Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5

Manmarjiyan Season 5 – 10

by Story With Sanjana July 17, 2026
written by Story With Sanjana July 17, 2026 1 comment
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Manmarjiyan Season 5 – 10

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी , गुड्डू और आदर्श फूफा गुड्डू की पिकअप से अपने घर निकल गए। शर्मा जी और शर्माईन अपने घर चले गए। लवली बिंदिया को अपने साथ लेकर पहले ही गुप्ता जी के घर से जा चुका था और बचा गोलू तो वह अपना दिमाग लगाकर एम्बुलेंस से निकल भागा। गोलू पैदल चलकर चौक की तरफ चला आया। चौक में खाने के ठेले देखकर गोलू की भूख जाग गयी और अब तो उसके पास पैसे भी थे इसलिए वह ख़ुशी ख़ुशी ठेले की तरफ चला आया।

उसने ठेले वाले से एक प्लेट छोले कुलचे देने को कहा और इंतजार करते हुए इधर उधर देखने लगा तभी गोलू की नजर बगल की दुकान पर खड़े लवली और बिंदिया पर पड़ी तो उन्हें देखकर गोलू मन ही मन बड़बड़ाया,”जे लवली भैया बिंदिया भाभी के साथ हिया का कर रहे है , मिश्रा जी के घर काहे नहीं गए ?”

गोलू ने खुद ही खुद से सवाल किया और फिर खुद ही खुद को जवाब देने के लिए हैरानी भरे स्वर में कहा,”ए साला ! जे लवली बिंदिया भाभी को चकिया से भगा के ले आया है कही जे बात पर मिश्रा जी ने इन दोनों को घर से तो नहीं निकाल दिया ? भक्क साला ! जब मिश्रा जी को इन दोनों को घर से ही निकालना था तो फिर चकिया आकर इत्ती भसड़ काहे फैलाई ?”

“ए बऊआ ! इह पकड़ो अपना छोला कुलचा”,ठेले वाले ने प्लेट गोलू की तरफ बढाकर कहा तो गोलू की तंद्रा टूटी और उसने चिढ़कर कहा,”हुआ मिश्रा जी दो  पियार करने वालो को घर से निकाल दिए रहय और तुम्हे अपने छोले कुलचे की पड़ी है”
“अबे मिश्रा जी दो पियार करने वालों को घर से निकाले चाहे कानपूर से हमे का बे ? इह अपना पिलेट पकड़ो और 60 रुपिया दो हमे और भी बहुते काम है”,ठेलेवाले ने गोलू को ताना मारकर कहा

गोलू ने मुँह बनाया और प्लेट लेकर कहा,”निम्बू डाले हो ना ?”
“काहे ? खट्टा खाने का मन हो रहा है का तुम्हरा ?”,ठेलेवाले ने भी गोलू के साथ बकैती करते हुए कहा
“हम का पेट से है जो खट्टा खाने का मन करेगा ? अबे प्याज मूली के साथ जोन निम्बू देते हो उह्ह्ह दो जियादा सरपंच नाही बनो”,गोलू ने भड़ककर कहा

ठेलेवाले ने निम्बू का टुकड़ा गोलू की प्लेट में रख दिया तो गोलू वहा से जाने लगा।  ठेलेवाले ने पीछे से उसकी कोलर पकड़कर उसे रोका और कहा,”पइसा कौन देगा ?”

गोलू रुका और पलटकर कहा,”कौन का देगा ? हम देंगे , पहिले चैन से खा ले ?”
“हाँ हाँ खाय ल्यो”,ठेलेवाले ने गोलू को छोड़कर कहा
गोलू सामने पड़ी बेंच पर आ बैठा और जैसे ही एक निवाला तोड़कर मुँह की तरफ बढ़ाया ठेलेवाले ने कहा,”एक ठो बात बताओ भैया ! शादी से भागकर आये हो का ?”

