Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 3

Pasandida Aurat Season 3 – 33

by Story With Sanjana August 18, 2026
written by Story With Sanjana August 18, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 3 – 33

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

मौर्या ग्रुप अंदर कम्पनी , नवी मुंबई
लंच के बाद नीलेश ने जयदीप से कहकर एक अर्जेन्ट मीटिंग रखवाई थी। जयदीप , लीगल टीम हेड , नीलेश और कम्पनी के सभी शेयर होल्डर्स इस मीटिंग में बैठे थे। नीलेश को छोड़कर सभी जयदीप से सवाल कर रहे थे कि आखिर क्यों उन्होंने बिना किसी से डिस्कस किये “देसाई ग्रुप” के साथ की गयी डील्स को अचानक से केंसल कर दिया। कुछ शेयर होल्डर्स जयदीप पर गुस्सा भी कर रहे थे और कुछ अपने अपने शेयर्स बेचने की बात कर रहे थे। एक ने तो ये तक कह दिया कि मिस्टर देसाई से पंगा लेकर जयदीप ने अच्छा नहीं किया।

अब ये कम्पनी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। बेचारा जयदीप चुपचाप सबकी बाते सुन रहा था और नीलेश को देख रहा था क्योकि नीलेश के कहने पर ही उसने इतनी बड़ी बेवकूफी की थी और सबकी बाते सुनकर उसे भी लगने लगा कि सच में उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है।
नीलेश चुपचाप अपना काम कर रहा था उसने वहा चल रही किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया। नीलेश को चुप देखकर तो जयदीप का दिल बैठा जा रहा था।

कुछ देर बाद मीटिंग रूम का दरवाजा खुला और एक रोबदार आदमी अपने मैनेजर के साथ अंदर आया। उन्हें देखते ही नीलेश अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और साथ ही बाकि सब भी , भरत ने जब सामने खड़े शख्स को देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया और चेहरे पर 12 बज गए। सामने खड़ा शख्स कोई और नहीं बल्कि “शर्मा ग्रुप और इंडस्ट्रीज” के मालिक थे जो आज कि मीटिंग में आये थे।

मिस्टर शर्मा अपनी जगह पर आ बैठे और उनका मैनेजर अपने हाथ बांधकर पीछे खड़ा हो गया। नीलेश अपनी जगह से उठा और मिस्टर शर्मा का सबसे परिचय करवाया और उसके बाद शुरू हुआ डिस्कशन,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
घंटे भर की चर्चा के बाद मिस्टर शर्मा ने नीलेश की प्रेजेंट की फाइल पर साइन किया और जयदीप से हाथ मिलाकर कहा,”कॉन्ग्रैचुलेशन मिस्टर मौर्या”

“थैंक्यू सर”,जयदीप ने कहा , उसे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जिस आदमी को वह अपना बिजनेस आइडियल मानता है वो आज उसके सामने बैठकर उसकी डील्स साइन कर रहा है। मिस्टर शर्मा नीलेश से मिले उस से कुछ बाते की और फिर वहा से निकल गए।

जो शेयर होल्डर्स कुछ देर पहले जयदीप पर बिगड़ रहे थे अब उसे बधाईया देकर जा रहे थे। सबके जाने के बाद नीलेश आया और फाइल जयदीप की तरफ बढ़ा दी। जयदीप ने फाइल लेकर कहा,”क्या मिस्टर शर्मा ने हमारे नए प्रोजेक्ट के लिए डील फिक्स की है ?”
“नहीं सर ! जो 6 डील आपने देसाई ग्रुप से केंसल की थी , मिस्टर शर्मा ने उन्हें साइन किया है वो भी चार गुना पैमेंट के साथ”,नीलेश ने कहा और वहा से चला गया। जयदीप ने सुना तो चक्कर खाकर वही गिर पड़ा।

नीलेश मीटिंग रूम से बाहर चला आया उसे पता भी नहीं था जयदीप अंदर बेहोश पड़ा है वो तो ऑफिस बॉय जब मीटिंग रूम से चाय कॉफी के कप और बाकि सामान लेने आया तब जयदीप को देखकर चिल्लाया ! सभी भागकर मीटिंग रूम में आये। नीलेश भी अंदर आया और सबको साइड कर जयदीप के पास आकर  तो पाया कि वह बेहोश पड़ा है। नीलेश ने अंकित की मदद से जयदीप को उठाया और उसे लेकर उसके केबिन में आये !

