Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 42

by Story With Sanjana March 12, 2026
written by Story With Sanjana March 12, 2026 4 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 42

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अवनि के हाथ खाये एक निवाले से ही पृथ्वी की आत्मा जैसे तृप्त हो गयी। उसकी आँखों में नमी थी और उसने बहुत मुश्किल से खुद को सम्हाला। पृथ्वी ने नम आँखों से जयदीप को देखा तो जयदीप हल्का सा मुस्कुरा दिया और पृथ्वी समझ गया कि जयदीप ने ये जान बूझकर किया। अवनि जयदीप की तरफ पलटी और कहा,”सर अब आप खाइये”

“हम्म्म,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने कहा और जैसा अवनि ने सिखाया था जयदीप ने वैसे ही निवाला बनाकर खाया और एक निवाले से ही उसे समझ आ गया कि पृथ्वी क्यों अवनि की इतनी तारीफ करता है। जयदीप ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”अह्ह्हम्म्म ! ये सच में बहुत अच्छा बना है अवनि , नो डाउट तुम बहुत अच्छा खाना बनाती हो लेकिन तुम्हारा ये दाल बाटी बेस्ट है,,,,,!!!”
“थैंक्यू सर”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा

“सबसे पहले तो मुझे ये सर कहकर बुलाना बंद करो,,,,,,तुम मुझे भैया कहकर बुलाओगी तो मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा”,जयदीप ने प्यार से कहा
“जी,,,,,,!!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा और फिर सब बातें करते हुए खाना खाने लगे। आज सब बोल रहे थे लेकिन पृथ्वी चुप था या यू कहे बहुत कम बात कर रहा था वह तो अभी भी उसी पल में जी रहा था जब अवनि ने अपने हाथ से उसे निवाला खिलाया था।

“सच मे पृथ्वी सर बहुत लकी है मेम , उन्हें रोज आपके हाथो से बना टेस्टी खाना मिलता है,,,,,,!!”,मनीष ने कहा
“हाँ भाभी ! खाना बहुत अच्छा बना है और ये तो मैं पहली बार खा रहा हु”,सामने बैठे नकुल ने कहा
“मेम ! आप मुझे भी ये बनाना सिखाएंगी , मैं अपने घर पर बनाकर सबको खिलाने वाले हूँ”,कशिश ने कहा
“घर पर या घरवाले को ?”,बगल में बैठी तान्या ने कशिश को कोहनी मारकर शरारत से कहा  

तान्या की बात सुनकर अवनि को कुछ समझ नहीं आया तो पास बैठे पृथ्वी ने कहा,”कशिश का रिश्ता पक्का हो चुका है और अगले साल इसकी शादी है इसलिए तान्या उसे छेड़ रही है”
“ओह्ह्ह ! कॉन्ग्रैचुलेशन,,,,,,,,!!”,अवनि ने कशिश से कहा
“थैंक्यू मेम,,,,,,,!!!”,कशिश ने कहा

“नकुल ! तुम्हारे दोस्त ने तो शादी कर ली अब तुम कब शादी कर रहे हो ?”,जयदीप ने कहा  
नकुल ने सुना तो खाते खाते रुक गया और जयदीप की तरफ देखकर कहा,”अह्ह्ह जल्दी कर लूंगा”
“इनका बस चले तो ये सबकी शादी करवा दे”,पृथ्वी खाते हुए धीरे से बड़बड़ाया।

खाना खाने के बाद सभी हॉल में आ बैठे। अवनि ने नकुल की मदद से सभी बर्तन और खाने का बचा सामान उठाया और किचन में रख दिया। नकुल बर्तन रखकर सिंक के पास चला आया और हाथ धोते हुए कहा,”भाभी ! खाना बहुत अच्छा था”
“थैंक्यू नकुल जी”,अवनि ने कहा
“बस इस खाने के बाद कुछ मीठा मिल जाता तो मजा आ जाता”,नकुल ने अवनि के सामने अपने मन की बात रखी
“आप बाहर चलकर सबके साथ बैठिये मैं लेकर आती हूँ,,,,,,!!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा

“मतलब आपने खाने के बाद कुछ मीठा भी रखा है , ओह्ह्ह भाभी यू आर सो स्वीट,,,,,वैसे आई गेस ये क्या हो सकता है ? पूरनपोली या फिर लड्डू या फिर आइस्क्रीम ?”,नकुल ने बच्चो की तरह खुश होकर कहा
“इनमे से कुछ नहीं है पर हाँ कुछ ऐसा है जो आपने आज से पहले कभी नहीं खाया होगा”,अवनि ने कहा
“फिर तो मुझे जरूर खाना है , जल्दी आना मैं बाहर वेट कर रहा हूँ”,कहते हुए नकुल बाहर चला गया।

नकुल के जाने के बाद अवनि फ्रीज की तरफ आयी उसने मीठे में “ब्रेड पुडिंग” बनाया था जो कि खाने में बहुत ही सॉफ्ट और मीठा होता है। गाढ़ी रबड़ी , क्रीम  में भीगा ब्रेड जिस पर ड्रायफ्रूट्स की लेयर थी देखने में ही कितना खूबसूरत लग रहा था। अवनि ने ट्रे में छोटी समतल प्लेटे रखी और उनमे एक एक पीस रखकर किचन से बाहर चली आयी। अवनि ने सबको मीठा सर्व किया ये देखकर सब और ज्यादा हैरान थे और सबसे ज्यादा पृथ्वी कि अवनि ने ये कब बनाया। सबको देकर अवनि ने आखरी प्लेट पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी।

पृथ्वी ने प्लेट लिया और देखा कि अवनि ने नहीं लिया तो वह समझ गया कि ये आखरी प्लेट था उसने अवनि की तरफ बढाकर कहा,”अह्ह्ह्ह अवनि ! इसे मैं बाद में खा लूंगा , एक्चुली मैंने बहुत ज्यादा खाना खा लिया तो अभी नहीं खा पाउँगा”
“मैं इसे फ्रीज में रख देती हूँ”,अवनि ने कहा

“आप रुको मैं रख देता हूँ”,कहकर पृथ्वी ने प्लेट ली और खुद ही किचन की तरफ बढ़ गया। अवनि सबके साथ आ बैठी और बातें करने लगी। सब अवनि की तारीफ करते नहीं थक रहे थे और आखिर में सर्व किये मीठे की तो कुछ ज्यादा ही तारीफ हो रही थी। अवनि बस मुस्कुराते हुए सबको देखती रही।

किचन में आकर पृथ्वी ने प्लेट फ्रीज में रख दिया जब जाने के लिए पलटा तो देखा कि उसका अंदाजा सही था , अवनि के लिए मीठा नहीं बचा था और खाली प्लेट देखकर उसने मन ही मन कहा,”पागल लड़की ! सबको खिलाने में लगी है ये नहीं खुद के लिए भी थोड़ा बचाये,,,,,बस जो बचा वो मुझे लाकर दे दिया। अरे ! अब तुम्हे कैसे समझाऊ मेरा पेट तो तुम्हारे उस एक निवाले ने ही भर दिया था,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी मुस्कुराया और किचन से बाहर चला आया।

रात के 11 बज चुके थे और जयदीप ने सबसे चलने को कहा। पृथ्वी और अवनि सबको छोड़ने दरवाजे तक आये। मनीष अंकित कशिश तान्या ने अवनि और, पृथ्वी और नकुल को गुड नाईट कहा और लिफ्ट की तरफ बढ़ गए। जयदीप ने अवनि से अपना ध्यान रखने को कहा और जैसे ही जाने लगे पृथ्वी ने अवनि से कहा,”मैं सबको नीचे तक छोड़कर आता हूँ,,,,,,,,,!!”
“पृथ्वी मैं भी चलता हूँ,,,,,,गुड नाईट भाभी”,नकुल ने पृथ्वी के साथ जाते हुए कहा। सबके जाने के बाद अवनि ने दरवाजा बंद किया और अंदर चली गयी।

