Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 49

by Story With Sanjana March 24, 2026
written by Story With Sanjana March 24, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 49

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि उसकी आँखों में देखने लगी। सिद्धार्थ के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे लेकिन उसकी आँखों में कुछ तो ऐसा था जो सुरभि के मन को आज बैचैन करने के बजाय एक सुकून पहुंचा रहा था। सुरभि ने सिद्धार्थ से नजरे हटाई और हाथ में पकडे रुमाल से अपने आँसू पोछे और फिर बहती हुई नाक भी उसी रूमाल से पोछकर सिद्धार्थ की तरफ बढ़ा दिया। सिद्धार्थ ने उस रूमाल को चुटकी से पकड़ा और बेंच के किनारे पर रख दिया। उसने पानी का बोतल सुरभि की तरफ बढ़ाया और कहा,”अब तुम्हे ठीक लग रहा है ?”

“हम्म्म थैंक्स,,,,,,,एंड आई ऍम सॉरी”,सुरभि ने पानी पीकर कहा
“सॉरी किसलिए ?”,सिद्धार्थ ने हैरानी से पूछा
“वो मैं तुम्हारी डेट खराब कर दी इसलिए,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने धीरे से कहा
“उसके लिए तो मुझे तुम्हे थैंक्स कहना चाहिए”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ की तरफ देखा और कहा,”थैंक्यू क्यों ?”

“वो काफी बोरिंग डेट थी , उस लड़की को मुझसे ज्यादा खाने में इंट्रेस्ट था ऐसा लग रहा था जैसे मैं अकेले इस डेट पर आया हूँ,,,,,,,,सो तुमने उसे स्पोइल करके ठीक ही किया”,सिद्धार्थ ने सामने देखते हुए एक गहरी साँस लेकर कहा
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ को देखने लगी। जितना बुरा वह सिद्धार्थ को समझती थी उतना बुरा वह था नहीं बस अवनि को परेशान करने की वजह से वह सुरभि की नजरो में बुरा बन चुका था।

सिद्धार्थ को खामोश पाकर सुरभि भी सामने देखने लगी और कहा,”मैंने तुम्हे बहुत परेशान किया उसके आई ऍम सॉरी , वैसे भी मैं यहाँ से जा रही हूँ तो सोचा जाने से पहले तुम्हे सॉरी कह दू”
सुरभि के मुँह से जाने की बात सुनकर ना जाने क्यों सिद्धार्थ को अजीब सा महसूस हुआ उसने गर्दन घुमाकर सुरभि को देखा और कहा,”तुम चली जाओगी ?”

“हाँ ! कहते है हर रिश्ते में एक आखरी कोशिश करके देखनी चाहिए , मैं भी वापस जाकर अनिकेत को समझाने की कोशिश करुँगी,,,,,,,,,क्या पता उसे मेरा प्यार समझ आ जाये,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने उदास होकर कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो सामने देखा और धीरे से बड़बड़ाया,”अह्ह्ह्ह ! तुम में और अवनि में कोई खास फर्क नहीं है,,,,,हर रिश्ते में आखरी कोशिश जरुरी नहीं होती है,,,,,,,,,,!!!”

“तुमने कुछ कहा ?”,सिद्धार्थ को बड़बड़ाते देखकर सुरभि ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं ! गुड लक , अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,आई थिंक मुझे अब चलना चाहिए”,सिद्धार्थ ने उठते हुए कहा
“चलना चाहिए ? हाह ! तुम चाहते तो थोड़ी देर यहाँ और बैठ सकते थे पर लगता है तुम भी मेरा दुःख सुनकर परेशान हो गए हो इसलिए मुझसे दूर भाग जाना चाहते हो,,,,,,,,,,तुम मुझसे घर छोड़ने के लिए भी तो पूछ सकते थे ना , हाह सही कहती है अवनि तुम इतने अच्छे भी नहीं हो,,,,,,,,,!!”,सुरभि के होंठ धीरे से बुदबुदाये और साथ ही उसके चेहरे के हाव-भाव भी बदल गए