गोलू ने सुना तो पहले ठेलेवाले को देखा और फिर खुद को देखा तो समझ गया कि ठेलेवाले ने उस से ऐसा क्यों पूछा क्योकि गोलू महाराज अभी तक ऋतिक की शेरवानी में ही थे। उसने निवाला खाया और कहा,”उह्ह्ह बहुते लम्बी कहानी है कबो फुर्सत मा सुनाएंगे”
ठेलेवाला फिर अपने काम में लग गया और गोलू जल्दी जल्दी छोले कुलचे पर हाथ साफ़ करने लगा।

प्लेट में आधा कुलचा ही बचा होगा कि लवली और बिंदिया वह धमके और लवली ने गोलू को ताना मारकर कहा,”हुआ सबका खाना हराम करके हिया बैठकर आराम से छोले कुलचे खाय रहे हो , शरम नाही है तुम्हरे अंदर”
गोलू ने सर उठाकर सामने खड़े लवली को देखा और खीजकर कहा,”अब का खाना भी नाही खाये ? हुआ आपके ससुराल वाले तो सादी मा एक ठो गिलास पानी तक नाही पूछे हमसे,,,,,,,,,,,!!!!”

“हाँ हमाये ससुराल बारात लेकर जो गए थे तुम,,,,,,,,,,!!!”,लवली ने कहा तो गोलू ने मुँह बनाया और बचा हुआ कुलचा खाकर कहा,”कुलचा खाना है तो बैठिये फालतू का ज्ञान नाही दीजिये”
लवली ने सुना तो गोलू को घूरने लगा लेकिन भूख तो उसे भी लगी थी इसलिए उसने गोलू से बहस ना करके बेंच पर बैठते हुए कहा,”खा लेंगे दुइ प्लेट बनवा दो हमाये लिए भी,,,,,,,,,,,!!!”

“का राक्षसों के खानदान हो जो एक साथ दुइ पिलेट खाओगे ?”,गोलू ने उठकर कहा
लवली ने बैठे बैठे उसके पीछे एक लात मारी और कहा,”दिखाई नहीं देता बिंदिया भी है हमाये साथ,,,,,,,,,!!!”
“हाँ हाँ तो ठीक है ना लगवाते है मार काहे रहे है ?”,गोलू ने कहा
“बिना मार खाये दिमाग काम कहा करता है तुम्हरा , साला हम तो जे सोच के परेशान है कि उह्ह्ह गुड्डू तुमको झेलता कैसे है ?”,लवली ने चिढ़कर कहा

“ऐसा का लवली भैया,,,,,,,,,,,,,एक मिनिट”,गोलू ने बड़े प्यार से कहा और ठेले वाले की तरफ पलटकर कहा,”ए चचा ! इह पकड़ो तुम्हरा साठ रुपइया और उह्ह्ह आदमी जो खाये ना ओह्ह्ह का पैसा ओह्ह से ही लेना”
लवली ने सुना तो हैरानी से गोलू की तरफ देखा और गोलू ने मुँह बनाकर कहा,”गुड्डू भैया हमे झेलते कैसे है ? अरे पियार करते है हमसे इहलीये झेल लेते है आपकी तरह नाही है सेल्फिश,,,,,,,,, खाओ अब अपने पैसे से कुलचा”
इतना कहकर गोलू वहा से चला गया।

गोलू के जाने के बाद बिंदिया ने लवली से कहा,”लवली ! तुम्हे गोलू से ऐसा नहीं कहना चाहिए था , उसने हम सबकी कितनी मदद की है”
बिंदिया की बात सुनकर लवली को अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन अब तो गोलू वहा से जा चुका था और इस वक्त लवली के पास पैसे भी नहीं थे जिस से वह बिंदिया को कुछ खिला सके और खुद खा सके। मायूस होकर लवली ने बिंदिया की तरफ देखा और चलने का इशारा किया। दोनों बेंच से उठे तभी उनके कानो में गोलू की आवाज पड़ी जो कि ठेलेवाले से कह रहा था,”दुइ पिलेट लगाय दयो पैसा हम दे देंगे”

लवली ने देखा गोलू वापस आ गया है तो गोलू की तरफ देखकर मुस्कुराया ये देखकर गोलू ने कहा,”जियादा खुश नाही होईये ! भाभी के लिए वापस आये है। आपके हमायी वजह से जे काहे भूखी रहे ? जे सब मा इनकी का गलती,,,,,,,,अरे चचा ! तुम का मुहूर्त का इंतजार कर रहे हो प्लेट लगाओ यार”
गोलू था तो बकैत लेकिन उसका दिल गुड्डू की तरह साफ़ और मासूम था इसलिए तो सबसे मार खाकर भी वह उनके पास वापस चला आता था।