पृथ्वी और नकुल भी सबके साथ लिफ्ट में चले आये। नीचे आकर नकुल अपनी बाइक लेकर घर के लिए निकल गया। अंकित बाइक से आया था इसलिए मनीष को अपने साथ लेकर चला गया , तान्या और कशिश कैब से आये थे लेकिन जयदीप ने इतनी रात में उन्हें अकेले जाने से मना किया और जाकर गाडी में बैठने को कहा ताकि वह उन्हें घर छोड़ सके। तान्या और कशिश गाडी की तरफ चली गयी अब बस जयदीप और पृथ्वी एक दूसरे के आमने सामने थे और दोनों ही खामोश,,,,,,,,,,,,!!

पृथ्वी को खामोश पाकर जयदीप ने कहा,”क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो ?”
पृथ्वी ने सुना तो जयदीप की तरफ देखा और आगे बढकर उसके गले लगकर कहा,”थैंक्यू,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने खुद से जयदीप को गले लगाया ये देखकर जयदीप की आँखों में ख़ुशी के भाव तैरने लगे। उसने पृथ्वी की पीठ थपथपाते हुए कहा,”मुझे नहीं पता था मिस्टर उपाध्याय तुम इमोशनल भी हो वरना मैंने तो हमेशा तुम्हे खड़ूस , अकड़ू और गुस्सैल ही देखा है”

पृथ्वी जयदीप से दूर हटा और कहा,”मैं इमोशनल हूँ ये बात सिर्फ मेरे करीबी लोग ही जानते है और आप भी उनमे से एक है। आज आपने जो किया वो सच में बहुत प्यारा एफर्ट था। रोज अवनि के साथ बैठकर खाना तो नसीब होता है लेकिन उसके हाथ से एक निवाला खाने के लिए मैं तरस गया था,,,,,,,,!!!”

जयदीप ने सुना तो उसे ख़ुशी भी हुई और एक अजीब सा दर्द भी , जयदीप पृथ्वी से बड़ा था और वह उसकी भावनाओ और जिंदगी की उथल पुथल से अनजान नहीं था इसलिए जब उसने पृथ्वी को ऑफिस के लंच टाइम में किसी बात पर उदास होते देखा तो समझ गया कि अवनि और पृथ्वी के बीच अभी बहुत दूरिया है और उन्ही दूरियों को कम करने जयदीप यहाँ आया था।

जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ! मैं ये नहीं कहूंगा कि तुम अवनि पर अपने पति होने का हक़ जताना शुरू कर दो लेकिन तुम्हे अपनी तरफ से भी थोड़ी पहल करनी चाहिए,,,,,,,,,अवनि अच्छी लड़की है वो एक दिन तुम्हारे प्यार और भावनाओ को समझ जाएगी बस उसे थोड़ा वक्त दो,,,,,,,,!!”
“हम्म्म,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“खाना बहुत अच्छा था तो कल तुम ऑफिस आ रहे हो ना ?”,जयदीप ने कहा
“हाँ मैं आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा

“आ जाऊंगा नहीं तुम्हे आना ही है , मिस देसाई पिछले दो दिन से तुम्हारा इंतजार कर रही है”,जयदीप ने कहा
“वो क्यों मेरा इंतजार कर रही है ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा
“क्या पता वो तुम्हे मिस कर रही हो ?”,जयदीप ने शरारत से कहा
“बस आपकी इन्ही बातो की वजह से मुझे प्रॉब्लम है,,,,,,,,एकदम से ये जो आप मेरे साथ ओवर फ्रेंडली होने की कोशिश करते है ना यही नहीं अच्छा लगता मुझे,,,,,,,,और कह दीजिये अपनी मिस देसाई से मेरा जब मन होगा मैं तभी ऑफिस आऊंगा”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा

“कैसे बात बात पर लड़कियों की तरह चिढ जाते हो न तुम पृथ्वी,,,,,,,वो चाहती है फाइनल मीटिंग में हमारी कम्पनी की तरफ से तुम प्रोजेक्ट रेप्रेजेंट करो तो कल सुबह 11 बजे ऑफिस में मिलते है,,,,,,,,,,गुड नाईट”,जयदीप ने कहा
“गुड नाईट”,पृथ्वी ने कहा। जयदीप जाने के लिए आगे बढ़ा और पलटकर कहा,”वैसे वो इतनी बुरी भी नहीं दिखती”
“आई ऍम वन वुमन मेन,,,,,,,गुड नाईट”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया

“गुड , और अगर तुमने अवनि को धोखा देने का सोचा भी तो मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं करूंगा”,जयदीप धीरे से बड़बड़ाया और फिर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया और वहा से निकल गया  
पृथ्वी ऊपर आया देखा अवनि हॉल में नहीं है तो वह किचन में चला आया। अवनि बर्तन धो रही थी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”अवनि रहने दो मैं करता हूँ”

“कोई बात नहीं मैं कर लुंगी तुम वैसे भी थके हुए हो और तुमने मेरी बहुत हेल्प की सो ये मुझे करने दो,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो फ्रीज की तरफ आया उसमे रखा अपना प्लेट उठाया और अवनि के पास आकर कहा,”जब तक आप ये करो क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ ?”
“एक शर्त पर”,अवनि ने कहा
“कैसी शर्त ?”,पृथ्वी ने कहा

“तुम्हे मुझे तुम कहकर बुलाना होगा , तुम्हारे मुँह से ये आप सुनना फॉर्मेलिटी लगता है मुझे”,अवनि ने बर्तन धोते हुए कहा
“अह्ह्ह ठीक है तो आज से मैं तुम कहकर बात करूंगा , अब मैं यहाँ बैठू ?”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा
“हम्म्म,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी अवनि के बगल वाले प्लेटफॉर्म पर आ बैठा और “ब्रेड पुडिंग”का एक टुकड़ा चम्मच में लेकर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”खाओ इसे”

“ये तुम्हारे लिए है पृथ्वी तुम खाओ”,अवनि ने कहा
“हाह ! क्या पता तुमने मुझे अपने वश में करने के लिए इसमें कुछ मिलाया हो,,,,,,इसलिए पहले तुम खाओ”,पृथ्वी ने नौटंकी करके कहा
अवनि ने अपनी आँखों को छोटा करके पृथ्वी को घुरा और कहा,”तुम कितने बुरे लड़के हो , मैं ऐसा क्यों करुँगी , मैं क्यों करुँगी तुम्हे अपने वश में ?”
“तो कर लो न,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए बड़े प्यार से कहा और यहाँ अवनि खामोश हो गयी। उसने पृथ्वी के हाथ से एक निवाला खाया और कहा,”लो खा लिया मैंने अब तो तुम खा सकते हो न ?”

“एक चम्मच और,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एक बड़ा निवाला चम्मच में उठाकर अवनि की तरफ बढाकर कहा
अवनि ने उसे भी खा लिया और फिर वापस अपने बर्तन धोने लगी। पृथ्वी मुस्कुराया और बचा हुआ खुद खाने लगा।
“तुमने अपने हिस्से का मुझे क्यों खिलाया ? ये मैंने तुम्हारे लिए बचाकर रखा था”,अवनि ने बर्तन धोने के बाद अपने हाथो को पोछते हुए कहा

