Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 111

by Story With Sanjana January 12, 2026
written by Story With Sanjana January 12, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat – 111

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

जयदीप अवनि की लिखी किताब पृथ्वी के हाथ में थमाकर चला गया और पृथ्वी धड़कते दिल के साथ एकटक उसे देख रहा था। उसने किताब को खोलकर देखा एक जानी पहचानी खुशबु पृथ्वी के नाक से टकराई , ये रजनीगंधा के फूल की खुशबु थी जो कि अवनि को बहुत पसंद था , गुलाब से भी ज्यादा और अवनि इसकी खुशबु से बना परफ्यूम इस्तेमाल किया करती थी। अवनि ने किताब के पन्नो में ऐसी खुशबु का इस्तेमाल क्यों किया पृथ्वी नहीं समझ पाया लेकिन अवनि की किताब अपने हाथ में देखकर उसकी आँखों में नमी तैर गयी।

उसने काँपती उंगलियों से किताब के पन्ने को छुआ लगा जैसे उसने अवनि के हाथ को छुआ हो। पृथ्वी ने पन्ना पलटा तो पाया सबसे ऊपर कहानी की शुरुआत में लिखा था “पृथ्वी” , पृथ्वी ने अपने नाम को छूकर देखा तो आखो में भरे आँसुओ में से एक बूँद लुढ़ककर किताब के पन्ने पर आ गिरी। अवनि पृथ्वी को अपनी कहानियो में शामिल करेगी ऐसा पृथ्वी ने सोचा नहीं था।

उसने एक गहरी साँस ली और किताब को बंद कर दिया। उसका मन भारी हो गया , वह अवनि को याद कर रहा था और चाहता था अभी इसी वक्त अवनि के सामने जाकर खड़ा हो जाए और पूछे उस से कि क्यों ? आखिर क्यों उसने पृथ्वी को अपनी जिंदगी में इतनी अहमियत दी ? पृथ्वी ने अपने शर्ट की बाजू से अपनी आँखों को पोछा और फिर उठकर केबिन से बाहर निकल गया , वह कुछ देर के लिए खुली हवा में जाना चाहता था और साँस लेना चाहता था।

“आह्ह्ह्हहची”,हॉल में सबके बीच बैठी अवनि ने जोर से छींका तो पास ही बैठी मीनाक्षी चाची ने कहा,”लगता है जमाई सा अवनि को याद कर रहे है”
मीनाक्षी की बात सुनकर बाकी सब हसने लगी और अवनि फीका सा मुस्कुरा दी। सुरभि कुछ ही दूर विश्वास जी के कमरे के पास दिवार से पीठ लगाए अवनि को देख रही थी। कितनी कोशिश की सुरभि ने अवनि को समझाने की लेकिन सच जानकर भी अवनि का दिल नहीं पिघला , लेकिन वह कर भी क्या सकती थी ?

अवनि जानती थी पृथ्वी के घरवाले कभी नहीं मानेंगे और अपनी ख़ुशी के लिए वह पृथ्वी की जिंदगी में अब और परेशानी देना नहीं चाहती थी। देखने वाले को भले ही ये बेवकूफी लगे लेकिन पृथ्वी और अवनि दोनों ही एक दूसरे की ख़ुशी के लिए एक दूसरे से दूर थे।

रात में सभी नाचने गाने का मजा ले रहे थे , सुरभि इस शादी से खुश नहीं थी लेकिन सिर्फ अवनि की ख़ुशी के लिए वह भी सबके साथ नाच गा रही थी। अवनि ने बहुत ही प्यारा अनारकली सूट और कंधे पर दुपट्टा डाला हुआ था , लम्बे बालों को गूंथकर चोटी बनायीं हुई थी , आँखों में काजल , होंठो पर लिपस्टिक और कानो में झुमके पहने थे लेकिन उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी उसके ललाट पर लगी छोटी काली बिंदी , अवनि सबके साथ खड़ी मुस्कुराते हुए सबको डांस करते देख रही थी।

कुछ देर बाद सलोनी आयी और अवनि का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले जाते हुए कहा,”अवनि दीदी मेरे साथ आईये न”
“कहा सलोनी ?”,अवनि ने सलोनी के साथ घर के अंदर जाते हुए कहा
“अरे आप आईये तो सही,,,,,,,,मुझे आपसे बहुत जरुरी काम है”,सलोनी ने कहा और अवनि को लेकर छत की सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी। उसके साथ चलते हुए अवनि उस से पूछती रही लेकिन सलोनी ने कुछ नहीं बताया और छत पर लाकर पीठ किये शख़्स के सामने करके कहा,”आप पर ये मेरा अहसान रहा”


