Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 57

by Story With Sanjana April 17, 2026
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Pasandida Aurat Season 2 – 57

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

मिस्टर देसाई का सवाल सुनकर पृथ्वी को थोड़ा अजीब लगा आखिर उन्हें ऐसा क्यों लगा कि प्राची उसके साथ होगी ?
“नहीं सर प्राची मेरे साथ नहीं है,,,,,,,,,,,,,सब ठीक है न सर ?”,पृथ्वी ने पूछा
“नहीं कुछ ठीक नहीं है , आज शाम से वह घर नहीं आयी है उसे फोन किया तो उसका फोन भी बंद आ रहा है ,, मुझे टेंशन हो रही है वो किसी बड़ी मुसीबत में ना फंस जाए”,मिस्टर देसाई ने परेशानी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे और हैरानी हुई और उसने कहा,”सर ! मैं आपको थोड़ी देर में वापस कॉल करता हूँ”

“हम्म्म,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा और पृथ्वी ने फोन काटकर तुरंत नीलेश का नंबर डॉयल किया। एक दो रिंग जाने के बाद ही नीलेश ने फोन उठाया और कहा,”हेलो ! हाँ सर”
“नीलेश ! मैंने एक घंटे पहले तुम्हे फोन करके बताया था कि प्राची नशे की हालत में यहाँ साउथ मुंबई में है , तुम अभी तक क्यों नहीं आये ?”,पृथ्वी ने प्राची के मैनेजर नीलेश से कहा
“सर वो मैंने मैडम को फोन किया था लेकिन उन्होंने मुझे आने से मना कर दिया इसलिए मैं,,,,,,,,,!!!”,नीलेश ने कहा

“और इसलिए तुम नहीं आये , वो इस वक्त नशे में है और उसके साथ कोई नहीं है,,,,,,,,,,तुरंत यहाँ पहुँचो”,पृथ्वी ने थोड़ा गुस्से से कहा
“सॉरी सर मैं नहीं आ सकता”,कहकर नीलेश ने फोन काट दिया
पृथ्वी ने सुना तो झुंझला गया और कहा,”क्या मुसीबत है ? ये लड़की पागल वागल है क्या ?”
पृथ्वी ने एक बार फिर मिस्टर देसाई को फोन लगाया और उन्होंने एक ही रिंग में फोन उठाकर कहा,”हाँ पृथ्वी ! प्राची मिली तुम्हे ?”

“अह्ह्ह्ह नहीं सर लेकिन मैंने एक घंटे पहले उसे यहाँ साउथ मुंबई में देखा था , वो काफी नशे में थी। एक काम कीजिये आप यहाँ आ जाईये”,पृथ्वी ने कहा
“क्या साउथ मुंबई में ? लेकिन उसने तो मुझसे कहा कि वह ऑफिस में है,,,,,,,,,,,खैर ! पृथ्वी क्या तुम मेरी एक मदद करोगे प्लीज”,मिस्टर देसाई ने कहा
“जी सर कहिये”,पृथ्वी ने कहा

“मैं इस वक्त साउथ मुंबई से बहुत दूर हूँ इन्फेक्ट मैं शहर से बाहर हूँ , घर पहुंचते पहुंचते मुझे 2 घंटे लग जायेंगे , If you don’t mind क्या तुम प्राची को घर छोड़ सकते हो प्लीज”,मिस्टर देसाई ने कहा
“सर मैं कैसे ?”,पृथ्वी ने मना करना चाहा लेकिन वह आगे कुछ कहता इस से पहले मिस्टर देसाई ने कहा,”प्लीज ना मत कहना ! इस वक्त मेरी मज़बूरी समझो प्लीज , मैं तुम्हे घर की लोकेशन भेजता हूँ प्लीज”,मिस्टर देसाई ने कहा

पृथ्वी चाहकर भी ना नहीं कह पाया और हामी भरकर फोन काट दिया। कुछ देर बाद ही उसे मिस्टर देसाई का मैसेज मिला जिसमे घर की लोकेशन थी।

पृथ्वी फोन हाथ में थामे लोकेशन देख रहा था तभी सुरभि ने कहा,”ए पृथ्वी ! यहाँ आओ ना सबकी साथ में एक फोटो लेते है”
पृथ्वी की तन्द्रा टूटी वह सुरभि और अवनि की तरफ चला आया। पृथ्वी पहले सुरभि की तरफ खड़ा हुआ लेकिन जब उसने देखा अवनि दूसरी तरफ खड़ी है तो उसने अवनि की तरफ आते हुए कहा,”उस तरफ लाइट अच्छा नहीं है”

