Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 34

by Story With Sanjana February 27, 2026
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Pasandida Aurat Season 2 – 34

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि और पृथ्वी दोनों साथ साथ बैठकर ख़ामोशी से चाय पी रहे थे। चाय खत्म कर पृथ्वी उठा और अवनि से खाली कप लेकर कहा,”नाश्ते में क्या खाएंगी आप , मैं कुछ बना दू आपके लिए ?”
“पृथ्वी ! मैं ठीक हूँ मैं बना लुंगी , तुम जाकर नहा लो तुम्हे ऑफिस जाना चाहिए”,अवनि ने कहा
“मैंने ऑफिस से दो दिन की छुट्टी ली है और अभी आप पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है इसलिए आपको कुछ नहीं करना मुझे बताईये मैं बनाता हूँ”,पृथ्वी ने कहा

“आलू के पराठे”,पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने कहा
“क्या , आलू के पराठे ? बिल्कुल नहीं अभी अभी आप ठीक हुए हो और आपको ये सब खाना है,,,,,,,,,मैं कुछ लाइट बनाता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“नहीं मुझे आलू के पराठे ही खाने है,,,,,,,,!!”,अवनि ने मुँह बनाकर कहा
“अवनि ! बेटा जिद नहीं करते,,,,,,,आलू का पराठा हेवी हो जाएगा,,,,,,,और अभी आपको दवा भी खानी है न,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने प्यार से कहा

“नहीं मुझे आलू के पराठे ही खाने है और कुछ नहीं खाना,,,,,,,,हाह ! अब मैं अपनी पसंद से कुछ खा पी भी नहीं सकती,,,,,,!!”,अवनि ने जिद करके कहा
पृथ्वी को अवनि की जिद माननी पड़ी और किचन में चला आया लेकिन किचन में तो आलू ही नहीं थे। नीचे अपार्टमेंट के बाहर कुछ सब्जीवाले खड़े होते थे इसलिए पृथ्वी ने अपना पर्स उठाया और फ्लेट से बाहर निकल गया। अवनि कमरे से बाहर आयी और मंदिर के सामने आकर पूजा करने लगी।

पृथ्वी लिफ्ट से होकर नीचे आया। सुबह सुबह का समय था और ट्राउजर टीशर्ट में वह काफी अच्छा लग रहा था। पृथ्वी अपार्टमेंट से बाहर आया और सब्जीवाले की तरफ चल पड़ा। पृथ्वी एक ठेले वाले के सामने आकर रुका और उसे आलू देने को कहा। इत्तेफाक से लता से भी सब्जी खरीदने उसी ठेले पर चली आयी।

लता को देखकर पृथ्वी का दिल भर आया लेकिन उसने लता से कोई बात नहीं की , करता भी कैसे आखरी बार जब वह लता से रिश्ता खत्म करके घर आया था तब लता ने उसे कब रोका था ? पृथ्वी चुपचाप सब्जिया लेने लगा।
“कद्दू कैसे दिया ?”,लता ने सब्जीवाले से पूछा
“40 का किलो”,सब्जीवाले ने कहा
“अरे इतना महंगा ! थोड़ा सही लगाओ मैं 30 दूंगी”,लता ने दूसरी सब्जिया छाँटते हुए कहा

“अरे काकी ! 40 भी महंगा लग रहा है आपको,,,,,,,इस से कम नहीं होगा”,सब्जीवाले ने कहा
“महंगा है तो महंगा ही कहूँगी न,,,,,,,,देना है तो दो वरना बाकि सब्जिया भी रखो”,लता ने हाथ में पकड़ी सब्जी नीचे रखकर कहा
सब्जीवाले ने लता को देखा और फिर उसकी नजरे सामने खड़े पृथ्वी से मिली तो पृथ्वी ने पलकें झपकाकर सब्जीवाले से इशारा किया कि वह लता की बात मानकर उस भाव में उसे सब्जिया दे दे जिस भाव में वो चाहती है।

