Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 77

by Story With Sanjana May 18, 2026
written by Story With Sanjana May 18, 2026 4 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 77

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

नीलम भुआ ने जान बूझकर साक्षी को अपनी पुरानी साड़ी दी और कहा कि वह अवनि को दे दे लेकिन जब अवनि को सच पता चला तो उसे बहुत दुःख हुआ। लॉन में सबसे मिलकर अवनि खुश थी और मुस्कुरा रही थी लेकिन नीलम भुआ की सच्चाई जानने के बाद वह उदास हो गयी। उदास सी अवनि एक तरफ आकर खड़ी हो गयी। साक्षी ने अवनि को उदास देखा तो उसी  तरफ आने लगी लेकिन नीलम भुआ ने उसे कुछ काम बताकर रोक लिया और वह अवनि के पास नहीं जा सकी।

नीलम भुआ ने जान बूझकर अवनि को साड़ी को लेकर ताना मारा जिस से अवनि तमाशा करे और सब घरवालों के सामने उसका असली चेहरा आ जाये लेकिन अवनि ने यहाँ समझदारी से काम लिया उसने ना नीलम भुआ से कुछ कहा ना ही साक्षी से कुछ पूछा। वह बस चुपचाप एक तरफ खड़ी रही तभी बड़ी मम्मी ने अवनि से अपनी तरफ आने का इशारा किया। अवनि उनकी तरफ चली आयी तो उन्होंने अवनि से कुछ पूजा करवाई और हाथ जोड़कर अपने और पृथ्वी के रिश्ते के लिए प्रार्थना करने को कहा।

जब अवनि घर आयी थी तब बड़ी मम्मी का रवैया थोड़ा कठोर और कड़वा था लेकिन अब वे अवनि के साथ सहज थी और उसे सब रस्म रिवाज खुद बता रही थी  ये देखकर अवनि के मन की उलझन भी कुछ कम हुई और वह ख़ुशी ख़ुशी प्रार्थना करने लगी। अवनि ने हाथ जोड़े और अपनी आँखे बंद करके मन ही मन माँ होलिका से प्रार्थना करने लगी। नीलम भुआ भी वही खड़ी थी उन्होंने देखा उनकी बात का अवनि पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ा है तो वे मन ही मन परेशान हो गयी। अवनि के प्रार्थना करने के बाद बड़ी मम्मी ने सबसे घर चलने को कहा।

सभी घर की तरफ जाने लगे , अवनि भी अपनी प्रार्थना करके जैसे ही जाने के लिए पलटी नीलम भुआ उसके पास आयी और कहा,”कितनी दिखावटी हो ना तुम अवनि , मतलब एक पुरानी रद्दी साड़ी पहनकर भी तुम सबके सामने खुश रहने का दिखावा कितने अच्छे से कर ले रही हो”
अवनि ने सुना तो भुआ जी की तरफ देखा और धीरे से मुस्कुराई  

और कहा,”भुआ जी ! भले ही ये आपकी पुरानी और रद्दी साड़ी हो लेकिन मैंने इसे आपका आशीर्वाद समझकर पहन लिया है,,,,,,,,,रही बात दिखावे की तो आप सब पृथ्वी के परिवार का हिस्सा है और जो पृथ्वी का है वो मेरा है और अपनों के सामने दिखावा नहीं किया जाता”
अवनि की बात सुनकर नीलम भुआ खामोश हो गयी। उन्हें लगा अवनि जाकर साक्षी से सवाल करेगी कि उसने उसे पुरानी साड़ी क्यों दी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

नीलम भुआ भी कहा हार मानने वाली थी उन्होंने अवनि को फिर से ताना मारकर कहा,”तुम अपनी बातो का जादू पृथ्वी और उसके घरवालों पर चला सकती हो लेकिन याद रखना मुझ पर तुम्हारी बातो का जादू बिल्कुल नहीं चलेगा”
नीलम भुआ इतना कहकर आगे बढ़ गयी और अवनि उन्हें जाते देखकर मुस्कुराई और कहा,”जादू नहीं भुआ जी इसे प्यार कहते है और मुझे यकीन है एक दिन मेरा ये प्यार आपके दिल में मेरे लिए जगह बना कर रहेगा”

