Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 23

by Story With Sanjana February 16, 2026
written by Story With Sanjana February 16, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 23

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की सेंडिल अपने हाथो में उठाये उसके साथ मॉल चला आया। मॉल में मौजूद लोगो की नजरें पृथ्वी पर थी कोई उसे देखकर हैरान था तो कोई मुस्कुरा रहा था। बहुत कम मर्द ऐसे देखने को मिलते है जो अपनी पसंदीदा औरत के लिए अपनी अकड़ और घमंड साइड में कर उनके सामने नरम बनकर रहना पसंद करते है। पृथ्वी को अवनि के सेंडिल उठाकर चलने में ना कोई शर्म आ रही थी ना ही इसी तरह की झिझक उसके चेहरे पर थी बल्कि वह तो अवनि के लिए ये सब करके खुश हो रहा था।


पृथ्वी अवनि के साथ एक शोरूम में आया। अंदर आकर पृथ्वी ने स्टाफ गर्ल को अवनि के लिए नए सेंडिल दिखाने को कहा
लड़की दोनों को साथ लेकर सोफे की तरफ बढ़ गयी उसने दोनों से बैठने को कहा और जैसे ही अवनि के पैर का साइज पूछा अवनि से पहले पृथ्वी ने कहा,”सेवन”
अवनि ने हैरानी से पृथ्वी को देखा और लड़की मुस्कुरा कर वहा से चली गयी।
“तुम्हे मेरे सेंडिल का साइज कैसे पता ?”,अवनि ने पृथ्वी से पूछा


“उस दिन मंदिर में आपकी सेंडिल का हुक बंद किया था ना तब अंदाजा लगाया”,पृथ्वी ने कहा
“तुम्हे सब याद है ?”,अवनि ने हैरानी से कहा
पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखा और कहा,”यकी तो दिक्कत है मैडम जी कि मुझे सब याद रहता है”
अवनि ने सुना तो बस ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी। कुछ देर बाद ही लड़की अवनि के लिए कुछ जोड़ी सैंडिल्स और बेली ले आयी और अवनि एक एक करके उन्हें पहनकर देखने लगी।

वह हर बार एक नया सेंडिल पहनती और पृथ्वी की तरफ देखती तो पृथ्वी कभी नाक चढ़ाकर तो कभी मुँह बनाकर मना कर देता। पृथ्वी को उनमे से कुछ पसंद नहीं आया तो उसने लड़की से कहा,”क्या मैं खुद देख सकता हूँ ?”
“बिल्कुल सर , आईये”,लड़की ने कहा और पृथ्वी को रेंक की तरफ ले आयी जहा कई सारे फुटवियर लाइन में रखे थे। पृथ्वी को वहा छोड़कर लड़की अवनि की तरफ चली आयी। पृथ्वी ने एक हरे रंग की एक जोड़ी सेंडिल उठायी जिसके हुक पर एक सफ़ेद रंग से डिजाइन बना था। उसके साथ पृथ्वी ने एक सफ़ेद रंग के सेंडिल भी लिए जो कि काफी खुबसुरत थे।


पृथ्वी उन्हें लेकर अवनि की तरफ आया तो लड़की ने कहा,”मैं इन्हे ट्राय करवा देती हूँ”
“शुक्रिया”,कहकर पृथ्वी ने बाँह से हरे रंग वाली सेंडिल को पोछा और अवनि के सामने नीचे बैठकर खुद ही बड़े प्यार से उसे वो सेंडिल पहनाने लगा। पृथ्वी सबके सामने ये कर रहा था और अवनि झिझक रही थी। अवनि ने जैसे ही बगल में खड़ी लड़की को देखा तो वह अवनि की तरफ झुकी और धीरे से कहा,”आप बहुत लकी है मेम”
 अवनि ने अपने सामने नीचे बैठे पृथ्वी को देखा जो कि अवनि को सेंडिल पहनाने में बिजी था।

