Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 104

by Story With Sanjana January 6, 2026
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Pasandida Aurat – 104

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

विश्वास जी अब इस दुनिया में नहीं रहे , वे अवनि को हमेशा के लिए अनाथ करके जा चुके थे। अवनि फटी आँखों से विश्वास जी को देखते रही ना वह रो पायी ना ही कुछ बोल पायी वह पत्थर हो चुकी थी। ICU के दरवाजे पर खड़े सिद्धार्थ ने जब देखा कि अवनि के पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे तो वह जल्दी से अवनि के पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”अवनि,,,,,,!!”

`अवनि ने कुछ नहीं कहा वह बस खाली आँखों से विश्वास जी के पार्थिव शरीर को देखे जा रही थी। नर्स ने जब देखा विश्वास जी इस दुनिया में नहीं रहे तो उसने जल्दी से डॉक्टर को इन्फॉर्म किया और खुद उनकी तरफ चली आयी। मॉनिटर पर चलती सीधी लाईने बता रही थी कि विश्वास जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। कुछ ही देर में डॉक्टर और उनकी टीम वहा आयी। डॉक्टर ने चेक किया और कहा,”He is no more”

डॉक्टर की बात सुनते ही अवनि फफक कर रो पड़ी , वह खुद को सम्हाल नहीं पायी। वहा मौजूद सभी लोगो के चेहरे पर उदासी थी और हर किसी को अवनि से हमदर्दी होने लगी।  
नर्स ने अवनि के साथ सिद्धार्थ को वहा देखा तो उस से कहा,”आप इन्हे लेकर बाहर जाईये प्लीज”
सिद्धार्थ ने हामी में गर्दन हिलायी और अवनि को उठाते हुए कहा,”अवनि ! अवनि सम्हालो खुद को , आओ मेरे साथ बाहर चलो”

“पापा,,,,,,,,,आप मुझे छोड़कर नहीं जा सकते,,,,,,मेरे पापा नही रहे सिद्धार्थ , वो मुझे अनाथ करके चले गए,,,,,,,,,मेरे पापा”,अवनि ने रोते हुए सिद्धार्थ के शर्ट की कोलर पकड़कर कहा और अपना मुंह सिद्धार्थ के सीने में छुपा लिया। अवनि को ऐसे रोते देखकर सिद्धार्थ की आँखों में भी नमी उभर आयी। उसने अवनि का सर सहलाया और उसे बाहर ले आया।

ICU से बाहर आते ही अवनि की नजर कौशल चाचा पर पड़ी और वह उनके गले लगकर फूट फूट कर रोने लगी। अवनि को रोते देखकर सीमा और कार्तिक समझ गए कि विश्वास जी अब इस दुनिया ,  कार्तिक की आँखों में आँसू भर आये और सीमा अपनी साड़ी का पल्लू मुँह में दबाकर रोने लगी। कौशल चाचा भी रो पड़े और अवनि को सम्हालने की नाकाम कोशिश करने लगे। अवनि घुटनो के बल नीचे गिर गयी और रोने लगी। डॉक्टर अपनी टीम के साथ बाहर आया उन्हें देखकर कौशल चाचा ने सीमा से कहा,”सीमा ! सम्हालो इसे”

सीमा ने आकर अवनि को सम्हाला लेकिन अवनि चुप होने का नाम नहीं ले रही थी आखिर उसने जो खोया उसका दर्द उस से ज्यादा भला कौन महसूस कर सकता है ? सिद्धार्थ ने देखा तो उसने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और अवनि की तरफ चला आया। सिद्धार्थ ने अवनि की बाँहो को  थामकर उसे उठाया और पास ही पड़ी बेंच पर बैठा दिया। सिद्धार्थ ने कार्तिक से पानी लेकर आने को कहा और खुद अवनि के बगल में बैठकर उसे चुप करवाने लगा लेकिन अवनि इस वक्त अपनी सुध बुध भूल चुकी थी , उसे होश नहीं था।

वह बस अपने पापा को खो देने के गम में थी। सीमा सिद्धार्थ को पहली बार देख रही थी और उसे अवनि की परवाह करते देखकर उसने इतना अंदाजा तो लगा लिया कि जरूर सिद्धार्थ और अवनि पहले से एक दूसरे को जानते है लेकिन ऐसे माहौल में सिद्धार्थ से कुछ भी पूछना सीमा को सही लगा , इस वक्त उन्हें बस अवनि की परवाह थी और देखते ही देखते अवनि बेहोश हो गयी।