अवनि सभी के साथ घर चली आयी। बडे पापा , बड़ी मम्मी , चाचा , चाची ,हिमांशु ,साक्षी ,नीलम भुआ , चाचा के बच्चे हिमानी मोहित और हिमांशु की बेटी मीशु सब हॉल में जमा थे। अब चूँकि अवनि ने कहा था कि आज रात का खाना वह बनाएगी इसलिए वह किचन में चली आयी। साक्षी ने अवनि को अकेले किचन में जाते देखा तो उसकी मदद करने जाने लगी लेकिन नीलम भुआ ने जब साक्षी को जाते देखा तो उन्होंने जान बुझकर मीशू की बाँह पर चिकोटी काट ली जिस से वह जोर जोर से रोने लगी।

ये देखकर सभी उसे चुप कराने लगे लेकिन मीशू बस मम्मी मम्मी करते रोने लगी। बड़े पापा ने देखा की वह बहुत ज्यादा रो रही है तो उन्होंने साक्षी से कहा,”साक्षी बेटा ! जाओ इसे अंदर ले जाओ”
साक्षी ने पलटकर किचन की तरफ देखा और फिर मीशू को लेकर अपने कमरे में चली गयी। नीलम भुआ मन ही मन मुस्कुरा उठी। घर में दो ही लोग है जो इस वक्त अवनि की मदद कर सकते है उनमे से साक्षी को नीलम भुआ ने भेज दिया और बची चाची तो उन्हे नीलम भुआ जानबूझकर अपने साथ ले गयी और अवनि को अकेले ही किचन में काम करना पड़ा।

चाचा ने देखा अवनि किचन में अकेली काम कर रही है तो उन्होंने हिमानी से कहा,”हिमानी ! जाओ बेटा भाभी की मदद करो”
हिमानी उठी और जैसे ही जाने लगी बड़ी मम्मी ने किसी काम से उसे आवाज दी और उसे जाना पड़ा। चाचा ने देखा अवनि फिर अकेली ही काम कर रही है तो उन्हें अच्छा नहीं लगा उन्होंने धीरे से अपने पास बैठे हिमांशु से कहा,”हिमांशु ! ये क्या है ? वो घर की नयी बहू है , पहली बार घर में आयी है और सबने उसे अकेले किचन में काम करने भेज दिया,,,,,,,,,,अरे इतने लोगो का खाना वो एक साथ कैसे बनाएगी ?”

“अह्ह्ह्ह ! मैं देखता हूँ चाचा , एक काम करता हूँ मैं साक्षी को भेजता हूँ”,हिमांशु ने उठते हुए कहा और कमरे की तरफ चला गया !
हिमांशु के जाने के बाद चाचा बड़े पापा की तरफ पलटे तो बड़े पापा ने कहा,”पंकज ! हम लोगो ने जैसा सोचा था अवनि उस से बिल्कुल अलग है”
“मतलब ?”,चाचा ने कहा

“मतलब ये कि पृथ्वी का फैसला सही था। लड़की बहुत समझदार और सुलझी हुई है। होली के बाद मैं रवि और लता से बात करता हूँ और समझाता हूँ उन्हें कि पृथ्वी को माफ़ कर दोनों को अपना ले और पुरे रीती रिवाज से फिर दोनों कि शादी करे”,बड़े पापा ने बहुत ही गंभीरता से कहा

चाचा ने सुना तो ख़ुशी से उनकी आँखे चमक उठी और चेहरा खिल उठा उन्होंने कहा,”मैं भी आपसे यही कहना चाहता था दादा , जो हुआ उसे भूलकर आगे बढ़ जाना ही सही होगा। दोनों एक दूसरे के साथ खुश है तो फिर हमे भी उन्हें माफ़ कर स्वीकार कर लेना चाहिए,,,,,,,,,,,,,और रवि दादा वो तो कब का पृथ्वी को माफ़ कर चुके है बस लता वहिनी की वजह से चुप है , वरना वो तो कल ही अवनि को घर ले आये”
“लता से मैं बात करूंगा पृथ्वी का फैसला गलत नहीं है ये इस लड़की ने साबित कर दिया ,देखना लता भी दोनों को जल्दी ही माफ़ कर देंगी”,बड़े पापा ने कहा