“अच्छा ठीक है ठीक है ले लो 30 में,,,,,,,,,,!!”,सब्जीवाले ने कहा तो लता फिर सब्जिया चुन चुन कर रखने लगी।
सब्जीवाले ने पृथ्वी की ली सब्जियों को एक ठेले में डाला और उसकी तरफ बढाकर कहा,”170 भैया”
पृथ्वी ने जेब से अपना पर्स निकाला , बगल में खड़ी लता की नजर पृथ्वी के पर्स पर पड़ी तो उसके हाथ रुक गए और वह उदास आँखों से पृथ्वी के पर्स की तरफ देखने लगी। पृथ्वी ने आज भी अपने पर्स में लता की तस्वीर रखी थी। पैसे चुकाकर पृथ्वी ने एक नजर लता की तरफ देखा तो लता उस से नजरे चुराकर दूसरी तरफ देखने लगी।

उन्हें ऐसा करते देखकर पृथ्वी को बहुत दुःख हुआ और उसने मन ही मन खुद से कहा,”क्यों आई ! आखिर क्यों आपको अपने पृथ्वी से इतनी नफरत हो गयी है ? मेरे लिए तो आज भी आप मेरी आई है,,,,,,,,पर क्या मैं आपके लिए आपका पुराना पृथ्वी बन पाऊंगा ?”
पृथ्वी का मन भारी हो गया उसने थैला उठाया और वहा से चला गया। लता उसे जाते हुए देखती रही और फिर सब्जिया लेकर वहा से चली गयी।

पृथ्वी ऊपर फ्लेट में आया तब तक अवनि पूजा करके धुले हुए कपडे सूखा चुकी थी और किचन में थी। पृथ्वी सीधा किचन में चला आया उसने जब अवनि को आटा गूंथते देखा तो थोड़ा गुस्से से कहा,”मैंने आपसे ये सब करने से मना किया है न फिर भी आप ये कर रही है”
“पृथ्वी ! मुझे ऐसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा , मैं अगर काम नहीं करुँगी तो सच में बीमार पड़ जाउंगी ,, अभी मैं ठीक हूँ इसलिए बस मैंने तुम्हारी हेल्प की”,कहते हुए अवनि ने गाल पर आये बालों को आटे से सने हाथ से ही हटा दिया जिस से बाल तो नहीं हटे लेकिन आटा जरूर अवनि के गाल पर लग गया।

पृथ्वी अवनि के पास आया और उसके गाल पर बिखरी लटों को पीछे करके कहा,”आप अपने बाल तो सम्हाल पाती नहीं है मेरी क्या हेल्प करेंगी ? देखिये आटा आपके गाल पर लगा है”
अवनि बच्चो की तरह मुस्कुरा दी तो पृथ्वी ने अफ़सोस में अपनी गर्दन हिलाई और कहा,”क्या होगा मैडम जी आपका , चलिए हटिये मैं करता हूँ”
अवनि ने पृथ्वी की बात को अनसुना किया और आटा गूंथकर रख दिया ,पृथ्वी ने आलू धोकर कूकर में चढ़ाये और अवनि के लिए पराठे बनाने की तैयारी करने लगा।  

सुबह सुबह लक्षित अपना कॉलेज बैग और क्रिकेट बैग उठाये घर से निकलते हुए चिल्लाया,”आई ! आज मैं घर देर से आऊंगा , कॉलेज के बाद मेरी प्रेक्टिस है”
“हाँ ठीक है ध्यान से जाना और टिफिन खा लेना”,किचन में काम करती लता ने कहा

