Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 12

by Story With Sanjana February 2, 2026
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Pasandida Aurat Season 2 – 12

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी को अपनी ओर देखते पाकर अवनि पलट गयी ,उसने सबसे पहले पूजा की और फिर कड़ाही गैस पर चढ़ा दी। अवनि हलवा बनाने लगी। पृथ्वी का फोन लगातार बजे जा रहा था इसलिए उसे जाना पड़ा। हलवे की खुशबु पुरे किचन में फ़ैल गयी। अवनि ने सबसे पहले हलवा एक कटोरी में निकाला , गैस पर अग्निदेव को भोग लगाया और फिर दूसरा भोग लेकर हॉल में मंदिर के सामने चली आयी।

अवनि ने मंदिर में भोग लगाया और हाथ जोड़कर मन ही मन कहा,”इसे स्वीकार करना है प्रभु और महादेव मैं जल्दी ही पृथ्वी को लेकर आपके मंदिर आउंगी बस आप उसे माफ़ कर देना,,,,,,,,वो दिल का बुरा नहीं है बस जो उसे चाहिए वो उसे जब नहीं मिलता तो चिढ जाता है,,,,,,,उसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ”

पृथ्वी ने देखा अवनि कुछ ज्यादा ही प्रार्थना कर रही है तो उसने कहा,”अवनि ! सिर्फ उन्हें ही खिलाओगी या मुझे भी टेस्ट करने को मिलेगा , वैसे भी वो तुम्हे कोई रिव्यू नहीं देने वाले”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”उनका रिव्यू मुझे तुम्हारे रूप में मिल चुका है”

“हाह ! ये क्या मेरा रिव्यू देंगे , मुझ जैसा लड़का आपको पुरे मुंबई में कही नहीं मिलेगा,,,,!!”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ आकर इतराते हुए कहा
“अच्छा ! लेकिन मैंने तो मुंबई देखा ही नहीं है मुझे कैसे पता चलेगा तुम्हारे जैसा दूसरा कोई मुंबई में है या नहीं ?”,अवनि ने कहा

“अरे तो मैं घुमाऊंगा ना आपको मरीन ड्राइव, गेटवे ऑफ इंडिया, चौपाटी बीच, जुहू बीच, वर्ली सीफेस, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, अक्सा बीच, वर्सोवा बीच, कोलाबा कॉजवे मार्केट, पवई झील, कन्हेरी गुफाएं, गोराई बीच, शिवाजी पार्क , ग्लोबल विपश्यना पैगोडा, और भी बहुत कुछ है”,पृथ्वी ने एक साँस में इन सब जगहों के नाम गिनवा दिए

“यहाँ कोई मंदिर नहीं है ?”,अवनि ने पूछा
“है न ! श्री सिद्धिविनायक मंदिर , मुम्बा देवी मंदिर , बाबुलनाथ , जुहू में इस्कॉन टेम्पल बहुत है,,,,,,,,लेकिन वहा घूमकर आप क्या करेंगी ?”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है सबसे पहले हम मंदिर जायेंगे और शिव मंदिर हुआ तो और भी अच्छा है”,अवनि ने सहजता से कहा

“अह्ह्ह्ह हाँ हाँ क्यों नहीं ? मंदिर जायेंगे,,,,,हां हां चलेंगे”,पृथ्वी ने कहा और फिर मन ही मन कहा,”लगता है ये मुझसे मांफी मंगवा कर ही छोड़ेगी,,,,,,!!”
“मैं तुम्हारे लिए हलवा लेकर आती हूँ”,अवनि ने कहा और किचन की तरफ चली गयी।

पृथ्वी हॉल में चला आया , अवनि उसके लिए एक कटोरी में हलवा लेकर आयी। पृथ्वी ने कटोरी ली और एक चम्मच भरकर मुंह में रख लिया। अवनि बस पृथ्वी की प्रतिक्रया का इंतजार कर रही थी। पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और कहा,”ये बिल्कुल वैसा ही बना है जैसा मेरी आई बनाती है”
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में नमी उभर आयी , एक औरत को अपने बनाये खाने के लिए इस से अच्छा कॉम्प्लिमेंट भला और क्या मिल सकता था ?

