Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2

Pasandida Aurat Season 2 – 67

by Story With Sanjana May 1, 2026
written by Story With Sanjana May 1, 2026 3 comments
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Pasandida Aurat Season 2 – 67

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सुरभि ने पृथ्वी को कुछ ऐसा बताया जिसे सुनकर पृथ्वी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और आँखों में जलन और चुभन के भाव दिखाई देने लगे। सुरभि ने पृथ्वी को देखा और उसका हाथ थामकर कहा,”अवनि अब तुम्हारी जिम्मेदारी है पृथ्वी , तुम्हारे सिवा उसका इस दुनिया में अब कोई नहीं है पृथ्वी उसका ख्याल रखना”
“मैं जिंदगीभर उसका ख्याल रखूंगा”,पृथ्वी ने भावुक होकर कहा

सुरभि ने देखा उसके जाने का समय हो गया तो उसने पृथ्वी को बाय कहा और जाने लगी तो पृथ्वी ने उसे आवाज देकर रोका और उसके पास आकर उसे गले लगाकर कहा,”थैंक्यू सुरभि ! तुम नही होती तो शायद मैं अवनि से कभी मिल ही नहीं पाता,,,,,,,हमारी कहानी का सबसे अहम किरदार तुम हो , अपना ख्याल रखना और हाँ हमेशा ऐसी ही रहना बेबाक , मुंहफट और जिंदादिल”

“ओह्ह्ह्ह पृथ्वी बस करो ! अब तुम मुझे इमोशनल कर रहे हो”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा तो पृथ्वी उस से दूर हटा और उसका सर थपथपाकर कहा,”यहाँ से जाने के बाद अपने लिए कोई अच्छा सा लड़का देख लेना जो तुम्हे झेल सके”
सुरभि ने सुना तो पृथ्वी के सीने पर मारते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह तुम कितने बुरे हो”

“अरे यार !! कितनी बार कहा है यहाँ मत मारा करो यहाँ अवनि रहती है”,पृथ्वी ने अपने सीने के बाँयी तरफ ऊँगली रखकर कहा तो सुरभि हंस पड़ी और फिर पृथ्वी को बाय बोलकर चली गयी। पृथ्वी भी उसे जाते देख मुस्कुराते हुए हाथ हिलाता रहा और जब सुरभि आँखों से ओझल हो गयी तो पृथ्वी भी घर के लिए निकल गया।  

सुरभि के जाने से अवनि उदास हो गयी। दो दिन से जो घर में रौनक थी वो एकदम से गायब हो गयी और घर सूना सूना सा लगने लगा। अवनि ने घर की सफाई की और नहाने चली गयी। किचन में आकर वह पृथ्वी के लिए टिफिन और नाश्ता बनाने लगी। अवनि ने लंच बनाया और चटनी बनाने लगी। आज उसने नाश्ते में स्टफ्ड इडली बनाई थी। अवनि ने इडली पकने के लिए इडली मेकर में रखा और चटनी बनाकर साइड में रख दी।

फ्री होकर अवनि ने अपने लिए चाय चढ़ा दी तभी डोरबेल बजी। पृथ्वी होगा सोचकर अवनि जल्दी से दुपट्टे से गीले हाथ पोछते किचन से बाहर आयी और  दरवाजा खोला तो सामने खड़े हिमांशु को देखकर थोड़ा हैरान हुई और कहा,”आप ?”
“पृथ्वी घर पर है क्या अवनि ?”,हिमांशु ने पूछा
“अह्ह्ह्ह नहीं ! वो सुरभि को छोड़ने एयरपोर्ट गए है , आप बाहर क्यों खड़े है अंदर आईये ना वो बस आने वाले ही है”,अवनि ने साइड होकर कहा तो हिमांशु अंदर चला आया और कहा,”मैं सुबह से उसे फोन कर रहा हूँ लेकिन उसका फोन नहीं लग रहा इसलिए मुझे खुद ही यहाँ आना पड़ा”

“उनका फोन कल पानी में गिरने की वजह से खराब हो गया है,,,,,,,,,आप बैठिये मैं आपके लिए चाय लेकर आती हूँ”,अवनि ने कहा
“हम्म्म्म ! वैसे तुम्हारी दोस्त इतनी जल्दी क्यों चली गयी ? उसे होली तक रुक जाना चाहिए था तुम्हारा भी मन लग जाता”,हिमांशु ने सोफे पर बैठते हुए कहा
“उसके घर से फोन आ गया था और फिर त्यौहार तो अपने ही घर में अच्छे लगते है ना भैया इसलिए वो चली गयी”,अवनि ने धीरे से कहा और किचन की तरफ चली गयी