लक्षित वहा से निकल गया और फुटपाथ की तरफ चल पड़ा। उसी की सोसायटी में रहने वाला उसका दोस्त प्रशांत आया और उसके बगल में चलते हुए,”ए लक्षित ! इस संडे सोसायटी के ग्राउंड में मैच है , तेरे दादा को बोल ना अपनी टीम से खेलने को,,,,,,हर बार हम लोग उनसे हार जाते है इस बार जीतना है”
“वो नहीं आएंगे,,,,,,,,,,!!”,लक्षित ने कहा

“क्यों नहीं आएंगे ? वो तो सोसायटी ग्राउंड का हर मैच खेलते है ना फिर क्यों नहीं आएंगे ?”,प्रशांत ने कहा
“मतलब वो अपनी टीम से नहीं खेलेंगे,,,,,,,,,,,!!”,लक्षित ने कहा
“क्या यार ! तू उनको अपनी टीम से खेलने के लिए मना ना,,,,,,,इस बार हम लोग हारे ना तो फिर हमेशा दूसरी टीम के सामने सर झुकाकर चलना पड़ेगा,,,,,,प्लीज ना यार पृथ्वी भैया को बोल ना हमारी टीम से खेले”,प्रशांत ने कहा

लक्षित ने सुना तो ख़ामोशी से प्रशांत को देखने लगा अब वह बेचारा कैसे समझाता उसे कि पृथ्वी को टीम में खेलने के लिए बोलना तो दूर वह तो अपने बड़े भाई से ठीक से बात तक नहीं करता है। लक्षित को खामोश देखकर प्रशांत ने कहा,”प्लीज ना यार,,,,,,,,,बस ये वाला मैच इसके बाद हम लोग और ज्यादा प्रेक्टिस करेंगे,,,,,,,,,!!”
लक्षित ने कुछ नहीं कहा और ख़ामोशी से आगे बढ़ गया। प्रशांत ने देखा तो धीरे से बड़बड़ाया,”इसे क्या हुआ ?”

मौर्या Pvt Ltd , नवी मुंबई
पृथ्वी आज भी छुट्टी पर था इसलिए जयदीप को जल्दी ऑफिस आना पड़ा। कुछ क्लाइंट्स के साथ मीटिंग थी और साथ ही देसाई ग्रुप का प्रोजेक्ट जिस पर पृथ्वी और जयदीप साथ काम कर रहे थे और इस कोशिश में थे कि कम्पनी का प्रोजेक्ट उन्हें मिल जाए। जयदीप अपने केबिन में आया और केंटीन में फोन कर एक कॉफी भिजवाने को कहा। जयदीप ने लेपटॉप ऑन करके जैसे ही अपना मेल खोला उसे पृथ्वी के कुछ मेल मिले।

जयदीप ने एक एक करके सब देखना शुरू किया। लड़का कॉफी लेकर आया तो जयदीप ने हाथ से रखने का इशारा किया और अपना ध्यान लेपटॉप पर रखा।
जयदीप ने सभी मेल चेक किये और हैरान था , पृथ्वी ने उसे आज की मीटिंग से जुडी सभी रिपोर्ट्स तैयार करके भेजी थी।

जयदीप ने लेपटॉप साइड किया और अपनी कॉफी उठाकर पीते हुए कहा,”ये लड़का भी ना , अगर ये लीव पर है तो इसे अवनि को टाइम देना चाहिए लेकिन ये तो घर बैठकर भी काम ही कर रहा है , हाह ! कोई अपने काम को लेकर इतना प्रोफेशनल कैसे हो सकता है ? लेकिन जो भी है ये करके लड़के ने दिल जीत लिया मेरा,,,,,,बस इसीलिए तो तुम मुझे इतना पसंद हो पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,थैंक्यू !”

जयदीप अपनी कॉफी इंजॉय कर ही रहा था कि तभी उनकी सेक्रेटरी ने आकर कहा,”सर ! मिस देसाई आयी है”
जयदीप ने सुना तो हाथ में पकड़ा कप साइड में रखा और अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा,”क्या ! मिस देसाई यहाँ आयी है ?”

