Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 88

by Story With Sanjana June 6, 2026
written by Story With Sanjana June 6, 2026 4 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 88

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि परेशान सी उसे देखने लगी और फिर बर्तन रखने किचन में चली आयी। पृथ्वी भी अवनि के पीछे किचन में चला आया और अपनी प्लेट सिंक में रख दी। पृथ्वी ने देखा अवनि सब खाना तो उसे , लक्षित और रवि जी को खिला दिया और अपने लिए वह अब चपाती बनाने वाली है तो पृथ्वी उसके पास आया और कहा,”तुम बैठो मैं बनाता हूँ”

“अरे नहीं पृथ्वी ! मैं बना लुंगी”,अवनि ने कहा लेकिन पृथ्वी उसकी कहा सुनने वाला था उसने अवनि को उठाया और किचन प्लेटफॉर्म पर बैठाकर कहा,”चुपचाप यहाँ बैठो मैं बनाता हूँ”
अवनि को पृथ्वी की बात माननी पड़ी। पृथ्वी गैस की तरफ आया तवा गर्म करने के लिए रखा और अवनि के लिए चपाती बनाने लगा हालाँकि पृथ्वी ने आज से पहले कभी चपाती नहीं बनायीं थी। उसने लोई बनाई और बेलने लगा। गोल तो दूर की बात है पृथ्वी ने आड़ा टेढ़ा कोई नक्सा बनाया और जैसे तैसे उसे तवे पर रखा। उसने उस पर चम्मच से घी डाला और अच्छे से सेंका।

पृथ्वी ने उसे प्लेट में रखा और कहा,”अह्ह्ह्ह ! वैसे ये इतना बुरा भी नहीं बना है,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने देखा सब्जी खत्म थी ये देखकर उसने मायूसी से अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने बगल में रखा अचार का डिब्बा उठाया और उसमे से थोड़ा अचार प्लेट में रखकर पृथ्वी से प्लेट लेकर कहा,”कोई बात नहीं मैं इस से खा लुंगी”

“लेकिन तुम सिर्फ़ इसके साथ कैसे खा पाओगी ?”,पृथ्वी ने अवनि के सामने आकर कहा  
अवनि ने एक निवाला तोडा और खाकर कहा,”मैं खा लुंगी वैसे भी मेरा कुछ खट्टा खाने का मन है”
पृथ्वी ने सुना तो ना जाने क्यों शरमा गया और फिर गैस की तरफ जाते हुए धीरे से कहा,”वो दिन भी जल्दी ही आएगा”

अवनि ने पृथ्वी की बात पर ध्यान नहीं दिया वह तो बड़े चाव से पृथ्वी का बनाया पपराठा खा रही थी। पृथ्वी ने अवनि के लिए एक पराठा और सेंका और इस बार वाला पहले वाले से थोड़ा बेहतर था। पृथ्वी ने उसे भी लाकर प्लेट में रखा और कहा,”कल से तुम मेरे साथ बैठकर खाना खाओगी”
“जी पृथ्वी जी”,अवनि ने मुस्कुराकर प्यार से कहा। अवनि के मुँह से पृथ्वी जी सुनकर पृथ्वी का तो हाथ ही अपने सीने से चला गया और उसने कहा,”एक साथ इतना प्यार बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा मैं अवनि”

अवनि ने सुना तो खिलखिलाकर हंस पड़ी। पृथ्वी उसे प्यार से देखने लगा। कितने दिनों बाद वह अवनि को ऐसे हँसते खिलखिलाते देख रहा था और फिर एकदम से उसकी नजर पड़ी अवनि के हाथ में पकड़ी प्लेट पर जिसमे अचार और आधा पराठा रखा था।  

बड़े पापा के घर पर भी तो उसे यही खाने को मिला था लेकिन यहाँ अवनि इसके साथ भी खुश थी और अगले ही पल पृथ्वी को समझ आया कि खाना चाहे जैसा भी हो खिलाने वाले की नियत और उसका मन होना बहुत जरुरी है। पृथ्वी ने अवनि से खाने को कहा और खुद सिंक के पास आकर बर्तन धोने लगा। अपनी प्लेट अवनि ने खुद धोयी और फिर किचन प्लेटफॉर्म साफ़ करने लगी। बर्तन धोकर पृथ्वी जैसे ही हॉल मे आया उसकी नजर टेबल पर पड़े फोन पर चली गयी।