“अवनि,,,,,,,,!!”,सीमा चाची चिल्लाई ये देखकर कौशल चाचा और डॉक्टर अवनि के पास आये। डॉक्टर ने अवनि की नब्ज चेक की और सिद्धार्थ से कहा,”इन्हे तुरंत अंदर लेकर आईये”
सिद्धार्थ ने अवनि को गोद में उठाया और लेकर अंदर चला आया। विश्वास जी का पार्थिव शरीर जिस बिस्तर पर था उसी के बगल वाले बिस्तर पर अवनि थी और डॉक्टर उसे चेक कर रहे थे। अवनि को विश्वास जी के चले जाने का गहरा सदमा लगा और इसी वजह से वह अचानक बेहोश हो गयी।

डॉक्टर ने सिद्धार्थ और कौशल चाचा को बाहर भेजा और नर्स से इंजेक्शन तैयार करने को कहा। उन्होंने अवनि को इंजेक्शन लगा दिया जिस से उसे कुछ देर के लिए आराम मिले। अवनि को आराम करने के लिए छोड़कर डॉक्टर बाहर आ गए। उन्होंने कौशल और सिद्धार्थ से बात की और हॉस्पिटल की सभी फॉर्मेलिटी पूरी कर विश्वास जी को घर ले जाने को कहा।

डॉक्टर वहा से चला गया और कौशल चाचा अपने बड़े भाई की मौत से दुखी होकर बेंच पर आ बैठे। विश्वास जी के चले जाने की खबर सुनकर कौशल चाचा बुरी तरह से टूट चुके थे , उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। कार्तिक पानी ले आया लेकिन अवनि वहा नहीं थी , वह अपने पापा के पास आया तो सिद्धार्थ ने उसके हाथ से पानी लेकर कौशल चाचा को पिला दिया। उनकी हालत देखकर सिद्धार्थ ने कार्तिक से कहा,”तुम मेरे साथ आओ”

सिद्धार्थ कार्तिक को लेकर वहा से चला गया और सीमा रोते हुए कौशल चाचा की तरफ चली आयी। कौशल चाचा रोये जा रहे थे तभी उनका फोन बजा। फ़ोन मयंक का था कौशल चाचा ने रोते हुए कहा,”मयंक ! हमारे भाईसाहब अब इस दुनिया में नहीं रहे,,,,,,,,,,हम सब अनाथ हो गए मयंक , अनाथ हो गए”
मयंक ने जब सुना तो उसके पैरो तले जमीन खिसक गयी और आँखों से आँसू झर झर बहने लगे। मयंक ने फोन काटा और तुरंत हॉस्पिटल के लिए निकल गया।

रिसेप्शन पर आकर सिद्धार्थ ने सभी फॉर्मेलिटी पूरी की और हॉस्पिटल का बिल भी खुद भरा , इस वक्त अवनि और उस के घरवाले दुःख में थे और सिद्धार्थ उन्हें ये सब करने के लिए नहीं कह सकता था। सिद्धार्थ जब फाइल में साइन कर रहा था तो उसने देखा पास ही खड़ा कार्तिक रो रहा है। सिद्धार्थ साइन करके कार्तिक के पास आया और उसे गले लगाकर कहा,”हिम्मत से काम लो , ईश्वर ने उनकी जिंदगी में इतना ही वक्त लिखा था शायद ,, तुम शायद घर में सबसे बड़े लड़के हो ऐसे कमजोर पड़ोगे तो बाकी सब को कौन सम्हालेगा ?

अवनि की तबियत भी ख़राब है ऐसे में उसे तुम सब की जरूरत है,,,,,,,,,,,आओ चलो अंकल की बॉडी को घर लेकर चलते है”
सिद्धार्थ की बातो से कार्तिक को थोड़ी हिम्मत मिली उसने अपने आँसू पोछे और सिद्धार्थ के साथ चल पड़ा। डॉक्टर ने पोस्टमार्टम के लिए कहा लेकिन सिद्धार्थ ने कठोरता से मना कर दिया। वह जानता था अवनि ऐसा कभी नहीं होने देगी। सिद्धार्थ ने सभी डॉक्युमेंट्स बनवाये तब तक मयंक भी वहा आ पहुंचा। उसने कौशल और सीमा को सम्हाला लेकिन अपने बड़े भाई की मौत का सुनकर खुद भी बच्चो की तरह रो पड़ा।  