“क्योकि तुमने सबको खिलाया लेकिन खुद के लिए नहीं रखा और मेरी जिम्मेदारी बनती है मैं अपने हिस्से में से तुम्हारे लिए बचाकर रखू , इसलिए ये मेरा नहीं बल्कि हमारा हिस्सा है”,पृथ्वी ने खाते हुए कहा
अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी की तरफ देखने लगी। उसके सामने बैठा ये इंसान कितना सरल और सहज था। वह कभी मैं या तुम की बात नहीं करता था बल्कि हमेशा “हम” में उलझा रहता था। सामने बैठा पृथ्वी खाते हुए कितना प्यारा लग रहा था।

अवनि बस उसे देखते रही और मन ही मन खुद से कहा,”कभी कभी तुम्हे देखती हूँ तो लगता है जैसे तुम महादेव की गयी मेरी तमाम प्रार्थनाओ का फल हो , तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना कोई इत्तेफाक तो नहीं है ये महादेव का ही लिखा “तथास्तु” है। आज लक्षित ने तुम्हे अपनाया है देखना कल तुम्हारे आई बाबा भी तुम्हे अपना लेंगे वो भी पुरे दिल से और इसके लिए मुझे जो भी करना पड़े मैं करुँगी पृथ्वी,,,,,,,,!!”

अवनि को ख़ामोशी से अपनी तरफ तकते पाकर पृथ्वी ने कहा,”तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो ?”
कहते हुए पृथ्वी ने अपनी टीशर्ट को सही किया और कहा,”देखो मैं बहुत शरीफ लड़का हूँ , मुझे ऐसी नजर से मत देखो”
“मैं,,,,,,,,!!!”,अवनि ने चिढ़कर कहा और वहा से चली गयी तो पृथ्वी ने जल्दी जल्दी सब खाया और प्लेट सिंक में रख अवनि के पीछे आते हुए कहा,”अरे मैं मजाक कर रहा था,,,,,,,,,तुम देख सकती हो , चाहो तो मेरा फायदा भी उठा सकती हो मैं कुछ नहीं कहूंगा”

पृथ्वी ये सब कहते हुए अवनि के पीछे आया और अवनि एकदम से पलटी और पृथ्वी ने अपने हाथ उठा लिए और उसका दिल धड़क उठा क्योकि अवनि उसके बहुत करीब थी। हालाँकि अवनि पृथ्वी की बातो का कभी बुरा नहीं मानती थी और बस इसलिए पृथ्वी को उसे छेड़ने में चिढ़ाने में मजा आता था। पृथ्वी को घबराया देखकर अवनि पीछे हटी और कहा,”तुम , तुम आखिर इतने अजीब क्यों हो ?”

“क्या करू आज से पहले कभी किसी लड़की के साथ एक छत के नीचे रहा नहीं न , बट धीरे धीरे सीख जाऊंगा”,पृथ्वी ने अपने हाथो को धीरे से नीचे करके कहा
अवनि ने कुछ नहीं कहा वह हॉल में चली आयी और वहा टेबल पर रखे सभी गिफ्टस पर उसकी नजर पड़ी। पृथ्वी भी उस तरफ चला आया और कहा,”वैसे तुम कितनी लकी हो यार सब तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आये,,,,,,,,,चलो ना खोलकर देखते है इनमें क्या है ?”

अवनि ने हॉल में लगी घडी की तरफ इशारा करके कहा,”पृथ्वी 12 बज रहे है क्या तुम्हे सोना नहीं है ?”
“पागल लड़की ! मैं गिफ्ट देखने के बहाने इसके साथ थोड़ा वक्त बिताना चाहता हूँ और इसे सोने की पड़ी है,,,,,,,,,हाह नहीं आ रही मुझे नींद , नहीं सोना मुझे यहाँ बैठकर तुम से बात करनी है , तुम्हे थोड़ी देर प्यार से देखना है , तुम्हे बताना है आज तुम कितनी सुन्दर लग रही हो लेकिन नहीं इसे तो मेरी नींद की पड़ी है ,, पृथ्वी 12 बज रहे है क्या तुम्हे सोना नहीं है ?