हिमांशु ने उसे जाते देखा और मन ही मन खुद से कहा,”हाँ सही कहा तुमने अवनि ! त्यौहार अपने घर में ही अच्छे लगते है इसलिए तो मैं तुम्हे लेने आया हूँ ताकि यहाँ आने के बाद पहला त्यौहार तुम अपने नए परिवार के साथ मनाओ”
अवनि ने हिमांशु के लिए कप में चाय छानी और साथ में एक प्लेट में कुछ मठरी और स्नेक्स रखकर बाहर चली आयी। उसने ट्रे हिमांशु के सामने रखी और एक तरफ खड़ी हो गयी।
हिमांशु ने देखा तो कहा,”तुम्हारी चाय कहा है और तुम साइड में क्यों खड़ी हो ?”

“अंदर है”,अवनि ने धीरे से कहा
“जाओ लेकर आओ”,हिमांशु ने चाय का कप उठाकर कहा
अवनि किचन में गयी और अपनी चाय ले आयी तो हिमांशु ने कहा,”बैठो”
“आप बड़े है , मैं आपके बराबर कैसे बैठ सकती हूँ ?”,अवनि ने कहा
“अवनि ! हमारे घर में भाईयो के बीच ये सब नहीं चलता हाँ पापा और चाचा लोग हो तो बात और है,,,,,,,,,,चलो बैठो”,हिमांशु ने कहा और चाय पीने लगा

हिमांशु के खुले विचार अवनि को बहुत पसंद आये वह साइड में रखे सिंगल सोफे पर आ बैठी और अपनी चाय पीने लगी। हिमांशु अवनि से उसके घर परिवार के बारे में बात करता रहा लेकिन बातचीत के दौरान उसकी नजरे झुकी रही , उसने एक बार भी अवनि की तरफ नहीं देखा।
 चाय पीने के बाद अवनि सभी बर्तन लेकर किचन में चली गयी और हिमांशु उठकर पृथ्वी का घर देखने लगा जिसमे एक एक चीज बहुत ही करीने से सजाई हुई थी। हिमांशु बालकनी में चला आया और जब उसने बालकनी का का बदला हुआ नजारा देखा तो हैरान रह गया।

जो बालकनी इस पुरे घर का सबसे गन्दा हिस्सा थी वही बालकनी अब सबसे साफ और खूबसूरत नजर आ रही थी।
हिमांशु मुस्कुराते हुए वापस हॉल में चला आया और अवनि से कहा,”अवनि ! तुमने तो इस घर का नक्शा ही बदल दिया , सच पहले ये सिर्फ एक मकान था इसे घर तुमने बनाया है”
“सिर्फ मैंने नहीं मैंने और पृथ्वी दोनों ने मिलकर इस मकान को घर बनाया है”,अवनि ने धीरे से कहा

हिमांशु ने सुना तो मुस्कुरा उठा और कहा,”अब समझ आया हमारा लड़का तुम्हारी इतनी तारीफ क्यों करता है ? वैसे वो है कहा अभी तक आया नहीं और मुझे ऑफिस भी जाना है,,,,,,,,,,,!!”
हिमांशु के कहते ही डोरबेल बजी और अवनि की आँखे चमक उठी इस बार पृथ्वी ही होगा सोचकर अवनि ने दरवाजा खोला और उसका चेहरा खिल उठा सामने पृथ्वी ही खड़ा था। अवनि को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी के दिल को एक राहत मिली वरना सुरभि ने उसे जो कुछ बताया उसके बाद से ही उसका मन बहुत बैचैन था।

पृथ्वी अंदर आया तो अवनि ने कहा,”हिमांशु भैया आये है , तुमसे कुछ बात करना चाहते है”
“हिमांशु भैया यहाँ क्या कर रहे है ?”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाते हुए हॉल में आया और हिमांशु को देखकर कहा,”आप सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे है ?”
“तुमने ही कहा था मुझसे कि अवनि बहुत अच्छा खाना बनाती है तो मैंने सोचा क्यों ना आज ट्राय किया जाए”,हिमांशु ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से हिमांशु को देखने लगा , पृथ्वी को उलझन में देखकर हिमांशु ने कहा,”मजाक कर रहा हूँ , बैठो मुझे तुम से कुछ जरुरी बात करनी है”
पृथ्वी ने सुना तो सोफे पर आ बैठा और कहा,”कहिये,,,,,,,,,,,!!!”
हिमांशु ने पृथ्वी को सब बताया और कहा,”घरवाले चाहते है कि इस होली अवनि यहाँ ना रहकर मेरे घर में रहे,,,,,,,,,,,!!!”
“अवनि कही नहीं जाएगी”,पृथ्वी ने कठोरता से

