Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 87

by Story With Sanjana June 5, 2026
written by Story With Sanjana June 5, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat Season 2 – 87

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

उदास होकर पृथ्वी कमरे में चला आया। अवनि ने पूजा की प्लेट मंदिर में रखी और पृथ्वी के पीछे कमरे में चली आयी। पृथ्वी सर झुकाकर बिस्तर पर बैठा था उसके जहन में क्या चल रहा था ये तो सिर्फ वही जानता था। अवनि आकर पृथ्वी के सामने खड़ी हो गयी। पृथ्वी को अवनि के आने का अहसास था लेकिन वह फिर भी सर झुकाये बैठा रहा। अवनि ने पृथ्वी को उदास देखकर कहा,”पृथ्वी ! क्या हुआ है आपको ?”

पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा बस अपनी बाँहो को अवनि की कमर से लपेटा और अपना गाल उसके पेट से लगा लिया। ये देखकर अवनि को महसूस हुआ जैसे कोई बात पृथ्वी को अंदर ही अंदर खाये जा रही है। अवनि का एक हाथ पृथ्वी के कंधे पर था और दूसरे हाथ की उंगलिया वह पृथ्वी के बालों में घुमाने लगी। वह बस ख़ामोशी से पृथ्वी के पास खड़ी रही।
“मुझे माफ़ कर दो अवनि,,,,,,,,,,!!!”,अवनि के पेट से गाल लगाए पृथ्वी ने आँखे मूंदे हुए अवनि से कहा
“किस बात की माफ़ी पृथ्वी ?”,पृथ्वी के बालों में अपनी उंगलिया घुमाते हुए अवनि ने कहा

“मेरी वजह से तुम्हे इतना सब सुनना और सहना पड़ा , मुझे अकेले तुम्हे वहा भेजना ही नहीं चाहिए था। मेरे अपनों ने तुम्हारा दिल दुखाया , तुम्हारे मन को ठेस पहुंचाई इन सबके लिए मैं जिम्मेदार हूँ अवनि,,,,,,,,,,मेरा तुम्हारे लिए प्यार जाहिर करना ही तुम्हारा दिल दुखाने की वजह बन गया। जब भी इस बारे में सोचता हूँ तो सच में मुझे बहुत तकलीफ होती है ,बुरा लगता है कि मैंने तुम्हे रोका क्यों नहीं ? क्यों वहा जाने दिया ?”,पृथ्वी ने उदासी भरे स्वर में कहा

अवनि ने सुना तो उसे पृथ्वी का दर्द समझ आया और उसकी आँखों में नमी उभर आयी। उसने पृथ्वी के चेहरे को अपने नाजुक हाथो में थामा और कहा,”मेरी तरफ देखिये”
पृथ्वी की आँखों में भी नमी थी और उसकी पलकें झुकी हुई थी। अवनि के कहने पर उसने पलकें उठायी और अवनि को देखा तो अवनि ने कहा,”जो कुछ हुआ उसमे आपकी कोई गलती नहीं है , ये सब सोचकर खुद को परेशान करना बंद कीजिये। पृथ्वी ! मुझे अपनाने और मेरा साथ निभाने के लिए आपने जो सहा है उसके सामने तो ये सब कुछ भी नहीं था

मेरे लिए आप अपने परिवार से दूर है ,अपने घर से दूर है , हर किसी का गुस्सा सहा है आपने , अपनों की नफरत तक झेली है और मैंने आपके लिए क्या किया ? कुछ भी नहीं ,  आपके घर जाकर सबके साथ रहने का फैसला मेरा था ना पृथ्वी फिर आप गलत कैसे हुए ? मुझे उन सबसे कोई शिकायत नहीं है पृथ्वी और ना कभी होगी और मुझे पूरा यकीन है जो हुआ उसका उन्हें भी दुःख है। बच्चे जब गलती करे तो उन्हें डाँटकर या मारकर अहसास दिला दिया जाता है लेकिन बड़े जब गलती करते है तो उन्हें समझने में थोड़ा वक्त लगता है।