जयदीप अपनी टेबल के साइड से निकलकर आया तब तक मिस देसाई अपने मैनेजर के साथ जयदीप के केबिन में दाखिल हो चुकी थी। डार्क ब्रॉउन कॉर्ड सेट में वह काफी खूबसूरत लग रही थी। उस पर सलीके से बने बाल , आँखों में गहरा काजल , होंठो पर लिपस्टिक , एक हाथ में अपना बैग और दूसरे में अपना महंगा फोन थामे देसाई ग्रुप के चेयरमेन की बेटी प्राची देसाई जयदीप के केबिन में खड़ी थी।
“आपने आने की तकलीफ क्यों की ? मुझसे कहा होता मैं चला आता”,जयदीप ने कहा

“थैंक्यू ! मैं बस देखना चाहती थी डेड जिस कम्पनी को अपना प्रोजेक्ट दे रहे है वो कैसी है ? आफ्टर आल इसके बाद आपकी कम्पनी हमारे ब्रांड में 5% की शेयर पार्टनर होगी,,,,,,,,,!!”,प्राची ने सधे हुए स्वर में कहा
“थैंक्यू सो मच मेम ! आप खड़ी क्यों है बैठिये ना प्लीज”,जयदीप ने सोफे की तरफ इशारा करके कहा।
प्राची सोफे पर आ बैठी , मैनेजर फाइल हाथो में थामे वही बगल में खड़ा हो गया। जयदीप ने अपनी सेक्रेटरी से कॉफी भिजवाने को कहा और खुद सिंगल सोफे पर बैठकर प्राची से बात करने लगा।

प्राची को जयदीप की बातो में कोई इंट्रेस्ट नहीं था बल्कि उसकी नजरे तो किसी और को ढूंढ रही थी। जयदीप की बातो से बोर होकर प्राची ने मैनेजर के हाथ से फाइल ली और उसमे साइन करके उसे जयदीप की तरफ बढाकर कहा,”मिस्टर मौर्या ! हमारे ब्रांड का  पहला प्रोजेक्ट आपका , अब आप इस पर कितनी मेहनत करते है ये आप और आपकी टीम पर डिसाइड करता है,,,,,,,,मुझे उम्मीद है आप हमे निराश नहीं करेंगे”

जयदीप ने सुना तो उसे अपने कानो पर विश्वास नहीं हुआ , ख़ुशी से उसकी आँखे चमक उठी और चेहरा खिल उठा। आज ही इस प्रोजेक्ट के लिए उसकी देसाई ग्रुप के साथ मीटिंग थी और फाइनल मीटिंग पृथ्वी को अटेंड करनी थी लेकिन प्राची ने तो सुबह सुबह यहाँ आकर उसे सरप्राइज ही दे दिया और उस से भी बड़ा सरप्राइज ये कि प्रोजेक्ट उसकी कम्पनी को मिल चुका था।
जयदीप ने ख़ुशी ख़ुशी फाइल ली और कहा,”थैंक्यू ! थैंक्यू सो मच मेम , मैं और मेरी टीम आपको निराश नहीं करेंगे”

“साउंड गुड मिस्टर मौर्या ! वैसे जाने से पहले मैं आपका ऑफिस देखना चाहूंगी और आपकी टीम से भी मिलना चाहूंगी”,प्राची ने कहा
“स्योर मेम,,,,,,,,उस से पहले कॉफी हो जाये”,जयदीप ने कहा क्योकि लड़का कॉफी लेकर आ चुका था।
प्राची ने कप उठाया और जयदीप ने दूसरा कप मैनेजर की तरफ बढ़ा दिया। उसने अभी अभी कॉफी पी थी इसलिए अपने लिए कुछ नहीं मंगवाया। प्राची ने कॉफी पी तब तक जयदीप प्रोजेक्ट फाइल देखने लगा।

