Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 89

by Story With Sanjana December 14, 2025
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Pasandida Aurat – 89

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

नकुल की बातों ने पृथ्वी के दर्द को और बढ़ा दिया और वह घर चला आया लेकिन घर आते ही लता ने आते ही उस पर बम फोड़ा और कहा,”पृथ्वी ! मैंने तुम्हारे लिए ये लड़की देखी है , तुम तस्वीर देख लो अगर समझ आती है तो इस संडे इसके घरवालों को बुला लेते है”
पृथ्वी ने सुना तो लता की तरफ देखा और कहा,”मुझे कोई शादी नहीं करनी है आई”
“क्यों नहीं करनी है ? और शादी से क्या परेशानी है तुम्हे ?”,रवि जी ने कहा

“आपने जो कहा वो मैंने मान लिया लेकिन अब ये मेरा फैसला है कि मुझे शादी नहीं करनी , मैं ऐसे ही ठीक हूँ”,कहकर पृथ्वी अपने कमरे की तरफ चला गया।
पृथ्वी की बात सुनकर लता के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये , उन्होंने पृथ्वी को अवनि से दूर किया तो अब पृथ्वी ने शादी करने से ही साफ़ इंकार कर दिया। लता को परेशान देखकर रवि जी ने कहा,”चिंता मत करो लता , हम सब मिलकर उसे समझायेंगे”
“हम्म,,,,,,!!”,लता ने कहा और वहा से चली गयी।

इसके बाद शुरू हुआ पृथ्वी के घरवालों का टॉर्चर , घर में हर कोई पृथ्वी को शादी के लिए समझाने लगा , मनाने लगा लेकिन पृथ्वी भी जिद्दी था उसने साफ इंकार  वह शादी नहीं करेगा। उसने भले ही अवनि को खुद से दूर कर दिया लेकिन अब उसकी जगह वह अपनी जिंदगी में किसी और लड़की को देना नहीं चाहता था ना ही अपने घरवालों के लिए किसी लड़की की जिंदगी ख़राब करना चाहता था।

संडे के दिन पृथ्वी अपने कमरे में बैठा दिवार पर लगे कैलेंडर को देख रहा था , बस तीन दिन और बचे थे बाकि सब दिनों पर क्रॉस का निशान था। तीन दिन बाद क्या था ये तो बस पृथ्वी ही जानता था लेकिन एक उम्मीद उसके मन में अभी भी थी। बड़े पापा के घर पर आज सभी लंच के लिए मिलने वाले थे लेकिन पृथ्वी उसमे शामिल नहीं हुआ वह दिनभर अपने कमरे में बैठा जयदीप के किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करता रहा। पिछले 3 हफ्तों से पृथ्वी ऑफिस नहीं गया था   जयदीप भी पृथ्वी को लेकर उदास था क्योकि दिन में एक बार तो उसकी पृथ्वी से मीठी सी बहस हो जाया करती थी।

जयदीप कहने को पृथ्वी का बॉस था लेकिन उसने हमेशा पृथ्वी को अपना छोटा भाई और दोस्त समझा तभी तो वह हमेशा उसकी हर गलती , हर बहस , हर बदतमीजी पर माफ़ कर देता था। पृथ्वी के बिना उसका केबिन भी शांत और गंभीर नजर आता था। पृथ्वी के टीम मेंबर ऑफिस आते चुपचाप अपना काम करते और चले जाते।  

बड़े पापा के घर सभी जमा थे तभी लता ने कहा,”उसने शादी के लिए बिल्कुल इंकार कर दिया है , कही वो उस लड़की से फिर बात तो नहीं करने लगा”
“नहीं लता वो ऐसा नहीं करेगा,,,,,,,,,इतना भरोसा है उस पर , उस लड़की ने बस उसका दिमाग खराब कर दिया है जिस से उसे अब उसे कोई और दिखाई नहीं देता,,,,,,,,वैसे भी उसे जितना ज्यादा कहेंगे वह उतना ही ज्यादा शादी से दूर भागेगा,,,,,,,,,,,,कुछ वक्त के लिए उसे उसके हाल पर छोड़ देना ही बेहतर होगा”,बड़े पापा ने कहा