पृथ्वी की बात सुनकर हिमांशु ने पास ही खड़ी अवनि की तरफ देखा और फिर पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ! तुम जानते हो न ये रस्म हमारे घर में सालों से चली आ रही है। शादी की पहली होली लड़की अपने पति और सास के साथ नहीं रहती है। तुम्हारे और अवनि के पास ये एक अच्छा मौका है घरवालों की नाराजगी दूर करने का और फिर टेंशन क्यों लेते हो मैं और साक्षी है न वहा,,,,,,,मैं अवनि का ख्याल रखूंगा”

पृथ्वी ने सुना तो सोच में पड़ गया , दो दिन उसे अवनि को खुद से दूर भेजना कितना मुश्किल लग रहा था ये सिर्फ वही जानता था उस पर उन लोगो के बीच जो अवनि को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे। पृथ्वी को सोच में डूबा देखकर हिमांशु ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”क्या सोच रहा है पृथ्वी ?

आई थिंक अवनि को वहा जाना चाहिए और मुझे पूरा विश्वास है कि अवनि वहा सबका दिल जीत लेगी और क्या पता इसके बाद सब ठीक हो जाये और सब तुम्हे और अवनि को फिर से अपना ले। यही सही मौका है पृथ्वी और रही बात तुम्हारी आई कि तो एक बार सब घरवालों ने अवनि को अपना लिया तो वो भी अपना ही लेगी,,,,,,,,!!!”

“वो सब तो ठीक है भाई लेकिन वहा कोई भी अवनि को पसंद नहीं करता है ,मैं इसे कैसे भेज दू ?”,पृथ्वी ने उदासी भरे स्वर में कहा
“अवनि ! अब तुम ही इस समझाओ”,कहते हुए हिमांशु उठा और बालकनी की तरफ चला गया। अवनि पृथ्वी के सामने चली आयी और बड़े प्यार से कहा,”पृथ्वी ! तुम्हे एक बार हिमांशु भैया की बात माननी चाहिए,,,,,,,,,,,,क्या पता इसके बाद सब सही हो जाये और तुम्हारे घरवाले तुम्हे माफ़ कर दे,,,,,,,,,!!!!”

“बात वो नहीं है अवनि मैं बस ये सोचकर डर रहा हूँ अगर वहा किसी ने भी तुमसे बदतमीजी की या कुछ बोला तो,,,,,,,,,,,तुम तो इतनी सीधी हो कि पलटकर उन्हें जवाब भी नहीं दोगी”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर कहा
“किसने कहा मुझे जवाब देना नहीं आता ? मुझे बहुत अच्छे से जवाब देना आता है पृथ्वी बस डिपेंड करता है मेरे सामने मेरा कोई अपना है या गैर”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी ख़ामोशी से उसे देखने लगा।

“मान जाओ न पृथ्वी , रस्मो रिवाजो के लिए ऐसे मना नहीं करते अपशगुन होता है”,अवनि ने पृथ्वी के हाथ पर अपना हाथ रखकर प्यार से कहा
“तुम दो दिन के लिए मुझसे दूर चली जाओगी”,पृथ्वी ने उदास होकर कहा

“पृथ्वी ! मैं हमेशा के लिए थोड़ी जा रही हूँ और फिर तुम्हारे लिए तो अच्छा है न , दो दिन तुम्हे यहाँ परेशान करने वाला कोई नहीं होगा , तुम पुरे बिस्तर पर अकेले फैलकर सो सकते हो ,किचन के सिंक में जूठे बर्तन छोड़ सकते हो ,गीला टॉवल घर में जहा मर्जी फेंक सकते हो और कोई तुम्हे नहाने के लिए भी फ़ोर्स नहीं करेगा तुम्हारा जब मन करे तुम तब नहाना”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा लेकिन अवनि की ये बात पृथ्वी के सीने में किसी फ़ांस की तरह चुभ रही थी। अवनि से दूर जाने के ख्याल से पृथ्वी बैचैन हो जाता था अब तो उसे दो दिन अवनि के बिना रहना था बिना उस से मिले