अवनि को अभी तक होश नहीं आया था ऐसे में उसे यहाँ अकेले छोड़ना किसी को सही नहीं लगा तब सिद्धार्थ ने कहा,”आप सब अंकल की बॉडी लेकर घर चलिए , अवनि के पास मैं रुक जाता हूँ जैसे ही उसे होश आएगा मैं उसे लेकर घर आ जाऊंगा”
“लेकिन आप कौन है बेटा ? अवनि ने कभी आपके बारे में जिक्र नहीं किया,,,,,,,,,,!!!”,कौशल चाचा ने मायूसी भरे स्वर में कहा

“अवनि का दोस्त समझिये अंकल,,,,,,,,,आप चिंता मत कीजिये मैं खुद उसे लेकर घर आऊंगा , अवनि मेरी जिम्मेदारी है”,सिद्धार्थ ने कहा
मयंक ने सिद्धार्थ के कंधे पर हाथ रखा और कहा,”उसका ख्याल रखना”
सिद्धार्थ को अवनि के साथ छोड़कर बाकि सब विश्वास जी की बॉडी के साथ हॉस्पिटल से निकल गए। सिद्धार्थ उदास सा ICU के बाहर पड़ी बेंच पर आ बैठा। उसने अपने हाथो की उंगलियों को आपस में फंसाकर होंठो से लगा लिया और सोच में पड़ गया।

अवनि के साथ जो हुआ वो सब जानकर सिद्धार्थ को बहुत दुःख हो रहा था और उस से भी ज्यादा दुःख था उसे अपने किये बर्ताव का जो उसने अवनि के साथ किया था।

अवनि को लिफ्ट देने के बाद से ही सिद्धार्थ उसे लेकर परेशान था , वह रातभर अवनि के बारे में सोचता रहा और सुबह जल्दी अपनी गाड़ी से उदयपुर चला आया। सिद्धार्थ का उदयपुर आना इत्तेफ़ाक ही था क्योकि उसे नहीं पता था अवनि के पापा को दिल का दौरा पड़ा है और वे हॉस्पिटल में है।

सिद्धार्थ सीधा अवनि के घर आया था और वहा से उसे ये सब पता चला। सिद्धार्थ को अवनि की फ़िक्र होने लगी इसलिए वह हॉस्पिटल चला आया जिसमे सिद्धार्थ का कोई स्वार्थ नहीं था वह बस अवनि को परेशान नहीं देख पाया और हॉस्पिटल आकर उसे धक्का लगा जब उसने देखा कि अवनि के पापा अब इस दुनिया में नहीं रहे।

सुरभि उदयपुर में ही थी और आज वह सिरोही वापस जाने वाली थी इसलिए सुबह सुबह अवनि के घर चली आयी ताकि विश्वास जी से मिलकर अवनि के लिए कोई सामान ले जाना हो तो वह ले जाए लेकिन घर के दरवाजे पर भीड़ देखकर सुरभि के कदम ठिठके , अगले ही पल उसके कानो में रोने की आवाजे पड़ी तो किसी अनहोनी के डर से उसका दिल धड़क उठा। सुरभि धड़कते दिल के साथ घर के अंदर आयी तो देखा , घर के आँगन में सफ़ेद चद्दर से ढका विश्वास जी का पार्थिव शरीर पड़ा है। ये देखते ही सुरभि की आँखे फ़टी की फ़टी रह गयी।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और पहला ख्याल उसे अवनि का आया। उसने पास ही खड़े कार्तिक से कहा,”अवनि ! अवनि कहा है ?”
कार्तिक ने सुरभि को अवनि के हॉस्पिटल में होने की बात बताई तो सुरभि का दिल बैठ गया। उसने सपने में भी नहीं सोचा था अवनि की जिंदगी में ऐसा कोई पल भी आएगा। वह बाहर की तरफ भागी , कार्तिक ने उसे आवाज दी लेकिन सुरभि तब तक जा चुकी थी। आस पड़ोस के लोग जमा होने लगे और हर कोई विश्वास जी के चले जाने का शोक मना रहा था।

घर से बाहर आकर सुरभि ने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और हॉस्पिटल की तरफ निकल गयी। उसकी आँखों से आँसू बहते जा रहे थे। स्कूटी हॉस्पिटल के बाहर आकर रुकी , सुरभि ने जल्दी जल्दी उसे पार्किंग में खड़ा किया और अंदर चली आयी। सुरभि ने किसी से कुछ नहीं पूछा और सीधा ऊपर चली आयी। चेहरे पर दर्द और घबराहट के भाव लिए वह ICU की तरफ बढ़ी कि सामने बेंच पर बैठे सिद्धार्थ को देखकर उसके चेहरे के भाव बदल गए और आँखों में गुस्सा तैरने लगा। सुरभि को वहा देखकर सिद्धार्थ अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ।