ऑफिस का पूरा स्टाफ जयदीप के केबिन के बाहर जमा हो गया और उसे इस हाल में देखकर सभी आपस में खुसर फुसर करने लगे। नीलेश और अंकित ने जयदीप को सोफे पर लेटाया और नीलेश ने अंकित से पानी लाने को कहा।
अंकित ने पानी का गिलास लाकर नीलेश को दिया। नीलेश ने पानी के कुछ छींटे जयदीप के मुँह पर मारे और जयदीप को होश आया। वह हड़बड़ा कर उठा ,

नीलेश को अपने सामने देखकर जयदीप को कुछ देर पहले मिस्टर शर्मा से हुई मीटिंग याद आ गयी। वे नीलेश से बात करना चाहते थे इसलिए अंकित से बाहर जाने को कहा और खुद नीलेश के हाथ से पानी का गिलास लेकर एक साँस में उसे गटक गए।
अंकित केबिन से बाहर आया तो सब उसे जयदीप के बारे में पूछने लगे। उसने सबको शांत किया और अपनी अपनी डेस्क पर जाने को कहा तो सभी वहा से चले गए और अंकित भी अपने केबिन की तरफ बढ़ गया।

जयदीप को परेशान देखकर नीलेश बगल में पड़े खाली सोफे पर आ बैठा और कहा,”आप ठीक है ?”
जयदीप ने नीलेश को देखा और कहा,”नहीं ! मैं बिल्कुल ठीक नहीं हूँ , अभी कुछ देर पहले जो हुआ वो क्या था ? तुम , तुम मिस्टर शर्मा को कैसे जानते हो और वो यहाँ क्या कर रहे थे, शर्मा ग्रुप के जिस MD से मिलने के लिए एक महीना पहले अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है वो हमारे ऑफिस में कैसे क्या तुम मुझे बताओगे ये सब क्या हो रहा है ?”

नीलेश इस वक्त जयदीप की हालत अच्छे से समझ सकता था इसलिए बहुत ही शांत स्वर में कहा,”सर ! चिंता मत कीजिये जो हो रहा है अच्छा हो रहा है। मिस्टर शर्मा के देसाई ग्रुप के साथ पिछले कई सालों से अच्छे बिजनेस रिलेशन है। जब मैं देसाई ग्रुप में था तब कम्पनी की सभी बड़ी मीटिंग्स मिस प्राची अटेंड किया करती थी और उनका मैनेजर होने के नाते मैं हर मीटिंग में उनके साथ होता था। उनकी अब्सेंस में मैंने कई मीटिंग अटेंड की और उनका प्रेजेंटेशन भी दिया है इसलिए इन सब से मेरी अच्छी दोस्ती है।

मिस्टर शर्मा पिछले कुछ टाइम से देसाई ग्रुप एंड कम्पनी में चल रही मनमानियों से परेशान थे। प्राची की जगह अब मिस्टर भरत वहा MD है।”
भरत का नाम होंठो पर आते ही नीलेश के चेहरे पर नफरत के भाव झिलमिलाने लगे लेकिन जयदीप ने ध्यान नहीं दिया और कहा,”इसका मतलब तुम मिस्टर शर्मा को पहले से जानते हो लेकिन उन्होंने उन 6 डील्स को कन्फर्म क्यों किया जो पहले देसाई ग्रुप के पास थी ?”

नीलेश ने जयदीप की तरफ देखा और कहा,”जो 6 प्रोजेक्ट आपने देसाई ग्रुप को दिए , मिस्टर भरत देशमुख ने उन्ही 6 प्रोडक्ट को 8 गुना कीमत में मिस्टर शर्मा को बेचने वाले थे,,,,,,,,,,,,,,!!!”

