Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 46

by Story With Sanjana March 18, 2026
written by Story With Sanjana March 18, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 46

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी अवनि के साथ एक बार अपने ऑफिस के बाहर चला आया जहा बगल में ही एक बहुत प्यारा कैफे था। पृथ्वी अवनि को लेकर उस कैफे में चला आया। दोनों एक खाली टेबल पर एक दूसरे के आमने सामने आ बैठे। पृथ्वी ने कॉफी आर्डर किया और अवनि से कुछ खाने का पूछा तो अवनि ने मना कर दिया। विक्रम के बारे में जानने के बाद भी पृथ्वी बहुत शांत और सहज दिखाई पड़ रहा था और यही बात अंदर ही अंदर अवनि को परेशान भी कर रही थी। पृथ्वी कैफे में बजते किसी अंग्रेजी गाने को धीरे धीरे गुनगुनाते हुए अपनी ही मस्ती में था।

सामने बैठी अवनि की नजर पृथ्वी की कोलर पर लगे अपने क्लेचर पर पड़ी तो उसने कहा,”तुमने इसे अभी यहाँ क्यों लगा रखा है ?”
पृथ्वी की तन्द्रा टूटी उसने अपनी कोलर पर लगे क्लेचर को देखा और मुस्कुराकर कहा,”अच्छा लग रहा है ना”
“पृथ्वी ! हटाओ उसे वहा से,,,,,,सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे ?”,अवनि ने कहा    
“तुम क्या सोचती हो मुझसे बस इस से फर्क पड़ता है और वैसे भी इस से मैं सेफ हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“वो कैसे ?”,अवनि ने हैरानी से कहा

अरे इसे देखकर लड़किया मुझसे दूर रहेगी , They Realised कि मैं पहले से किसी और का हूँ”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर प्यार से कहा
अवनि ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी। वेटर एक कॉफी लेकर आया तो पृथ्वी ने ट्रे से गिलास उठाकर अवनि के सामने रख दिया। अवनि ने देखा पृथ्वी ने अपने लिए नहीं मंगवाया तो कहा,”तुमने अपने लिए आर्डर क्यों नहीं किया ?”
“अह्ह्ह वो मैं क्या कह रहा था ?”,कहते हुए पृथ्वी उठा और अपनी जेब से अपना फोन और ईयर फोन निकालते हुए अवनि के बगल में आकर कहा

अवनि पृथ्वी की तरफ देखने लगी तो उसने ईयर फोन के दोनों सिरे अवनि के कान में लगाते हुए कहा,”क्यों ना तुम कॉफी पीते हुए मेरा पसंदीदा गाना सुनो और इस पल को एन्जॉय करो,,,,,,,तब तक मैं एक छोटा सा काम करके आया”
अवनि ने सुना तो मासूमियत से हामी में अपनी गर्दन हिला दी। पृथ्वी ने गाना प्ले किया और फोन अवनि के हाथ में  थमाकर उसका सर सहलाया और वहा से चला गया। गाने की धुन अवनि के कानों में बजने लगी और वह जाते हुए पृथ्वी को देखती रही गाने के बोल जैसे ही अवनि के कानों में पड़े उसे समझ आया क्यों पृथ्वी ने इस गाने को अपना पसंदीदा गाना कहा था

“कागज के फूल लाऊ तेरे लिए , ख़त लिखू तेरे लिए
मैं खुदा पे मानू नहीं , पर माँगू दुआ तेरे लिए
तेरे लिए घर बनाऊ , दीवारे भी मैं रंग से सजाऊ
पसंद है तुम्हे मालूम है , तुमने बताया था एक दफ़े
नीले फूल लाऊ तेरे लिए ,  ख़त लिखू तेरे लिए
मैं खुदा पे मानू नहीं , पर माँगू दुआ तेरे लिए”