उसने देखा ऐसा करते हुए पृथ्वी के माथे पर ना कोई शिकन थी ना ही चेहरे पर कोई भाव , उसने लड़की की तरफ देखा और कहा,”हाँ ! आपने सही कहा”
“सर की चॉइस बहुत अच्छी है , ये सैंडिल्स आपके पैरों में बहुत अच्छे लग रहे है,,,,,,,,!!!”,लड़की ने कहा
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”आपको पसंद आये ?”
“अच्छे है,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा


पृथ्वी ने दूसरे सैंडिल्स लड़की को दिए और कहा,”मुझे एक वो चाहिए जो इन्होने पहना है और एक ये और साथ में ये स्लीपर्स भी” कहते हुए उसने बगल के रेंक में रखे स्लीपर्स की तरफ इशारा कर दिया ताकि उन्हें अवनि घर में पहन सके।
लड़की ने दोनों जोड़ी ली और काउंटर की तरफ चली गयी। अवनि उठी और पृथ्वी के पास आकर कहा,”तुमने इतना सब क्यों लिया एक जोड़ी काफी थी , हम पुराने सैंडिल्स को सिल्वा भी सकते है”


पृथ्वी ने सुना और कहा,”मैडम जी ! पुराने सेंडिलस और पुराने ज़ख्म जितना भी सिलो उधड़ ही जाते है तो बेहतर है उन्हें हमेशा के लिए अलविदा कह दिया जाए और वैसे भी मुझे आपके लिए ये सब करके अच्छा लगता है,,,,,,,,!!!”
“थैंक्यू,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“अब ये किसलिए ?”,पृथ्वी ने पूछा


“बस थैंक्यू”,अवनि ने कहा और पृथ्वी के साथ काउंटर की तरफ चली आयी। पृथ्वी ने बिल भरा और बैग लेकर अवनि के साथ बाहर निकल गया। मॉल से बाहर आये तब तक अँधेरा हो चुका था और पृथ्वी को भूख भी लगने लगी। चलते चलते उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”छः ! आप मुंबई में है और मैंने अभी तक आपको वडा-पाव नहीं खिलाया , चलिए खिलाता हूँ”
“तुम्हे भूख लगी है ना ?”,अवनि ने पूछा तो पृथ्वी समझ गया कि उसकी चोरी पकड़ी गयी है और उसने अवनि की तरफ देखकर अपनी आँखे मीची और हामी में  गर्दन हिला दी।


अवनि पृथ्वी के साथ चल पड़ी दोनों ने वहा से एक लोकल ऑटो पकड़ा और पृथ्वी की बताई जगह पर चल पड़े। रात के समय ये शहर और भी खूबसूरत नजर आ रहा था। वह चमकती आँखों से बाहर की चकाचोंध देख रही थी और बगल में बैठा पृथ्वी उसे , उसी नजर कभी अवनि की झपकती बड़ी बड़ी पलकों पर जाती तो कभी हवा से अवनि के उड़ते बालों की लटों पर , अवनि के सुर्ख होंठ और होंठो से कुछ नीचे का वो काला तिल ,,, पृथ्वी अवनि को इतने प्यार से देख रहा था जैसे पहली बार देख रहा हो।


अवनि इस से बेखबर शहर के नजारों को अपनी आँखों में भर रही थी तभी अवनि ने आसमान में फटते अनगिनत रॉकेट को देखा तो ख़ुशी के मारे उसने अपने हाथ से पृथ्वी के हाथ को थपथपाया और अपना हाथ उसके हाथ पर रखकर कहा,”पृथ्वी ! वो देखो,,,,,,सब कितना खूबसूरत लग रहा है ना”
पृथ्वी थोड़ा सा अवनि की तरफ झुका और बाहर देखा तो पाया अवनि आसमान में फटते रंग बिरंगे रॉकेट्स को देखकर बच्चो की तरह खुश हो रही थी।

पृथ्वी ने इस शहर में ये नजारा कई बार देखा था इसलिए उसे इसमें कुछ नया नहीं लगा लेकिन उसके लिए नया था अवनि को इतनी मामूली सी चीज के लिए इस तरह खुश देखना , पृथ्वी अवनि के करीब था इस बात का अहसास अवनि को नहीं था वह तो बस आसमान में नजरे गड़ाए बैठी थी लेकिन पृथ्वी का दिल धड़कने लगा , अवनि से आती परफ्यूम की भीनी भीनी खुशबु , उसके उड़ते बालों की लटों का पृथ्वी के चेहरे को चूमना और उसके हाथ पर अवनि का हाथ ,,