“लेकिन वो अब पहले से बहुत बदल गया है , न बात करता है , न बाहर जाता है , कितने दिनों से मैंने उसे मुस्कुराते हुए भी नहीं देखा,,,,,,,,,कही हम सबने पृथ्वी के साथ कोई ज्यादती तो नहीं कर दी ?”,रवि जी ने बुझे स्वर में कहा  

“ऐसा कुछ नहीं है दादा ! माँ-बाप होने के नाते आपने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया , ये आजकल के बच्चे किसी के साथ कुछ दिन बातचीत करते है और उसे प्यार समझकर शादी के सपने देखने लगते है,,,,,,,,माँ-बाप से बेहतर उनके बच्चो के लिए कोई नहीं सोच सकता , आप ये सब सोचकर खुद को गिल्ट में मत डालिये,,,,,,!!”,चाचा ने कहा

“प्रवीण सही कह रहा है , और क्या गारंटी है पृथ्वी ने जिस लड़की को पसंद किया है वो जिंदगीभर उसका साथ निभा पायेगी। जब जिम्मेदारियां सर पर पड़ती है ना तो ये प्यार व्यार सब हवा हो जाता है,,,,,,,,!!”,नीलम ने कहा
“लेकिन ऐसे कब तक रहेगा ? कभी न कभी तो शादी करनी होगी न उसे , और क्या पता शादी के बाद वह उस लड़की को भूल जाये”,बड़ी मम्मी ने कहा

“आई ! वो पहले ही इन सब से बहुत परेशान है अभी शादी करके क्यों उसकी परेशानी और बढ़ाना चाहते है आप लोग,,,,,,,,,,ठीक है उसने किसी लड़की को पसंद किया लेकिन उसने खुद से कोई फैसला नहीं किया पहले घर पर बताया है , आप लोगो को उसे थोड़ा वक्त देना चाहिए वो धीरे धीरे सम्हाल लेगा खुद को उसके बाद शादी का सोचे तो अच्छा है”,हिमांशु ने कहा

बड़े पापा ने हिमांशु की तरफ देखा और कहा,”जैसे तुमने सबके खिलाफ जाकर शादी कर ली तुम चाहते हो हम सब बैठकर उस दिन का इंतजार करे,,,,,,,पृथ्वी की पसंद से किसी को कोई दिक्कत नहीं है लेकिन कम से कम लड़की उसके लायक तो हो,,,,,,,,पहले ही वह लड़की अपनी एक शादी तोड़ चुकी है तुम्हे लगता है वह इस घर में परिवार में एडजस्ट कर पाएगी”

अपने पापा की बात सुनकर हिमांशु खामोश हो गया तभी नीलम बोल पड़ी,”अरे दादा ! ऐसी लड़कियों का कोई भरोसा नहीं है , शादी निभा पायेगी भी या नहीं ,, आप कुछ भी कहिये लेकिन पृथ्वी का फैसला बहुत ही गलत है,,,,,!!!”

“आप सबकी बात ठीक है लेकिन अब क्या ? पृथ्वी हम में से किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है , शादी के लिए लड़की दिखाओ तो चुपचाप देख लेगा और मना कर देगा,,,,,,,तो क्या वो जिंदगी भर ऐसे ही रहने वाला है ?”,लता ने मायूस होकर कहा

“अब तो बस एक ही इंसान है जो पृथ्वी को शादी के लिए मना सकता है”,नीलम भुआ ने कहा
“कौन ?”,बड़े पापा ने कहा तो बाकि सब नीलम भुआ की तरफ देखने लगे। नीलम भुआ कुछ देर खामोश रही और फिर कहा,”आई को बुला लेते है , अब वही है जो पृथ्वी को शादी के लिए मना सकती है क्योकि पृथ्वी के सबसे ज्यादा करीब कोई है तो वो है आई और पृथ्वी हम सब की बात टाल सकता है लेकिन उनकी बात कभी नहीं टालेगा”