कॉफी के बाद जयदीप प्राची को लेकर केबिन के बाहर आया और उसे अपना ऑफिस दिखाने लगा। जयदीप ने प्राची को अपने ऑफिस के सभी इम्पोर्टेन्ट लोगो से मिलवाया , लीगल टीम से मिलवाया और इसके बाद वह पृथ्वी के केबिन की तरफ आया। जयदीप के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर ही प्राची के चेहरे पर चमक और होंठो पर मुस्कान तैर गयी। जयदीप प्राची के साथ केबिन में दाखिल हुआ तो अदंर मौजूद अंकित , मनीष , तान्या और कशिश अपनी अपनी जगह से उठ खड़े हुए और प्राची से हेलो कहा।

प्राची ने देखा पृथ्वी वहा नहीं है तो उसने जयदीप से कहा,”अह्ह्ह्ह मिस्टर उपाध्याय नजर नहीं आ रहे ?”
“ओह्ह्ह हाँ ! मैं आपको बताना भूल गया पृथ्वी आज लीव पर है,,,,,,,,ये सब उसके टीम मेंबर है पृथ्वी ही इन्हे लीड करता है और जब वह नहीं होता तो अंकित करता है,,,,,,,,आपको कुछ डॉट्स हो तो आप अंकित से इस बारे में बात कर सकती है”,जयदीप ने कहा

प्राची ने जब सुना की पृथ्वी लीव पर है तो होंठो की मुस्कान और चेहरे की चमक एकदम से गायब हो गयी। उसने एक नजर अंकित को देखा तो अंकित मुस्कुरा दिया लेकिन प्राची ने जयदीप की तरफ पलटकर कहा,”अह्ह्ह ! नो थैंक्यू ! मुझे कोई डाउटस नहीं है,,,,,,,,,,,,आई थिंक अब मुझे चलना चाहिए”
“हम्म्म आईये मैं आपको आपकी गाड़ी तक छोड़ देता हूँ”,जयदीप ने कहा

मैनेजर और जयदीप केबिन से बाहर निकल गए , प्राची भी पृथ्वी की खाली डेस्क को देखते हुए आगे बढ़ी तो नजर डेस्क के बोर्ड पर लगी नेम प्लेट पर चली गयी “पृथ्वी उपाध्याय ब्रांच मैनेजर”
प्राची वहा से चली गयी। जयदीप उसे छोड़ने गाडी तक आया , कुछ देर वहा रुककर उस से बात की और फिर प्राची अपनी गाड़ी में बैठकर वहा से निकल गयी

गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी प्राची किसी सोच में डूबी थी। उदासी और उलझन एक साथ उसके चेहरे से टपक रही थी। ड्राइवर के बगल में कम्पनी का मैनेजर बैठा था जो कम्पनी के लिए कम और प्राची के लिए काम ज्यादा करता था। प्राची ने मन ही मन कुछ सोचा और फिर मैनेजर से कहा,”हितेश ! मुझे पृथ्वी उपाध्याय की सभी डिटेल्स चाहिए”
मैनेजर जिसका नाम हितेश था उसने पलटकर प्राची को देखा और कहा,”हो जाएगा मेम”
प्राची ने सुना तो अपनी आँखे मूँदकर सर पीछे झुका लिया उसके दिमाग में क्या चल रहा था ये तो बस वही जानती थी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने अवनि के लिए पराठे बनाये और लेकर बाहर आया। अवनि सोफे पर बैठी परेशान सी अपने फोन को देख रही थी। पृथ्वी ने देखा तो प्लेट अवनि के सामने रखकर कहा,”क्या हुआ , आप परेशान क्यों है ?”
“पता नहीं मेरे फोन से डेटा अपने आप कैसे डिलीट हो गया ? दो दिन पहले ही सुरभि से कुछ बात हुई थी , कुछ इम्पोर्टेन्ट डिटेल्स थी लेकिन अभी ना वो मैसेज है ना ही उसकी चैट,,,,,,,,,!!”,अवनि ने उलझनभरे स्वर में कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे बीती रात सुरभि से हुई बातचीत याद आ गयी , उसने अपने मैसेज डिलीट करने के बजाय सुरभि का पूरा चैट ही डिलीट कर दिया था लेकिन अवनि को वह सच नहीं बता सकता था इसलिए अनजान बनते हुए कहा,”अह्ह्ह क्या पता कुछ एरर हो और उसकी वजह से डिलीट हो गया हो , आप पराठा खाइये न”
“नहीं पृथ्वी ! एरर होता तो सभी चैट डिलीट होती ना लेकिन यहाँ सिर्फ सुरभि की चैट डिलीट है,,,,,,,,,,,एक तो वैसे ही इन दिनों परेशान है”,अवनि ने हताश होकर कहा