मोहित पास ही बैठा सब सुन रहा था उसने खुश होकर कहा,”फिर तो मैं अभी दादा को कॉल लगाकर उन्हें बताता हूँ कि सब उनकी शादी के लिए मान गए है”
“बिल्कुल नहीं ! पृथ्वी से अभी ये सब नहीं कहना है,,,,,,,,,,,अभी रवि का फोन आया था कि होली पर उनके साथ है वो,,,,,अभी उसे ये सब बताया तो वह सीधा यही चला आएगा,,,,,,,,,,,,,होली के बाद जब वह अवनि को लेने आएगा तब उसे बताएँगे,,,,,,,,,,!!!”,बड़े पापा ने मुस्कुरा कर कहा

“वाह दादा ! क्या बात है ? आप कब से ये सब सोचने लगे ?”,रवि ने कहा
“रवि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है माँ-बाप को ये अहसास होने लगता है कि उनके बच्चो की ख़ुशी में उनकी असली ख़ुशी है ,बाकि समाज को खुश करना इतना जरुरी भी नहीं”,बड़े पापा ने कहा तो चाचा मुस्कुरा उठे और मोहित की तरफ गर्दन घुमाकर कहा,”सुनो ! तुम्हे भी कोई पसंद हो तो बता देना”
“क्या पापा आप भी,,,,,,,,,,!!!”,कहकर मोहित वहा से चला गया और चाचा हंस पड़े  

देसाई मेंशन ,मुंबई
नौकर के कहने पर प्राची कुछ सामान थैले में भरकर घर से बाहर चली आयी। वह सोसायटी के लॉन में आयी जहा सब होलिका दहन के लिए इकट्ठा हुए थे। प्राची ने लोअर टीशर्ट पहना था। ना उसने ठीक से बाल बनाये थे ना ही चेहरे पर कोई मेकअप था। मिस्टर देसाई ने देखा तो प्राची को इस हाल में देखकर मन ही मन वे खिज उठे आखिर प्राची चाहती क्या थी ? वे प्राची की तरफ आये लेकिन तब तक प्राची जलती हुई होलिका के पास जा पहुंची और थैले में भरे सामान को जलती आग के हवाले कर दिया।

ये सामान कोई आम नहीं था बल्कि इसमें शामिल थे प्राची को मिले अवार्ड्स , सर्टिफिकेट और उसकी डिग्रियां,,,,,,,,,,मिस्टर देसाई को पहले तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन जब प्राची की कॉलेज की डिग्री जलकर हवा में उड़ते हुए उनके सामने आ गिरी तब उन्होंने उसे उठाकर देखा और हैरानी से उनकी आँखे फ़ैल गयी। वे अधजली डिग्री हाथ में लिए प्राची की तरफ भागे और उसे रोकते हुए कहा,”प्राची ! ये क्या कर रही हो तुम ?तुम्हारा दिमाग तो सही है ? तुमने अपने सर्टिफिकेट ,अपनी डिग्री जला दी हेव यू लोस्टेड,,,,,,,,,,,,!!!”

प्राची की आँखे गुस्से और आँसुओ से भरी हुई थी उसने अपने पापा को देखा और कहा,”इन सबका अब कोई मतलब नहीं है डेड , क्या फायदा इन डिग्री और सर्टिफिकेट्स का जो मुझे वो ना दिला सके जो मुझे चाहिए,,,,,,,,,,,!!”

प्राची की बात सुनकर मिस्टर देसाई के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये वे प्राची को घूरने लगे। आस पास खड़े लोग प्राची का ये बर्ताव देखकर आपस में खुसर फुसर करने लगे। मिस्टर देसाई ने प्राची की बाँह पकड़ी और उसे वहा से ले गए। होलिका दहन का कार्यक्रम एक बार फिर पहले की तरह चलने लगा लेकिन अब सबके पास बात करने के लिए एक टॉपिक था और वो था “प्राची देसाई”