“तुमने कुछ कहा ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं ! बाय , तुम भी अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,,आई विश हम दोबारा फिर ना मिले”,सुरभि ने मुस्कुराकर लेकिन आज उसकी मुस्कराहट में हमेशा वाली ख़ुशी या तंज नहीं था
सुरभि के कहे आखरी शब्द ना जाने क्यों सिद्धार्थ को चुभन का अहसास दे गए , वह कुछ देर तक एकटक सुरभि को देखता रहा और फिर वहा से चला गया।

सिद्धार्थ के जाने के बाद भी सुरभि वही बैठी रही और अपनी बिखरी जिंदगी के बारे में सोचने लगी , यहाँ से अब उसे एक कठिन फैसला लेना था और सुरभि वही नहीं ले पा रही थी। सिद्धार्थ अपनी गाड़ी में आ बैठा और वहा से निकल गया। गाड़ी की स्पीड सामान्य थी और सिद्धार्थ स्टेयरिंग पर हाथ टिकाये किसी सोच विचार में उलझा था कि तभी उसकी आँखों के सामने सुरभि से हुयी मुलाकात वाले पल आने लगे , सुरभि का बार बार उस से टकराना , उसका सिद्धार्थ पर चिल्लाना , उसे परेशान करना , उसे सताना , उसके सामने नशे में बात करना , लड़खड़ाना और इन दिनों बात करते करते एकदम से रो देना सब सिद्धार्थ की आँखों के सामने चल रहा था।

सिद्धार्थ ने सुरभि के ख्यालो से खुद को दूर करने के लिए खिड़की से बाहर देखने लगा तभी उसके कानो में गुंजी सुरभि की कही बात
“मैंने तुम्हे बहुत परेशान किया उसके आई ऍम सॉरी , वैसे भी मैं यहाँ से जा रही हूँ तो सोचा जाने से पहले तुम्हे सॉरी कह दू”
सिद्धार्थ ने गाड़ी साइड में रोकी और खुद में ही बड़बड़ाया,”वो जा रही है ये सुनकर मैं क्यों इतना ऑक्वर्ड फील कर रहा हूँ ? हाह ! और मेरा दिल क्यों चाह रहा है उसके जाने से पहले मैं उसे एक बार और देख लू,,,,,,,,,,,,अजीब है यार , वो लड़की मुझे कभी पसंद नहीं थी फिर भी मुझे उसके लिए परवाह हो रही है,,,,,,,,!!!”

सुरभि के बारे में सोचते हुए सिद्धार्थ एक बार फिर उलझ गया। उसने गाड़ी घुमाई और वापस उसी जगह चला आया जहा वह कुछ देर पहले सुरभि के साथ बैठा था। सिद्धार्थ गाडी से नीचे उतरा और बेंच की तरफ आया तो खाली बेंच देखकर उसका मन उदास हो गया। वह उस खाली बेंच पर आ बैठा और ख़ामोशी से अपने बगल वाली खाली जगह को देखने लगा जहा कुछ देर पहले सुरभि बैठी थी।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
दोपहर में सोया पृथ्वी शाम तक सोता रहा , अवनि मंदिर जाने के लिए तैयार थी और पृथ्वी के उठने का इंतजार कर रही थी। जब पृथ्वी नहीं उठा तो अवनि उसके पास आयी और उसका कंधा थपथपा कर कहा,”पृथ्वी ! पृथ्वी उठो शाम हो चुकी है”
पृथ्वी उबासी लेते हुए उठा , उसने अवनि को तैयार देखा तो कहा,”तुम कही जा रही हो क्या ?”
“मैं नहीं हम दोनों जा रहे है,,,,,,,,,चलो उठो और तैयार हो जाओ , तुम मुझे मंदिर लेकर जा रहे हो”,अवनि ने किचन की तरफ जाते हुए कहा