कपूर प्रोडक्शन हॉउस , नवी मुंबई
अपने ऑफिस के केबिन में अपनी कुर्सी पर बैठा विक्रम कपूर अवनि के बारे में सोच रहा था। जितनी बार अवनि का ख्याल उसके जहन में आता उतनी ही बार उसके चेहरे के भाव बदल जाते और वह गुस्से से तिलमिला उठता। आज से पहले किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई थी कि कोई विक्रम कपूर को ऐसा जवाब दे सके लेकिन अवनि के एक थप्पड़ ने ही विक्रम की सारी गलतफहमियों को दूर कर कर दिया।
रिसेप्शन पर बैठी दिव्या विक्रम से मिलने आये लोगो की डिटेल्स नोट कर रही थी कि तभी पृथ्वी उसके बगल से निकलकर विक्रम के केबिन की तरफ बढ़ा

“हेलो ! क्या आपने आज का अपॉइंटमेंट लिया है ?”,दिव्या ने पृथ्वी से कहा
पृथ्वी रुका और पलटकर कहा,”आज के बाद यहाँ किसी को अपॉइंटमेंट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी”
“व्हाट ?”,दिव्या ने कहा उसे पृथ्वी की बात समझ आती इस से पहले पृथ्वी ने विक्रम के केबिन का दरवाजा खोला और अंदर चला गया।

अपनी कुर्सी पर पीछे सर झुकाये विक्रम आँखे मूंदे बैठा था उसने जब किसी की अंदर आने की आहट सुनी तो आँखे मूंदे कहा,”दिव्या ! मैंने कहा ना तुमसे मुझे अभी किसी से नहीं मिलना है,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और उसमे भरा पानी विक्रम के मुँह पर फेंका। अचानक पानी गिरने से विक्रम हड़बड़ा कर उठा उसने सामने खड़े अनजान लड़के को देखा तो गुस्से से कहा,”ये क्या बदतमीजी है और कौन हो तुम , अंदर कैसे आये ?”

“मैं आपके साथ एक अडल्ट फिल्म बनाना चाहता हूँ,,,,,,चलो कपडे उतारो मुझे देखना है तुम मेरी फिल्म के लिए सही हो भी या नहीं,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाकर उस पर बैठते हुए कहा।
विक्रम अपनी जगह से उठा और पृथ्वी के सामने आकर गुस्से से कहा,”ये क्या बकवास कर रहे हो तुम ? मैं एक डायरेक्टर हूँ कोई एक्टर या वर्कर नहीं”
पृथ्वी ने सुना तो हामी में सर हिलाया और उठ खड़ा हुआ उसने खींचकर विक्रम को एक थप्पड़ मारा और कहा,”वो भी एक राइटर है तुम्हारी गुलाम नहीं,,,,,,,,,,!!!”

एक थप्पड़ में ही विक्रम का दिमाग ठिकाने आ गया और गुस्सा भी शांत हो गया उसने घबराकर कहा,”तुम , तुम किसकी बात कर रहे हो ?”
“अवनि मलिक उपाध्याय , तुमने उसे अडल्ट कंटेंट लिखने को कहा और जब उसने मना किया तुम उसका करियर बर्बाद करने की बात कर रहे हो , चल करके दिखा”,पृथ्वी ने विक्रम को घूरते हुए गुस्से से कहा
“मेरी बात सुनो,,,,,,,,!!”,विक्रम ने पृथ्वी से कहा लेकिन पृथ्वी का गुस्सा तब तक बढ़ चुका था उसने विक्रम की कॉलर पकड़ी और उसे थप्पड़ मारना शुरू किया।

चार-पाँच खींचकर थप्पड़ मारे और फिर उसकी कोलर पकड़कर उसका गाल टेबल से लगाकर कहा,”तुझे क्या लगा वो अकेली है , उसके आगे पीछे कोई नहीं है,,,,,,,,,,एक प्रोजेक्ट के बदले तू उसके साथ जो चाहे करेगा,,,,,,,दिया होगा तूने हजारो लोगो को चांस लेकिन आज एक चांस मैं तुझे देता हूँ”  

कहते हुए पृथ्वी ने विक्रम की कोलर पकड़कर उसे उठाया और अपने सामने करके उसके कोलर को सही करते हुए बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”5 मिनिट है तेरे पास या तो तू जाकर अपने किये के लिए उस से माफ़ी मांगेगा या फिर,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी अपनी बात पूरी करता इस से पहले विक्रम ने घबराकर कहा,”मैं मैं मैं उनसे माफ़ी मांग लूंगा”

