Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 27

by Story With Sanjana February 20, 2026
written by Story With Sanjana February 20, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 27

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि किचन से वापस आयी तो देखा पृथ्वी अभी भी ऑफिस के कपड़ो में ही बैठा है तो उसने उसके पास आकर कहा,”तो क्या तुम आज सच में बाहर जाने वाले हो ?”
“हम्म्म , मैं बस इंतजार कर रहा हूँ आप कब तैयार होकर आती है , वैसे आपको तैयार होने की जरूरत नहीं है आप ऐसे भी बहुत अच्छी लग रही है,,,,,,,,,तो क्या हम चले ?”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा

“ऐसे ?”,अवनि ने अपने आपको देखकर कहा हालाँकि वह इन कपड़ो में भी अच्छी लग रही थी बस उसने बालों को समेटा हुआ था और चेहरे पर कोई मेकअप नहीं था सिवाय ललाट पर एक काली बिंदी के
पृथ्वी ने सुना तो अवनि से वाशबेसिन के सामने आने को कहा और वहा लगे शीशे में अवनि से देखने का इशारा किया। पृथ्वी अवनि के पीछे ही खड़ा था , अवनि ने शीशे में खुद को देखा लेकिन खुद को ना देखकर उसकी नजरे पृथ्वी पर जा ठहरी जो शीशे में देखते हुए अपने बालों को सही कर रहा था और उनमे उँगलियाँ घुमा रहा था।

अवनि प्यार से एकटक उसे देखती रही और जैसे ही उसकी नजरे पृथ्वी की नजरो से मिली अवनि का दिल धड़कने लगा उसने नजरें हटाई और अपने बालों को सही करने लगी। पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”वैसे कुछ भी कहो मैडम जी ! साथ में अच्छे तो लगते है हम दोनों,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो सामने देखा , पृथ्वी के कंधे से थोड़ा ऊपर , कद में उस से कम , एक थोड़ा सांवला तो एक रंग में साफ , एक की आँखों में बेइंतहा मोहब्बत तो एक की आँखों में हल्की नमी , एक के होंठो पर मुस्कान तो एक के होंठो पर ख़ामोशी , सही कह रहा था पृथ्वी , अवनि और वह साथ में अच्छे लग रहे थे।

“मैं आती हूँ,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और वहा से चली गयी
पृथ्वी शीशे के सामने आया और खुद को देखा तो नजरें आँखों पर ठहर गयी। पृथ्वी को अपनी आँखों में जो प्यार नजर आ रहा था वह अवनि नहीं देख पा रही थी।
पृथ्वी शीशे के सामने से हटा और हॉल में चला आया। अवनि ने कमरे में आकर अपने बाल बनाये , होंठो पर हलकी लिपस्टिक लगाई और बाहर चली आयी। पृथ्वी अवनि को साथ लेकर घर से निकल गया।

पृथ्वी अवनि को लेकर ओरियन मॉल चला आया। पनवेल में ये मॉल सबसे बड़ा मॉल था। मॉल की जगमगाती लाइट्स , लोगो की भीड़ और मॉल का आलिशान इंटीरियर देखकर अवनि की आँखों में एक अलग ही ख़ुशी और चमक थी। अपार्टमेंट से ये जगह बस आधे घंटे की दुरी पर ही थी इसलिए पृथ्वी अवनि को यहाँ ले आया।
पृथ्वी मॉल आये और अपने लिए कुछ न खरीदे ऐसा कैसे हो सकता था वह अवनि के साथ कपड़ो के एक शोरूम में चला आया और अवनि से कहा,”आपके हिसाब से मुझे कैसे कपडे पहनने चाहिए ?”