पृथ्वी ने सुना तो अवनि के बगल में पड़े सोफे पर आ बैठा और अनजान बनते हुए कहा,”परेशान है ! लेकिन क्यों ? कुछ हुआ है क्या ?”
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”अनिकेत,,,,,,,,,वो चाहता है सुरभि उस से शादी कर ले और अपनी जॉब छोड़कर हमेशा के लिए उदयपुर चली जाए”
“हाह ! पागल वागल है क्या वो ? उसे अपनी लाइफ पार्टनर को सपोर्ट करना चाहिए , आज के टाइम में कितनी मुश्किल और मेहनत से गोवेर्मेंट जॉब मिलता है और वो चाहता हैं सुरभि जॉब छोड़ दे,,,,,,,,बहुत ही बकवास ख्याल है”,पृथ्वी ने कहा

“हाँ लेकिन सुरभि उस से बहुत प्यार करती है,,,,,,,,उसके लिए जॉब और अनिकेत दोनों में से किसी एक को चुनना बहुत मुश्किल है पृथ्वी,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उदास होकर कहा
पृथ्वी सब देख सकता था लेकिन अवनि के चेहरे पर उदासी नहीं इसलिए कहा,”मैडम जी ! आप क्यों परेशान हो रही है ? मेरे ख्याल से तो सुरभि को अपना जॉब चुनना चाहिए,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”अच्छा और अगर तुम्हे मुझ में से और अपनी जॉब में से किसी एक को चुनना पड़ता तो तुम किसे चुनते ?”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”भाड़ में गया जॉब ! मैं तो आपको चुनता,,,,,,,,,,एक जॉब के लिए मैं आपको थोड़े जाने दे सकता हूँ,,,,,,,,,,!!!”
“तो फिर सुरभि को जॉब क्यों चुनना चाहिए ? वो भी तो अनिकेत को चुन सकती है ना”,अवनि ने कहा

पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और हल्का सा मुस्कराकर सधे हुए स्वर में कहा,”वो अनिकेत है मैडम जी पृथ्वी नहीं,,,,,,,,,,अगर किसी ने उस से वैसा प्यार किया होता जैसा मैं आपसे करता हूँ तो वह ख़ुशी ख़ुशी अपनी जॉब छोड़ देती,,,,,,,,,,,मैडम जी अगर कोई सच में आपसे प्यार करेगा तो वो ये कभी नहीं चाहेगा आप अपने सपनो के साथ समझौता करके उसे चुने,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो खामोश हो गयी और पृथ्वी को देखने लगी और पृथ्वी प्यारभरी नजरो से अवनि को,,,,,,,,,,,,आखिर उसकी बात में सच्चाई जो थी।

( क्या कभी पहले जैसा हो पायेगा लता और पृथ्वी के बीच का ये रिश्ता ? क्या सोसायटी मैच में लक्षित लेगा पृथ्वी की मदद और जीतेगा इस बार का मैच ? पृथ्वी को लेकर आखिर क्या है प्राची के इरादे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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