पृथ्वी ने फोन उठाकर देखा और कहा,”ये तो बाबा का फ़ोन है , शायद वो यही भूल गए”
किचन समेटकर अवनि बाहर आयी तो पृथ्वी के हाथ में फोन देखकर कहा,”ये फोन ?”
“बाबा का है यही भूल गए”,पृथ्वी ने कहा
“अगर पृथ्वी ये फ़ोन देने जाएगा तो उसे घर जाना पडेगा और इस से आई की शिकायत भी दूर हो जाएगी”,अवनि ने मन ही मन खुद से कहा
“क्या हुआ ,क्या सोचने लगी ?”,अवनि को खोया देखकर पृथ्वी ने कहा

“पृथ्वी ! तुम्हे घर जाकर उन्हें उनका फ़ोन देना चाहिए,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“कोई जरूरत नहीं है मैं लक्षित को फोन कर दूंगा वो ले जाएगा”,पृथ्वी ने कहा
“उफ्फ्फ पृथ्वी ! कितने जिद्दी हो ना तुम ? कभी कभी तो बिल्कुल बच्चो की तरह जिक्र करते हो”,अवनि ने झुंझलाकर फिर अपने मन में कहा

“ओह्ह्ह हेलो ! क्या हुआ तुम्हे ?”,पृथ्वी ने अवनि के सामने हाथ हिलाकर कहा तो अवनि की तन्द्रा टूटी और उसने पृथ्वी के थोड़ा करीब आकर उसकी टीशर्ट की सलवट सही करते हुए कहा,”पृथ्वी ! तुम खुद जाकर उन्हें ये फोन दोगे तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगेगा,,,,,,,,,,,जाओ ना प्लीज और वैसे भी जो कुछ भी हुआ है उसमे तुम्हारे आई बाबा की कोई गलती नहीं है। जाओ ना पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि को अपने करीब पाकर पृथ्वी की धड़कने वैसे ही तेज हो गयी और उस पर अवनि का इतने प्यार से उसे किसी बात के लिए मनाना , पृथ्वी भला यहाँ ना कैसे बोल सकता था उसने कहा,”अब इतने प्यार से कहोगी तो कोई भी जायेगा”
अवनि पीछे हटी और मुस्कुराकर कहा,”जाओ,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने रवि जी का फोन जेब में रखा और अपना फोन लेकर चला गया। अवनि ने दरवाजा बंद किया और अंदर चली आयी। कमरे में बिस्तर पर धुले हुए कपडे रखे थे अवनि आकर उन्हें तह करने लगी।  

रवि जी का घर , पनवेल
“आखिर मेरे बनाये टिन्डो में ऐसी क्या ख़राब है जो आप को खाना खाने वहा जाना पड़ा ? मैं आप दोनों से पूछ रही हूँ,,,,,,,,,,,,चुप क्यों है जवाब दीजिये ?”, हॉल में बैठे लक्षित और रवि जी से लता ने झिड़ककर पूछा
रवि जी ने लक्षित की तरफ देखा और दबे स्वर मे कहा,”फंसा दिया ना मुझे”
“मैंने नहीं आपने मुझे फंसाया है और आप तो दादा से नाराज थे न फिर वहा क्यों आये ?”,लक्षित ने भी दबे स्वर में कहा

अच्छा तो अब मुझे वहा तुम से और तुम्हारे दादा से पूछकर आना पड़ेगा ?”,रवि जी ने दबे स्वर में गुस्से से कहा
“ये आपस में क्या खुसर फुसर कर रहे है आप दोनों ? इधर देखिये मेरी तरफ और जवाब दीजिये”,लक्षित और रवि जी को बात करते देखकर लता ने कहा
रवि जी ने रवि की तरफ देखा और कहा,”जाने दो ना लता , तुम खामखा गुस्सा हो रही हो मैं तो बस वहा इसे ढूंढने गया था”

“अच्छा और वहा बैठकर दोनों जो खाना खा रहे थे वो , जरूर दोनों ने वहा खाना खाने का यही बहाना दिया होगा कि ‘खाने में टिंडे बने है’ और लगे वहा खाने”,लता ने रवि जी को घूरकर कहा तो रवि जी लक्षित को देखने लगे और कहा,”तुम कुछ बोलोगे ?”
लक्षित को रवि जी पर दया आ गयी तो उसने कहा,”अरे आई ! बाबा की इसमें कोई गलती नहीं है मैं ही कुछ काम से दादा के पास गया था , वो खाना खा रहे थे तो उन्होंने मुझे भी अपने साथ बैठा लिया”
“ठीक है मान लिया लेकिन तुम्हारे बाबा , पूछो इनसे ये वहा क्या कर रहे थे और खाना क्यों खा रहे थे ?”,लता ने कहा