लता ने सुना तो उसे राहत मिली , बाकि सबको भी नीलम की बात सही लगी तो उन्होंने उस पर सहमति जताई। बड़े पापा ने प्रवीण चाचा से कहकर आई को मुंबई बुलाने को कहा और आज की फॅमिली मीटिंग में एक बार फिर पृथ्वी की किस्मत का फैसला कर दिया गया जिसके बारे में पृथ्वी को कोई खबर तक नहीं थी,,,,,,,,,,,!!

सिरोही , राजस्थान
बैंक से छुट्टी होने पर अवनि घर जाने के लिए निकल गयी , आज उसका मन थोड़ा उदास था और भारी भी इसलिए वह शिव मंदिर चली आयी। मंदिर आकर अवनि ने महादेव के दर्शन किये और हाथ जोड़कर उन्हें देखते हुए मन ही मन प्रार्थना करने लगी “महादेव ! आपने मुझे वो सब दिया है जो मेरे लिए सही था और सिर्फ इसलिए मुझे कभी आपसे कोई शिकायत नहीं रही ,

आज मैं आपसे अपने लिए प्रार्थना करने नहीं आयी हूँ महादेव मैं आज किसी और की ख़ुशी के लिए प्रार्थना करने आपके सामने खड़ी हूँ। वो लड़का सच में पागल है महादेव , वो एक ऐसी जिद कर बैठा है जो अगर पूरी हुई तो न जाने कितने ही लोगो के दिल टूटेंगे , कितने ही लोगो को ठेस पहुंचेगी।

मैं जानती हूँ इस वक्त वो बहुत दर्द और तकलीफ में है , उसने मुझसे ये कह तो दिया कि मैं उसे भूल जाऊ लेकिन वो खुद मुझे कभी नहीं भूल पायेगा,,,,,,,,,,,मैं उसकी जिंदगी में शामिल होकर उसकी तकलीफ और बढ़ाना नहीं चाहती महादेव इसलिए उस से दूर हूँ , जब वो मेरे साथ था तब मैंने उसकी भावनाओ को समझकर भी नजरअंदाज किया ताकि प्यार के नाम पर उसे वो तकलीफ ना हो जो मुझे हुई , हमारा मिलना शायद नसीब में था ही नहीं महादेव , लेकिन वो इस बात को कभी स्वीकार नहीं करेगा जिद्दी जो है,,,,,,,,,,,,

वो तो आपको भी नहीं मानता पर मैं चाहती हूँ महादेव् , और पुरे दिल से चाहती हूँ कि आप कुछ तो ऐसा करे जिस से वो आपको मानने लगे , आप पर विश्वास करने लगे ताकि उसका दर्द कम हो जाये,,,,,,,,,,,वो मेरी जिंदगी में मुझे ख़ुशी देने आया था पर उसे क्या पता था मेरी जिंदगी का दर्द उसके हिस्से में आ जाएगा,,,,,,,,,,,,,,वो बुरा लड़का नहीं है महादेव बस उसे आपसे थोड़ी सी शिकायत है क्योकि आपने उसे वो नहीं दिया जो वो चाहता है,,,,,,,,,,,पर वो ये नहीं समझता कि कुछ लोग हमारी किस्मत में नहीं होते,,,,,,,,वो बस कुछ वक्त के लिए हमारी जिंदगी में आते है और फिर चले जाते है ,