“तुम कुछ भी पहनो तुम पर सब अच्छा लगता है पृथ्वी”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुँह बना लिया और धीरे से कहा,”हाह ! वो तो मुझे भी पता है , लेकिन फिर भी आपको मेरे लिए अपनी पसंद से कपडे खरीदने चाहिए ताकि आपकी पसंद के कपड़ो में मैं आपको और अच्छा लगू”
“लेकिन अगर तुम ये पहनोगे तो तुम इसमें ज्यादा अच्छे लगोगे”,अवनि की आवाज पृथ्वी के कानो में पड़ी तो उसकी तंद्रा टूटी उसने सामने देखा तो अवनि के हाथ में एक हाल्फ स्लीवस का डार्क ब्रॉउन शर्ट और साथ में लाइट क्रीम कलर का शर्ट था।

पृथ्वी ने आगे बढ़कर अवनि के हाथ से कपडे लिए और कहा,”मैं ट्राय करके देखता हूँ , तब तक आप मेरे लिए कुछ और निकालकर रखिये,,,,,,,,,मैं जानता हूँ आपकी पसंद बहुत अच्छी है”
“तुम्हे कैसे पता मेरी पसंद बहुत अच्छी है,,,,,,,,!!”,अवनि ने हैरानी से पूछा
पृथ्वी जाते जाते अवनि की तरफ पलटा और अपने दोनों हाथो को फैलाकर कहा,”Just loook at me , मैं भी तो आपकी ही पसंद हूँ”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी , उसके पास पृथ्वी की बात का कोई जवाब नहीं था। पृथ्वी मुस्कुराते हुए वहा से चला गया और अवनि रेंक में लगे कपडे देखने लगी। अवनि शोरूम में घूमने लगी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वह पृथ्वी के लिए क्या ले ? क्योकि कुछ अवनि को पसंद नहीं आ रहे थे और अपनी पसंद वह पृथ्वी पर थोपना नहीं चाहती थी। बहुत देखने के बाद अवनि को लाइट पिंक शर्ट पसंद आया उसके साथ उसने ब्लैक पेंट लिया , फॉर्मल के साथ अवनि ने एक जींस और उस पर एक मस्टर्ड कलर का शर्ट लिया।

अवनि उन्हें लेकर ट्रायल रूम के सामने चली आयी और सोफे पर आ बैठी। पृथ्वी पहले वाले कपडे पहनकर बाहर आया। उसके चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी और कॉन्फिडेंस था और वो इसलिए क्योकि पृथ्वी इन कपड़ो में बहुत अच्छा लग रहा था।

पृथ्वी अवनि के सामने आया , उसने अपने दोनों हाथो को जेब में रखा और बड़े स्टाइल से खड़े होकर अवनि को दिखाने लगा , शर्ट हाफ स्लीवस था इसलिए पृथ्वी के बायसेप्स कुछ ज्यादा ही अच्छे नजर आ रहे थे।
“तुम्हे ये खरीदना चाहिए ये तुम पर अच्छा लग रहा है”,अवनि ने कहा
“है ना ! मुझे भी पसंद आया , आपने और क्या पसंद किया मेरे लिए दिखाना जरा,,,,,,,,,!!१”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ आकर कहा

अवनि ने पसंद किये कपडे पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिए , पृथ्वी की नजर जैसे ही पिंक शर्ट पर पड़ी उसने कहा,”मैडम जी ! आपने ये पिंक शर्ट क्यों लिया है ? पिंक लड़कियों का कलर होता है मैं ये नहीं पहनूंगा”
“पृथ्वी ! किसने कहा पिंक सिर्फ लड़किया पहनती है ? तुम जाओ ट्राय करो ये तुम पर बहुत अच्छा लगेगा”,अवनि ने पृथ्वी को ट्रायल रूम की तरफ धकियाकर
कहा तो पृथ्वी को जाना पड़ा हालाँकि उसे वह पिंक शर्ट पहनते हुए बहुत अजीब लग रहा था।

पृथ्वी ने पेंट शर्ट पहना और शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए बाहर आया , उसे ना जाने क्यों शर्म आ रही थी जबकि वह इन कपड़ो में पहले से भी ज्यादा प्यारा और मासूम लग रहा था। अवनि ने देखा तो उसके पास आयी। उसने पृथ्वी की शर्ट का कोलर सही करते हुए कहा,”ये तुम पर ज्यादा सुट कर रहा है”
अवनि के इतना करीब आकर बेचारे पृथ्वी की तो सांसे ही हलक में अटक गयी ऊपर से सबके सामने अवनि उसकी शर्ट का कोलर सही कर रही थी ये देखकर पृथ्वी ने आस पास देखा तो शर्म से उसके कान लाल हो उठे क्योकि वहा मौजूद कई लोग उसे ही देख रहे थे।