“अरे मैं कहा खाना खा रहा था वो तो अवनि जिद करने लगी इसलिए मैंने बस ज़रा सा चख लिया अब बच्ची का दिल तोड़ना अच्छा नहीं लगता न”,रवि जी ने अपनी सफाई में कहा
“लेकिन आई क्या खाना बनाती है वहिनी,,,,,,,!!!”,लक्षित ने खाने को याद करके कहा
“हाँ और वो नयी सब्जी कितनी लाजवाब थी,,,,,,,,,!!”,रवि जी ने भी लक्षित की हाँ में हाँ मिलाकर कहा
“हाँ तो फिर कल से वही जाकर खाना”,लता ने कहा और किचन में चली गयी।

“बाबा जाईये मनाईये आई को वरना कल सुबह नाश्ते में हमे वही टिंडे खाने पड़ेंगे”,लक्षित ने कहा
रवि जी ने सुना तो उठे और लता ले पीछे पीछे किचन में चले आये। लता किचन में रखे बर्तन समेटने लगी तो रवि जी उनकी मदद करने लगे। लता बर्तन छोड़कर प्लेटफॉर्म साफ करने लगी तो रवि जी ने कहा,”नाराज मत हो लता ,अच्छा तुम्हारे बनाये टिंडे मैं कल सुबह नाश्ते में खा लूंगा अब तो गुस्सा थूक दो”

लता रवि की की तरफ पलटी और कहा,”बात गुस्से की नहीं है , उसने सिर्फ दो लोगो का खाना बनाया होगा और आप दोनों वहा पहुंच गए ,, उसने पूछा लेकिन आप तो मना कर सकते थे ना”
रवि जी ने सुना तो उन्हें अहसास हुआ कि उनकी वजह से कही अवनि के लिए खाना ही ना बचा हो। उन्होंने कुछ कहने के लिए जैसे ही लता की तरफ देखा लता ने खोये हुए स्वर में कहा,”पता नहीं उसके लिए खाना बचा भी होगा या नहीं ?”

लता को अवनि की परवाह करते देखकर रवि जी मुस्कुराये और कहा,”तुम्हे अवनि की फ़िक्र हो रही है ?”
रवि जी के सवाल से लता की तंद्रा टूटी तो उन्होंने रवि जी को एक नजर देखा और वहा से चली गयी।  

लता किचन से बाहर आयी तो देखा लक्षित तेल की बोतल लिए खड़ा था। उसे देखकर लता ने चिढ़े हुए स्वर में कहा,”अब तुम्हे क्या चाहिए ?”
लक्षित जानता था लता को कैसे मनाना है इसलिए वह उनके पास आया और कहा,”आई देखो ना मेरे बाल कितने रूखे हो गए है और मेरे सर में थोड़ा थोड़ा दर्द भी हो रहा है तो मेरे बालों में थोड़ा तेल लगा दीजिये न प्लीज,,,,,,!!”
“क्यों जिसने खाना खिलाया तेल भी वही जाकर लगवाओ न”,लता ने चिढ़कर कहा

लक्षित ने सुना तो जानबूझकर मायूसी वाला चेहरा बनाया और जाने के लिए पलट गया तो लता ने उसके हाथ से बोतल लेकर कहा,”चलो बैठो”
लक्षित मुस्कुराया और नीचे जमीन पर आ बैठा। लता उसके पीछे आ बैठी और हाथो में थोड़ा सा तेल लेकर लक्षित के बालों में लगाते हुए कहा,”बाल देखो कैसे कर रखे है ,रोज तेल क्यों नहीं लगाते इनमे ?”
“अरे आई ! पहले जब दादा यहाँ थे तब आप हर संडे उनके और मेरे बालों में तेल लगा दिया करती थी अब जबसे दादा गए है आप तो भूल ही गयी है और मुझे याद नहीं रहता,,,,,,,,,,!!”,लक्षित ने कहा

लता ने सुना तो बीते वक्त की यादें उनकी आँखों के सामने आ गयी और उन्होंने लक्षित के बालों में तेल लगाते हुए कहा,”वो अच्छा खाना बनाती ?”
“कौन ?”,लक्षित ने पूछा
“वो ही”,लता जी ने कहा
“वो ही कौन ?”,लक्षित ने फिर पूछा
लता ने उसके सर पर एक चपत लगाई और कहा,”अरे तुम्हारी वहिनि कौन ?”
“आप मुझसे क्यों पूछ रही है ? वो रहे दादा उन्ही से पूछ लीजिये,,,,,,,,,वैसे भी मुझसे ज्यादा तो उन्होंने ही उनके हाथ से बना खाना खाया है”,लक्षित ने सामने दरवाजे पर खड़े पृथ्वी को देखकर कहा।