जयदीप ने सुना तो हैरानी से उसका मुँह खुला का खुला रह गया ! भरत इतना बड़ा जालसाज निकलेगा जयदीप ने कभी सोचा नहीं था। उसने हैरानी से नीलेश की तरफ देखा तो नीलेश ने सोफे से अपनी पीठ लगाकर आराम से बैठते हुए कहा,”अब समझ आया मैंने आपसे देसाई ग्रुप के साथ वो 6 डील केंसल करने को क्यों कहा ?”
“तो क्या तुम मिस्टर देसाई को धोखा देना चाहते हो ?”,जयदीप ने पूछा

“पृथ्वी आपके बारे में सही कहता है”,नीलेश ने एकटक जयदीप को देखते हुए सधे हुए स्वर में कहा
“क्या कहता है पृथ्वी मेरे बारे में ?”,जयदीप ने मुस्कुराकर कहा
नीलेश ने जयदीप को एक बहुत ही कड़क लुक दिया और कहा,”यही कि आपको बातें देर से समझ आती है”
जयदीप ने सुना तो उसके चेहरे से मुस्कराहट एकदम से गायब हो गयी और उसने चिढकर कहा,”उसने ऐसा कहा ? देख लूंगा उसे , तुम मेरे सवाल का जवाब दो , क्या तुम मिस्टर देसाई को धोखा दे रहे हो ?”

नीलेश ने एक ठंडी आह भरी और कहा,”मुझे अगर उन्हें धोखा देना होता तो मैं उनकी कम्पनी छोड़कर यहाँ आपके सामने नहीं होता ! मैं किसी को धोखा नहीं दे रहा बस असल मे जो धोखेबाज है उनका चेहरा सामने लाने की कोशिश कर रहा हूँ,,,एंड डोंट वरी मेरी वजह से आपको और आपकी कम्पनी को कोई नुक्सान नहीं होगा,,,,,,,!!!”
जयदीप ने सुना तो ख़ामोशी से नीलेश को देखने लगा। कुछ तो ऐसा था जो नीलेश छुपा रहा था लेकिन इस वक्त जयदीप ने उस से कुछ नहीं पुछा और धीरे से हामी में गर्दन हिला दी।

नीलेश उठा और केबिन से बाहर निकल गया। जयदीप भी उठा और टेबल की तरफ आकर पानी का गिलास उठाया और पीते हुए खिड़की की तरफ चला आया। नीलेश को जितना सरल उसने समझा था नीलेश उतना सरल था नहीं ! अब तो जयदीप को बस पृथ्वी के वापस मुंबई आने का इंतजार था ताकि वह जान सके कि ये आखिर ये दोनों मिलकर क्या करना चाहते है ?

सिरोही , राजस्थान
मीटिंग ख़त्म कर सिद्धार्थ गाड़ी लेकर वहा से निकल गया। रास्तेभर वह फिर सुरभि के नंबर पर फोन करता रहा। रिंग जाती रही लेकिन इस बार भी सुरभि ने फोन नहीं उठाया। आखिर क्या हुआ होगा ? सोचकर सिद्धार्थ का दिमाग फटने लगा था। सिरोही पहुंचने में उसे एक घंटा लगा और शहर में पहुंचते ही वह घर ना जाकर सुरभि के अपार्टमेंट वाले रास्ते की तरफ निकल गया। उसे उम्मीद थी कि अब तक सुरभि अपने फ्लेट पर आ चुकी होगी और किसी वजह से उस से नाराज होगी इसलिए फोन नहीं उठा रही।

सिद्धार्थ अपार्टमेंट के सामने पहुंचा ही था कि उसका फोन बजा ! गाड़ी में बैठे सिद्धार्थ ने जल्दी से अपना फोन उठाकर देखा लेकिन स्क्रीन पर जगदीश जी का नंबर देखकर मायूस हो गया और फोन कान से लगाकर कहा,”हाँ पापा”
“सिद्धू ! कहा हो तुम ? जल्दी से सिटी हॉस्पिटल पहुँचो”,जगदीश जी ने घबराये हुए स्वर में कहा

हॉस्पिटल का नाम सुनकर सिद्धार्थ का दिल धड़क उठा और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। उसने घबराये हुए स्वर में कहा,”सिटी हॉस्पिटल ? क्या हुआ पापा , सब ठीक तो है ना ?”
“तुम्हारी मम्मी बाथरूम में फिसल कर गिर गयी थी , उन्ही को लेकर हॉस्पिटल आया हूँ,,,,,,,,,,तुम सवाल मत करो जल्दी यहाँ पहुंचो”,जगदीश जी ने कहा