लवली और बिंदिया वापस बेंच पर आ बैठे। गोलू ने प्लेट उनके सामने लाकर रख दी ! दोनों खाने लगे गोलू भी वही खम्बे से पीठ लगाकर हाथ बांधकर खड़ा हो गया और कुछ देर बाद कहा,”एक बात बताओ लवली भैया ! मिश्रा जी ने आपको और बिंदिया भाभी को घर से निकाल दिया का ?”
“नहीं ! पिताजी हमे घर से काहे निकालेंगे ?”,लवली ने कहा

“तो फिर आप बिंदिया भाभी को अपने साथ लेकर कानपूर की सड़को पर काहे घूम रहे है , घर काहे नाही गए ?”,गोलू ने पूछा
“घर किस मुँह से जाए गोलू ? अम्मा को पता चला हमहू बिंदिया को शादी के मंडप से भगाकर लाये है तो का बीतेगी उन पर ? और पिताजी ! उन्होंने भी तो हमसे चकिया जाने से मना किया था ना फिर भी हम बिंदिया के लिए वहा गए ये जानकर उह्ह्ह भी हमसे नाराज होंगे और फिर जब उन्हें पता चलेगा कि तुम्हाये और गुड्डू के काण्ड मा हम भी शामिल थे तो फिर वो पक्का हमे अपने घर से बाहर निकाल देंगे”,लवली ने उदास होकर कहा

“कौनसा कांड ? अब हमने और गुड्डू भैया ने कौनसा काण्ड कर दिया ?”,गोलू ने हैरानी से कहा और उछलकर लवली के पास आया
“भूल गए तुमने ही पिलान बनाया था चकिया जाकर बिंदिया को उठाने का”,लवली ने कहा  

गोलू ने सुना तो उसका हाथ अपने सीने पर चला गया क्योकि एक कांड ख़त्म नहीं हुआ था कि उसका और गुड्डू का दुसरा कांड सामने आ चुका था। उसने तो अपना सीना ही पकड़ लिया और लवली के पैरो के पास उकडू बैठकर बोला,”इह का मतलब हमायी और गुड्डू भैया की लंका फिर लगेगी,,,,,,,,,,,ए लवली भैया ! जे सब तो हमने आपके लिए किया ना,,,,,,,,अब आप ही हमे मिश्रा जी से बचाइए आपको हमाये छोले कुलचे की कसम”

लवली ने गोलू की तरफ देखा और कहा,”एक बात बताये गोलू ! तुम्हायी जिंदगी मा चरस बोने वाले तुमहू खुद हो,,,,,,,,,60 रुपिया के कुलचे खिला के तुमको लगता है तुमहू हमे अपनी तरफ कर लोगे और हमहू पिताजी के खिलाफ हो जायेंगे , बिल्कुल नाही”
गोलू ने सुना तो लवली को घूरने लगा ये देखकर लवली ने कहा,”हमे घूरने से कुछ नहीं होगा जोन रायता फैलाये हो ना जाकर ओह्ह्ह का समेटो और हम तुमको और गुड्डू को जे काण्ड से बचा भी ले तो तुम्हरा कोई न कोई नवा कांड सामने आ ही जाएगा”

गोलू ने सुना तो उठा और अपना हाथ लवली के सामने करके कहा,”बस लवली भैया बस,,,,,,,आपको का लगता है हम मिश्रा जी से डरते है , डरते नाही है”
गोलू ने इतने गुस्से से कहा कि आस पास के सब लोगो के साथ साथ बिंदिया और लवली भी गोलु को देखने लगे लेकिन अगले ही पल गोलू लवली के पैरों में आ गिरा और उसका पैर पकड़कर रोते हुए बोला,”डरते नहीं है बल्कि उनकी एक फटकार सुनकर पाजामे मा पेशाब कर देते है हम और गुड्डू भैया ! अरे उह्ह्ह आदमी जब पियार करता है तो बहुत करता है पर जब मारता है तो गिनती भूल जाता है ,