पृथ्वी वही सोफे पर पड़ा पड़ा अंगड़ाई लेता रहा और धीरे से खुद में ही बडबडबाया,”शादी के बाद रोमांस होता है , प्यार होता है लेकिन मैडम जी को तो मंदिर जाना है,,,,,,,,,,अरे अब क्या मांगना है महादेव से मैं मिल तो गया , अब क्या महादेव जी को नीचे बुलाने का इरादा है,,,,,,,!!!”
अवनि ने गैस पर पृथ्वी के लिए चाय चढ़ाई और दरवाजे से बाहर झांककर देखा पृथ्वी अभी भी सोफे पर ही उलटा लेटा था ये देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! तुम्हे इतना भी आलसी नहीं होना चाहिए , चलो उठो”

पृथ्वी उठा और वाशबेसिन के सामने आकर मुँह धोने लगा। उसने मुंह धोया और पोछते हुए किचन की तरफ ही चला आया। अवनि तब तक चाय कप में छान चुकी थी उसने कप पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और कहा,”तुम चाय पी लो तब तक मैं कपडे तह कर देती हूँ,,,,,,,!!!”
“हम्म्म,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कप लेकर कहा और अवनि के पीछे पीछे हॉल में चला आया।

अवनि ने सूखे हुए कपडे बालकनी से उठाये और तह करके अंदर रख दिए। पृथ्वी भी तब तक अपनी चाय खत्म कर चुका था। उसने कपडे बदले और अवनि के साथ फ्लेट से बाहर निकल गया। शाम के 6 बज रहे थे , सोसायटी के बाहर ही बड़ा आलिशान मंदिर था पृथ्वी अवनि के साथ वहा चला आया। दोनों ने दर्शन किये और बाहर आते हुए अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! ये जगह कितनी शांत और सुकूनभरी है , क्या मैं थोड़ी देर के लिए यहाँ बैठ सकती हूँ ?”
“अह्ह्ह हाँ ठीक है थोड़ी देर क्यों आपको जितनी देर बैठना है आप बैठ सकती है , जब तक आप यहाँ है मैं ATM हो आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा

“हम्म्म चलेगा”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
पृथ्वी वहा से चला गया और अवनि वही मंदिर की सीढ़ियों से ऊपर बने चबूतरे के एक किनारे आकर बैठ गयी। शाम का वक्त , ढलता सूरज और उस पर ठंडी हवाएं अवनि के मन को सुकून और दिमाग को शांति एक साथ पहुंचा रहे थे।

सुकून सिर्फ अवनि के मन मे ही नहीं बल्कि चेहरे पर भी दिखाई पड़ रहा था तभी उसके कानो में आवाज पड़ी,”वहिनी ! आज आपने मंदिर आने का मन कैसे बना लिया , आप तो कभी इस मंदिर नहीं आती है ?”
अवनि ने पलटकर देखा नीलम भुआ लता के साथ सामने से चली आ रही थी। लता को वहा देखकर अवनि का दिल धड़क उठा और उसे उस रात वाले पल याद आ गए जब लता ने कितनी नफरत से उसे देखा था। अवनि के चेहरे से सुकून गायब हो गया और उसकी जगह दर्द ने ले ली।