अरे मेरी नींद तो पिछले कई दिनों से उडी हुई है तुम्हे क्या पता ?”,पृथ्वी खुद में ही धीरे धीर बड़बड़ाने लगा और उसकी बातो का असर उसके चेहरे पर भी साफ दिखाई दे रहा था। वह क्या बड़बड़ा रहा था अवनि ये तो नहीं सुन पायी लेकिन उसके चेहरे के भाव देखकर उसकी तरफ आयी और कहा,”चलो देखते है”
पृथ्वी ने सुना तो बच्चो की तरह मुस्कुराया और फिर अवनि के साथ बैठकर गिफ्ट देखने लगा।

अवनि ने जयदीप का दिया तोहफा उठाया और पृथ्वी की तरफ बढाकर खोलने का इशारा किया। पृथ्वी ने उसे खोला एक बहुत ही सुन्दर डिब्बे में एक सिल्वर ब्रासलेट था। पृथ्वी ने उसे हाथ में उठाकर देखा और फिर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”ये बहुत प्यारा है,,,,,,!!!”
“हाँ और ये काफी महंगा भी दिख रहा है उन्हें इतना खर्चा नहीं करना चाहिए था”,अवनि ने कहा

“हम्म्म ! इस बार उनके बर्थडे पर हम उन्हें कुछ अच्छा गिफ्ट कर देंगे,,,,,,,,,मैं ये तुम्हे पहना दू ?”,पृथ्वी ने पूछा
अवनि ने ब्रासलेट पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और कहा,”हम्म्म”
पृथ्वी ने अपने हाथ से अवनि की कलाई में वो सिल्वर ब्रासलेट पहना दिया। अवनि की कलाई में वह काफी अच्छा भी लग रहा था। अवनि ने दूसरा गिफ्ट खोला जो उसे तान्या से मिला था। उसमे स्किन केयर का सामान था जिसे देखकर पृथ्वी ने कहा,”हाह ! तुम्हे इन सबकी क्या जरूरत है तुम इनके बिना ही काफी सुन्दर लगती हो,,,,,,,,,!!!”

“कोई बात नहीं ये तुम यूज़ करना थोड़े सुन्दर हो जाओगे”,अवनि ने पृथ्वी को चिढ़ाते हुए कहा
“ओह्ह्ह हेलो ! नेचुरल ब्यूटी मैं लड़कियों की तरह ये सब यूज़ नहीं करता,,,,,,सिर्फ मुँह धोकर आ जाऊ ना तब भी अच्छा दिखूंगा”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
अवनि मुस्कुराई और अगला तोहफा पृथ्वी की तरफ बढ़ाया। अंकित ने अवनि को बहुत सुन्दर घडी गिफ्ट की थी तो वही मनीष ने ढेर सारी चॉकलेट्स,,,,,,,!!!

पृथ्वी ने चॉकलेट्स देखकर कहा,”इतनी चॉकलेट्स कौन खाता है ?”
“अनरोमांटिक लोग चॉकलेट्स नहीं खाते”,अवनि ने बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा  
पृथ्वी समझ गया कि यहाँ अनरोमांटिक सीधा सीधा उसे कहा जा रहा है तो उसने कहा,”मैं अनरोमांटिक नहीं हूँ”
“हाह ! मैं नहीं मानती,,,,,,जो चॉकलेट्स के लिए ये कह सकता है वो क्या ही रोमांटिक होगा”,अवनि ने कहा आज वह कुछ ज्यादा ही अच्छे मूड में थी इसलिए बार बार पृथ्वी को छेड़ रही थी।