बाटा की चप्पल अपनी पूरी जिंदगी मा इतनी पहनी नाही होगी जितनी से हमने मार खायी है , अरे हॉकी खेलने के लिए नाही हमे और गुड्डू भैया को पेलने के लिए रखे है , चाँटे तो ऐसे मारते है जैसे गाल पर चुम्मा दे रहे है , हमाये बाप अगर जल्लाद है तो मिश्रा जी ओह्ह्ह के भी बाप है लवली भैया नंगा करके बर्फ की सिल्ली पर लेटा देंगे हमे और गुड्डू भैया को,,,,,,,,,,अब आप ही हमे बचा सकते हो , हमका बचाय ल्यो आप जो कहोगे हमहू करेंगे बस जे काण्ड बाहिर ना आन दयो आपको जे कुलचे वाले की कसम है”

कुलचे वाले ने सुना तो गोलू की तरफ पलटकर कहा,”अबे ए ! हमायी कसम काहे खाय रहे हो ?”
“अरे चचा तुम्हाये हाथ का कुलचा खाये है एक आधी कसम भी खाय लेंगे तो तुम्हरा का बिगड़ जाही है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने रोते हुए ठेले वाले से कहा और फिर लवली से चिपककर कहा,”हमे बचाय ल्यो लवली भैया”
गोलू को देखकर बिंदिया को दया आ आ गयी तो उसने लवली से कहा,”लवली इनकी मदद कर दो ना,,,,,,,,,,,,,इन्होने भी तो तुम्हारी कितनी मदद की है”

गोलू ने बिंदिया को अपनी सिफारिश करते देखा तो अपने दोनों हाथ जोड़े और बिंदिया के सामने दंडवत प्रणाम करके बोला,”बिंदिया भाभी ! आप देवी हो देवी जो हमाये बारे मा इत्ता सोची,,,,,,,हमको अगर बिटिया हुई ना तो ओह्ह्ह का नाम हम बिंदिया ही रखेंगे”
“और अगर बेटा हुआ तो ?”,लवली ने गोलू की कोलर पकड़कर उसे उठाते हुए पूछा
गोलू मुस्कुराया और कहा,”कांडी ! उसका नाम हमहू कांडी रखेंगे”

“जे कैसा नाम है बे ?”,लवली ने हैरानी से कहा
“का है कि उह्ह्ह हमाये और पिंकिया के सबसे बड़े वाले कांड के बाद ही तो पैदा होगा ना इहलीये ओह्ह्ह का नाम हम कांडी रखे है”,गोलू ने अपने दोनों हाथो की उंगलियों को आपस में फसाते हुए कहा जो कि देखने में बहुत ही गंदा इशारा लग रहा था !  

लवली ने सुना तो अपना सर अपने हाथ से लगाया और फिर चार उंगलिया गोलू की तरफ करके कहा,”गोलू इह से पहिले हम तुमको मारे भाग जाओ हिया से”
गोलू ने सुना तो उठा और अपनी शेरवानी झाड़कर कहा,”हाँ हाँ जा रहे है बस आप ख्याल रखना जे काण्ड मिश्रा जी के सामने ना आये”

कहकर गोलू वहा से चला गया और लवली बडबडाया,”जे काण्ड तो हमहू दबा देंगे गोलू पर हमको पूरा यकीन है साला तुम्हरा कोई ना कोई नवा कांड तो पिताजी के सामने आ ही जाएगा”
लवली को बड़बड़ाते देखकर बिंदिया ने उसके हाथ को छुआ तो लवली की तंद्रा टूटी और वह कुलचा खाने लगा।

“अरे हम सच कह रहे है रूपा जी हमरा फुलवारी के साथ कोई चक्कर नाही है , कसम से हमरा बिस्वास कीजिये”,गुप्ता जी के घर की छत पर रूपा के पीछे पीछे घूमते मंगल फूफा ने कहा
“चक्कर नाही है तो फिर काहे सब जन बार बार ओह्ह का नाम ले रहे है ?”,रूपा ने भी नाराजगी भरे स्वर में कहा

“अरे सबकी गा,,,,,,,,,,,,,हमरा मतलब सबके दिमाग मा सक का कीड़ा है। फुलवारी सामने रहती है और अब हम ठहरे हट्टे कट्टे , स्मार्ट , हेंडसम कंवारे नौजवान तो जे साला यादव , आदर्श्वा और तो और गुप्ता जी जे सब हमायी पर्सनालिटी से जलते है इहलीये फुलवारी का नाम हमरे नाम के साथ जोड़कर हमे बदनाम कर रहे है”,मंगल फूफा ने कहा