पृथ्वी को अच्छा लगा ये जानकर अवनि खुश भी थी लेकिन साथ ही उदास भी कि उसे इन हालातो में ये सब अकेले करना पड़ा। अवनि को उदास और उसकी आँखों में नमी देखकर पृथ्वी ने कहा,”ये क्या आपकी आँखों में आँसू,,,,,,,,अच्छा अच्छा आप सोच रही होंगी मेरे साथ मेरे घरवालों ने भी आज आपके हाथो से बना हलवा खाया होता तो उनका क्या रिएक्शन होता ? मैं बताता हूँ ना,,,,,,,,,,,,एक मिनिट हाँ”

कहकर पृथ्वी सोफे पर बैठा और बिल्कुल रवि जी की तरफ एक्टिंग करके थोड़े कड़क स्वर में कहा,”अरे वाह अवनि बेटा क्या हलवा बनाया है तुमने , तुम्हारे हाथो में तो जादू है , अब से हर संडे मैं तुम्हारे हाथ से बना ये हलवा खाने वाला हूँ,,,,,,,,,!!!”
कहकर पृथ्वी ने एक चम्मच हलवा खाया और अवनि ये देखकर मुस्कुरा उठी। पृथ्वी उठा और सोफे के हत्थे पर बैठकर कहा,”अब लक्षित हाँ,,,,,,,,!!!”

अवनि प्यार से पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने अपने छोटे भाई की एक्टिंग करते हुए हलवा खाया और हत्थे से कूदकर कहा,”क्या बात है वहिनी ये बहुत अच्छा बना है,,,,,,,,आज से पहले इतना अच्छा हलवा मैंने कभी नहीं खाया,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो इस बार नम आँखों के साथ हंसी भी , पृथ्वी ने अपनी आई की तरफ चेहरे पर गंभीर भाव बनाये और कहा,”अब आई,,,,,,!!!”

लता की एक्टिंग करते हुए पृथ्वी ने एक की बजाय दो बार हलवा खाया और फिर अवनि की तरफ आते हुए कहा,”हम्म्म अच्छा बना है लेकिन सिर्फ हलवा बनाने से काम नहीं चलेगा। मोदक , पूरनपोली , बासुंदी और श्रीखंड बनाना आता है ? नहीं आता तो कोई बात नहीं मैं सीखा दूंगी,,,,,,,,वैसे ये मेरा लड़का है न , इसके खाने में बहुत नखरे है तो इसको जो पसंद हो वो तुम बनाना सीख लेना बस,,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना और फिर एकदम से अपना मुँह हाथो में छुपाकर रोने लगी। पृथ्वी ने देखा तो हैरान रह गया वह तो अवनि को हसाने के लिए ये सब कर रहा था लेकिन अवनि तो रोने लगी। पृथ्वी ने कटोरी टेबल पर रखी और अवनि के सामने आकर कहा,”माफ़ करना मैं बस मजाक कर रहा था , आपको कुछ सीखने की जरूरत नहीं है आप जो खिलाएंगी मैं खा लूंगा,,,,,,,,,कभी कोई स्पेशल डिमांड भी नहीं करूंगा और नखरे तो बिल्कुल नहीं करूंगा , आप रोईए मत ना प्लीज”