उन्हें भी समझ आएगा कि आप गलत नहीं थे , आपका मुझसे शादी करने का फैसला गलत नहीं था , आपका उनके खिलाफ जाकर अपने लिए ख़ुशी चुनना गलत नहीं था,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि की बातें सुनता रहा और उसके बाद अवनि ने जो किया वो तो पृथ्वी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। पृथ्वी के चेहरे को अपने हाथो में थामे अवनि ने अपने होंठो से पृथ्वी के ललाट को छुआ और कहा,”मुझे आप पर गर्व है पृथ्वी और हमेशा रहेगा,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि के होंठो की छुअन पृथ्वी के मन तक को छू गयी। उसने अपनी आँखे मूँद ली तो अवनि उस से दूर हटी और कहा,”और वैसे भी आप मुझसे दो साल छोटे है तो मुझे अब आपको डाँटकर ही समझाना पड़ेगा”
पृथ्वी ने सुना तो अपनी आँखे खोली और अवनि की तरफ देखकर कहा,”ए ! मैं तुमसे बड़ा हूँ”
“सिर्फ हाईट में , इसीलिए कभी कभी आपकी बातें मेरे सर के ऊपर से चली जाती है”,अवनि ने प्यारा सा चेहरा बनाकर कहा

पृथ्वी ने सुना तो हंस पड़ा। पृथ्वी को हँसते देखकर अवनि ने कहा,”हँसते हुए कितने प्यारे लगते है आप लेकिन फिर भी उदास होने की कोई न कोई वजह ढूंढ लेंगे,,,,,,,,,,मुझे लगता था सिर्फ मैं ओवरथिंकिंग करती हूँ लेकिन आप तो मुझसे भी चार कदम आगे है,,,,,,,,,,चलिए अब उठिये और नहा लीजिये मैं आपके लिए खाना लगाती हूँ”
कहकर अवनि दरवाजे की तरफ बढ़ गयी पृथ्वी उठा और अवनि को जाते देखकर कहा,”अवनि”
“हम्म्म्म”,अवनि ने पलटकर कहा

“थैंक्यू,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
“मेंशन नॉट”,अवनि ने भी बड़े प्यार से कहा और वहा से चली गयी। पृथ्वी ने अपनी आँख के किनारे साफ किये और बिस्तर पर रखे कपडे लेकर नहाने चला गया।

रवि जी का घर ,पनवेल
“आई आज खाने में क्या बना है ?”,बाहर से आये लक्षित ने वाशबेसिन के सामने आकर हाथ धोते हुए कहा
“टिंडे,,,,,,,,,,,!!”,लता ने किचन में खाना बनाते हुए कहा
टिंडे का नाम सुनकर ही लक्षित का मुँह बन गया और उसने अपने हाथ धोकर तौलिए से पोछते हुए कहा,”अह्ह्ह आई आज शाम से ही मेरे पेट में दर्द है तो मैं तो खाना नहीं खा पाऊंगा,,,,,,,!!!”
“अरे ये क्या बात हुई ? ए रुक ! कहा जा रहा है ? अरे अगर दर्द है तो इधर आ मैं दवा देती हूँ,,,,,,,,,,,,,,,लकी ,लकी”,लता किचन से आवाज देते ही रह गयी और लक्षित चला गया

आनंद निलय अपार्टमेंट ,पनवेल
पृथ्वी नहाकर आ चुका था। अवनि ने उसे लिए खाना लगाया। कढ़ी तो पृथ्वी को पसंद थी लेकिन साथ में कुछ नया देखकर वह खुश हो गया और कहा,”ये तुमने मेरे लिए बनाया है ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,,,रुकिए मैं परोस देती हूँ”,कहकर अवनि ने खाली प्लेट पृथ्वी के सामने रखी और उसके लिए खाना परोसने लगी। अवनि ने खाना परोसा तो पृथ्वी ने कहा,”अवनि तुम भी बैठो ना साथ में खाते है,,,,,,,,,,,,!!!”

“आप शुरू कीजिये मैं आती हूँ”,अवनि ने कहा क्योकि वह पृथ्वी को गर्म गर्म खाना खिलाना चाहती थी इसलिए उसके साथ ना बैठकर खुद किचन की तरफ जाने लगी तभी डोरबेल बजी।
पृथ्वी ने उठना चाहा तो अवनि ने कहा,”आप बैठिये ! मैं देखती हूँ”
अवनि ने आकर दरवाजा खोला सामने लक्षित खड़ा था अवनि उस से कुछ पूछ पाती इस से पहले लक्षित ने कहा,”वहिनी खाने में क्या बना है ? मुझे बहुत तेज भूख लगी है,,,,,,,,,,,!!”