“हाँ हाँ मैं अभी आता हूँ”,सिद्धार्थ ने कहा और फोन काटकर गाडी घुमा ली।
सिद्धार्थ सुरभि से मिलने आया था लेकिन अंदर जाने से पहले ही उसे वापस जाना पड़ा। उसने पलटकर सुरभि के अपार्टमेंट को देखा और मन ही मन खुद में बड़बड़या,”आई हॉप कि तुम ठीक हो सुरभि,,,,,,,,,,,,!!!”

उदयपुर , राजस्थान
सुरभि के घरवाले सुरभि को लेकर उदयपुर पहुंचे और सीधा घर ले आये। घर के सभी लोग हॉल में जमा थे और साथ ही सुरभि की मम्मी के कुछ रिश्तेदार भी और उनके सामने सुरभि को फटकार लगायी गयी और उस से सिद्धार्थ के बारे में पूछा गया। सुरभि अब तक सब से बहुत मिन्नते कर चुकी थी , सबको बहुत समझा चुकी थी इसलिए अब उसने किसी की बात का जवाब नहीं दिया और वहा से चली गयी। अपने कमरे में जाकर सुरभि ने कमरे का दरवाजा बंद किया और गुस्से से कमरे में चक्कर काटने लगी।

उसे अनिकेत पर गुस्सा आ रहा था जिसने ये सब भसड़ फैलाई थी साथ ही उसे सिद्धार्थ की फ़िक्र भी हो रही थी कि वह उसे फोन कर रहा होगा , उसे ढूंढ रहा होगा और कही फोन ना उठाने पर सिद्धार्थ उसे गलत ना समझ ले ?
थककर सुरभि बिस्तर पर आ बैठी और अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर खुद में ही बड़बड़ाने लगी
“अब मैं क्या करू ? कैसे समझाऊ घरवालों को कि जिसे वो गलत समझ रहे है वही मेरे लिए सबसे सही लड़का है और ये सब गड़बड़ उस अनिकेत ने की है।

मम्मी पापा ऐसे नहीं है , अगर वो अवनि का प्यार समझ सकते है तो वो अपनी बेटी का प्यार तो समझ ही सकते है लेकीन ये मेरे कम्बख्त रिश्तेदार , इन्होने ही मम्मी पापा के कान भरे होंगे और उन्हें सिरोही तक पहुंचा दिया ! मेरा फोन भी मेरे पास नहीं है और तो और मुझे उस चिलगोजे का नंबर भी याद नहीं है मैं उसे कैसे बताऊ मैं कितनी बड़ी मुसीबत में फंस गयी हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,

अवनि ! अवनि के पास सिद्धार्थ का नंबर मिल सकता है अगर उसने उसे डिलीट ना किया हो तो लेकिन मैं अवनि से उसका नंबर कैसे माँग सकती हूँ ? पता नहीं पृथ्वी ने अवनि को अभी तक मेरे और सिद्धार्थ के बारे में बताया है भी या नहीं,,,,,,,,,,,,,,,अगर बताया भी है तो मुझे सबसे पहले अवनि को ही फेस करना होगा,,,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह ये सब क्या हो गया ? मैं अब क्या करू ??”
कहकर सुरभि पेट के बल बिस्तर पर गिरी और रोते हुए अपने हाथो को पटकने लगी !  

 ड्रीमलैंड रिसोर्ट , ठाणे
मिस्टर देसाई के कहने पर भरत लंच के बाद फाइल लेकर मिस्टर आहूजा के साथ मीटिंग करने ठाणे पहुंचा ! मिस्टर आहूजा अपने केबिन में एक क्लाइंट के साथ बिजी थे इसलिए उन्होंने भरत को बाहर इंतजार करने को कहा। भरत वेरिंग लॉबी में आ बैठा और मिस्टर आहूजा का इंतजार करने लगा। वह जल्दी से जल्दी ये मीटिंग खत्म करके नवी मुंबई जाना चाहता था ताकि जयदीप से मिलकर सब सम्हाल सके लेकिन यहाँ आकर भरत ऐसा फंसा की इंतजार करते करते उसे 2 घंटे बीत गए लेकिन मिस्टर आहूजा अपने क्लाइंट के साथ बिजी रहे।