अवनि ने पहले हैरानी से सामने खड़े शख्स को देखा और फिर जैसे ही सलोनी से कुछ कहने के लिए पलटी सलोनी वहा से चली गयी। अवनि वापस पलटी तब तक वह शख्स भी अवनि की तरफ पलट गया और जब अवनि ने उसे देखा तो उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। सामने सिद्धार्थ खड़ा था और अवनि को देखकर मुस्कुराए रहा था। सिद्धार्थ को अचानक यहाँ देखकर अवनि ने कहा,”तुम यहाँ ?”


“हाँ ! तुम्हे देखने का दिल किया तो चला आया , तुम्हे फोन किया लेकिन तुमने उठाया ही नहीं , मैसेज किया तो जवाब भी नहीं दिया तो सोचा क्यों ना डायरेक्ट आकर तुम से मिल लू,,,,,,,,,,,,अच्छी लग रही हो”,सिद्धार्थ ने प्यार से कहा उसकी निगाहे अवनि के चेहरे से हटने का नाम नहीं ले रही थी। सिद्धार्थ को अपनी ओर देखते पाकर अवनि ने कहा,”तुम्हे ऐसे यहाँ नहीं आना चाहिए , किसी ने देखा तो क्या सोचेंगे ?”
सिद्धार्थ अवनि के करीब आया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”क्या सोचेंगे अवनि ? यही सोचेंगे कि मैं तुम्हारे बिना दो दिन भी नहीं रह पाया”


सिद्धार्थ का यू करीब आना अवनि को बेचैन कर गया। अवनि की आँखों में परेशानी के भाव देखकर सिद्धार्थ पीछे हटा और मुस्कुराते हुए कहा,”पापा ने शादी के लिए ये तुम्हारे घर के पीछे वाला गेस्ट हॉउस ही बुक किया है , मेरे घरवाले और रिश्तेदार आज शाम ही उदयपुर आये है। पापा ने तो मना किया था कि शादी से पहले अपनी होने वाली दुल्हन से नहीं मिलना होता लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पाया और तुम्हे देखने चला आया,,,,,,,!!”


अवनि ने सुना तो फीका सा मुस्कुरा दी , उसके लिए यहाँ रुकना किसी घुटन से कम नहीं था लेकिन दो दिन बाद सिद्धार्थ से उसकी शादी थी और अवनि को अब सिद्धार्थ के साथ की आदत डालनी थी। सिद्धार्थ का फोन बजा , स्क्रीन पर गिरिजा जी नंबर देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”अच्छा अवनि मैं अब चलता हूँ,,,,,,,,,और हाँ घर में किसी से कहकर अपनी नजर उतरवा लेना , आज तुम कुछ ज्यादा ही प्यारी लग रही हो”
“हम्म्म्म थैंक्यू !”,अवनि ने कहा


सिद्धार्थ जाने लगा और जाते जाते रूककर अवनि के पास आया और अपने होंठो से उसके गाल को छूकर कहा,”आई लव यू , मैं जल्दी ही तुम्हे लेने आऊंगा हमेशा के लिए,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सिद्धार्थ को ये हक़ नहीं दिया था लेकिन वह सिद्धार्थ को ऐसा करने से रोक भी नहीं पायी ना ही कुछ कहा बस खामोश खड़ी सिद्धार्थ को देखते रही , सिद्धार्थ ने अवनि के गाल को थपथपाया और बाय कहकर वहा से चला गया। अवनि बुत बनी वही खड़ी रही  

सिद्धार्थ का छूना , उसका करीब आना , अवनि को घुटन का अहसास दिला रहा था।
“अवनि ! तुम यहाँ क्या कर रही हो ? नीचे सब तुम्हारे बारे में पूछ रहे है”,सुरभि ने आकर कहा
सुरभि की आवाज से अवनि की तंद्रा टूटी और वह उसके साथ नीचे चली आयी।
रात के खाने के बाद अवनि अपने कमरे में सोने चली आयी , सुरभि भी अवनि के घर रुक गयी और उसके कमरे में चली आयी। सुरभि बिस्तर पर लेटकर अपना फोन चलाने लगी और अवनि कमरे में यहाँ वहा घूमने लगी

उसका चेहरा बता रहा था कि वह बैचैन थी , अवनि उदास सी खिड़की के पास आकर खड़ी हो गयी और बाहर देखने लगी। सुरभि काफी देर से अवनि को नोटिस कर रही थी , उसने अपना फोन साइड में रखा और बिस्तर से उठकर कमरे में रखी स्टडी टेबल के पास आयी। उसकी दराज खोलकर उसमे से एक खाली खत निकाला और टेबल पर रखा पेन उठाकर अवनि की तरफ आकर दोनों उसकी तरफ बढ़ा दिए। अवनि ने बुझी आँखों से सुरभि को देखा तो सुरभि ने कहा,”जाने से पहले उसके लिए एक आखरी खत नहीं लिखोगी अवनि ?”


अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने खुद को मजबूत रखा और अपने आँसुओ को आँखो में ही रोक लिया। वह ख़ामोशी से उदास चेहरा लिए सुरभि को देखती रही तो सुरभि ने कहा,”मैं जानती हूँ तुम्हारा मन बैचैन है और बहुत कुछ है जो तुम पृथ्वी से कहना चाहती हो। कल के बाद तुम हमेशा के लिए किसी और की हो जाओगी , पृथ्वी आ तुम पर कोई हक़ नहीं रहेगा क्या आज रात तुम उसे आखरी हक़ नहीं दोगी अपने दिल की बात जानने का,,,,,,ये लो लिखो , ये खत उसे कभी मिलेंगे या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन इन्हे लिखकर शायद तुम्हारे दिल को एक आखरी बार सुकून मिल जाये”


कहते कहते सुरभि का मन भारी होने लगा , वह अवनि के सामने कमजोर पड़ना नहीं चाहती थी इसलिए बिस्तर की तरफ चली आयी और अवनि की तरफ पीठ करके लेट गयी।

अवनि ने हाथ में पकडे उस खाली खत को देखा और फिर अपनी स्टडी टेबल पर आ बैठी , उसकी आँखों में अभी भी नमी थी। उसने पेन का ढक्कन हटाया और पृथ्वी के लिए आखरी खत लिखने लगी। उस खत को लिखते हुए अवनि की आँखों में भरे आँसू जगह जगह उस खत पर भी गिरे और खत पर लिखे शब्दों की स्याही घुल गयी लेकिन अवनि ने लिखना जारी रखा।

उसने अपने दिल का हाल उस खत में लिखा और फिर उसे समेटकर लिफाफे में बंद कर दिया। अवनि ने खत पर एक तारीख लिखी और उसे दराज में रख दिया।
वह ख़ामोशी से कुछ देर वही बैठी रही और फिर उठकर बिस्तर पर चली आयी।

अगला पूरा दिन अवनि शादी से पहले की रस्मो में व्यस्त रही , उसके पास ना फुरसत से बैठने का वक्त था ना ही किसी से बात करने का , दोपहर बाद उसके हाथो और पैरों में मेहँदी लग चुकी थी इसलिए अवनि धुप में छत पर बैठी थी। सुरभि और बाकी सब भी वही मौजूद थे। देखते ही देखते शाम हुई और फिर रात हो गयी। अवनि इतना थक चुकी थी कि जल्दी ही सोने चली गयी लेकिन उसके बगल में लेटी सुरभि जाग रही थी , सुरभि को अभी भी उम्मीद थी कि कोई तो ऐसा चमत्कार हो कि ये शादी ना हो। सोचते सोचते सुरभि को भी नींद आ गयी।

अवनि तो सो चुकी थी लेकिन कोई था जो पूरी रात जाग रहा था। अपने फ्लेट की बालकनी में खड़ा पृथ्वी अवनि की लिखी नयी किताब को हाथो में लिए उसे पढ़ते हुए जाग रहा था। कितने दिनो के बाद आज पृथ्वी अपने फ्लेट में आया था ताकि इत्मीनान से इस किताब को पढ़ सके और कुछ वक्त अवनि की यादो के साथ बिता सके। पृथ्वी से ऑफिस से आने के बाद उस किताब को पढ़ना शुरू किया और पढ़ते पढ़ते सुबह हो गयी। सुबह के 6 बज रहे थे और आज संडे था इसलिए पृथ्वी को ऑफिस जाने की जल्दी भी नहीं थी।

उसने किताब को बंद किया और अवनि की पहली किताब के साथ सम्हालकर रख दिया। पृथ्वी ने महसूस किया कि किताब पढ़ते हुए वह एक मिनिट भी नहीं सोया था। वह सोफे पर आ बैठा और अपने हाथो की उंगलियों को आपस में फसाकर होंठो से लगा लिया , वह काफी गहरी सोच में था और उसके दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा था ये तो सिर्फ वही जानता था।