“हां हां सब समझ रही हूँ मैं कछुआराम”,सुरभि मुस्कुराते हुए धीरे से बड़बड़ाई    
पृथ्वी अवनि के बगल में आ खड़ा हुआ , सुरभि ने तीनो की साथ में कुछ फोटोज क्लिक किये और फिर दोनों से दूर हटकर कहा,”चलो तुम दोनों का साथ में एक फोटो लेती हूँ”
पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन बहुत खुश हुआ क्योकि अवनि से मिलने के बाद पहली बार वह अवनि के साथ फोटो खिचवाने जा रहा था। अवनि पृथ्वी के बगल में आ खड़ी हुई। अवनि पृथ्वी के कंधे तक ही आ रही थी लेकिन दोनों साथ में बहुत प्यारे लग रहे थे।

“अरे दूर दूर क्या खड़े हो थोड़ा पास आओ ना”,सुरभि ने कहा
अवनि और पृथ्वी थोड़ा पास पास खड़े हो गए , सुरभि ने उनकी बहुत ही प्यारी सी फोटो क्लिक की और दिखाने के लिए उनके पास चली आयी। पृथ्वी ने फोटो को देखा और मुस्कुरा दिया। अवनि ने देखा दोनों साथ में अच्छे लग रहे है तो वह भी सुरभि की तरफ देखकर मुस्कुरा दी।  

पृथ्वी ने कैब बुक की और तीनो सड़क की तरफ बढ़ गए। चलते चलते पृथ्वी की नजर सड़क किनारे बेंच पर बैठी प्राची पर पड़ी तो उसे मिस्टर देसाई की बात याद आयी। वह अवनि और सुरभि से वही रुकने को कहकर प्राची की तरफ आया और कहा,”मेम ! आप अभी तक घर नहीं गयी और आपने नीलेश को यहाँ आने से मना  क्यों कर दिया ?”

प्राची के कानों में पृथ्वी की आवाज पड़ी तो उसने सर उठाकर देखा और कहा,”नीलेश मेरा क्या लगता है जो मैं उसे यहाँ आने को कहू ? लेकिन तुम , तुम लगते हो पर तुम्हे मेरी परवाह नहीं है”
पृथ्वी ने सुना तो अपना सर पीट लिया , आज ही ऑफिस में उसने प्राची को ये अहसास दिलाया था कि वह शादीशुदा है और अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है और फिर भी प्राची ये सब बातें कर रही थी। पृथ्वी को प्राची के साथ खड़े देखकर अवनि और सुरभि भी बेंच की ररफ चली आयी

अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ! आई नो तुम फिर गुस्सा करोगे पर प्लीज क्या तुम इन्हे घर छोड़कर आ सकते हो ?? देखो रात बहुत हो गयी है और इस वक्त इनका यहाँ ऐसे हालत में अकेले रहना ठीक नहीं है,,,,,,,,,,प्लीज पृथ्वी”
पृथ्वी ने सुना तो चुपचाप अवनि को देखने लगा , एक तरफ मिस्टर देसाई ने उसे प्राची को घर लाने को कहा और दूसरी तरफ अवनि भी उसे यही करने को कह रही थी। प्राची इस हाल में बिल्कुल नहीं थी कि उसे अकेले घर भेजा जाये ना ही इस हालत में थी कि अकेले यहाँ छोड़ा जाए।

“पृथ्वी ! अवनि सही कह रही है तुम इन्हे लेकर जाओ हम दोनों कैब से घर चले जायेंगे”,इस बार सुरभि ने कहा
पृथ्वी को अवनि की बात माननी पड़ी , कुछ देर बाद उसकी बुक की हुई कैब आ पहुंची पृथ्वी ने अवनि और सुरभि से कैब में बैठने को कहा और फिर अवनि की तरफ आकर कहा,”ध्यान से जाना और पहुंचकर मुझे फोन करना , मैं जल्दी आ जाऊंगा”

“अपना ख्याल रखना”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा और अगले ही पल उसे चुभन का अहसास हुआ , उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह पृथ्वी को खुद से दूर कर रही हो। कैब वहा से चली गयी।

पृथ्वी प्राची के सामने आया और कहा,”चलिए मैं आपको घर छोड़ देता हूँ , आपकी गाड़ी कहा है ?”
“पार्किंग में है”,प्राची ने उन्मांद भरे स्वर में कहा
“ठीक है , चाबी दीजिये मैं लेकर आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
प्राची ने अपना क्लच पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने उसमे से चाबी निकाली और प्राची से वही रुकने का कहकर खुद पार्किंग में चला आया।