“आप बाहर क्यों खड़े है अंदर आईये ना ,मैं आपके लिए खाना लगाती हूँ”,अवनि ने प्यार से कहा तो लक्षित ख़ुशी ख़ुशी अंदर चला आया और कहा,”पता है आज आई ने टिंडे बनाये है और वो मुझे बिल्कुल नहीं खाने,,,,,,,,!!”
“कोई बात नहीं आप बैठिये मैं अभी आयी”,कहकर अवनि किचन की तरफ चली गयी।
लक्षित पृथ्वी के बगल में सोफे पर आ बैठा ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

“आई ने आज टिंडे बनाये है”,लक्षित ने मुँह बनाकर कहा
“तो ? घर में जो बने वो खाना चाहिए”,पृथ्वी ने कहा
“अच्छा और ये बात कौन कह रहा है ?”,लक्षित ने मुँह बनाकर कहा
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले अवनि लक्षित के लिए खाने की प्लेट ले आयी। लक्षित में इतना सब्र कहा था वह उठा और अवनि के हाथ से प्लेट लेकर कहा,”थैंक्यू वहिनी”

पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने इशारो इशारो में पृथ्वी को समझाया कि कोई बात नहीं चलता है। अवनि ने देखा पृथ्वी की प्लेट में चपाती नहीं है तो वह लेने चली गयी। अवनि के हाथो से बना खाना लक्षित ने पहले भी खाया था इसलिए खुश होकर अब भी पुरे दिल से खा रहा था। पृथ्वी ने उसे इतने चाव से खाते देखकर कहा,”मेरी बायको अच्छा खाना बनाती है न ?”
“बहुत अच्छा एक नंबर,,,,,,,,,उनको पूछो ना उनकी कोई छोटी बहन है क्या ? उनके जितनी सुन्दर ना भी हो तो चलेगा बस खाना अच्छा बनाए”,लक्षित ने खाते हुए कहा

पृथ्वी ने सुना तो दूसरे हाथ से लक्षित के सर पर एक चपत लगाकर कहा,”बकवास कम करो थोड़ी”
सर पर मारने की वजह से खाना लक्षित के गले में उलझ गया और वह खाँसने लगा अवनि ने पृथ्वी को चपत लगाते देख लिया था इसलिए जल्दी से लक्षित की तरफ आयी और पानी का गिलास उसकी तरफ बढाकर उसकी पीठ सहलाते हुए पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! खाना खाते वक्त ऐसे मजाक नहीं करना चाहिए”
लक्षित ने पानी पीया अवनि ने उसका गाल छूकर कहा,”आप ठीक है न ?”

“हम्म्म”,लक्षित ने मुस्कुराकर हामी में गर्दन हिलायी। अवनि का माँ की तरह परवाह करना उसे अच्छा जो लग रहा था। अवनि ने लक्षित से आराम से खाने को कहा और जैसे ही पृथ्वी की तरफ आयी डोरबेल फिर बजी। पृथ्वी ने दरवाजे की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”मैं देखती हूँ”
अवनि ने जाकर दरवाजा खोला लेकिन इस बार हैरान रह गयी क्योकि सामने रवि जी खड़े थे।

रवि जी को सामने देखकर अवनि ने अपना दुपट्टा जल्दी से सर पर लिया तो रवि जी ने कहा,”मैं अंदर आ जाऊ ?”
“जी आईये न”,अवनि ने साइड होकर कहा
रवि जी अंदर चले आये। रवि जी को देखकर पृथ्वी हैरान हुआ क्योकि उसकी और अवनि की शादी के बाद रवि जी पहली बार यहाँ जो आये थे। रवि जी ने एक नजर घर को देखा जो कि पहले कबाड़खाना हुआ करता था।

रवि जी ने एक नजर पृथ्वी को देखा अब पृथ्वी चूँकि सब घरवालों से नाराज था इसलिए उसने रवि जी से कुछ नहीं कहा। रवि जी ने लक्षित को देखा जो कि बड़े आराम से खाना खा रहा था।
“वहा तुम्हारी आई घर पर तुम्हारा इंतजार कर रही है और तुम यहाँ खाना खा रहे हो”,रवि जी ने लक्षित से कहा
“अरे बाबा ! आई ने आज फिर खाने में टिंडे बनाये है,,,और आपको पता है वहिनि बहुत अच्छा खाना बनाती है इसलिए मैं यहाँ खाने चला आया”,लक्षित ने कहा