मिस्टर देसाई प्राची को लेकर घर आये और उसकी बाँह छोड़कर उसे हॉल की तरफ धकियाकर कहा,”ये सब क्या है प्राची , तुमने अपनी डिग्री अपने सर्टिफिकेट जला दिए ? क्या हो गया है तुम्हे तुम इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर सकती हो ? तुम जानती भी हो उन डिग्रियों को हासिल करने के लिए तुमने कितनी मेहनत की है और उन्हें बर्बाद करने से पहले तुमने एक बार भी नहीं सोचा,,,,,,,,,,,,,,आखिर तुम चाहती क्या हो ? क्यों बार बार सोसायटी के सामने मुझे शर्मिंदा कर रही हो ? क्या इसी दिन के लिए मैंने तुम्हे इतना प्यार इतनी आजादी दी थी ?”

 मिस्टर देसाई की बात सुनकर प्राची ने जलती आँखों से उन्हें देखा और कहा,”किस प्यार और आजादी की बात कर रहे है आप डेड ? मैंने एक गलती की और आपने एक झटके में मेरी सारी मेहनत अपने मैनेजर भरत के नाम कर दी ,, How can you do this? डेड ,, क्या आपकी कम्पनी पर मेरा कोई हक़ नहीं है ? आपने मुझे उस कम्पनी से इसलिए निकाल दिया क्योकि मैं पृथ्वी से प्यार करती हूँ और मेरा प्यार आपके बिजनेस के बीच में आ रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,आप अपनी ही बेटी के साथ ऐसा कैसे कर सकते है डेड ?”

प्राची की बात सुनकर देसाई सर गुस्से से उसे देखने लगे और फिर चिल्लाकर कहा,”तो क्या चाहती हो तुम मैं खामोश बैठकर तुम्हारी और अपनी कम्पनी की बर्बादी देखू ? मेरे लिए दोनों ही इम्पोर्टेन्ट है प्राची क्योकि एक मेरा खून है और दूसरी मेरी मेहनत की कमाई मैं उसे अपनी आँखों के सामने बर्बाद होते नहीं देख सकता ,ना ही मैं देख सकता हूँ कि एक मामूली मैनेजर तुम पर हाथ उठाये”

“ओह्ह्ह डेड ! पृथ्वी ने मुझे पर हाथ उठाया मुझे इसका बिल्कुल बुरा नहीं लगा , मैं उस से प्यार करती हूँ डेड वो मुझे पर हाथ उठा सकता है वो मेरे साथ जैसा चाहे वैसा बिहेव कर सकता है ,मुझे इस से कोई प्रॉब्लम नहीं है डेड”,प्राची ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
“लेकिन मुझे है प्राची ! कोई मेरी आँखों के सामने तुम पर हाथ उठाये मुझे प्रॉब्लम है लेकिन उस वक्त मैं कुछ नहीं बोल पाया क्योकि उस वक्त गलती तुम्हारी थी “,मिस्टर देसाई ने दुखी स्वर में कहा।

उनकी आवाज से महसूस किया जा सकता था कि प्राची को मारे गए थप्पड़ से वो कितना आहत थे।
“मेरी गलती ! मेरी क्या गलती है डेड ? मैंने पृथ्वी से प्यार किया ये , ये मेरी गलती कैसे हो सकती है ?”,प्राची ने उसी बेचैनी से कहा
“यही तो तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है प्राची , तुम एक शादीशुदा आदमी से प्यार करती हो”,मिस्टर देसाई ने ऊँचे स्वर में कहा

प्राची ने सुना तो सहमकर पीछे हटी और कहा,”डेड ! डेड अगर वो शादीशुदा है तो इसमें मेरी क्या गलती है ? और वैसे भी उसकी शादी कोई शादी नहीं है , उसके घरवाले इस शादी के खिलाफ है वो उस लड़की को कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे। मैंने सब पता किया है डेड वो लड़की , वो लड़की अपनी शादी के मंडप से उठ गयी थी इसलिए पृथ्वी ने तरस खाकर उस से शादी कर ली,,,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची की बहकी बहकी बाते सुनकर मिस्टर देसाई ने कहा,”उसने भी जो भी किया हो सच ये है कि वो शादीशुदा है,,,,,,,,,,,!!!”