पृथ्वी बाहर गया था और थोड़ी देर में वापस आने वाला था। लता को यहाँ देखकर कही पृथ्वी उस रात की तरह फिर उसे गलत ना समझ ले सोचकर अवनि ने वहा से जाना बेहतर समझा। वह सर झुकाकर जैसे ही लता के बगल से गुजरी लता की नजर अवनि पर पड़ी और उन्होंने कहा,”सुनो,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा , लता ने सामने से उसे आवाज दी ! अवनि लता की तरफ पीठ करके खड़ी थी उसने जब लता की बात का कोई जवाब नहीं दिया तो लता ने कहा,”मैं तुम से ही बात कर रही हूँ,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने एक गहरी साँस ली और लता की तरफ पलटकर कहा,”जी कहिये,,,,,,,,!!!”
लता ने अवनि को देखा , साधारण सलवार सूट , कंधो पर दुपट्टा , गले में मंगलसूत्र , मांग में सिंदूर , ललाट पर छोटी लाल बिंदी , सलीके से बने बाल , हाथो की कलाईयों में चुडिया , अवनि सादगी में बहुत सुन्दर लग रही थी। नीलम ने देखा लता कही खो गयी है तो उसने लता की बांह छूकर धीरे से कहा,”वाहिनि ! बात करो ना”
“अह्ह्ह्ह हा ! इस होली क्या तुम अपने घर जाने वाली हो ?”,लता ने चौंककर अवनि से पूछा

घर का नाम सुनते ही अवनि के चेहरे पर उदासी के भाव तैरने लगे , घर से तो उसे उसी दिन निकाल दिया गया था जब उसने सबके सामने पृथ्वी का हाथ थामा था और उसके बाद आज तक किसी ने उसे फोन तक नहीं किया न ही जानने की कोशिश की कि वह कहा है और किस हाल में है ? अवनि को खामोश देखकर  लता ने कहा,”हमारे यहाँ शादी के बाद पहली होली में लड़किया अपने ससुराल में नहीं रहती है , पृथ्वी ये बात नहीं जानता इसलिए तुम उसे ये याद दिला देना”

अवनि ने सुना तो लता की तरफ देखा , अवनि तो इसी में खुश थी कि आज लता ने उस से बात की और उस पर गुस्सा नहीं किया ना ही उसके लिए नफरत दिखाई।

“जी मैं उन्हें बता दूंगी,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“चले वाहिनि , मंदिर में आरती का समय हो गया है”,नीलम ने कहा तो लता वहा से चली गयी। उन्हें जाते देखकर अवनि मुस्कुरा दी उसकी आँखों में नमी थी उसने मंदिर की तरफ देखा और हाथ जोड़कर कहा,”थैंक्यू महादेव ! आज पृथ्वी की आई ने मुझसे बात की,,,,,,बस वो जल्दी से पृथ्वी को भी माफ़ कर दे,,,,,,,,थैंक्यू महादेव”
“कितना थैंक्यू बोलती हो ना तुम उनको”,अवनि के पीछे खड़े पृथ्वी ने कहा

अवनि चौंककर पलटी और कहा,”तुम कब आये ?”
“जब तुम उन्हें थैंक्यू बोल रही थी , वैसे तुम उनको थैंक्यू क्यों कह रही थी ?”,पृथ्वी ने पूछा क्योकि वह अवनि की पूरी बात नहीं सुन पाया था उसने बस आखरी दो शब्द “थैंक्यू महादेव” सुना था।
“क्योकि उन्होंने मेरी जिंदगी में तुम्हे भेजा इसलिए,,,,,,,,अब चले ?”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा
“हाये ! तो फिर ये थैंक्यू तुम्हे मुझसे कहना चाहिए ना कि उनसे”,पृथ्वी ने अवनि के पीछे पीछे आते हुए कहा

“पृथ्वी हम दोनों एक दूसरे को तब मिले जब हम दोनों एक दूसरे को ढूंढ भी नहीं रहे थे , ये महादेव का ही तो चमत्कार है ना दो ऐसे लोगो का मिल जाना”,अवनि ने चलते चलते पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“हाँ ये तो सच है , मैं बनारस कुछ सवाल लेकर गया था और देखो जवाब में मुझे तुम मिल गयी,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
दोनों वापस सोसायटी के अंदर चले आये और बाते करते हुए फुटपाथ पर चलने लगे। अवनि खामोशी से सुन रही थी क्योकि पृथ्वी ही कुछ ना कुछ बोले जा रहा था।  