अवनि ने देखा रवि जी तब से खड़े है तो उसने पृथ्वी की तरफ देखकर इशारा किया कि वह रवि जी से बैठने को कहे। पृथ्वी ने रवि जी की तरफ देखा और कहा,”आप खड़े क्यों है ? बैठिये ना”
“हहहहह हाँ , अवनि बेटा एक गिलास पानी मिलेगा ?”,रवि जी ने अवनि की तरफ देखकर कहा और पृथ्वी के ठीक सामने सोफे पर आ बैठे।
अवनि पानी लेने चली गयी। पृथ्वी अब धीरे धीरे खाना खा रहा था , रवि जी यहाँ लक्षित के लिए तो बिल्कुल नहीं आये है ये बात पृथ्वी अच्छे से जानता था।

पृथ्वी और लक्षित को खाना खाते देखकर रवि जी को भी भूख लगने लगी अब वे सीधा सीधा कैसे कह देते कि उन्हें खाना खाना है इसलिए लक्षित से कहा,”क्या तुम्हारी आई ने सच में आज के खाने में टिंडे बनाये है ?”
“हाँ ना बाबा इसलिए तो मैं यहाँ चला आया , अब से जब भी आई लौकी टिंडे बनाएंगी मैं यहाँ खाने आ जाया करूंगा”,लक्षित ने खाते हुए कहा
“हाँ अब सबकी किस्मत तुम्हारे जितनी अच्छी भी तो नहीं होती,,,,,,,,,,!!”,रवि जी धीरे से बड़बड़ाये लेकिन अवनि ने सुन लिया जो कि उन्हें पानी देने आयी थी।

अवनि ने पानी का गिलास उन्हें दिया और कहा,”अगर आप बुरा ना माने तो क्या मैं आपके लिए खाना ले आऊ ?”
रवि जी ने सुना तो मन ही मन खुश हुए लेकिन बाहर से खुद को सामान्य दिखाकर कहा,”अरे नहीं नहीं बेटा ! तुमने अपने और पृथ्वी जितना बनाया होगा ,मैं घर जाकर खा लूंगा”
“ऐसी बात नहीं है , आप बैठिये मैं लेकर आती हूँ”,अवनि ने कहा और किचन में चली गयी।

 पृथ्वी ने देखा अवनि सबको खिला रही है बस खुद ही नहीं खा पा रही लेकिन रवि जी और लक्षित के सामने वह उसे खुद भी तो नहीं खिला सकता था इसलिए चुपचाप बैठकर अपना खाना खाता रहा।
“अगर लता को पता चला तो उसे बुरा लगेगा”,रवि जी ने धीरे से कहा
“अरे बाबा ! आई को तो तब पता चलेगा ना जब कोई उन्हें बताएगा”,लक्षित ने बेपरवाही से कहा

अवनि रवि जी के लिए भी प्लेट में खाना लगाकर ले आयी लेकिन रवि जी की प्लेट में खाने के साथ लड्डू भी था जिसे देखकर रवि जी ने कहा,”अरे बेटा ! मैं मीठा नहीं खा सकता मुझे शुगर है”
“जी मैं जानती हूँ और ये भी जानती हूँ कि आपको लड्डू बहुत पसंद है इसलिए इसमें बहुत कम मीठा है”,अवनि ने कहा
रवि जी ने सुना तो प्यार से अवनि को देखने लगे और मन ही मन खुद से कहा,”इतनी प्यारी बच्ची को हम सबने कितना दुःख दिया है”

“आप मुझे ऐसे क्यों देख रहे है ?”,रवि जी को खोया देखकर अवनि ने कहा तो उनकी  तन्द्रा टूटी और उन्होंने कहा,”देख रहा हूँ एक मकान को घर बनाने में सबसे बड़ा योगदान एक औरत का ही होता है ,खुश रहो बेटा”
पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन खुश हुआ और अवनि की तरफ देखा। रवि जी के मुँह से आशीर्वाद के दो शब्द सुनकर अवनि के चेहरे पर जो ख़ुशी थी वही ख़ुशी तो पृथ्वी उसे देना चाहता था। अवनि मुस्कुरा कर अंदर चली गयी।
आज कितने दिनों बाद रवि जी , पृथ्वी और लक्षित साथ बैठकर खाना खा रहे थे।

अवनि गर्म चपाती लेकर बाहर आयी तो रवि जी ने उसे रोक लिया और कहा,”अवनि ! तुम्हारी प्लेट कहा है ? चलो तुम भी बैठो और खाना खाओ”
“अह्ह्ह आप लोग खाइये ना मैं बाद में खा लुंगी”,अवनि ने कहा जबकि किचन में खाना कम था और अवनि नहीं चाहती थी तीनो में से कोई भी भूखा रहे।
“बाद में क्यों ? जाओ अपनी प्लेट लेकर आओ और खाना खाओ”,रवि ने कहा
बेचारी अवनि परेशान सी किचन की तरफ जाने लगी और एक बार फिर डोरबेल बजी और इस बार भी अवनि ने दरवाजा खोला और इस बार वह हैरान नहीं हुई बल्कि उसका दिल तेजी से धड़कने लगा