“गुड,,,,,,,,चले ? और ये क्या हालत बना रखी है , बाल सही करो अपने और ये होंठो पर लगा खून भी,,,,,,हम्म्म्म अब ठीक है,,,,,,,चलो”,कहते हुए पृथ्वी ने अपनी शर्ट को झटका और अपने बालों में से हाथ घुमाकर केबिन से बाहर निकल गया।
बाहर सब हैरान परेशान से खड़े थे पृथ्वी ने पलटकर देखा तो केबिन का दरवाजा खुला और विक्रम बाहर आया। कुछ देर पहले जो विक्रम अवनि के सामने शेर बनकर दहाड़ रहा था अब वही विक्रम पृथ्वी के सामने भीगी बिल्ली बना हुआ था। विक्रम ने एक नजर सबको देखा और फिर पृथ्वी के साथ वहा से बाहर निकल गया

कैफे के बाहर आकर पृथ्वी ने कहा,”मेरे अंदर जाने के दो मिनिट बाद तू अंदर आएगा और उस से माफ़ी मांगेंगा”
“मैं आ जाऊंगा,,,,,,,,पर तुम हो कौन ?”,विक्रम ने कहा
पृथ्वी ने विक्रम का गाल थपथपया और कहा,”जिसके साथ तुमने बदतमीजी की है ना वो मेरी Wife है और कोई उसके साथ बदतमीजी करे ये मैं बर्दास्त नहीं कर सकता,,,,,,,,!!”
विक्रम ने सुना तो शर्म से अपना सर झुका लिया और पृथ्वी से अंदर जाने का इशारा किया।  

 पृथ्वी कैफे के अंदर चला आया। उसने सामने बैठी अवनि को देखा जो ईयर फोन कानों में लगाए अभी भी वैसे ही बैठी थी। पृथ्वी उसे देखते हुए उसकी तरफ बढ़ने लगा। अवनि को अहसास हुआ जैसे पृथ्वी उसके आस पास ही है तो उस ने नजरें उठाकर सामने देखा और उसका दिल धड़क उठा। पृथ्वी सामने ही था और चलकर उसकी तरफ ही आ रहा था। कानों में गाने की आखरी लाइन्स गूंजने लगी और अवनि एकटक पृथ्वी को देखते रही
“देख शायर बना तेरे लिए , नगमा लिखा तेरे लिए
मैं खुदा पे मानू क्यों ? तू खुदा मेरे लिए”

पृथ्वी अवनि के सामने आकर रुका , उसने अवनि को खोया देखकर उसके सामने अपना हाथ हिलाया लेकिन अवनि न जाने किस दुनिया में खोयी थी। पृथ्वी ने उसके कानों से ईयर फोन निकाले तो अवनि की तन्द्रा टूटी।
पृथ्वी ने अपना फोन देखा और कहा,”तुम अभी तक यही गाना सुन रही हो ?”
“हाँ ये लूप पर चल रहा था,,,,,,,,,,,तुम कहा गए थे ?”,अवनि ने पूछा

“अह्ह्ह्ह कही नहीं बस बाहर एक कॉल करने गया था , तुमने कॉफी नहीं पीया रुको मैं दुसरा आर्डर करता हूँ,,,,,,,,!!”,कहकर पृथ्वी ने वेटर को बुलाया और 2 कोल्ड कॉफी के साथ एक पिज्जा भी आर्डर कर दिया क्योकि अब उसे भूख लगने लगी थी।
अवनि के कानों में अभी भी वही गाना गूँज रहा था और अवनि प्यार से पृथ्वी को देखे जा रही थी। पृथ्वी ने अवनि को अपनी तरफ देखते पाया तो अपनी भँवे उचकाई। अवनि ने ना में गर्दन हिला दी और शीशे के बाहर देखने लगी।