अवनि पीछे हटी तो पृथ्वी ने धीरे से साँस ली और कहा,”ठीक है मैं ये ले लेता हूँ,,,,,,,,!!!”
“तुम्हे और ट्राय नहीं करना ?”,अवनि ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं ! मेरा हो गया , मैं तीनो ले लूंगा,,,,,,,,,,मैं चेंज करके आया”,पृथ्वी ने कहा और वहा से चला गया।
कुछ देर बाद पृथ्वी चेंज करके आया उसके हाथो में तीन शर्ट थी और तीन पेंट थी वह उन्हें लेकर बिलिंग एरिया में चला आया। पृथ्वी ने सेल्समेन से बिल बनाने को कहा तभी अवनि ने अपना हाथ अपने गले से छुआ और कहा,”पृथ्वी ! मुझे बहुत प्यास लगी है”

“आप रुकिए मैं पानी लेकर आया”,पृथ्वी ने कहा
“सर वो वहा लास्ट में आपको मिल जाएगा आप वहा से ले लीजिये”,सेल्समेन ने कहा
“हम्म्म,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी अवनि के लिए पानी लेने चला गया
सेल्समेन ने बिल बनाकर अवनि की तरफ बढ़ा दिया अवनि ने बिल देखा और पे भी खुद ही किया , उसने जान बूझकर पृथ्वी को भेजा ताकि वह उसका बिल पे कर सके। पृथ्वी पानी लेकर आया और बोतल अवनि की तरफ बढ़ा दिया।

“कितना हुआ ?”,पृथ्वी ने सेल्समेन से पूछा
“मेम ने पे कर दिया है सर”,सेल्समेन ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से अवनि की तरफ देखा और कहा,”आपने क्यों किया ? मैं करता न,,,,,,,,,,!!!”
“तुमने किया मैंने किया एक ही बात है पृथ्वी , आओ चलते है”,अवनि ने एक बैग उठाकर खुद रखा और बाकि दो पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिए।

दोनों शोरूम से बाहर चले आये तो पृथ्वी ने साथ चलते हुए कहा,”आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था , ये बहुत गलत बात है”
अवनि पलटी और पृथ्वी की तरफ आकर आकर कहा,”क्या गलत है ? तुम कर सकते हो तो मैं क्यों नहीं ? तुम मेरे लिए इतना सब करते हो क्या मुझे तुम्हारे लिए इतना सा करने का हक़ नहीं है,,,,,,,,,,,ऐसा नहीं करना चाहिए था क्यों नहीं करना चाहिए था बताओगे जरा ? अब ये मत कहना मैं पति हूँ , ये सब पे करना मेरी जिम्मेदारी है , मैं आपसे खर्च नहीं करवा सकता at all , मेरा मन था इसलिए मैंने ये किया,,,,,,,,,,,,,!!!”

“आप तो मुझे बिल्कुल वाइफ की तरफ डांट रही है”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा
अवनि ने सुना तो अफ़सोस से अपनी गर्दन हिलायी और जाने के लिए आगे बढ़ते हुए बड़बड़ाई,”क्या करू मैं तुम्हारा ?”
“बस थोड़ी सी मोहब्बत,,,,,,,,,,,इस जिंदगी के लिए काफी होगी”,पृथ्वी भी अवनि के पीछे आते हुए बड़बड़ाया और मुस्कराहट उसके होंठो पर फ़ैल गयी। अवनि ने उसके लिए बिल पे किया आखिर ये ख़ुशी की ही बात थी।

दोनों कुछ देर मॉल में घूमे और बाहर चले आये लेकिन बाहर आते ही पृथ्वी फिर मायूस हो गया क्योकि आसमान में काले बादल तो थे लेकिन बारिश नहीं हो रही थी।
पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा,”ये बारिश क्यों नहीं हो रही है ?”
“क्या हुआ ? क्या सोचने लगे तुम चलो घर चलते है”,अवनि ने कहा जिसे बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं थी।