रूपा चलते चलते रुकी और पलटकर मंगल फूफा के सर से लेकर पाँव तक हाथ से इशारा करके कहा,”अच्छा और जे लोग काहे जलेंगे आपकी इह पर्सनालिटी से ?”
“अरे क्योकि आप जैसे स्वपनसुन्दरी जो हमाये साथ है,,,,,,,,,उनको रूपा नहीं मिला ना इहलीये जलते है ससुरे सब के सब”,मंगल फूफा ने मुस्कुराकर दबे स्वर में कहा

मंगल फूफा के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर रूपा खुश तो हुई लेकिन ख़ुशी को अपने चेहरे पर नहीं आने दिया और कहा,”वो सब हमे नाही पता मंगल जी , आपकी जिंदगी मा अगर फुलवारी है तो फिर हमरी हिया का जरूरत ?”
“अरे उह्ह्ह पहिले से शादीसुदा है , उह्ह्ह गोबर जैसा आदमी नाही देखी थी यादव ओह्ह्ह ही तो है ओह्ह्ह का घरवाला , अरे शादीसुदा के चक्कर मा हम काहे पड़ेंगे ? आप ज़रा बात की गहराई को समझिये रूपा जी जे सब मिलके आपके और हमाये बीच दिवार खड़ी कर रहे है”,मंगल फूफा ने कहा

जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि कानपूर आने के बाद रूपा बदली बदली नजर आ रही थी इसलिए यहाँ भी रूपा ने मंगल फूफा की बात को नजरअंदाज किया और कहा,”हमे कुछ नाही सुनना मंगल जी पहिले इह सब रायता जो आप फैलाये है उह्ह समेटिये ओह्ह्ह के बाद हमसे मिलियेगा”

“अरे उह्ह सही हाथ जे ही है”,मंगल फूफा ने रूपा को अपना हाथ दिखाते हुए उसके पीछे आते हुए कहा।
गुप्ता जी अभी अभी नहाकर घर के हॉल में आये थे इसलिए उन्होंने सिर्फ बनियान और लुंगी पहनी थी। उन्होंने जब रूपा को आते देखा तो बोले,”अरे रूपा ! जे बुलेट ट्रेन की स्पीड मा कहा जा रही हो ?”
“हम बिंदिया के पास जा रहे है जब तक सब साफ नहीं हो जाता हम जे घर मा नाही रहेंगे”,रूपा ने कहा

गुप्ता जी कुछ समझ पाते तब तक मंगल फूफा भी वहा आ पहुंचे और गोलू भी अभी अभी बाहर से आया था। गुप्ता जी , मंगल फूफा और रूपा को साथ देखकर वह भी उनकी तरफ चला आया।
“अरे रूपा बात का हुई जे बताओ”,गुप्ता जी ने पूछा
“कुछो नाही बस मंगल जी अपने और हमाये बीच फुलवारी के नाम की दिवार खड़ी कर रहे है”,रूपा ने कहा
“अब मजदुर जैसे आदमी से पियार करोगी तो दिवार ही खड़ी करेगा”,गुप्ता जी ने बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा

गोलू ने सुना तो मारे ख़ुशी के गुप्ता जी के सामने आकर उनकी तरफ हाई फाइव करके कहा,”वाह पिताजी का डायलॉग मारा है”
गुप्ता जी ठहरे गोलू के बाप उन्होंने हाई फाइव तो दिया लेकिन गोलू के गाल पर और बेचारा गोलू फिरकी की तरह घूमते हुए सोफे पर जा गिरा।  

( क्या लवली करेगा गोलू की मदद और छुपायेगा उसका चकिया वाला कांड ? चकिया वाले कांड के अलावा भी क्या गोलू का कोई और कांड बाहर आना बाकि है ? क्या मंगल रोक पाएंगे रूपा को और बचा पाएंगे इन जल्लादो से अपना प्यार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Shivani Sakure July 18, 2026 - 6:07 am

Ye Shayad golu aur fua ka whatsapp group wala kaand hoga

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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