पृथ्वी को देखकर लता का दिल ममता से भर आया लेकिन वे अपनी जगह बैठी रही। रवि जी किचन से बाहर आये उन्होंने दरवाजे पर खड़े पृथ्वी को देखा तो कहा,”अरे पृथ्वी ! तुम यहाँ ?”
“आप अपना फ़ोन घर पर भूल आये थे वही देने आया हूँ”,पृथ्वी ने अपने जेब से फोन निकालकर रवि जी की तरफ बढाकर कहा

रवि जी ने पृथ्वी से फोन ले लिया और लता की तरफ देखा जो की ख़ामोशी से पृथ्वी को ही देख रही थी। पृथ्वी ने जब देखा कि लता लक्षित के बालों में तेल लगा रही है तो उसका दिल किया जाकर लक्षित को साइड करे और खुद में वहा जाकर बैठ जाये लेकिन ऐसा नहीं कर पाया।
“अच्छा बाबा ! मैं चलता हूँ”,पृथ्वी ने जान बुझकर अपने ललाट से हाथ लगाकर कहा ताकि लता की नजर उस पर पड़े और वे उस से कुछ पूछे लेकिन लता से पहले ही रवि जी बोल पड़े,”क्या हुआ ! सर में दर्द है क्या ?”

“हम्म्म , मैं घर जाकर दवा ले लूंगा”,पृथ्वी ने कहा और जाने के लिए पलट गया। आज वह घर के अंदर तक आ चुका था और ये सिर्फ अवनि की वजह से था। लता ने अब तक खुद को बहुत रोका और आखिर में बोल पड़ी,”सुनो,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो रुका और धीरे से मुस्कुरा उठा। वह पलटा तो लता ने कहा,”दवा क्यों लेनी है ? यहाँ आकर बैठो सर में तेल लगा देती हूँ”
पृथ्वी ने सुना तो उसका दिल ख़ुशी से झूम उठा ,आखिर उसकी ख्वाहिश जो पूरी हो रही थी।

लता ने लक्षित से साइड होने को कहा और पृथ्वी से बैठने का इशारा किया। पृथ्वी नीचे जमीन पर आ बैठा। रवि जी भी वहा चले आये। लता ने अपने हाथो में तेल लिया और जैसे ही पृथ्वी के बालों में लगाकर उनमे अपनी उंगलिया घुमाई सुकून से भरकर पृथ्वी ने अपनी आँखे मूँद ली ! आज कितने दिनों बाद वह लता के हाथो की छुअन महसूस कर रहा था। लता का गुस्सा भी कम हो गया और उसने कहा,”खाना खाया तुमने ?”

“हम्म्म,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अपनी आँखें मूंदे कहा वह बातें करके इन पलों को बर्बाद करना नहीं चाहता था।
“लक्षित बता रहा था वो बहुत अच्छा खाना बनाती है”,लता ने फिर पूछा
“आपसे थोड़ा कम,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा तो एक हलकी सी मुस्कान लता के होंठो पर झलकने लगी साथ ही अगले ही पल वे ये सोचकर उदास भी हो गयी कि अब तक उन्होंने पृथ्वी को खुद से कितना दूर रखा और उसे तकलीफ दी।
लता को खामोश देखकर पृथ्वी ने कहा,”वो बिल्कुल आपकी तरह खाना बनाती है आई , बस एक ही फर्क है”
“क्या ?”,लता ने कहा

“आपने मुझे कभी करेला नहीं खिलाया लेकिन उसने खिला दिया,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा तो लता मुस्कुरा उठी और फिर भावुक होकर कहा,”वो तेरा ख्याल तो रखती है ना ?”
पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली और लता की तरफ घूमकर बैठ गया। उसने लता की बात का जवाब नहीं दिया बल्कि अपना फोन निकाला और अवनि का नंबर डॉयल किया

एक दो रिंग जाने के बाद अवनि ने फोन उठाया तो पृथ्वी ने उसे लाऊड स्पीकर पर डाल दिया और कहा,”हेलो अवनि ! क्या हो रहा है बेटा ?”
“आपके कपडे प्रेस कर रही हूँ , कल सुबह आपको ऑफिस जल्दी जाना है इसलिए सोचा अभी कर देती हूँ”,अवनि ने धीरे से कहा