भरत अंदर ही अंदर गुस्से से भरा जा रहा था लेकिन वह मिस्टर आहूजा से कुछ कह भी नहीं सकता था वरना ये डील हाथ से निकल जाती ! आख़िरकार मिस्टर आहूजा को भरत का ख्याल आया और उन्होंने उसे मीटिंग रूम में आने को कहा।
एक घंटे के डिस्कशन के बाद मिस्टर आहूजा ने भरत से कहा,”ओहके मिस्टर भरत ! इस से आगे मैं मिस्टर देसाई से बात कर लूंगा”
भरत ने सुना तो गुस्से से उसका खून जल उठा और वह बड़बड़ाया,”जब देसाई से ही बात करनी थी तो मुझे यहाँ क्यों बुलाया ?”

“आपने कुछ कहा मिस्टर भरत ?”,मिस्टर आहूजा ने कहा
“अह्ह्ह्ह नहीं सर ! ठीक है आप सर से बात कर लीजिये , मैं अब चलता हूँ”,भरत ने उठते हुए कहा
“मिस्टर भरत ! मैंने आपके लिए कॉफी मंगवाई है प्लीज पीकर जाईये”,मिस्टर आहूजा ने कहा  
भरत ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा उसे पहले ही काफी देर हो चुकी थी लेकिन मिस्टर आहूजा से पहली बार मिल रहा था इसलिए उन्हें मना नहीं कर पाया और बैठकर कॉफी का इन्तजार करने लगा !

कॉफी पीकर भरत जल्दी से वहा से निकला , रिसोर्ट के पार्किंग से अपनी गाडी निकाली और घडी में समय देखा जो कि शाम के साढ़े चार बजा रही थी। यहाँ से जयदीप के ऑफिस पहुंचने में उसे एक घंटा लगने वाला था। भरत जैसे ही नवी मुंबई पहुंचा उसका फोन बजा स्क्रीन पर चेतन का नाम देखकर भरत के चेहरे पर चिढ के भाव आये और उसने फोन उठाकर कहा,”हेलो ! तुमने मुझे इस वक्त फोन क्यों किया है , जल्दी बोलो क्या काम है ?”

“सर ! मैंने आपको ये याद दिलाने के लिए फोन किया है कि आज शाम मिस्टर शर्मा के साथ आपकी मीटिंग है और अगर आपने ये मीटिंग अटेंड नहीं की तो आपका भांडा फुट जाएगा और मिस्टर देसाई के सामने आपकी सारी सच्चाई आ आजायेगी”,चेतन ने साफ़ शब्दों में कहा
भरत ने सुना तो उसे याद आया कि मिस्टर आहूजा और जयदीप के चक्कर में वह मिस्टर शर्मा और आज की बोर्ड मीटिंग को तो भूल ही गया था।  

भरत ने गुस्से और तकलीफ से भरकर अपना हाथ स्टेयरिंग पर मारा और फोन काट दिया। उसने अपनी गाडी घुमाई और शर्मा ग्रुप एंड कम्पनीज के लिए निकल गया जो की नवी मुंबई में ही थी। भरत मीटिंग से ठीक 20 मिनिट पहले मिस्टर शर्मा के ऑफिस पहुँच गया। मिस्टर शर्मा अपने केबिन में थे इसलिए भरत सीधे वही चला आया। भरत को अपने सामने देखकर मिस्टर शर्मा ने कहा,”भरत ! तुम तो वक्त से पहले आ गए , खैर बैठो मीटिंग शुरू होने में अभी वक्त है,,,,,,,,!!!”