सुरभि सिद्धार्थ की तरफ आयी और गुस्से से कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? क्या तुम्हे दिखाई नहीं देता उसकी जिंदगी में पहले से कितने दुःख है , अब यहाँ आकर तुम क्यों उसके दुःख को और बढ़ाना चाहते हो ?”
“सुरभि तुम मुझे गलत समझ रही हो मैं यहाँ बस अवनि,,,,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने इतना ही कहा कि सुरभि ने गुस्से में आकर एक थप्पड़ सिद्धार्थ के गाल पर जड़ दिया और कहा,”खबरदार जो तुमने अपने मुँह से अवनि का नाम भी लिया , पहले क्या कम तकलीफ दी है तुमने उसे , तुम्हे यहाँ नहीं होना चाहिए , चले जाओ यहाँ से,,,,,,,,,,,!!”

सुरभि से थप्पड़ खाने के बाद भी सिद्धार्थ वही खड़ा था , ना उसकी आँखों में शिकायत के भाव थे ना ही माथे पर कोई शिकन , उसने धीमे स्वर में कहा,”जब तक अवनि को होश नहीं आ जाता और मैं उसे उसके घर नहीं पहुंचा देता तब तक मैं कही नहीं जाऊंगा”

सुरभि ने सुना तो गुस्से से सिद्धार्थ को घूरने लगी हालाँकि वह नहीं जानती थी कि सिद्धार्थ यहाँ पहले से मौजूद था। उसने सिद्धार्थ से आगे कोई बहस नहीं की और ICU के पास पड़ी बेंच पर आ बैठी। एक तरफ सिद्धार्थ बैठा था और दूसरी तरफ सुरभि थी और दोनों ही अवनि से बेहद प्यार करते थे। अवनि की परवाह करते हुए सुरभि को ख्याल आया और वह अपने फ़ोन में कुछ टाइप करने लगी।

कुछ देर बाद नर्स ने आकर बताया कि अवनि को होश आ गया है ये सुनते ही सिद्धार्थ और सुरभि दोनों साथ उठे और साथ ही अंदर जाने लगे तो सुरभि ने सिद्धार्थ को रोककर कहा,”उस पर तुम्हारा अब कोई हक़ नहीं है,,,,,,,,,,,इसलिए तुम यही रुको”
पहली बार सिद्धार्थ को सुरभि की बात पर गुस्सा नहीं आया ना ही कोई चिढ हुई बल्कि वह ख़ामोशी से पीछे हट गया और सुरभि अंदर चली गयी।  

सिद्धार्थ बाहर खड़े होकर दोनों का इंतजार करने लगा। सुरभि को देखकर अवनि उसके गले लगकर रोने लगी। पिता के चले जाने का दर्द उसकी आवाज से झलक रहा था। सुरभि भी अपने आँसू नहीं रोक पायी उसने जैसे तैसे करके अवनि को सम्हाला और बाहर लेकर आयी। सिद्धार्थ ने देखा तो वह अवनि के पास आया और कहा,”तुम ठीक हो ना अवनि ?”

“ये बिल्कुल ठीक है सिद्धार्थ और अब तुम्हे यहाँ से जाना चाहिए , अवनि को इसके घर मैं पहुंचा दूंगी वो भी सही सलामत”,सुरभि ने कठोरता से कहा हालाँकि अवनि खामोश थी उसकी आँखों के सामने बस विश्वास जी का चेहरा आ रहा जो आखरी वक्त में अवनि ने देखा था। सिद्धार्थ ने कुछ नहीं कहा वह अवनि को लेकर किसी तरह की जबरदस्ती नहीं करना चाहता था इसलिए पीछे हट गया और सुरभि उसे लेकर आगे बढ़ गयी। दो कदम चलकर ही अवनि लड़खड़ाई और सुरभि उसे सम्हाल नहीं पायी

अवनि जैसे ही गिरने को हुई सिद्धार्थ ने आगे बढ़कर उसे सम्हाल लिया और सुरभि की तरफ देखकर कहा,”तुम चाहो तो मुझे दो थप्पड़ और मार लेना लेकिन मैं अवनि को अकेला नहीं छोड़ सकता , इस हाल में तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,,,,,!!”

सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि खामोश हो गयी और इसके बाद दोनों अवनि को सम्हालकर नीचे ले आये। सिद्धार्थ ने अवनि को गाडी में बैठाया और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा। सुरभि अपनी स्कूटी से आयी थी इसलिए वह सिद्धार्थ की गाडी के साथ साथ चलने लगी।

सिद्धार्थ अवनि को लेकर सुख विलास भवन पहुंचा। उसने एक बार फिर अवनि को सहारा दिया और उसे लेकर अंदर आया। घर के बाहर और घर में जमा भीड़ देखकर अवनि को फिर से विश्वास जी का ख्याल आया और वह दहाड़े मारकर रोने लगी। सीमा और मीनाक्षी ने जैसे ही अवनि को देखा उसके पास आयी और उसे सम्हाला , अवनि रोते हुए विश्वास जी के पार्थिव शरीर के बगल में आ बैठी और रोने लगी। उसका रोना इतना दुखद था कि वहा मौजूद सबकी आँखों में नमी थी। सिद्धार्थ ये सब देख नहीं पाया तो बाहर चला आया और लॉन में एक तरफ खड़ा हो गया।

वक्त गुजरा और विश्वास जी के अंतिम संस्कार की तैयारियां होने लगी। सिद्धार्थ ने देखा कौशल चाचा और मयंक चाचा इस वक्त बुरी तरह टूट चुके है तो वह आगे आया और उनकी मदद करने लगा या यू कहे कि आस पड़ोस के लोगो के साथ मिलकर विश्वास जी के अंतिम संसार की तैयारी उसने अपने हाथो से खुद की। अंदर बैठी सुरभि ने जब सिद्धार्थ को ये सब करते देखा तो ना जाने क्यों उसे कुछ देर पहले सिद्धार्थ को मारे गए थप्पड़ का अफ़सोस हुआ। सुरभि ने सिद्धार्थ से ध्यान हटाया और अवनि को सम्हालने लगी।

सभी तैयारियां हो चुकी थी। विश्वास जी के पार्थिव शरीर को नहलाया गया , उन्हें नए कपडे पहनाये गए और सभी संस्कार करने के बाद उन्हें अर्थी पर लेटाकर फूलों से सजाया गया। सब होने के बाद आखरी दर्शन के लिए जब अवनि को बुलाया गया तो अवनि अपना सर उनके ललाट से लगाकर रोने लगी। बड़ी मुश्किल से अवनि को उनसे दूर किया गया और अंदर ले जाया गया। सिद्धार्थ भी सबके साथ वही मौजूद था ऐसे माहौल में भला वह घर कैसे जा सकता था ?

कौशल चाचा , मयंक चाचा और एक रिश्तेदार ने अर्थी के तीन हिस्सों को उठाया , चौथे हिस्से को उठाने के लिए सबने इधर उधर देखा तभी सिद्धार्थ आगे आया और पीछे वाले चौथे हिस्से को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया। घर का बड़ा बेटा होने के नाते कार्तिक ने अग्नि का मटका उठा लिया और अर्थी के आगे चलने लगा। सभी वहा से निकल गए और पीछे छोड़ गए रोती बिलखती अवनि को,,,,,,,,,,,,,,!!!

सोसायटी से होकर सभी सड़क पर चले आये और श्मशान घाट की तरफ जाने लगे। मयंक चाचा और कौशल चाचा ने अर्थी के आगे के हिस्से पकडे थे और सिद्धार्थ पीछे था। पडोसी , रिश्तेदार और विश्वास जी की पहचान के सब लोग इस शवयात्रा में शामिल थे और सबके चेहरे दुःख से भरे थे। मयंक चाचा आँखों में आँसू लिए आगे बढ़ रहे थे कि तभी उनकी बगल में कोई आया। मयंक चाचा ने जैसे ही देखा उसने अपने होंठो पर ऊँगली रख के चुप रहने का इशारा किया और चुपचाप मयंक की जगह खुद लेकर विश्वास जी की अर्थी को कंधा देते हुए आगे बढ़ गया।

( क्या सिद्धार्थ का उदयपुर आना सच में कोई इत्तेफाक था या वह चल रहा है अवनि को पाने के लिए फिर से कोई नयी चाल ? क्या सिद्धार्थ को लेकर दूर हो रही है सुरभि की ग़लतफ़हमी ? विश्वास जी अर्थी को कंधा देने वाला वह शख्स आखिर कौन है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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3 comments

Chaitali amdavadi January 7, 2026 - 12:06 am

Twist pe Twist aa rahe hai kahani me or ye kahani ko excited bana rahe hai
can’t wait for next part

Reply
Aashi January 7, 2026 - 11:08 am

Vo pkka prithvi hi h

Reply
kshitij vinayak January 7, 2026 - 11:09 am

pr agr isme bhi agr writer ne koi twist la diya toh kahi siddharth wala angle

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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