अवनि ने सुना तो रोना बंद किया और अपने आँसू पोछकर कहा,”मैं तुम्हारी वजह से नहीं रो रही हूँ पृथ्वी”
“तो फिर आप क्यों रो रही है ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
अवनि ने अपनी पलकें झुकाकर कहा,”मेरी वजह से तुम्हे अपने घरवालों से दूर रहना पड़ रहा है मुझे बस ये अच्छा नहीं लग रहा”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि के पास आया और कहा,”क्या मैं आपको छू सकता हूँ ?”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखा , अवनि उसकी पत्नी है ये जानते हुए भी वह अवनि से परमिशन माँग रहा था। अवनि ने हामी में अपनी गर्दन हिला दी। पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के सर से लगाया और उसे धीरे से अपने करीब करके उसका सर अपने सीने से लगा लिया। उसका बांया हाथ अवनि की पीठ पर था और दांये हाथ से वह अवनि का सर सहला रहा था। पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा वह खामोश रहा जबकि उसकी धड़कने का शोर अवनि साफ सुन पा रही थी।

कुछ देर बाद ही अवनि शांत हो गयी हालाँकि उसके हाथ नीचे लटक रहे थे , अवनि को सामान्य देखकर पृथ्वी ने धीरे से कहा,”बार बार ये सब सोचकर खुद को तकलीफ देना बंद करो अवनि,,,,,आपने कुछ गलत नहीं किया ना ही मैंने कुछ गलत किया है,,,,,,,मैं अपने परिवार से दूर अपने फैसलों की वजह से हूँ और मुझे यकीन है ये दूरिया जल्दी खत्म हो जाएगी”

अवनि ने कुछ नहीं कहा बस खामोश रही , सही तो कह रहा था पृथ्वी उसने जो फैसले किये उसमे अवनि का भला क्या दोष ? अवनि पृथ्वी से दूर हटी तो पृथ्वी ने अपनी सख्त उंगलियों से अवनि के गालों पर आये आँसुओ को पोछा और कहा,”मैं आपको बार बार रोने से इसलिए नहीं रोकता कि ये मुझे इरिटेट कर रहा है या फिर मुझे घुटन हो रही है , मैं

बस इसलिए रोकता हूँ क्योकि मैं आपको किसी के लिए पड़ते देखना नहीं चाहता , अपने लिए भी नहीं,,,,,,,,,,,मेरे साथ रहते हुए आपको इतना मजबूत बनना है कि आपकी आँखों में इन आँसुओ के लिए कोई जगह ही ना बचे,,,,,,,,और अगर कभी इन आँखों में आँसू आते भी है तो फिर वो ख़ुशी के आँसू होने चाहिए दुःख के नहीं,,,,,,,,,,,,क्योकि अब आपकी जिंदगी में दुःख तो नहीं आने देगा ये “पृथ्वी उपाध्याय”

पृथ्वी की बातें सुनकर अवनि एकटक उसे देखने लगी। कभी कभी पृथ्वी उसे बहुत बेसब्र लगता था तो कभी कभी वह ऐसी बातें कह जाता कि अवनि को अपने आस पास सब ठहरा हुआ नजर आने लगता। पृथ्वी अवनि से दो कदम पीछे हटा और मुस्कुराते हुए कहा,”देखा मैं हाइट में आपसे बड़ा हु,,,,,,,,,मेरा ना हमेशा से सपना था मेरी शादी जिस भी लड़की से हो वो बस मेरे कंधे तक आये”

“और ऐसा क्यों ?”,अवनि ने पूछा
“ताकि मैं जब भी कभी उस से कुछ झूठ कहू तो वो मेरे सीने से आकर लगे और मेरे दिल की आवाज सुन सके , क्योकि मेरा दिल कभी झूठ नहीं बोलता”,पृथ्वी ने बड़े ही प्यार से कहा
“कितने अजीब हो न तुम”,अवनि ने कहा

“अजीब हूँ तभी तो आपके हिस्से में आया हूँ वरना लड़किया तरसती है मुझसे बात करने के लिए,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी अपने कमरे की तरफ चला गया।
अवनि जाते हुए पृथ्वी को देखती रही और फिर खुद से कहा,”तुम अजीब इसलिए हो पृथ्वी क्योकि तुम बहुत मासूम हो,,,,,,,,तुम्हारे अंदर छल कपट नहीं है , तुम किसी का दिल तोड़ना नहीं जानते और यही तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी है”