“शादी टूट भी तो सकती है डेड , वो वो उस लड़की को डायवोर्स भी तो दे सकता है ना डेड,,,,,,,,,,,उसके बाद सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा
“प्राची ! होश में आओ प्राची होश में आओ , किसी का बसा बसाया घर उजाड़कर तुम अपना घर बसाने का कैसे सोच सकती हो ? क्या इतनी भी शर्म नहीं बची तुम्हारे अंदर ?”,मिस्टर देसाईं ने प्राची की बाँहो को थामकर उसकी आँखों में देखते हुए गुस्से से कहा

प्राची मुस्कुराई और कहा,”everything is fare in love and war” डेड”
प्राची की आँखों में जिद और बेशर्मी के भाव देखकर मिस्टर देसाई ने उसकी बाँहे छोड़ी और हताश होकर वहा से चले गए।  

रवि जी का घर ,पनवेल
होलिका दहन के बाद पृथ्वी अपने घरवालों के साथ घर चला आया लेकिन इस बार भी वह अंदर ना जाकर बाहर ही रुक गया।  लता ने अंदर आकर रवि जी और लक्षित के लिए खाना लगाया लेकिन साथ ही आज एक थाली और लगाई जिसे देखकर रवि जी हल्का सा मुस्कुराये। लता ने देखा पृथ्वी नहीं है तो उसने रवि जी से कहा,”क्या वो अंदर नहीं आएगा ?”

रवि जी ने लता को पृथ्वी के अंदर ना आने की वजह बताई तो लता उदास हो गयी। उन्हें महसूस हुआ कि कही न कही उन्होंने खुद ही अपने पृथ्वी को खुद से दूर किया है। रवि जी ने लता को उदास देखकर कहा,”लता ! अब जिद छोड़ भी दो , आखिर वो हमारा बेटा है और उसने इतना बड़ा गुनाह भी नहीं किया जो हम उसे इतनी बड़ी सजा दे। आज त्यौहार के दिन वो घर आया इसमें कही न कही अवनि का ही हाथ है।

पृथ्वी में आये हर अच्छे बदलाव के पीछे अवनि का ही हाथ है लता ,, तुम्हे ये समझना होगा कि वो लड़की हमारे पृथ्वी की पसंद है और तुम खुद कहती थी कि तुम्हारा पृथ्वी कभी कोई गलत फैसला नहीं कर सकता,,,,,,,,,,एक बार लता , बस एक बार अपने बेटे को समझकर देखो ,उसकी पसंद को अपनाकर देखो तुम्हे खुद अहसास हो जाएगा”

लता ख़ामोशी से रवि की बात सुनती रही। कुछ देर बाद वे बाहर आयी तो देखा पृथ्वी वहा नहीं है बल्कि वह घर जा चुका है। लता की आँखों में आँसू भर आये। रवि जी ने लता को काफी देर तक दरवाजे पर खड़े देखा तो उठकर उसके पास आये। रवि जी ने देखा पृथ्वी बाहर नहीं है वह जा चुका है तो उन्हें भी दुःख हुआ। लता ने रवि जी की तरफ देखा और कहा,”देखो ना ! वो बिना खाना खाये ही चला गया”

“कोई बात नहीं लता ,तुम लक्षित के हाथ उसके लिए टिफिन भेज दो जैसे पहले कभी कभार भेजा करती थी जब वो घर नहीं आता था”,रवि जी ने कहा तो लता ने हामी में सर हिलाया और अंदर चली आयी।

पृथ्वी वापस अपने फ्लेट पर चला आया। लता से नाराजगी के चलते वह खाना खाकर नहीं आया था और फ्लेट पर आते ही उसे भूख लगने लगी। उसने कपडे बदले , हाथ मुँह धोया और किचन में चला आया। पहले इस किचन में थोड़ा बहुत सामान होता था लेकिन अब तो पूरा किचन भरा था और कुछ न कुछ खाने को मिल ही जायेगा सोचकर पृथ्वी यहाँ आया। फ्रीज खोलकर देखा लेकिन वहा उसके खाने लायक कुछ भी नहीं था।