“अह्ह्ह मैडम जी ! मैं क्या कह रहा हूँ न , इतना अच्छा मौसम है और घर भी ज्यादा दूर नहीं है तो क्यों ना पैदल चले,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि के बगल में आकर कहा
“ठीक है चलो”,अवनि ने कहा और दोनों पैदल ही चल पड़े। अवनि के साथ चलते हुए पृथ्वी खामोश था और मन ही मन उपरवाले को कोस भी रहा था कि अगर वे थोड़ी सी बारिश कर दे तो उनका क्या बिगड़ जाएगा।

चलते चलते दोनों आधे रास्ते आ चुके थे लेकिन बारिश नहीं हुई थी हताश होकर पृथ्वी ने अपना फ़ोन निकाला और फिर आखरी बार जब आसमान की तरफ देखा तो पानी की एक बूंद उसके गाल पर आकर गिरी , पृथ्वी मुस्कुराया और अगले ही पल बारिश की बुँदे गिरने लगी। अचानक हुई बारिश से अवनि हैरान थी उसने देखा वह और पृथ्वी भीग रहे है तो उसने पृथ्वी की बाँह पकड़ी और उसे साइड में बस स्टॉप के टीन शेड के नीचे लाकर कहा,”भीग क्यों रहे हो , तुम बीमार पड़ जाओगे”

“अरे मैडम जी ! मैंने क्या कहा था सुबह आपसे कि आज बारिश जरूर होगी”,पृथ्वी ने खुश होकर कहा
“हाँ लेकिन अजीब बात है ना पृथ्वी इस वक्त बारिश नहीं होनी चाहिए,,,,,,,,,मार्च में बारिश नहीं होती है”,अवनि ने हैरानी से कहा
“वो मुझे नहीं पता चलो आओ”,पृथ्वी ने आगे बढ़ते हुए कहा
“कहा ?”,अवनि ने कहा

“अरे बारिश में भीगने के लिए और कहा , देखो कितना अच्छा लग रहा है और यहाँ आपको कोई जज भी नहीं करेगा क्योकि यहाँ हमे देखने वाला कोई नहीं है”,पृथ्वी ने अपने हाथो को फैलाकर बारिश में भीगते हुए कहा
अवनि ने ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने उसे आने का इशारा किया लेकिन एक अजीब डर अवनि के चेहरे और आँखों में झिलमिलाने लगा शायद बीते वक्त की कड़वी यादे अभी भी उसके जहन में थी लेकिन अतीत की यादें अवनि के दिमाग पर हावी हो इस से पहले पृथ्वी भीगते हुए उसके पास आया

अपना हाथ उसकी तरफ बढाकर कहा,”अवनि ! आओ ना,,,,,,,,,,,ट्रस्ट मी कुछ नहीं होगा”
अवनि ने फिर ना में अपनी गर्दन हिलायी तो पृथ्वी ने कहा,”अगर आप मुझ पर भरोसा करके मुंबई तक आ सकती है तो मुझ पर भरोसा करके चार कदम बढाकर यहाँ भी आ सकती है,,,,,,,,,,यकीन कीजिये कुछ नहीं होगा,,,,,,,मैं हूँ”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी , पृथ्वी का ये कहना “मैं हूँ” ना जाने क्यों अवनि को एक सुरक्षा का अहसास दिलाता था।

अवनि ने हाथ में पकडे बैग वही बेंच पर रखे और अपना हाथ पृथ्वी के हाथ पर रखा और उसकी तरफ कदम बढ़ा दिए। पृथ्वी के साथ अब अवनि भी बारिश में भीग रही थी पहले पहले उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन जब उसने अपनी आँखे बंद करके अपना चेहरा आसमान की तरफ उठाया और अपने हाथो को हवा में खोला तो उसकी बेचैनी धीरे धीरे कम होने लगी। सामने खड़ा पृथ्वी एकटक अवनि को देखने लगा।

अवनि की पलकों से होकर बारिश का पानी सहसा ही उसके सुर्ख गुलाबी होंठो पर ठहरता और बह जाता। अवनि ने अपनी आँखे खोली , हाथो को समेटा और सामने देखा तो नजरे पृथ्वी से जा मिली , पृथ्वी का दिल धड़कने लगा। दोनों एक दूसरे के सामने खड़े बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे।