अवनि के जहन में लता की कही बात चल रही थी उसने चलते चलते पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! क्या तुम्हारे यहाँ ऐसा कोई रिवाज है कि होली पर लड़की अपने ससुराल में नहीं रह सकती ?”
“अह्ह्ह्ह पता नहीं पर हाँ साक्षी भाभी अपनी पहली होली पर हिमांशु भैया के घर ना रहकर हमारे घर रुकी थी , मैंने जब आई से पूछा तो उन्होंने कहा पहली होली पर लड़किया अपने पति के घर में नहीं रहती है,,,,,,,,पर तुम ये क्यों पूछ रही हो ?”,पृथ्वी ने कहा

“फिर तो मुझे भी नहीं रहना चाहिए ना,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“कोई जरूरत नहीं है,,,,,,,और मैं ये सब में नहीं मानता , हम साथ रहेंगे,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“नहीं पृथ्वी ! रीती-रिवाज ऐसे ही नहीं बनाये जाते , अगर ऐसा कुछ रिवाज है तो जरूर उसका कोई मतलब होगा ना,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“हाँ लेकिन यहाँ मैं आपको अपने घर के अलावा और कहा छोड़ सकता हूँ ? हमारा कोई दूसरा घर भी तो नहीं है”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो चुप हो गयी सही तो कह रहा था पृथ्वी ऐसे कैसे वह अवनि को किसी भी घर में छोड़ सकता था ? वह ख़ामोशी से आगे बढ़ गयी तो पृथ्वी ने कहा,”वैसे होली में अभी बहुत टाइम है और अगर तुम्हे लगता है कि तुम्हे यहाँ नहीं रहना चाहिए तो फिर हम दो दिन के लिए सिरोही चलेंगे सुरभि के पास”
अवनि ने सुना तो ख़ुशी से पृथ्वी की तरफ देखा और पृथ्वी ने मुस्कुरा कर हामी में गर्दन हिला दी।

सनशाइन होटल , वाशी
“वेलकम मिस्टर मौर्या ! आप अकेले आये है आपके मैनेजर अह्ह्ह्ह क्या नाम है उनका,,,,,,,,,,,,,,!!!”,देसाई सर के PA भरत ने अटककर कहा
“पृथ्वी उपाध्याय,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने सधे हुए स्वर में कहा  
“हाँ पृथ्वी ! वो कही दिखाई नहीं दे रहे ?”,भरत ने पूछा
“दरअसल वो कही बिजी है तो उनका आना नहीं हो पाया उन्होंने कहा है वो कल सुबह आकर मिस्टर देसाई से खुद मिल लेंगे और जो कुछ हुआ उसके लिए माफ़ी भी मांग लेंगे,,,,,,,,,!!”,जयदीप ने कहा

“ओह्ह्ह्ह कोई बात नहीं , सर वहा है आईये”,भरत ने जयदीप को अपने साथ ले जाते हुए कहा
जयदीप ने अपने साथ आये अंकित और लीगल टीम मेंबर अविनाश से वही रुकने को कहा और खुद भरत के साथ आगे बढ़ गया।
जयदीप ने आकर देसाई सर से हाथ मिलाया और कहा,”आज की मीटिंग में जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ सर , एक एमर्जेन्सी की वजह से पृथ्वी को मीटिंग छोड़कर जाना पड़ा अदरवाइज ही इज सो प्रोफेशनल,,,,,,,,!!!”