उसने प्राची की गाड़ी ढूंढी और लेकर प्राची के सामने लाकर रोक दी। प्राची उठी और गाड़ी का दरवाजा खोलकर पृथ्वी के बगल में आ बैठी। पृथ्वी ने गाड़ी आगे बढ़ा दी और वहा से निकल गया। जिस तरफ अवनि की कैब गयी थी पृथ्वी की गाड़ी उस से उलटी दिशा में दौड़ पड़ी

“ओह्ह्ह्ह तो ये बात है , इसलिए तुम मेरे सामने इतना ऐटिटूड दिखा रही थी ,, हाह पर क्या फायदा तुम जिस के साथ घूम रही हो वो तो पहले से शादीशुदा है”,अपनी गाडी के पास खड़े विक्रम ने प्राची को पृथ्वी के साथ जाते देखकर कहा और फिर अपनी गाड़ी स्टार्ट कर वहा से चला गया।

पृथ्वी ख़ामोशी से गाड़ी चला रहा था वह जल्द से जल्द प्राची को उसके घर छोड़कर वापस अवनि के पास जाना चाहता था। जब कैब में बैठी अवनि ने पृथ्वी से अपना ख्याल रखने को कहा तो उस वक्त अवनि की आँखों में उभरी बेचैनी को पृथ्वी देख पा रहा था और अब वही आँखे और उन आँखों की बेचैनी बार बार उसके जहन में आ रही थी।

पृथ्वी को खामोश देखकर प्राची ने कहा,”तुम कितने रूड हो पृथ्वी ! तुमने मेरे लिए गाड़ी का दरवाजा तक नहीं खोला”
पृथ्वी ने सुना तो सामने देखते हुए कहा,”गाडी का दरवाजा आदमी या तो तब खोलता है जब किसी का गुलाम हो या फिर तब जब उस गाड़ी में बैठने वाला उसका कोई अपना हो,,,,,,,,और ना तो मैं आपका गुलाम हूँ और ना ही आप मेरी अपनी”

प्राची ने सुना तो अपना हाथ अपने सीने पर रखा और कहा,”उफ्फ्फ्फ़ ! बस तुम्हारी यही बाते तो मुझे तुम्हारी और करीब ले आती है , किस्मत भी हमे बार बार  एक दूसरे के सामने ले आती है,,,,,,,,अब मैं इसे इत्तेफाक कहू या किस्मत का कोई खूबसूरत खेल”
“ये बस आपके मन का वहम है और जितनी जल्दी आप इस वहम से बाहर निकल जाए आपके लिए उतना ही अच्छा है”,पृथ्वी ने इस बार भी सामने देखते हुए कहा

प्राची पर पृथ्वी की बातो का कोई असर नहीं पड़ा उसने कहा,”ओह्ह्ह कम ऑन पृथ्वी मान भी लो कि तुम्हे भी मुझमे दिलचस्पी है वरना आधी रात में तुम इस तरह मुझे घर छोड़ने नहीं जाते,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो गाडी की स्पीड कम की और प्राची की तरफ देखकर कठोरता से लेकिन धीमे स्वर में कहा,”मैं आप जैसी औरतो में दिलचस्पी नहीं रखता , मैं आपको घर सिर्फ इसलिए छोड़ने जा रहा हूँ क्योकि मैं अपनी वाइफ से बहुत प्यार करता हूँ और मैं उसका कहा नहीं टाल सकता,,,,,,,,,,,,,!!!!”

प्राची ने सुना तो उसकी ख़ुशी मायूसी और तकलीफ में बदल गयी और फिर उसने पृथ्वी को ठेस पहुंचाने के लिए अपना सर पीछे सीट से लगाया और अपने हाथो को बांधकर कहा,”हाह ! फिर तो तुम्हारी वाइफ बहुत ही बेवकूफ औरत है जिसने अपने पति को आधी रात में एक परायी औरत के साथ भेज दिया”

पृथ्वी ने अवनि के लिए बेवकूफ शब्द सुना तो उसे गुस्सा आया उसने ब्रेक मारा और प्राची की तरफ पलटकर कहा,”इनफ इज इनफ ! मेरी वाइफ के बारे में एक भी गलत शब्द बोला तो मुँह तोड़ दूंगा तुम्हारा समझी,,,,तुम्हारे बाप ने तुम्हे ऐशो आराम की जिंदगी दी है इसका मतलब ये नहीं है कि तुम इसका गलत फायदा उठाओ , अपने पैसे और स्टेटस का रौब मेरे सामने मत दिखाना तुम सब खरीद सकती हो लेकिन ‘पृथ्वी उपाध्याय’ को नहीं,,,,,,!!!”
पृथ्वी को गुस्से में देखकर प्राची समझ गयी कि उसने कुछ ज्यादा ही गलत बोल दिया है इसलिए वह चुपचाप बाहर देखने लगी।

पृथ्वी ने गाड़ी का दरवाजा खोला बाहर निकला दो चार लम्बी सांसे ली और खुद को नार्मल करके वापस गाड़ी में आ बैठा। उसने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी। इस बार स्पीड पहले से ज्यादा थी,,,,,,,,,,,,,,!!!”