पृथ्वी ने सुना तो उसने अवनि को घूरकर देखा और फिर सामने पड़ी चॉकलेट्स में से एक चॉकलेट उठाया और उसका एक टुकड़ा तोड़कर खुद अपने हाथ से अवनि के होंठो के बीच रखा और सामने देखकर एक गहरी साँस ली और जैसे ही अवनि की तरफ अपने होंठो को बढ़ाया अवनि ने जल्दी जल्दी वो टुकड़ा खा लिया , बेचारा पृथ्वी कहा वह अवनि को अपनी रोमांटिक स्किल्स दिखाने वाला था और कहा अवनि ने उसके अरमानो पर पानी फेर दिया। पृथ्वी पीछे हटा और आखरी तोहफा अवनि की तरफ बढा दिया। अवनि ने उसे पृथ्वी की तरफ किया और कहा,”इसे तुम खोलो मैं पानी लेकर आती हु”

अवनि पानी लेने चली गयी और कुछ देर बाद वापस आयी तो पृथ्वी एक शार्ट ड्रेस हाथो में थामे अवनि की तरफ पलटा। अवनि ने हाथ में खुला हुआ बोतल पकड़ा था और उसके मुँह में पानी भरा था जैसे ही उसने पृथ्वी के हाथ में वो ड्रेस देखी हैरानी से उसकी आँखे बड़ी हो गयी और अगले ही पल पृथ्वी ने कहा,”ये तो बहुत छोटा है”
इतना सुनते ही अवनि के मुँह में भरा पानी बाहर आ गिरा। वह जल्दी से पृथ्वी की तरफ आयी उसके हाथ से ड्रेस लिया और बैग में डालकर कहा,”हाँ ये काफी छोटा है , तुम तुम सो जाओ,,,,,,,,,रात बहुत हो गयी है”

कहकर अवनि जैसे ही जाने लगी पृथ्वी ने उसकी कलाई पकड़ी और कहा,”लेकिन अभी मेरा जवाब देना बाकि है”
“जवाब , कैसा जवाब ?”,अवनि ने धड़कते दिल के साथ कहा
पृथ्वी अवनि के सामने आ खड़ा हुआ और कहा,”वो आज शाम क्रिकेट ग्राउंड में तुम्हारा जो रिएक्शन था मुझे भी तो उसका जवाब देना चाहिए न”
“हाँ,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने चौंककर कहा लेकिन तब तक पृथ्वी झुका और अवनि के गाल को अपने होंठो से छूकर कहा,”गुड नाईट”

अवनि की तो सांसे ही हलक में अटक गयी , थोड़ा बहुत हंसी मजाक छेड़ना मनाना अवनि भी पृथ्वी के साथ कर लिया करती थी लेकिन पृथ्वी एकदम से ये करेगा उसने सोचा नहीं था। पृथ्वी मुस्कुराते हुए वहा से चला गया और अवनि भी अपने गाल को छूकर मुस्कुरा उठी।

( क्या धीरे धीरे पृथ्वी को समझ आ रही है अपने जीवन में जयदीप की अहमियत ? क्या पृथ्वी और अवनि आ रहे है धीरे धीरे एक दूसरे के करीब ? क्या पृथ्वी कर चुका है अवनि के सामने अपने प्यार की पहल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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4 comments

Nency Patel March 12, 2026 - 10:37 am

Jaydip sir bohot acche hai chalo kuch to in dono ke bich achcha hua

Reply
Kshmata Chauhan March 12, 2026 - 11:36 am

Yeh Prithvi na sach m bahot innocent hai aur Avni bhi…dono ne kitne pyar se sabke liye dinner banaya…aur last m wo jo meethe m tha bread pudding…wha kya baat hai baiiii…just abhi maine uski recipe dekhi youtube pe… bahot badhiya Avni Prithvi Upadhyay…tumne kamaal kar diya…

Reply
Akankchha March 12, 2026 - 1:48 pm

Bhgwan ji bs ek prithvi dila
Bhgwan ji bhi sochte hoge kbhi akshat kbhi guddu kabhi munna kbhi shivam kbhi rudra isko sanjana ki story k sare male lead chahiye
Pr kya kru such m ye Kitna cute h

Reply
Story With Sanjana March 14, 2026 - 11:05 am

hahahahaha So sweet of you ! i wish aapko inme se koi ak to jarur mile

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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