सिर्फ पृथ्वी ही जानता था वह कैसे अपनी सांसे रोक के अवनि के इतना करीब था। अगले ही पल आसमान में और ज्यादा रौशनी हुई और अवनि ने खुश होकर पृथ्वी के हाथ को कसकर पकड़ लिया लेकिन साथ ही अवनि का नाख़ून पृथ्वी के हाथ पर जा लगा और पृथ्वी ने मारे दर्द के अपने होंठो को दबा लिया। अवनि को बताकर वह उसकी ख़ुशी कम नहीं करना चाहता था।

ऑटो वहा से आगे निकल गया तो अवनि पृथ्वी की तरफ पलट गयी पृथ्वी को अपने इतना करीब पाकर अवनि जल्दी से पीछे हटी और जब उसने देखा उसका हाथ भी पृथ्वी के हाथ पर है तो उसने जल्दी से अपना हाथ हटा लिया और दूसरी तरफ देखने लगी। अवनि का ध्यान ही नहीं गया कि उसका नाख़ून पृथ्वी के हाथ पर लगा है जहा से हल्का खून भी निकल आया है।

बेचारा पृथ्वी अवनि से थोड़ा साइड में खिसका और दूसरी तरफ देखकर साँस ली। अवनि को लेकर उसे  चाहे दिन में 100 ख्याल आये लेकिन जब भी वह अवनि के करीब होता था सब भूल जाता था , उसकी धड़कने तेज और साँसे धीमी पड़ जाती थी। पृथ्वी ने खुद को नार्मल किया और अवनि की तरफ देखकर कहा,”आपको फायरवर्क्स इतने पसंद है ?”


अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और हाँ में गर्दन हिला दी। पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”देखा मैंने , आप बच्चो की तरह खुश हो रही थी ,, आज से पहले मैंने आपको इतना खुश कभी नहीं देखा,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”हम सबकी जिंदगी में कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होता है जिसे देखकर हम दिल से खुश होते है , जैसे कुछ लोग नयी नयी जगह घूमकर खुश होते है  

कुछ नए कपडे खरीदकर , कुछ ढेर सारे फूलों को देखकर , कुछ को शामें पसंद होती है , कुछ को स्नो फॉल देखकर ख़ुशी मिलती है ऐसी बहुत सारी चीजे है। तुम्हे सबसे ज्यादा ख़ुशी कब होती है ?”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”जब क्रिकेट खेलता हूँ और जीत जाता हूँ तब मैं सबसे ज्यादा खुश होता हूँ , जब बारिश देखता हूँ तब भी खुश होता हूँ , और जब आई के हाथ का बना,,,,,,,,,,,,,,,,!!”


कहते कहते पृथ्वी रुक गया उसे याद आया कि बीती शाम ही लता ने उसके साथ सब रिश्ते खत्म कर दिए है। उसके चेहरे पर उदासी और दर्द के भाव उभर आये उसने अवनि से नजरे हटाई और ऑटोवाले से कहा,”दादा ! हम पहुँच चुके है साइड में रोक दीजिये”
ऑटो वाले ने ऑटो साइड में रोका तो पृथ्वी और अवनि नीचे उतर गए और किराया देकर आगे बढ़ गए।

पृथ्वी का कहते कहते रुक जाना अवनि बखूबी समझ रही थी लेकिन इस बारे में बार करके वह पृथ्वी के दर्द को बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए पृथ्वी के साथ चलते हुए उसने कहा,”तुम अब क्रिकेट क्यों नहीं खेलते ? तुम्हे जाना चाहिए”
“जब आपसे आखरी बार बात हुई थी उसके बाद से ही मैंने वो हर काम करना छोड़ दिया था जो मुझे ख़ुशी देता था। मेरा कही मन ही नहीं लगता था , ना किसी से बात करने का दिल करता था , ना किसी से मिलने का ,