उसके मन को इतना मजबूत बना दीजिये महादेव कि उसे कभी मुझे छोड़ने का अफ़सोस ना हो और वो ख़ुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सके। उसे हमेशा खुश रखना महादेव , वो आपसे शिकायत भी रखे तब भी हमेशा उसके साथ रहना वैसे ही जैसे अब तक मेरा साथ दिया,,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी के लिए महादेव से प्रार्थना करते हुए अवनि की आँखों में आँसू भर आये। उसे पृथ्वी के चले जाने का इतना दुःख नहीं था जितना दुःख इस बात से था कि अब पृथ्वी ईश्वर से ही नाराज होकर बैठ गया है। वह अवनि के लिए उनके भी खिलाफ खड़ा हो गया है।

अवनि ने अपने आँसुओ को आँखों में ही रोक लिया और जाने के लिए जैसे ही मुड़ी नजर मंदिर के प्रांगण में खड़े सिद्धार्थ पर चली गयी जो उदास नजरो से अवनि को ही देख रहा था। आज पहली बार सिद्धार्थ को देखकर अवनि का दिल नहीं धड़का , ना ही उसे सिद्धार्थ से डर लगा , ना ही सिद्धार्थ को देखकर कोई भाव उसके मन में आये वह बस नम आँखों से उसे देख रही थी।

सिद्धार्थ का दिल किया जाकर अवनि से बात करे लेकिन उसे बीती मुलाकात की बातें याद आ गयी जब उसने अवनि को परेशान ना करने की बात की थी। वह आगे बढ़ गया और प्रशाद पंडित जी को देकर हाथ जोड़कर महादेव की मूर्ति के सामने खड़े होकर प्रार्थना करने लगा,”मैं जानता हूँ मैंने अवनि को बहुत दुःख दिया है , उसका दिल दुखाया है , उसकी आँखों में आँसू दिए है , मैं ये भी जानता हूँ कि ये सब के लिए वो मुझे कभी माफ़ नहीं करेगी ,, मैं बस इतना कहना चाहता हूँ महादेव कि कुछ देर पहले आपके सामने खड़े होकर उसने आपसे जो माँगा बस वो उसे मिल जाये , इस से ज्यादा मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए”

पंडित जी की आवाज से सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी वे उसे प्रशाद लेने के लिए बुला रहे थे। सिद्धार्थ ने पंडित जी से प्रशाद लिया और जेब से 100 का नोट निकाला लेकिन उसे दान-पात्र में नहीं डाला और चुपचाप वहा से निकल गया। पंडित जी ने उसे हैरानी से देखा और फिर अपने काम में लग गए। सिद्धार्थ बाहर आया , अवनि मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी थी। दूसरी तरफ बैठकर सिद्धार्थ अपने जूते पहनने लगा और जूते पहनकर जैसे ही आगे बढ़ा सामने से आते एक बुजुर्ग आदमी से टकरा गया।

आदमी के हाथ में थाली थी जिसमे प्रशाद और पूजा के सामान के साथ उसी थाली में एक मुट्ठी लाल सिंदूर भी रखा था जो कि टकराने की वजह से सिद्धार्थ के सफ़ेद शर्ट पर गिर गया। अवनि वहा से पहले ही जा चुकी थी
“अरे माफ़ करना बेटा , तुम्हारा कमीज खराब हो गया”,आदमी ने घबराकर कहा
“कोई बात नहीं ! मेरी वजह से आपका प्रशाद गिर गया,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने अपनी शर्ट पर गिरे सिंदूर को झाड़ने लगा।

आज पहली बार ऐसा हुआ जब सिद्धार्थ ने किसी पर गुस्सा नहीं किया , ना ही उसे गुस्सा आया उल्टा वह सामने खड़े बुजुर्ग से खुद माफ़ी मांग रहा था। सिद्धार्थ में अचानक ये बदलाव अवनि के जाने की वजह से थे या वह फिर दिखावा कर रहा था ये तो अब वही जानता था। बुजुर्ग आदमी आगे बढ़ गया और सिद्धार्थ भी मंदिर से बाहर निकल गया  