जैसा कि पृथ्वी ने कहा था थोड़ी ही देर बाद विक्रम अंदर आया। उसका होंठ एक तरफ से हल्का सूजा हुआ था। वह आकर अवनि के सामने खड़ा हुआ। विक्रम को वहा देखकर अवनि ये सोचकर मन ही मन घबरा उठी कि कही पृथ्वी विक्रम को यहाँ देखकर गुस्सा ना हो जाये और विक्रम यहाँ पृथ्वी के सामने कोई तमाशा ना कर दे। उसने mसामने बैठे पृथ्वी को देखा जो कि बहुत ही शांत बैठा था। ना उसके चेहरे पर गुस्से के कोई भाव थे ना ही आँखों में शिकायत वह तो बड़े आराम से हाथ में पकडे गिलास से पानी पी रहा था।

अवनि ने विक्रम की तरफ देखा और जैसे ही कुछ कहने को हुई तो विक्रम ने कहा,”मुझे माफ़ कर दीजिये अवनि जी , मैंने आपको गलत समझा और आपसे वो सब कहा,,,,,,,,,आई ऍम रियली सॉरी ,, मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। उसके सामने खड़ा विक्रम खुद उस से अपनी गलती की माफ़ी मांग रहा था। अवनि को तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ लेकिन विक्रम को वहा देखकर उसके चेहरे पर कठोर भाव थे।

अवनि को खामोश देखकर विक्रम ने फिर कहा,”अवनि जी ! मुझे नहीं पता था आप कौन है प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये , अनजाने में मुझसे भूल हो गयी प्लीज अवनि जी,,,,,,,,,,,मैं मैं हाथ जोड़कर आपसे माफ़ी मांगता हूँ”
कहते हुए विक्रम ने अवनि के सामने अपने हाथ जोड़ दिए ये देखकर पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखते हुए कहा,”अब ये बेचारा तुमसे इतनी माफ़ी मांग ही रहा है तो फिर तुम्हे इसे माफ़ कर देना चाहिए अवनि,,,,,,,,,!!!”
विक्रम को हाथ जोड़ते देखकर अवनि को अच्छा नहीं लगा तो उसने कहा,”मैंने माफ़ किया और आप प्लीज जाईये यहाँ से”

“थैंक्यू , थैंक्यू सो मच अवनि जी आपने मुझे माफ़ कर दिया थैंक्यू”,कहते हुए विक्रम ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने आँखों ही आँखों में उसे वहा से जाने का इशारा किया और विक्रम वहा से चला गया।  

विक्रम के जाने के बाद अवनि ने पृथ्वी को देखा और हैरानी से कहा,”कितनी हैरानी की बात है ना पृथ्वी , वो मुझसे माफ़ी मांगने आया था”
“इसमें हैरानी की बात बिल्कुल नहीं है अवनि ये सब तुम्हारे मारे उस थप्पड़ का कमाल है जो तुमने हिम्मत करके उसे मारा था,,,,,,,लगता है एक थप्पड़ में उसकी अक्कल ठिकाने आ गयी और वो तुमसे माफ़ी मांगने चला आया,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो ख़ुशी से मुस्कुराई। वेटर कॉफी और पिज्जा ले आया और टेबल पर रखकर चला गया। पृथ्वी ने अवनि के लिए प्लेट में खुद सर्व किया और उसके सामने रखा। उसने अपने लिए भी लिया और खाने लगा। अवनि ने मुस्कुराते हुए पिज्जा स्लाइस उठाया और एक निवाला खाकर खुद में ही बड़बड़ाई,”इसका मतलब मैं डरपोक नहीं हूँ मैंने किसी के गलती करने पर उसे थप्पड़ मारा और उसे अपनी गलती का अहसास भी हुआ तभी तो वह मुझसे माफ़ी मांगने यहाँ आया,,,,,,,मुझे ऐसे ही स्ट्रांग बनकर रहना होगा”

सामने बैठे पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और सर झुकाकर धीरे से कहा,”पागल लड़की,,,,,,,,,!!!”
कॉफी पीने और पिज्जा खाने के बाद पृथ्वी ने बिल चुकाया और अवनि के साथ कैफे से बाहर चला आया। ऑफिस से तो वह बहुत अकड़कर निकला था इसलिए वापस किस मुँह से जाता और अभी तक उसे जयदीप का फोन भी नहीं आया था। पृथ्वी समझ गया कि इस बार जयदीप सच में उस से नाराज है लेकिन जयदीप की नाराजगी की किसे परवाह थी वह तो अवनि के साथ से खुश था। उसने सामने से आती टैक्सी को रोका , अवनि के साथ उसमे आ बैठा और दोनों घर के लिए निकल गए,,,,,,,,,,,,!!!”