कभी कभी तो दिल करता था कही भाग जाऊ लेकिन जिम्मेदारियों से भागना भी तो कायरता कहलाता है इसलिए बस हर गुजरते दिन के साथ खुद को तसल्ली देता रहा कि ‘एक दिन सब ठीक हो जायेगा’ ,, वो 14 महीने मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल वक्त था मैडम जी”,कहते कहते पृथ्वी को बिता वक्त याद आया और उसकी आँखों में नमी के साथ गले में चुभन का अहसास भी होने लगा।
अवनि ने देखा तो कहा,”बस अब कुछ मत कहो,,,,,,,!!”


पृथ्वी ने सुना तो अवनि तो अवनि की तरफ देखने लगा
“इस बार तुम्हारी सोसायटी में मैच कब होगा ?”,अवनि ने पूछा
“हर संडे होता है शाम में,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है फिर इस संडे तुम क्रिकेट खेलने जाओगे,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“नहीं ना मैडम जी ! मैंने खेलना छोड़ दिया है अब दिल नहीं करता”,पृथ्वी ने मायूस होकर कहा


“और अगर मैं कहू कि मैं तुम्हे खेलते हुए देखना चाहती हूँ और चाहती हूँ तुम जीतकर आओ , क्या तब भी तुम नहीं खेलोगे ?”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से एकटक अवनि को देखने लगा , पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने मासूमियत से कहा,”प्लीज ना पृथ्वी ! मुझे देखना तुम सच में जीतते भी हो या फिर ऐसे ही तुम मेरे सामने बड़ी बड़ी फेंक रहे थे”
पृथ्वी ने सुना तो प्यार से अवनि को घुरा और कहा,”मैंने आज तक कोई मैच नहीं हारा है मैडम जी , मैं हमेशा जीतता हूँ चाहो तो नकुल से पूछ लेना”


“नकुल से क्यों पूछना तुम खेलो मैं खुद देख लुंगी तुम जीतते हो या फिर हार जाते हो”,अवनि ने पृथ्वी को चिढ़ाते हुए कहा  
अब पृथ्वी के सामने कोई हारने की बात करे और वह ना चिढ़े ऐसा भला कैसे हो सकता था ? वह अवनि के थोड़ा करीब आया और उसकी आँखों में देखकर कहा,”तो फिर इस संडे आप पृथ्वी उपाध्याय को जीतते हुए देखने के लिए तैयार रहना”


“हाह ! देख लेंगे”,अवनि ने अपने बालों को हाथ से झटका और इतरा कर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और पीछे हटकर आगे बढ़ने का इशारा किया। दोनों वहा से आगे बढ़ गए। पृथ्वी ख़ुशी ख़ुशी अवनि के साथ आगे बढ़ रहा था लेकिन अवनि के जहन में चल रहे थे पृथ्वी के कहे शब्द “और जब आई के हाथ का बना,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी अवनि को लेकर फ़ूड स्टाल्स की तरफ ले आया जहा कई फ़ूड स्टॉल्स लगे थे  
पृथ्वी ने अपने और अवनि के लिए दो प्लेट वडा पाव आर्डर किया और दोनों खाली पड़ी बेंच पर आ बैठे। अवनि ख़ामोशी से सामने से गुजरते लोगो को देख रही थी। पृथ्वी अवनि से थोड़ी दूरी बनाकर बैठा था और फिर धीरे से उसकी तरफ खिसक गया।
“आपसे एक बात पुछू ?”,पृथ्वी ने कहा


अवनि की तंद्रा टूटी उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”हम्म्म पूछो”
“आपको मेरे साथ ऐसे रोड साइड बैठकर खाना अजीब नहीं लगता ? मेरा मतलब आप इतनी बड़ी राइटर है , इतने लोग आपको जानते है पसंद करते है। आपको तो किसी अच्छे रेस्टोरेंट या होटल में खाना खाना चाहिए लेकिन आप हर बार मेरे कहने पर ऐसी जगह चली आती है,,,,,,,,,आप चाहे तो मुझे मना भी कर सकती है लेकिन आप नहीं करती”,पृथ्वी ने धीरे से कहा