अवनि जैसे ही मंदिर से बाहर आयी उसके पास सुरभि का फोन आया और उसने अवनि को मंदिर के बाहर वाली दुकान से हींग कचौरी लेकर आने को कहा। अवनि सुरभि के लिए कचौरी लेने दुकान पर चली आयी , पास ही में प्रशाद की दूकान थी और इत्तेफाक से सिद्धार्थ भी अपने प्रशाद के पैसे देने उस दूकान पर चला आया। सिद्धार्थ ने अवनि को नहीं देखा वह दुकानवाले से बात करने में व्यस्त था लेकिन अवनि की नजर सिद्धार्थ पर पड़ी तो वह उसने दुकानवाले से जल्दी देने को कहा क्योकि वह बस यहाँ से निकलना चाहती थी।

“भैया कुछ खाने को दे दो ना,,,,,,,,,!!”,एक छोटे से लड़के ने आकर सिद्धार्थ की बाँह खींचकर कहा तो सिद्धार्थ ने लड़के की तरफ देखा
कुछ ही दूर खड़ी अवनि की आँखों के सामने वो पल आ गए जब सिद्धार्थ ऐसे ही माँगने वाले मजबूर बच्चो को गुस्से से घुड़क दिया करता था या बिना कुछ दिए भगा दिया करता था। अवनि खामोश आँखों से बच्चे और सिद्धार्थ को देख रही थी। सिद्धार्थ ने बच्चे को देखा और फिर बगल की दुकानवाले से कहा,”सुनो भाई !
इसको जो खाना है वो दे दो पैसे मैं दे दूंगा,,,,,,,!!”

अवनि ने सुना तो हैरानी हुई , सिद्धार्थ का ये बदला हुआ रूप देखकर उसे ख़ुशी कम और हैरानी ज्यादा हुई। लड़का ख़ुशी ख़ुशी अवनि की तरफ चला आया और दुकानवाले से कचौरी देने को कहा। अवनि ने अपना सामान लिया और वहा से चली गयी , अवनि के जाने के बाद सिद्धार्थ आया उसने वही 100 रूपये का नोट जेब से निकाला जिसे वह मंदिर में चढाने वाला था और दुकानवाले को दे दिया। दुकानवाले ने अपने रूपये काटे और बाकि सिद्धार्थ की तरफ बढ़ा दिए तो सिद्धार्थ ने बचे रूपये लड़के को दिए और उसके सर पर हाथ घुमाकर वहा से निकल गया।

मंदिर के रास्ते से सड़क पर आकर सिद्धार्थ और अवनि दोनों विपरीत दिशाओ में बढ़ गए। सिद्धार्थ के मन में जहा अवनि को लेकर कोई उलझन नहीं था बस उसके लौट आने का इंतजार था तो वही अवनि के मन में भी सिद्धार्थ के लिए कोई बेचैनी नहीं थी , ना ही उसके बदले व्यवहार को लेकर कोई भाव,,,,,,,,,,,!!

अवनि घर चली आयी उसने सुरभि को सिद्धार्थ के बारे में कुछ नहीं बताया वह सुरभि को परेशान करना नहीं चाहती थी। रात के खाने के बाद अवनि फिर अपनी किताब लिखने में बिजी हो गयी।

पृथ्वी के घरवालों ने मिलकर ये फैसला किया कि अब पृथ्वी की दादी को मुंबई बुलाया जाये ताकि वे पृथ्वी को समझाए और शादी के लिए मना ले और वैसा ही हुआ 1 हफ्ते बाद दादी मुंबई आने वाली थी और सभी खुश थे सिवाय पृथ्वी के , हालांकि उसे नहीं पता था दादी यहाँ क्यों आ रही है ? वह अब भी उदास सा केलेण्डर के दिन खत्म होने का इंतजार कर रहा था , आने वाला कल महीने का आखरी दिन था , अवनि से बात किये एक महीना गुजर चूका था और हर गुजरने वाला दिन पृथ्वी के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं था , सिर्फ वही जानता था अवनि के बिना ये एक महीना उसने कैसे बिताया था ?