अवनि पृथ्वी के बारे में सोच ही रही थी कि तभी डोरबेल बजी। अवनि ने अपने दुप्पट्टे से अपने चेहरा साफ किया और दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। अवनि ने दरवाजा खोला तो देखा सामने नकुल खड़ा था। नकुल अवनि को देखकर मुस्कुराया और कहा,”हेलो भाभी”
“हेलो , आईये न”,अवनि ने कहा इस नए शहर में पृथ्वी के बाद नकुल ही था जिसे अवनि जानती थी और जिसके साथ थोड़ा थोड़ा घुलने मिलने लगी थी।

नकुल अंदर चला आया और किचन से आती खुशबु सूंघकर कहा,”बहुत अच्छी खुशबु आ रही है , क्या बनाया है आपने ?”
“मैंने हलवा बनाया है आप बैठिये मैं आपके लिए लेकर आती हूँ”,अवनि ने कहा और किचन की तरफ चली गयी
नकुल सोफे पर आ बैठा और कहा,”वैसे पृथ्वी कहा है ?”
“तुम हलवा खाओ मैं नहाकर आया”,पृथ्वी ने अपने कमरे से झांककर नकुल से कहा और नहाने चला गया।

अवनि नकुल के लिए हलवा ले आयी और उसकी तरफ बढ़ाकर वही खड़ी हो गयी। नकुल ने एक चम्मच हलवा खाया और कहा,”उम्मम्मम !! हे खूप छान आहे वहिनी ( ये तो बहुत ही लाजवाब है भाभी )

नकुल के मुँह से मराठी सुनकर अवनि एकटक उसे देखने लगी। अगले ही पल नकुल को अहसास हुआ कि अवनि को मराठी नहीं आती इसलिए उसने कहा,”मैंने कहा हे खूप छान आहे इसका मतलब है ये बहुत अच्छा बना है”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”Thankyou,,,,,,,,!!!”
“आपको मराठी बिल्कुल नहीं आती ?”,नकुल ने हलवा खाते हुए पूछा

“मैंने कल ही एक बात सीखी जब कोई आपसे नमस्ते कहे तो जवाब में क्या कहना चाहिए”,अवनि ने कहा
“बताईये,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,””पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”
नकुल ने सुना तो हैरानी से अवनि को देखा और कहा,”ये आपको किसने सिखाया ?”

“पृथ्वी ने , उसने कहा अगर यहाँ मैं किसी से पहली बार मिलु और वो मुझे नमस्ते कहे तो मैं जवाब में ये कहू इस से उन्हें अपनापन महसूस होगा”,अवनि ने मासूमियत से कहा
नकुल ने साइड में देखा और धीमे स्वर में कहा,”कमीना”
“मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”,अवनि ने नकुल को खामोश देखकर पूछा
नकुल ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अह्ह्ह नहीं गलत तो नहीं पर क्या आपको इसका मतलब पता है ?”

“हाँ ! इसका मतलब है मैं पृथ्वी के साथ रहती हूँ , आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा'”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“और ये भी आपको पृथ्वी ने ही बताया होगा ?”,नकुल ने पूछा तो अवनि ने मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिला दी ये देखकर नकुल ने एक बार फिर साइड में देखा और धीमे स्वर में कहा,”कुत्ता-कमीना”
अवनि को समझ नहीं आया नकुल बार बार साइड में क्यों देख रहा है ?

नकुल ने खाली कटोरी टेबल पर रखी और कहा,”भाभी ! “पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही” इसका मतलब है “पृथ्वी मेरा पति है और मैं उस से बहुत प्यार करती हूँ , मैं उसे कभी नहीं छोडूंगी”
अवनि ने सुना तो हैरानी से नकुल को देखने लगी और फिर उसकी आँखों के सामने वो सारे लोग आ गए जिनके सामने अवनि ने ये लाइन बोली थी। अवनि को परेशान देखकर नकुल ने कहा,”आप सच में बहुत सीधी हो उसने बोला और आपने मान लिया,,,,,,!”