उसने फ्रीज से ठन्डे पानी का बोतल निकाला और पीने लगा तभी डोरबेल बजी। पृथ्वी पानी पीते पीते बाहर आया और दरवाजा खोला तो देखा सामने चाचा का लड़का मोहित खड़ा था। मोहित को सामने देखकर पृथ्वी पहले थोड़ा हैरान हुआ और फिर कहा,”तुम यहाँ ?”
“हाँ ! आपके लिए खाना लेकर आया हूँ”,मोहित ने टिफिन पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा
“खाना ?”,पृथ्वी ने टिफिन लेते हुए हैरानी से कहा

“हाँ आपकी वाइफ ने भेजा है,,,,,,,,,,और साथ में ये लेटर भी”,मोहित ने शर्ट की जेब से एक लेटर निकालकर पृथ्वी को दिया। पृथ्वी ने लेटर लिया और मोहित के सर पर एक चपत मारकर कहा,”आपकी वाइफ क्या होता है ? तुम्हारी भाभी लगती है वो”
“ओह्ह्ह सॉरी ! वैसे इस लेटर में क्या है ?”,मोहित ने अवनि के दिए लेटर में झांकते हुए कहा जिसे पृथ्वी लगभग खोल चुका था

पृथ्वी ने लेटर बंद किया और कहा,”वो मैं तुम्हे क्यों बताऊ ? चलो अब जाओ यहाँ से,,,,,,,,,!!!”
मोहित ने सुना तो जाते हुए कहा,”हाह ! शादी हो गयी लेकिन अब भी वैसे ही हो आप , जा रहा हूँ”
“थैंक्यू,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने उसे जाते देखकर कहा
“ये थैंक्यू मेरे लिए है या भाभी के लिए ?”,मोहित ने जाते जाते पलटकर पूछा

“तुम्हारे लिए है उसे तो मैं पर्सनली बोल दूंगा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा और दरवाजा बंद कर लिया। उसने एक हाथ में टिफिन पकड़ा था और लड़के में इतना भी सब्र नहीं था कि आराम से अंदर आकर उस लेटर को पढ़े उसने दूसरे हाथ से झटककर लेटर खोला और पहला शब्द पढ़ते ही होंठो पर मुस्कान तैर गयी  
“प्रिय पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

( नीलम भुआ के इतना अपमान करने के बाद भी शांत क्यों है अवनि ? पृथ्वी को पाने की प्राची की ये जिद किस मोड़ पर लेकर जाएगी उसकी जिंदगी ? पृथ्वी के लिए खाने के साथ लेटर में क्या लिखकर भेजा अवनि ने ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ  )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2
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4 comments

Nency Patel May 18, 2026 - 10:46 am

Yeh prachi to Puri ki puri besharm hai

Reply
Narmada Nayak May 18, 2026 - 12:36 pm

Pehle to aj ki chapter ekdam mast thi ,me avni or pruthvi ke liye khush hun dusre wo prachi bahat bigdel or ziddi hai

Reply
Kshmata Chauhan May 18, 2026 - 3:39 pm

Himanshu k ghar jakar bhi Avni Prithvi k liye dinner nhi booli…lakin ab Lata ji ki tifin kon khayega… Prithvi to phele hee Avni k bheje tifin se pet bhar chuka hoga…lakin yeh letter m Avni ne kya khass likha hai…aur yeh Neelam bua aur Prachi dono hee Avni ki dusman hai…inn dono ko Prithvi ki zindagi se Avni ko nikalna hai…koi saman hai kya Avni, jo ese hee nikal Prithvi ki zindagi se… Prithvi ka jivan hai Avni…

Reply
vishnu jain May 19, 2026 - 10:09 am

Nice story jb tak story twist nahi aata jb story sune mazja nahi aata hai nilam bhula aur parchi avni ko prithvi jivan dur krna chahati hai lekin jo prithvi ke jivan avni ko chata ravi ji chacha, himanshu,sakshi,chachi dadi bhut log prithvi kushi chahte hai aagye story jise jise twist aaye vase story mazjdaar hoti jaygi aur mujse lagta session 2 avni parivaar apnane chla jayega aur session 3 me shayd prithvi Avni love story dekne mil jaye un do bich bond payaar ehsaas prithvi itzjaar shayad khatm ho jayega

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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