अवनि मुस्कुराई और कहा,”पृथ्वी ! राइटर मैं बाकि सब के लिए हूँ तुम्हारे लिए नहीं , तुम्हारे लिए मैं सिर्फ अवनि हूँ। मुझे तुम्हारे साथ यहाँ बैठकर खाने में कोई परेशानी नहीं है ,, हम कहा खा रहे है ? क्या खा रहे है ? से ज्यादा अहम् है हम किसके साथ बैठकर खा रहे है,,,,,,,तुम मेरे लिए आम नहीं हो पृथ्वी”
 पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा उठा तब तक लड़का दोनों के लिए वडा पाव ले आया। अवनि ने अपना प्लेट लिया और पृथ्वी ने अपना ,, अवनि ने ध्यान नहीं दिया पाव में रखा वडा गर्म था और अवनि ने जैसे ही खाना चाहा उसका मुँह जल गया उसने वापस रखा और कहा,”गर्म है”


पृथ्वी ने अपना प्लेट साइड में रखा और अवनि से कहा,”दीजिये”
अवनि ने अपना प्लेट पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने उसे उठाया और फूँक मारने लगा। अवनि प्यार से बस उसे देखती रही ऐसा करते हुए पृथ्वी बिल्कुल उसके पापा जैसा लग रहा था वे भी बचपन में अवनि को ऐसे ही तो खाना खिलाया करते थे लेकिन पृथ्वी उसे अपने हाथ से क्यों खिलायेगा ये सोचकर अवनि के होंठो से मुस्कान गायब हो गयी।

पृथ्वी ने देखा अवनि उसकी तरफ ही देख रही है तो उसने एक निवाला तोडा और फूँक मारकर अवनि की तरफ बढ़ा दिया ये देखकर अवनि की आँखों में नमी तैर गयी। एकदम से उसे पृथ्वी की जगह वहा विश्वास जी नजर आये। उसका दिल भर आया और गले में चुभन का अहसास हुआ। पृथ्वी को लगा शायद अवनि उसके हाथ से खाना नहीं चाहती है इसलिए उदास है तो उसने अपना अपना हाथ वापस नीचे कर लिया लेकिन वह निवाला वापस प्लेट में रख पाता इस से पहले अवनि ने दोनों हाथो से उसके हाथ को थाम लिया और आगे बढ़कर खुद उसके हाथ से निवाला खा लिया।

पृथ्वी का मन ख़ुशी से खिल उठा धीरे धीरे ही सही अवनि उसे हक़ दे रही थी। पृथ्वी ने फिर से खिलाना चाहा तो अवनि ने कहा,”तुम खाओ”
“हाह ! मुझे लगा जैसे मैंने आपको खिलाया वैसे आप भी मुझे खिलाएगी,,,,,,,,,,आप इतनी अनरोमांटिक कैसे हो सकती है ?”,पृथ्वी ने मन ही मन कहा और दूसरा निवाला खुद खा लिया
अवनि की प्लेट उसने उसकी तरफ बढ़ा दी और खुद अपनी प्लेट लेकर खाने लगा।

( क्या अवनि के लिए पृथ्वी पूरी तरह बदल देगा खुद को ? क्या अवनि के कहने पर पृथ्वी फिर से शुरू करेगा क्रिकेट खेलना ? कब आएगा वो दिन जब अवनि हाथो से खिलाएगी पृथ्वी को खाना ?  जानने के लिये पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
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1 comment

Kshmata Chauhan February 16, 2026 - 12:17 pm

Dono he (Prithvi-Avni) ek dusre se umeed to krte hai…lakin bol nhi pate… Prithvi hamesha yahi sochta hai ki Avni usse kilayegi ya apni taraf se kuch khass karengi…lakin Prithvi Babu Avni ko bhi tumse pyar hai, bas usse jatane m thodi jijhak hoti hai tumhre samne…lakin Prithvi tumhra pyar itna saaf aur pavitr hai ki Avni
khud hee tumse apne pyar ka izhaar karengi….bas tum abhi usse thoda time do

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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