“मुझे लगा,,,,,,,,,,हाह ! वो बहुत बुरा लड़का है”,अवनि ने गुस्से और दुःखी स्वर में कहा
नकुल उठा और अवनि के पास आकर धीरे से कहा,”मैं तो कहता हूँ उसकी क्लास लगा दो , उसकी हिम्मत कैसे हुई आपको गलत गलत बातें सिखाने की”

पृथ्वी नहा चुका था इसलिए कपडे पहनकर वह अपने बालों को पोछते हुए कमरे से बाहर आया लेकिन जैसे ही उसने नकुल को अवनि के पास खड़े होकर उसे कुछ बोलते सुना तो वही से चिल्लाया,”ए नकुल ! तुम अवनि के इतना पास क्यों खड़े हो ? थोड़ा डिस्टेंस रखो वो अब शादीशुदा है”

नकुल ने सुना तो दूर हट गया और पृथ्वी को देखकर मुस्कुराने लगा। नकुल को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी ने कहा,”तुम सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“क्लास देखने आया हूँ”,नकुल ने हॉल से निकलकर बुक रेंक की तरफ जाते हुए कहा जहा से उसे अपनी कुछ किताबे लेनी थी और वही लेने वह पृथ्वी के फ्लेट पर आया था।
“क्लास देखने , तुम्हे क्या मेरा फ्लेट कॉलेज की कोई क्लासरूम दिख रही है ?”,पृथ्वी ने कहा लेकिन नकुल ने कोई जवाब नहीं दिया

“आप ज़रा यहाँ आएंगे”,अवनि ने पृथ्वी को देखते हुए कठोर स्वर में कहा
अवनि के मुँह से “आप” सुनकर पृथ्वी पहले तो ख़ुशी से मुस्कुराया लेकिन अगले ही पल अवनि के चेहरे के भाव देखकर उसकी मुस्कराहट गायब हो गयी और वह बड़बड़ाया,”इसने मुझे आप कहा लेकिन इसके आप में प्यार कम गुस्सा ज्यादा दिख रहा है,,,,,,,,अब मैंने क्या किया होगा ?”

बड़बड़ाते हुए पृथ्वी ने सामने देखा तो पाया अवनि गुस्से से एकटक उसे ही देख रही है तो पृथ्वी किसी बच्चे की तरह चुपचाप आकर उसके सामने खड़ा हो गया वह कुछ कहता इस से पहले अवनि ने कहा,”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही” इसका मतलब क्या है ?”
“हाँ हाँ पृथ्वी बताओ भाभी को इसका मतलब क्या है ?”,अपने हाथ में कुछ किताबे थामे नकुल भी हॉल में चला आया

पृथ्वी कभी अपने होंठो को दबाता , कभी अपनी गर्दन खुजाता तो कभी इधर उधर नजरे घुमाता बस अवनि से नजरे नहीं मिला रहा था और अवनि पृथ्वी को देखे जा रही थी।

( क्या अवनि के साथ रहते हुए पृथ्वी बना पायेगा उसे मजबूत ? पृथ्वी के बुक रेंक में अपनी खोयी हुई किताब देखकर क्या होगा नकुल का रिएक्शन ? क्या सच में लगने वाली है बेचारे पृथ्वी की क्लास ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

पृथ्वी हॉल में चला आया , अवनि उसके लिए एक कटोरी में हलवा लेकर आयी। पृथ्वी ने कटोरी ली और एक चम्मच भरकर मुंह में रख लिया। अवनि बस पृथ्वी की प्रतिक्रया का इंतजार कर रही थी। पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और कहा,”ये बिल्कुल वैसा ही बना है जैसा मेरी आई बनाती है”
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में नमी उभर आयी , एक औरत को अपने बनाये खाने के लिए इस से अच्छा कॉम्प्लिमेंट भला और क्या मिल सकता था ?

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संजना किरोड़ीवाल

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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