“मिस्टर शर्मा मुझे आपसे कुछ जरुरी बात करनी है”,भरत ने कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा  
” भरत ! अब जो बात होगी बोर्ड मीटिंग में होगी,,,,,,,तुम कुछ लोगे चाय कॉफी ?”,मिस्टर शर्मा ने ठन्डे स्वर में कहा जैसे उन्हें भरत की बात से कोई फर्क ही ना पड़ा हो।  
“मिस्टर शर्मा प्लीज ! क्या ये बोर्ड मीटिंग रखना जरुरी है ? डील आपकी और देसाई कम्पनी के बीच है तो क्या हम दोनों आपस में इस पर बात नहीं कर सकते ?”,भरत ने तड़पकर कहा

मिस्टर शर्मा कुछ देर खामोश रहे और फिर कहा,”भरत ! उन 6 डील्स के लिए मेरी कम्पनी मिस्टर देसाई को अच्छी रकम देने वाली थी जबकि मैंने तुम्हे 10 लाख एडवांस भी दिया उसके बाद भी 3 दिन तक तुम्हारी तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। कम्पनी के शेयर होल्डर्स मुझसे जवाब मांग रहे है बताओ क्या जवाब दू मैं उन्हें ? जब प्रोजेक्ट तुम्हारे हाथ में थे ही नहीं तो फिर तुमने हमारी कम्पनी से उनकी डील करके एडवांस क्यों लिया ? मैं कल ही मिस्टर देसाई से मिलकर उनसे बात करता हूँ और उनसे कहता हूँ कि अगर यही हाल रहा तो आई ऍम सॉरी मुझे देसाई ग्रुप से अपने सभी बिजनेस रिलेशन खत्म करने होंगे”

मिस्टर शर्मा की बात सुनकर भरत के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और ललाट पर पसीने की बुँदे झिलमिलाने लगी। मिस्टर देसाई को तो पता भी नहीं था कि भरत ऐसी कोई डील कर रहा है , उसने 10 लाख एडवांस भी अपने पर्सनल अकाउंट में लिए थे और अब ये बात मिस्टर देसाई के सामने आने का मतलब था भरत के बने बनाये प्लान का मिटटी में मिल जाना !

“मिस्टर शर्मा ! प्लीज ऐसा कुछ मत कीजिये , आई ऍम रियली सॉरी मैं टाइम पर आपको प्रोजेक्ट हेंडओवर नहीं कर पाया। मैं मैं इसकी भरपाई करने के लिए तैयार हूँ बस आप इस बोर्ड मीटिंग को केंसल कर दीजिये। मैं मैं आपका पूरा एडवांस आपको वापस लौटाने के लिए तैयार हूँ,,,,,,,,,,,,,,!!!”,भरत ने कहा
मिस्टर शर्मा ने भरत को देखा और कहा,”एडवांस तो आप वापस करेंगे ही करेंगे मिस्टर भरत लेकिन सिर्फ एडवांस ही नहीं बल्कि आपने जो हमारी कम्पनी का जो नुकसान हुआ है और वक्त बर्बाद किया है उसका एक्सट्रा पेमेंट भी देना पडेगा”

भरत ने सुना तो हैरानी से मिस्टर शर्मा को देखने लगा। मिस्टर शर्मा उठकर भरत के सामने आये और पानी का गिलास उसकी तरफ बढाकर कहा,”आपकी कम्पनी अब 10 लाख की जगह 20 लाख वापस करेगी”
भरत ने सुना तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गयी , उसने कांपते हाथो से पानी के गिलास को थामा और होंठो से लगा लिया।

( आखिर क्यों कर रहा है नीलेश जयदीप की मदद , क्या इसके पीछे है कोई बड़ी वजह ? सुरभि कैसे पहुचायेगी सिद्धार्थ तक अपनी बात और क्या सिद्धार्थ समझ पायेगा सुरभि की मज़बूरी ? इस नयी मुसीबत से बचने के लिए क्या भरत मानेगा मिस्टर शर्मा की बात और चुकाएगा उसे दुगुनी रकम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल   

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Kshmata chauhan August 18, 2026 - 1:19 pm

Kya sach m Bhart ki pol khulne wali hai…quki Bhart bhi pahucha hua khiladi hai, itni jaldi to wo haar manane ko tayar nhi hoga…wo kuch na kuch jugad karega khud ko Mr Desai ki nazro m saaf dikhane k liye…lakin uska khud ka beta Neelesh bhi to uske piche pada hua hai, ki kaise bhi krke usse apne baap ko sabak sikhana hai…dekhte hai ki baap bate m phele kon kamyab hota hai…lakin yeh Surbhi ki help kon karega

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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