कैब में बैठी अवनि ख़ामोशी से खिड़की के बाहर देख रही थी। सुरभि ने देखा तो अवनि के हाथ पर अपना हाथ रहा और कहा,”क्या सोच रही हो ?”
अवनि की तंद्रा टूटी उसने सुरभि की तरफ देखा और ना में गार्डन हिलाकर कहा,”कुछ नहीं,,,,,,,,,,,,,!!!”
“अवनि ! बुरा ना मानों तो एक बात कहूँ”,सुरभि ने गंभीरता से कहा  
“हम्म्म,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा

“तुम्हे पृथ्वी को उस लड़की के साथ नहीं भेजना चाहिए था , पता नहीं क्यों पर उस लड़की से मुझे अच्छी वाइब नहीं आ रही और जहा तक मैं पृथ्वी को जानती हूँ उसे भी उसके साथ जाना पसंद नहीं आ रहा था , वो बस तुम्हारी ख़ुशी के लिए गया है”,सुरभि ने कहा

अवनि ने सुना तो उसके मन में एक टीस उठी जैसे उसे ये बात पहले से पता हो कि पृथ्वी उसकी ख़ुशी के लिए प्राची को छोड़ने गया था। उसने अपना दूसरा हाथ सुरभि के हाथ पर रखा और कहा,”मुझे पता है सुरभि कि पृथ्वी मेरे लिए गया है और मुझे उस पर पूरा विश्वास है बस पता नहीं क्यों उसे भेजने के बाद थोड़ा अजीब लग रहा है , ऐसा लग रहा है जैसे मैंने उसे खुद से दूर कर दिया हो”

सुरभि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”ऐसा इसलिए लग रहा है बुद्धू क्योकि तुम उस से प्यार करने लगी हो”
“ऐसा कुछ नहीं है”,अवनि ने सुरभि से नजरे चुराकर कहा
“ऐसा ही है , तुम पृथ्वी से छुपा सकती हो लेकिन मुझसे नहीं समझी,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा तो अवनि ने अपनी गर्दन झटक दी
सुरभि एक बार फिर गंभीर होकर बोली,”बस उस लड़की से पृथ्वी को दूर रखना मुझे उसके लक्षण कुछ ठीक नहीं लग रहे है”
“हम्म्म,,,,,,,,!!!”,अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी।

रास्तेभर पृथ्वी ने प्राची से कोई बात नहीं की और पृथ्वी को गुस्से में देखकर प्राची में भी हिम्मत नहीं हुई उसे कुछ कहने की , धीरे धीरे शराब का असर भी कम होने लगा। घर से एक किलोमीटर पर आकर गाड़ी अचानक से बंद हो गयी। पृथ्वी ने स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। पृथ्वी गाड़ी से बाहर निकला और बोनट खोलकर देखा तो पाया कि इंजन गर्म होने से गाड़ी बंद पड़ चुकी है। पृथ्वी ने बोनट बंद किया
प्राची गाड़ी से नीचे उतरी और कहा,”क्या हुआ ?” “इंजन गर्म होने से गाड़ी बंद पड़ चुकी है , तुम्हारा घर यहाँ से एक किलोमीटर दूर है तुम घर से किसी को बुला लो”,पृथ्वी ने कहा

“घर पर कोई नहीं है , पापा शहर से बाहर गए है और ड्राइवर भी उनके साथ है,,,,,,,,,,,,मैं यहाँ से पैदल चली जाउंगी तुम घर जा सकते हो , गाड़ी लॉक करके यही छोड़ दो सुबह ड्राइवर ले जायेगा”,प्राची ने बिना किसी भाव के कहा
 पृथ्वी ने देखा वह एक सुनसान इलाका था और गाड़ी वहा से ना के बराबर गुजर रही थी ऐसे में वह प्राची को अकेले छोड़कर कैसे जा सकता था ?
“चलो मैं तुम्हे छोड़ देता हूँ”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के कहा और प्राची से कुछ दूरी बनाकर उसके साथ चलने लगा।