 अवनि के सामने इस बार लता जी खड़ी थी। खामोश और चेहरे पर कठोर भाव लिए और उनकी नजरे थी अंदर बैठे रवि जी और लक्षित पर
“आप यहाँ , अंदर आईये ना”,अवनि ने डरते डरते कहा क्योकी आज भी वह लता से हुई मुलाकातों को भूली नहीं थी। लता ने अवनि को हाथ दिखाकर कहा,”मैं ठीक हूँ,,,,,,,,ज़रा लक्षित को बुला दोगी”
“हाँ,,,,,,,,,,जी मैं अभी बुलाती हूँ”,अवनि ने कहा और हॉल मे आकर लक्षित से दरवाजे की तरफ देखने का इशारा किया। लक्षित ने जैसे ही लता को देखा जल्दी से प्लेट नीचे रखी और दरवाजे की तरफ चला आया।

“तुम यहां क्या कर रहे हो ?”,लता ने कठोरता से पूछा
“अह्ह्ह वो मैं मैं तो दादा को होली विश करने आया था”,लक्षित ने लड़खड़ाती जबान में कहा। रवि जी ने जब लता को दरवाजे पर देखा तो उनकी तो जान ही सूख गयी। उन्होंने भी धीरे से प्लेट नीचे रखी जिसका खाना उन्होंने अभी अभी खत्म किया था और इधर उधर देखने लगे।
“कर दिया ना विश , अब घर चले ?”,लता ने कहा जबकि अवनि अपने हाथ बाँधे एक तरफ खड़ी रही।

लता के एक बार कहने से ही लक्षित उनके साथ चलने को  तैयार हो गया। रवि जी को नजरे चुराते देखकर लता ने कहा,”और आप ! आपको क्या अलग से कहना पडेगा ?”
“अह्ह्ह नहीं नहीं मैं तो बस ऐसे ही , लक्षित को ही बुलाने आया था , मैं मैं आता हूँ”,कहते हुए रवि जी ने उठते हुए प्लेट में रखा लड्डू उठाया और मुँह में रखकर लता की तरफ बढ़ गए
लता ने एक नजर अवनि को देखा और बाप बेटे को अपने साथ लेकर चली गयी। ये देखकर अवनि उदास हो गयी उसे लगा लता अभी भी उस से नाराज है वरना वो अंदर आने से मना क्यों करती ?

अवनि उदास सी पृथ्वी के पास चली आयी उसने टेबल पर रखे बर्तन उठाये और देखा पृथ्वी एकटक उसे ही देख रहा है तो उसने बुझे स्वर में पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! शायद वो मुझसे अभी भी नाराज है”
पृथ्वी मुस्कुराया और बड़े प्यार से कहा,”नहीं वो तुमसे नाराज नहीं है अवनि”
“तो फिर वो अंदर क्यों नहीं आयी ?”,अवनि ने रोआँसा होकर पूछा
“ये हम माँ बेटे का झगड़ा है अवनि ,जब तक मैं उनके घर में नहीं जाऊंगा वो भी मेरे घर में नहीं आएगी”,पृथ्वी ने हँसते हुए कहा

अवनि ने सुना तो परेशान सी पृथ्वी को देखने लगी।

( क्या पृथ्वी अपने दिल और दिमाग से निकाल पायेगा अवनि के साथ हुआ बुरा बर्ताव ? क्या लता के गुस्से के सामने घर जाकर खाने पड़ेंगे लक्षित और रवि जी को टिंडे ? माँ बेटे की इस मीठी सी लड़ाई में कौन मानेगा हार और किसकी होगी जीत ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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1 comment

Kshmata Chauhan June 5, 2026 - 11:54 am

Kitni pyari hai Avni yr…aur usne itna dinner banaya tha ki Prithvi, lakshit aur Ravi ji k khana ho jaye…chalo yeh bhi thik hai ab Avni se koi naraj nhi hai…bas Lata ji maan jaye…aur abhi Prithvi ne Avni se bola na ki yeh maa-bate k beach ki ladai hai…to bas ab yeh ladai bhi jaldi khatam hogi… mujhe to bas Vikram aur Prachi ki jodi se darr lag raha hai.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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