हुए अपनी गर्दन खुजा रहा है  

( पृथ्वी ने अवनि को जो सिखाया क्या अवनि जान पायेगी उसका मतलब ? आखिर क्या है देवाशीष और नीलम की कहानी ? अवनि को पृथ्वी की जिंदगी से निकालने के लिए क्या नीलम रचने वाली है कोई साजिश ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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