सहसा ही ये सब सोचकर उसकी आँखों में नमी उभर आयी ये देखकर अवनि ने कहा,”तुम कहोगे तो मैं नहीं जाउंगी”
पृथ्वी ने आँखों में आयी नमी को आँखों में ही रोक लिया और एक गहरी साँस लेकर कहा,”तुम सच में वहा जाना चाहती हो ?”
“अगर मेरे वहा जाने से सब ठीक होता है तो मैं जरूर जाना चाहूंगी पृथ्वी,,,,,,,,,,मेरे लिए तुमने कितना कुछ किया अब मेरी बारी है,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने पृथ्वी की आँखों में देखते हुए विश्वास भरे स्वर में कहा

पृथ्वी अवनि की आँखों में देखता रहा और फिर साइड में देखते हुए कहा,”ठीक है ! तुम जा सकती हो और होली के अगले दिन ही मैं तुम्हे लेने आ जाऊंगा फिर चाहे कोई माने या ना माने”
“ठीक है,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा और हिमांशु के पास आकर उसे बताया कि पृथ्वी मान गया है। हिमांशु ने सुना तो खुश होकर पृथ्वी के पास आया और कहा,”देखना पृथ्वी इसके बाद सब ठीक हो जाएगा”

“हम्म्म्म,,!!”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा उसका दिल अभी भी अवनि को खुद से दूर भेजने की गवाही नहीं दे रहा था।
“भैया बैठिये न , मैं आप दोनों के लिए नाश्ता लगा देती हूँ”,कहकर अवनि किचन में चली गयी.

नाश्ता करने के बाद पृथ्वी ऑफिस जाने के लिए तैयार होने कमरे में चला गया। हिमांशु भी दोपहर में अवनि से तैयार रहने का कहकर चला गया। किचन में खड़ी अवनि पृथ्वी का टिफिन पैक रही थी। उसने टिफिन पैक किया और लेकर बाहर चली आयी।

अवनि ने देखा पृथ्वी हॉल मे नहीं है तो वह कमरे में चली आयी। शीशे के सामने खड़ा पृथ्वी किसी गहरी सोच में डूबा था। अवनि ने देखा तो पृथ्वी के पास आयी और कहा,”पृथ्वी ! क्या तुम अभी भी वही सब सोच रहे हो ?”
अवनि की आवाज से पृथ्वी की तन्द्रा टूटी और उसने  अवनि की तरफ पलटकर कहा,”नहीं ! आज कुछ जरुरी मीटिंगस है तो उन्ही के बारे में सोच रहा था , वैसे  हो सकता है आज शाम घर आने में मुझे देर हो जाये,,,,,,,,,!!!”

मीटिंग्स के बारे में सोचकर खुद को परेशान क्यों करना ? मैं जानती हूँ तुम कर लोगे ,, जिस तरह से तुम अपने काम को लेकर डेडिकेटेड हो ,तुम्हे काम करते देखकर मुझे तुम्हारे लिए प्राउड फील होता है”,अवनि ने प्यार से कहा
“आज तक किसी ने मुझसे ये नहीं कहा अवनि तुम पहली इंसान हो जो ये कह रही हो”,पृथ्वी ने धीरे से मुस्कुराकर कहा  

“गधे है सब”,अवनि ने बड़ी सी मुस्कराहट के साथ कहा तो पृथ्वी ने भी मुस्कुराते हुए अपना सर झटक दिया और अपना बैग उठाकर कहा,”ठीक है मैं चलता हूँ , मेरा फोन बंद रहेगा क्योकि मैं जाते हुए उसे सर्विस सेंटर पर देने वाला हूँ तो अगर कुछ काम हो तो मुझे ऑफिस के फोन पर फ़ोन करना,,,,,,,,!!”