अवनि को बारिश मे शांत देखकर पृथ्वी ने उस से नजरे हटाई और उसके बाद दोनों जो भीगे है , कुछ देर के लिए दोनों बच्चे बन गए थे। कभी सड़क पर जमा पानी में उछल कूद करते , कभी एक दूसरे का हाथ पकड़कर भीगते , कभी हँसते तो कभी खिलखिलाते , अवनि बहुत खुश थी और उसे खुश देखकर पृथ्वी भी बहुत खुश था। अवनि खुश हो ही थी थी कि तभी बारिश एकदम से रुक गयी उसने मायूसी से पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने इधर उधर देखा पास ही पतले तने वाला एक पेड़ था , अब जायज सी बात थी बारिश हुई है तो पेड़ भी भीगा होगा और कुछ पानी उस पर भी बरसा ही होगा।

पृथ्वी अवनि का हाथ पकड़कर उस पेड़ के पास आया और अवनि से उसके नीचे रुकने का इशारा कर खुद उसके तने के पास चला आया। अवनि ने नहीं समझ आ रहा था पृथ्वी क्या कर रहा है उसने अपनी गर्दन उचकाई तो पृथ्वी ने तने को जोर से हिलाया। पेड़ के पत्तो पर बचा हुआ पानी बारिश की बूंदों की तरह एक बार फिर अवनि पर आ गिरा और अवनि के होंठो पर मुस्कान वापस लौट आयी। पृथ्वी अवनि के पास चला आया और अवनि के सामने आ खड़ा हुआ। उसका दिल अब भी धड़क रहा था और ये अक्सर होता था जब पृथ्वी अवनि के करीब होता था।

पृथ्वी को अपने करीब पाकर अवनि रुक गयी और उसे देखने लगी। पानी की बुँदे अवनि के होंठो पर ठहर गयी। पृथ्वी एक लड़का था और उसके सामने खड़ी लड़की उसकी पसंदीदा औरत , उसकी पत्नी और उसकी प्रेमिका थी ऐसे में भला वह खुद को कितना रोक पाता। अवनि खामोश थी , पृथ्वी के दिमाग में क्या चल रहा है वह नहीं जानती थी। अवनि की तरफ देखते हुए पृथ्वी ने अवनि की तरफ कदम बढ़ाया। अवनि पीछे हटना चाहती थी लेकिन नहीं हट पायी , उसके पैर जैसे वही जमीन पर जड़ हो गए हो।

पृथ्वी का करीब आना अब उसकी धड़कने बढ़ा रहा था , वह पृथ्वी को देखती रही , ठंडी हवा के झोंके , रात का वक्त , भीगी सड़क और बारिश की वो सोंधी सी खुशबु माहौल में एक अलग ही रुमानियत फैला रही थी। पृथ्वी अवनि के करीब आया उसने अपनी गर्दन थोड़ी सी झुकाई और जैसे ही अवनि के होंठो को छूने के लिए अपने होंठो को बढ़ाया अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली।

उस वक्त ना अवनि ने पृथ्वी को रोका ना ही कुछ कहा वह बस अपनी धड़कनो को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी और पृथ्वी के होंठ उसके होंठो को छूने के लिए बेताब थे। पृथ्वी ने जैसे ही अवनि के होंठो को छूना चाहा उसके दिल से आवाज आयी “क्या कर रहा है पृथ्वी ? तू अपनी हदें कैसे भूल सकता है ? तूने अवनि से वादा किया था कि तू उसकी मर्जी के बिना उसके करीब नहीं जाएगा फिर ये सब,,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी होश में आया और एकदम से पीछे हट गया। अवनि को जब पृथ्वी के पीछे हटने का अहसास हुआ तो उसने अपनी आँखे खोली और पृथ्वी की तरफ देखा। “i am so sorry”,पृथ्वी ने अवनि से नजरे चुराकर कहा और साइड में चला गया। अवनि कुछ देर वही खड़ी रही उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और चेहरा लाल था। पृथ्वी का यू करीब आना और फिर एकदम से दूर हो जाना अवनि नहीं समझ पायी।  

अवनि से दूर जाकर पृथ्वी ने खुद को नॉर्मल किया , अपने गीले बालों में से हाथ घुमाया और अपने चेहरे को पोछा। वह अवनि की तरफ पीठ करके खड़ा था उस के सामने जाकर उस से नजरे मिलाने की हिम्मत पृथ्वी में नहीं थी। कुछ ही दूर अवनि खामोश खड़ी थी , कुछ देर पहले दोनों साथ साथ कितना खुश थे।  और अब एकदम से ख़ामोशी ने दोनों का हाथ थम लिया था। पृथ्वी ने दो चार बार गहरी सांसे ली और पलटकर अवनि के सामने चला आया।

अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी अंदर ही अंदर और डर गया उसने हिम्मत की और कहा,”मुझे माफ़ कर दीजिये , वो मैं , मैं बस बहक गया था,,,,,,,लेकिन इसमें मेरी कोई गलती नहीं है मैं एक लड़का हूँ और मेरी भी कुछ फीलिंग्स है बस इसलिए जब मैंने आपको देखा तो उस पल मैं खुद को रोक नहीं पाया,,,,,,,,,,मैं कोशिश करूंगा आइंदा ऐसा कुछ न हो बस आप मुझे गलत मत समझना प्लीज,,,,,,,,,,,,,आपको मुझ पर गुस्सा आ रहा है तो आप मुझे दो चाँटे मार सकती है ,

आपका मुझ पर चिल्लाने का मन हो तो आप मुझ पर चिल्ला भी सकती है , डांट सकती है बस ऐसे चुप मत रहिये,,,,,,,,,,आपकी ख़ामोशी बर्दास्त नहीं कर सकता मैं,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा इस वक्त पृथ्वी उसे उतना ही मासूम लग रहा था जैसे स्कूल में बच्चा गलती करने के बाद अपनी टीचर के सामने खड़ा होता है।
अवनि एकटक पृथ्वी को देखती रही और फिर धीरे से कहा,”घर चलते है”

“हां हां , बिल्कुल , आई ऍम सॉरी मेरा कोई गलत इंटेंशन नहीं था सच में”,पृथ्वी ने कहा
“मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है पृथ्वी और ना ही मैं तुमसे नाराज हूँ,,,,,,,,,,बल्कि मुझे तो तुम्हे Thankyou कहना चाहिए ,, तुम्हारी वजह से बारिश से जुडी एक बुरी याद मैंने हमेशा के लिए अपने दिल से निकाल दी , आज के बाद जब भी मैं बारिश देखूंगी मुझे ये शाम याद आएगी,,,,,,,,,चलो घर चलते है”,अवनि ने बहुत ही प्यार और सहजता से कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसके मन का बोझ हल्का हो गया , उसे लगा अनजाने में उसने अवनि के करीब जाकर जो हरकत की उसकी वजह से कही अवनि उस से नाराज ना हो जाये लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ , उलटा अवनि ने इस मुश्किल पल में पृथ्वी को समझा। पृथ्वी ने हामी में सर हिलाया और बेंच पर रखे बैग उठाकर अवनि के साथ घर के लिए निकल गया।

( क्या इस बारिश के बाद अवनि भूल जाएगी हमेशा के लिए बारिश से जुडी कड़वी यादे ? अवनि के इतना करीब आकर भी आखिर क्यों रोक लिया पृथ्वी ने खुद को ? क्या इस घटना के बाद अवनि समझ पायेगी पृथ्वी की भावनाये ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत Season 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Kshmata Chauhan February 20, 2026 - 11:43 am

‘Look at me’😁 Prithvi k dimag m aate kaha se hai esi baate…aur wo bhi moke oe bolne k liye…kuch bhi lakin achcha hee hai dheere dheere Prithvi k sath Avni sahaj ho gai hai…wo bhi uske liye bahut kuch Krna chahati hai…jaise aaj kiya… Prithvi k liye kapdo ka bill pay Kiya…yeh bhi achcha tarika hai pyar jatane ka … mujhe to laga tha ki Prithvi Avni k liye pani lane gaya hai to kahin usko ya Avni ko Rushali na mil jaye…lakin esa kuch nhi hua…aur last m barish bhi ho gai…sach m mumbai bewaqt barish hoti hai…no Idea…lakin jab barish band hui to mujhe laga ki kisi tank se inn dono k liye barish kar dee hogi…but esa nhi tha…aur fir Prithvi ka bahakna aur khud ko rokana….sabse mushkil kaam hai…ab bas aage Avni uska sath de…to sab aasan ho jayega.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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