“इट्स ओके मिस्टर मौर्या ! हमारी कम्पनी के रिलेसन आपसे है आपके मैनेजर से नहीं हाँ वो आज की पार्टी में आते तो मेरा उनसे मिलना हो जाता”,देसाई सर ने कहा
“वो कल सुबह आपके ऑफिस आकर आपसे मिल लेंगे सर,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने कहा
“मिस्टर मौर्या ! अपनी बेटी की तरफ से मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ , गुस्से में आकर उसने डील केंसल कर दी ,, आप तो जानते ही है आजकल के जवान बच्चो में पेशेंस थोड़ा कम होता है और वो हर छोटी बात को अपने ईगो पर ले लेते है,,,,,,,,,,,प्राची की तरफ से मैं माफ़ी चाहता हूँ”,देसाई सर ने सहजता से कहा

“सर माफ़ी मांगकर आप मुझे शर्मिंदा कर रहे है , मुझे मिस देसाई से कोई शिकायत नहीं है बस आपसे एक रिक्वेस्ट है”,जयदीप ने कहा
“हाँ कहो ना”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आगे से आपकी कम्पनी की मीटिंग अगर आपके मैनेजर या आप खुद अटेंड करे तो ज्यादा बेहतर होगा”,जयदीप ने गंभीर स्वर में कहा  
“जी बिल्कुल,,,,,,,,,तो एक आज की डील फाइनल करे ?”,मिस्टर देसाई ने कहा और जयदीप को साथ लेकर चले गए

आज की मीटिंग में प्राची तैयार होकर बहुत ही महंगी और खूबसूरत ड्रेस पहनकर आयी थी। आज वह बला की खूबसूरत लग रही थी पार्टी में सबकी नजरे उसी पर थी लेकिन उसकी नजरे किसी और को ढूंढ रही थी। प्राची को पृथ्वी कही दिखाई नहीं दिया तो उसने अपने मैनेजर नीलेश के पास आकर कहा,”क्या पृथ्वी आज की पार्टी में नहीं आया ?”

“नहीं मेम ! जयदीप सर ने बताया कि वह किसी जरुरी काम में बिजी है , कल सुबह ऑफिस आकर आपसे और सर से मिलेगा”,नीलेश ने अपनी ड्रिंक पीते हुए धीरे से कहा
प्राची ने सुना तो मुस्कराहट उसके होंठो से गायब हो गयी और चेहरा मुरझा गया। उसे अब ये पार्टी बेजान लगने लगी। उसने काउंटर पर रखा ड्रिंक उठाया और एक सांस में गटक गयी। प्राची वहा से चली गयी और नीलेश उसे जाते हुए देखता रहा।

देर रात हॉल के सोफे पर बैठा पृथ्वी अपने लेपटॉप में काम कर रहा था और अवनि कमरे में सो रही थी। पृथ्वी नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था और अगली सुबह इसी प्रोजेक्ट को लेकर उसे विक्रम कपूर से मिलना था जो कि बहुत मुश्किल होने वाला था। पृथ्वी इत्मीनान से अपना काम कर ही रहा था कि तभी सामने टेबल पर पड़ा अवनि का फोन बजा। पृथ्वी ने पहली बार इग्नोर किया लेकिन फोन दो तीन बार और बजा तो पृथ्वी ने फोन उठाकर देखा।

सुरभि का मैसेज देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा उसने मैसेज खोलकर देखा तो उसके होंठो से मुस्कुराहट गायब हो गयी। पृथ्वी ने अपना लेपटॉप बंद करके साइड में रखा और अवनि का फोन जेब में डालकर फ्लेट से बाहर निकल गया।

 ( सुरभि के चले जाने की बात सुनकर क्यों उदास हुआ सिद्धार्थ ? क्या नीलम की बातों में आकर लता करने वाली है अवनि को हर्ट ? आखिर सुरभि ने ऐसा क्या भेजा जिसे पढ़कर परेशान हो गया पृथ्वी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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 संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2
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1 comment

Kshmata Chauhan March 24, 2026 - 11:37 am

Surbhi ne Avni ko bta diya hoga ki apni job chod kar Aniket se milegi aur apne rishte ho ek aur moka degi…aur ab Prithvi Jija ji usko Avni ki taraf se gyan denge…but Prithvi kal Vikram Kapoor se sorry bolne ki jagah prachi desai se sorry bol de… Vikram Kapoor bahot ghatiya insaan hai…

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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