“ठीक है”,अवनि ने पृथ्वी के पीछे आते हुए कहा
“और हाँ ! हिमांशु भैया अपने लंच टाइम में तुम्हे लेने आएंगे तो तुम तैयार रहना , वैसे मैंने उन्हें तुम्हारा नंबर दिया है तो आने से पहले वो तुम्हे फोन कर लेंगे”,पृथ्वी ने हॉल में रखे टिफिन को उठाते हुए कहा

“जी बिल्कुल”,अवनि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी का ये सब कहते हुए मन तो भारी हो रहा था लेकिन फिर भी वह होंठो पर जबरदस्ती मुस्कान लाकर बोला,”और,,,,,,,,,,!!!”
“और ?”,अवनि ने पृथ्वी की आँखों में देखते हुए पूछा
“और अपना ख्याल रखना ,मैं जल्दी ही तुम्हे वापस लेने आऊंगा,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने उदास आँखों से अवनि को देखते हुए कहा

पृथ्वी की आँखों में उदासी देखकर अवनि ने कहा,”अगर दोपहर के बजाय मैं शाम में तुम्हारे आने के बाद वहा जाऊ तो चलेगा ?”
“नहीं,,,,,,,,,,,,हो सकता है उसके बाद मैं तुम्हे जाने ना दू इसलिए तुम दोपहर में ही निकल जाना”, पृथ्वी ने कहा और दरवाजे की तरफ बढ़ गया।

अवनि मुस्कुराते हुए पृथ्वी को देखती रही उसकी आँखों में नमी थी और सीने में मीठा सा दर्द लेकिन ये दर्द मोहब्बत का था और आँखों में नमी ख़ुशी , इस दुनिया में कोई तो था जो अवनि से इतनी मोहब्बत करता था कि उसके दूर जाने के नाम से ही उदास हो जाता था।
अवनि ने दरवाजा बंद किया और घर के कामो में लग गयी ताकि जाने से पहले सभी जरुरी काम निपटा सके।

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जयदीप के केबिन में बैठा पृथ्वी ख़ामोशी से लेपटॉप पर किसी रिपोर्ट को चेक कर रहा था उसने थोड़ी देर बाद लेपटॉप बंद किया और कहा,”सर ! क्या देसाई ग्रुप के साथ आज हमारी कोई मीटिंग है ?”
“हाँ बिल्कुल,,,,,,,,लंच से पहले”,जयदीप ने कहा
“हमारी कम्पनी की तरफ से उसे कौन अटेंड करने वाला है ?”,पृथ्वी ने पूछा

“तुम्हारी टीम से अंकित जा रहा है”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा , आज पृथ्वी कुछ ज्यादा ही गंभीर और शांत नजर आ रहा था
“देसाई ग्रुप के साथ आज की मीटिंग मैं अटेंड करूंगा”,पृथ्वी ने सधे हुए स्वर में कहा
जयदीप ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और कहा,”Are you sure पृथ्वी ?
तुमने खुद मुझसे कहा था कि आगे से तुम कभी मिस्टर देसाई के साथ डील नहीं करोगे फिर ये अचानक से,,,,,,,,,,,,,सब ठीक तो है न , तुम कब से देसाई ग्रुप में इंट्रेस्ट दिखाने लगे ?”

“सर ! बी प्रोफेशनल ! मुझे सिर्फ इस डील में इंट्रेस्ट है मिस्टर देसाई और उनकी कम्पनी में नहीं,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने जयदीप की आँखों में देखकर कहा
“ठीक है ! मीटिंग फाइल तुम्हे अंकित से मिल जाएगी”,जयदीप ने कहा और पृथ्वी के चेहरे की तरफ देखने लगा जिस पर कोई भाव नहीं था और वह अब भी बहुत शांत नजर आ रहा था।

( हिमांशु की बात पर भरोसा करके क्या पृथ्वी कर रहा है कोई बड़ी गलती ? पृथ्वी को उस के परिवार से वापस मिलवाने के लिए क्या देनी पड़ेगी अवनि को कठिन परीक्षा ? आखिर क्यों अटेंड करना चाहता है पृथ्वी देसाई ग्रुप की मीटिंग ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2
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3 comments

Kshmata Chauhan May 1, 2026 - 12:44 pm

Mujhe to koi jhol nazar aa rha hai Holi celebration k naam pe…zarur Avni k sath Neelam bua kuch na kuch sazish karengi…jiska khamiyaza Avni aur Prithvi dono ko bhugatna padega…aur i think inn sabke bare m Himanshu bhaiya ko nhi pta hai…jiske baad kuch kaand naa ho jaye…aur idhar Prithvi Desai group k sath meeting kar prachi ko indirect way m kuch sabak sikhayega.

Reply
Nency Patel May 1, 2026 - 5:45 pm

Yaar avni ke sath kuch galat na ho jaye

Reply
Nency Patel May 1, 2026 - 5:54 pm

Yaar aap batao to sahi surbhi ne aisa kya bataya hai avni ke bare me

Reply

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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