दोनों पैदल ही चल पड़े , आधी दूर चले होंगे कि तेज गड़गड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गयी। मुंबई में अचानक यू बारिश का होना आम बात थी उस पर बारिश इतनी तेज थी दोनों बुरी तरह भीग गयी। पृथ्वी ने देखा भीगने की वजह से प्राची के कपडे उसके शरीर से चिपक गए है और वह ठण्ड की वजह से सिमटकर भी चल रही थी। पृथ्वी ने अपना जैकेट निकाला और प्राची की तरफ बढाकर कहा,”इसे पहन लो”
प्राची ने पृथ्वी के हाथ से जैकेट लिया और पहनकर चलने लगी ,

बारिश में भीगते पृथ्वी की निगाहे सामने थी और उसके बगल में चलती प्राची उतने ही प्यार से उसे देख रही थी। पृथ्वी का चेहरा उसकी आँखों से उसके दिल में उतरते जा रहा था 

 बारिश भी धीमी पड़ चुकी थी लेकिन तब तक दोनों मिस्टर देसाई के घर पहुंच चुके थे। मिस्टर  आये नहीं थे घर में बस एक नौकर था जो सालों से यहाँ काम करता था। प्राची को घर छोड़कर पृथ्वी जैसे ही जाने लगा प्राची ने कहा,”जब तक डेड नहीं आते क्यों ना तुम यही रुक जाओ , उनसे मिलकर चले जाना वैसे भी बाहर बारिश हो रही है तुम कैसे जाओगे ?”

पृथ्वी दुविधा में फंस गया बारिश फिर तेज हो चुकी थी और उसके पास कोई गाड़ी भी नहीं थी उसने रुककर मिस्टर देसाई का इंतजार करना ही ठीक समझा। घर के अंदर ना जाकर वह बाहर बरामदे में ही रुक गया ये देखकर प्राची ने कहा,”तुम अंदर नहीं आओगे ?”
“नहीं मैं यही ठीक हूँ”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोरता से कहा
“अह्ह्ह तुम कुछ लोगे चाय कॉफी जूस ?”,प्राची ने फिर पूछा
“मेरा कोट”,पृथ्वी ने सधे हुए स्वर में कहा
“हहहहहह ?”,प्राची को समझ नहीं आया

“मुझे मेरा कोट वापस चाहिए”,पृथ्वी ने उसी कठोरता से कहा
प्राची ने सुना तो उसका खून ही जल गया एक तो पृथ्वी उसके घर तक आया था ऊपर से अंदर ना आकर वह उस से अपना जैकेट वापस मांग रहा था। प्राची ने उसे उतारा और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने उसे झटका और कुर्सी पर डालकर अपना फोन निकाल लिया और अवनि का नंबर डॉयल कर फोन कान से लगा लिया।
शराब पीने और बारिश में भीगने की वजह से प्राची का सर अब दर्द करने लगा था और उसे हलकी हलकी थकान भी महसूस हो रही थी इसलिए वह वहा से चली गयी

कुछ देर रिंग जाने के बाद अवनि ने फोन उठा लिया और कहा,”हेलो’
“हेलो अवनि ! घर पहुंचे तुम लोग ?”,पृथ्वी ने चिंतित स्वर में पूछा
“हाँ बस कुछ देर पहले ही पहुंचे है , तुमने उन्हें घर छोड़ दिया ना ?”,अवनि ने पूछा
“हाँ ! मैं देसाई सर के घर पर ही हूँ , एक्चुली सर बाहर है उन्हें आने में 15-20 मिनिट लग जायेंगे तो सोचा उनसे मिलकर ही आता हूँ। यहाँ बहुत तेज बारिश भी हो रही है निकल नहीं पाउँगा,,,,,,,,,,तुम अपना और सुरभि का ख्याल रखना”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने जब सुना कि पृथ्वी को आने में अभी वक्त लगेगा तो उसका मन उदास हो गया और उसने धीरे से कहा,”हम्म ! ठीक है ध्यान से आना”
पृथ्वी अवनि की उदासी भाँप गया और कहा,”अवनि,,,,,,,,,,,,,!!!”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“मैं कही भी रहू तुम्हारा ही रहूंगा”,पृथ्वी ने कहा।
सहसा ही अवनि की आँखों में नमी उभर आयी फ़ोन के उस पार खड़ा शख्स कितनी आसानी से उसके मन के डर को भाँप गया।

 (  प्राची ने नीलेश को आने से मना क्यों किया ? क्या अवनि को हो रहा है अहसास पृथ्वी के प्यार का ? पृथ्वी का मिस्टर देसाई के घर रुकना कही डाल ना दे उसे किसी मुसीबत में ?  जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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 संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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