“मिस्टर मौर्या ! ये सब क्या है , इतनी बड़ी मीटिंग बीच में छोड़कर मिस्टर उपाध्याय कैसे जा सकते है ?”,जयदीप के केबिन में बैठी प्राची ने गुस्से भरे स्वर में कहा हालाँकि ये गुस्सा मीटिंग को लेकर नहीं था बल्कि पृथ्वी को लेकर था।
“आई ऍम सो सॉरी मेम ! पृथ्वी ऐसा कभी करता नहीं है आज अगर उसने ऐसा कुछ किया भी है तो जरूर कुछ इमरजेंसी होगी,,,,,,,,,,,उसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ मेम,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची के सामने पड़े सोफे पर बैठे जयदीप ने कहा

“उसकी गलती के लिए आप क्यों माफ़ी मांग रहे है ? आपने देखा उसने सबके सामने कितनी बदतमीजी और अकड़ से मुझसे बात की , माफ़ी आपको नहीं उसे मांगनी चाहिए वो भी मुझसे,,,,!!”,प्राची ने गुस्से से उबलकर कहा , उसकी आँखों के आगे अभी भी मीटिंग रूम वाली बातें चल रही थी जो पृथ्वी ने बहुत ही बेरुखी से उसे कही थी
जयदीप ने सुना तो कुछ देर खामोश रहा और फिर बहुत ही शांत लहजे में कहा,”मैं समझ सकता हूँ आपको पृथ्वी का बर्ताव अच्छा नहीं लगा लेकिन उस वक्त वो अपनी वाइफ को लेकर बहुत टेंशन में था बस इसलिए उसने आपसे,,,,,,,,,,खैर आप भूल जाईये उस बात को मैं पृथ्वी की तरफ से माफ़ी मांगता हूँ”


“दुनिया में सिर्फ उसकी ही वाइफ इकलौती नहीं है वह मीटिंग के बाद भी उस से मिलने जा सकता था। उसे अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मेंटेन करना आना चाहिए। अपनी वाइफ के लिए उसे इतनी बड़ी डील को छोड़कर नहीं जाना चाहिए था”,प्राची ने कहा
जयदीप अब  तक शांति से सब सुन रहा था लेकिन जैसे ही बात अवनि पर आयी उसके चेहरे के भाव बदल गए और बदलते भी क्यों नहीं आखिर उसने अवनि को अपनी छोटी बहन जो कहा था।

जयदीप उठा और कहा,”मिस देसाई ! पृथ्वी के लिए उसकी वाइफ इकलौती ही है और उसके लिए वह आपकी डील तो क्या दुनिया की हर डील ठुकरा सकता है इसलिए इस पर बहस करने का कोई मतलब नहीं है , पृथ्वी का बर्ताव आपको बुरा लगा तो मैं कोशिश करूंगा वह इसके लिए आपसे माफ़ी मांग ले,,,,,,,,!!!”
प्राची ने सुना तो ख़ामोशी से जयदीप को देखने लगी उसे लगा डील के लालच में जयदीप प्राची के सामने गिड़गिड़ायेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उलटा उन्होंने प्राची को ही उसकी सही जगह दिखा दी।

जयदीप अपनी कुर्सी की तरफ जाने लगा तो प्राची उठी और कहा,”मिस्टर मौर्या ! आई हॉप की आपको और आपकी कम्पनी को ये डील भारी ना पड़े,,,,,,,,,गुड बाय”
प्राची गुस्से में वहा से निकल गयी और जयदीप समझ गया कि पिछले 3 महीने से की जा रही मेहनत मिटटी में मिल चुकी है और देसाई ग्रुप की सबसे बड़ा प्रोजेक्ट उसके हाथ से जा चुका है। जयदीप मायूस होकर कुर्सी पर आ बैठा और अपने सर पीछे झुका लिया।  
जयदीप ने दो मिनिट अफ़सोस जताया और फिर गाडी की चाबी उठाकर अपने केबिन से बाहर निकल गया 