लता ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा , पृथ्वी लता को ही देख रहा था और अवनि की बात सुनकर लता को अपनी कही बात याद आ गयी जो वे हमेशा, हर रोज पृथ्वी से कहा करती थी “””हाँ तो मेरे पास सिर्फ दो ही हाथ है , तुझे प्रेस किये कपडे चाहिए तो जल्दी आकर खुद कर लिया कर,,,,,,,,,वरना शादी कर ले और बीवी ले आ वो रोज तेरे लिए कपडे प्रेस भी कर देगी और तुझे टाइम से ऑफिस भी भेज देगी””””
लता को अहसास ही नहीं हुआ कि कब उनकी आँख में भरे आँसुओ की एक बूँद कब पृथ्वी के हाथ पर आ गिरी

लता को खामोश देखकर पृथ्वी ने फोन का लाउडस्पीकर बंद किया और फोन कान से लगाकर कहा,”अवनि ! मैं थोड़ी देर आई बाबा के साथ हूँ,,,,,,,,,,आता हूँ थोड़ी देर में”
“हम्म्म थैंक्यू,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा और फोन काट दिया।
पृथ्वी ने अपने हाथ पर गिरी आँसू की बूँद को देखा और उसे अपनी आँख से लगा लिया और कहा,”आई ! आपने ही कहा था मैं कोई ऐसी ढूंढ लू जो आपकी तरह मेरा ख्याल रखे”

लता ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी , पृथ्वी ने नम आँखों के साथ आगे कहा,”वो बिल्कुल आपकी तरह मेरा ख्याल रखती है आई,,,,,,,,,,,मेरा बहुत ख्याल रखती है , मेरी हर छोटी छोटी चीजों को सम्हाल के रखती है , मेरे खाने से लेकर मेरे कपड़ो तक की फ़िक्र रहती है उसे , कभी मुझसे कुछ मांगती नहीं है जो है जितना है उसी में खुश रहती है , कभी किसी बात के लिए शिकायत भी नहीं करती और गुस्सा , गुस्सा करते तो मैंने कभी देखा ही नहीं , वो बहुत अच्छी लड़की है आई , मैं अच्छा इंसान हूँ लेकिन मुझे बेहतर उसने बनाया है आई , अब तो उसे अपना लीजिये आई ?”

कहते कहते पृथ्वी उदास हो गया , रवि जी ने सुना तो वे भी भावुक हो गए। लता ने कुछ नहीं कहा वे उठी और चुपचाप किचन में चली गयी। लता की ख़ामोशी को उनका जवाब समझकर पृथ्वी ने अपनी आँखे साफ़ की और उठकर जाने लगा तो लता किचन से बाहर आयी और कहा,”पृथ्वी,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी पलटा तो लता उसके पास आयी और हाथ में पकड़ा एक डिब्बा पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”ये मैंने खीर बनायी थी , इसमें रखा है अवनि को दे देना”

पृथ्वी ने सुना तो उसे अपने कानो पर यकीन नहीं हुआ और वही रवि जी भी हैरानी से लता को देखने लगे। लता ने अचानक आये इस बदलाव से दोनों हैरान थे। पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी तो लता ने आगे कहा,”रात बहुत हो गयी है तुम अपने घर जाओ , वो अकेली होगी”
पृथ्वी ने इस बार भी सिर्फ हामी में गर्दन हिलायी क्योकि इस वक्त उसके पास लता से कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे। वह बस खुश था , बहुत खुश था।  

( भुआ की खिलाई अचार रोटी और पृथ्वी की खिलाई अचार रोटी में क्या फर्क था ? क्या लता सच में लक्षित और रवि जी से गुस्सा है  या फिर उन्हें है अवनि की फ़िक्र ? अवनि का जवाब सुनकर क्या लता को होने वाला है अपनी गलतियों का अहसास ?” जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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4 comments

Kshmata Chauhan June 6, 2026 - 11:47 pm

Aery wha yeh to kamaal ho gya…Lata ji bhi maan gai aur unhone to Avni k liye kheer bhi dee…aur sabse achchi baat yeh ki Lata ji r kheer seedhe Prithvi ko dee…jis se ab Prithvi bhi jaan chuka hai ki uski family ne Avni ko sweekar kar liya hai…bas ab jaldi se inn dono ko dhoom dham wali shadi ho jaye…aur Avni k ghar wale isme shamil ho…

Reply
Nency Patel June 7, 2026 - 1:40 pm

Aaj ka part behad hi khubsurat hai matlab lataji ko ahsas ho gaya ki avni ke khana bacha nai hoga to uske liye unhone khir banai thi

Reply
Priya Bhardwaj June 7, 2026 - 4:41 pm

Heart touching ❤️

Reply
Shivani June 10, 2026 - 10:42 am

Dii next episode kab ayega

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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