रात में खाना खाकर वह सोने चला गया उसे बस सुबह का इंतजार था , कुछ तो ख़ास था कल की सुबह में जिसका इंतजार पृथ्वी पिछले एक महीने से कर रहा था और हर रोज कैलेंडर की तारीख मिटा रहा था अब बस महीने की आखरी तारीख बची थी जिस पर क्रॉस का निशान लगना बाकि था !

उसी रात अवनि अपने लेपटॉप के सामने बैठी मेल बॉक्स की स्क्रीन को देख रही थी। खिड़की के पास खड़ी सुरभि फोन पर अनिकेत से बात कर रही थी। रात के 11.30 बज रहे थे और अगला दिन होने में बस आधा घंटा बचा था। आने वाला कल अवनि के लिए ख़ास था शायद इसलिए वह पिछले एक महीने से उंगलियों पर दिन गिन रही थी। अवनि ने मेल बॉक्स में पृथ्वी का मेल ID डाला और लिखना शुरू किया , मेल लिखते हुए अवनि के चेहरे पर तकलीफ और आँखों में उदासी के भाव थे।

उसका मन भारी हो रहा था और गले में चुभन का अहसास हो रहा था। आने वाला कल शुरू होने के साथ ही वह पृथ्वी को ये मेल भेज देना चाहती थी। अवनि ने मेल लिखा और जैसे ही 12 बजे पृथ्वी को भेजकर लेपटॉप बंद कर दिया। सुरभि ने जब अवनि को मेल लिखते देखा तो हल्का सा मुस्कुराई।
“हेलो सुरभि ! क्या हुआ तुम बोल क्यों नहीं रही ?”,फोन के दूसरी तरफ से अनिकेत की आवाज आयी।
“मोहब्बत का एक नया रूप देख रही हूँ,,,,,,,,!!”,सुरभि ने अवनि की तरफ देखते हुए अनिकेत से कहा
“मतलब ?”,अनिकेत ने पूछा

सुरभि ने एक गहरी साँस ली और कहा,”कुछ नहीं,,,,,,,,,,,,!!”
अनिकेत ने सुरभि से कुछ देर बात की और फिर फोन काट दिया। सुरभि भी आकर बिस्तर पर अवनि के बगल में लेट गयी।
कोई जाने या ना जाने पर अवनि और पृथ्वी का दिल जानता था क्योकि वो उंगलियों पर गिन रही थी दिन बस उसे एक मुबारकबाद देने के लिए , वो कैलेंडर की तारीखे मिटा रहा था रोज सिर्फ उस एक मुबारकबाद के लिए और इन दोनों बातों में बस फर्क इतना था कि सिर्फ वो ही जानते थे क़ी “इंतजार” दोनों तरफ था।

( आखिर ऐसा क्या होने वाला था आने वाले कल में जिसका इंतजार पृथ्वी और अवनि दोनों को था ? क्या पृथ्वी की दादी मना पायेगी पृथ्वी को शादी के लिए या पृथ्वी लेगा उनकी मदद ? आखिर पृथ्वी के लिए मेल लिखते हुए क्यों हुआ अवनि का मन भारी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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3 comments

Kshmata Chauhan December 16, 2025 - 10:57 am

Avni ne mail m Prithvi ko kya likha hoga…kahin usne Prithvi ko usse hamesha hamesha bhoolne k liye to wada to nhi le liya hoga…mann darr rha hai…ki kya hoga…aur yeh Prithvi kyu next month ka intzar kar rha hai…kuch special hai kya…kya dadi aakar Prithvi ka sath degi ya uski mushkil ko badhayegi… bahot tension hai yr

Reply
Annie December 16, 2025 - 1:22 pm

90 part upload kr dijiye pls Mam 🙏

Reply
Annie December 17, 2025 - 9:32 am

90 part please upload

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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