पृथ्वी अवनि को लेकर घर पहुंचा। घर आकर पृथ्वी नहाने चला गया क्योकि आज गर्मी बहुत थी और उसे काफी चिपचिप हो रहा था। कपडे लेकर जैसे ही पृथ्वी बाथरूम में आया उसकी नजर शीशे पर पड़ी और वह मुस्कुरा उठा क्योकि अवनि का क्लेचर अब भी उसके शर्ट की कोलर पर लगा था। पृथ्वी शीशे के सामने चला आया उसने बड़े प्यार से क्लेचर को अपनी कोलर से निकाला और हाथ में लेकर देखने लगा।

आज उसने अवनि के लिए जो किया वो सब सोचकर सहसा ही उसके होंठो पर मुस्कान फ़ैल गयी साथ ही खुद पर थोड़ा गुस्सा भी आया कि आज पहली बार उसने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को मिक्स किया जिसके बदले डील तो हाथ से गयी ही गयी साथ में अगले दिन जयदीप का गुस्सा भी देखने को मिलेगा। पृथ्वी ने क्लेचर साइड में रखा और नहाने चला गया।

नहाकर उसने टीशर्ट-ट्राउजर पहना और बाहर चला आया। गीले बालों को तौलिये से पोछते हुए पृथ्वी बाहर आया तो देखा अवनि फोन पर किसी से बात कर रही है और बहुत ही सीरियस है। पृथ्वी अवनि के पास चला आया अवनि ने पृथ्वी को अपने सामने देखा तो फोन पृथ्वी की तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारे बॉस का फोन है,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने देखा ये उसी का फोन था जिस से अवनि बात कर रही थी , पृथ्वी ने फोन लिया और कान से लगाकर कहा,”हेलो,,,,,,,,,,!!!”

मालिक ! गुस्सा शांत हो गया हो तो क्या हम थोड़ी देर के लिए मिल सकते है ?”,जयदीप ने बहुत ही प्यार से कहा जिसे सुनकर पृथ्वी झेंप गया क्योकि ये प्यार नहीं बल्कि जयदीप की तरफ से उसे एक ताना था , आज जो हरकत उसने की उसके बाद कोई बॉस उस से मिलना तो दूर उसे फोन तक ना करे लेकिन जयदीप उस से मिलना चाहता था।
“अभी कहा है आप ?”,पृथ्वी ने पूछा
“तुम्हारी बिल्डिंग के नीचे खड़ा हूँ”,जयदीप ने सहजता से कहा

“ठीक है मैं आता हूँ,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और जैसे ही फोन काटने लगा दूसरी तरफ से जयदीप की आवाज आयी,”क्या मैं ऊपर नहीं आ सकता ? तुम्हारे साथ साथ मुझे अवनि से भी बात करनी है”
पृथ्वी उलझन में पड़ गया अवनि के सामने वह जयदीप को यहाँ बुलाये या नहीं क्योंकि ऑफिस में वह क्या करके आया था ये उसने अवनि को नहीं बताया था उसने बस कहा कि उसने मीटिंग केंसल की,,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को खामोश पाकर जयदीप ने कहा,”ठीक है मैं ऊपर ही आता हूँ,,,,,,,,!!!”

“अरे नहीं ! मैं , हेलो , हेलो मेरी बात,,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह काट दिया”,पृथ्वी ने कहा और अपना फोन देखा। जयदीप अपनी तरफ से कॉल कट कर चुका था अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”कुछ हुआ है क्या ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और ना में गर्दन हिला दी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

( पृथ्वी से मार खाकर सुधर जाएगा विक्रम कपूर या बनेगा अवनि के करियर में बड़ा रोड़ा ? क्या इस डील को बचाने के लिए पृथ्वी मांगेगा प्राची से माफ़ी और झुक जाएगा उसके सामने ? आखिर जयदीप को अवनि से क्या बात करनी है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Shivani March 20, 2026 - 12:33 pm

Next part pls
Avani ke likhe khat prithvi ko kab dii
Kya Real me bhi prithvi jaise ladke hote hai kya

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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