सोचते सोचते कब एक घंटा गुजर गया पृथ्वी को पता भी नहीं चला उसकी तंद्रा डोरबेल की आवाज से टूटी और वह चौंका। पृथ्वी अपने ख्यालो से बाहर आया और दरवाजा खोलने चला आया। पृथ्वी ने दरवाजा खोला तो देखा हाथ में बेट थामे सामने नकुल खड़ा है। पृथ्वी कुछ समझ पाता इस से पहले नकुल ने कहा,”मैं तेरे घर गया था आंटी ने बताया तू यहाँ है , चल ना आज सोसायटी में मैच है”


पृथ्वी को याद आया जब से अवनि से बात बंद हुई थी पृथ्वी ने बेट को हाथ तक नहीं लगाया था , वह खेलना छोड़ चुका था। उसने कुछ नहीं कहा और चुपचाप हॉल में चला आया। नकुल उसके पीछे पीछे अंदर आया और कहा,”क्या हुआ ?”
“आज उसकी शादी है”,पृथ्वी ने उदासीभरे स्वर में कहा
नकुल ने सुना तो वह भी उदास हो गया और अगले ही पल उसने कहा,”हां तो करने दे उसे शादी , दुनिया में लड़कियों की कमी है क्या ? तुझे उस से भी अच्छी लड़की मिलेगी”


“उस से अच्छी कोई और नहीं हो सकती”,कहते हुए पृथ्वी पलटा तो नकुल ने देखा उसकी आँखों में नमी थी
“तो अब तू क्या चाहता है ?”,नकुल ने हताश होकर कहा
पृथ्वी ने नम आँखों के साथ एक गहरी साँस ली और कहा,”मैं एक आखरी बार उसे देखना चाहता हूँ यार , मैं कोई ड्रामा क्रिएट नहीं करूंगा बस दूर से उसे देखकर वापस आ जाऊंगा,,,,,,,!!”
नकुल ने सुना तो उसे बहुत दुःख हुआ , पृथ्वी की तकलीफ उसकी आँखों में , उसके चेहरे पर और उसके शब्दों में झलक रही थी।

नकुल कुछ देर खामोश रहा और कहा,”चल”
पृथ्वी ने हैरानी से नकुल को देखा तो नकुल ने उसकी तरफ देखकर कहा,”चल”
पृथ्वी बस एकटक उसे देखता रहा तो नकुल उसके पास आया और कहा,”आज का मैच मैं अकेले हार भी गया तो कोई गम नहीं लेकिन तू जिंदगी का मैच नहीं हारना चाहिए,,,,,,,,चल , उदयपुर के लिए नेक्स्ट फ्लाइट 2 घंटे बाद है”
पृथ्वी ने सुना तो उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर बह गए और उसने आगे बढ़कर नकुल को गले लगा लिया।

नकुल के गले लगे पृथ्वी सुबकने लगा तो नकुल ने कहा,”और सिर्फ उसको देख के वापस आ जाना और आज के बाद उसका जिक्र करके रोया न तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा”
नकुल की बात सुनकर पृथ्वी ने उसे और कसकर गले से लगाया और फिर दूर होकर कहा,”बस देखकर आ जाऊंगा”
“चल मुँह धो ले ऐसे जाएगा तो अच्छा नहीं लगेगा और कपडे बदलकर आ मै तब तक टिकिट्स देखता हूँ”,नकुल ने कहा


पृथ्वी अपने कमरे में आया , एक शॉवर लिया और कबर्ड के सामने आकर कपडे ढूंढने लगा। उसके हाथ एक काले रंग की टीशर्ट लगी पृथ्वी ने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और पहन लिया। साथ में जींस पहना और टीशर्ट पर जैकेट पहन लिया। पृथ्वी ने बालों को सही किया और कमरे से बाहर जाने लगा। कमरे की चौखट पर आकर पृथ्वी के कदम रुके और वह वापस अंदर आया।


उसने कबर्ड खोला और उसमे रखे उस गुलाबी रंग के पाउच को निकाला जिसमे उसने अवनि की पायल को सम्हालकर रखा था। पृथ्वी ने उस पाउच को खोलकर पायल को अपने हाथ में उठाया और देखकर कहा,”आपकी अमानत आपको लौटाने का वक्त आ गया है मैडम जी”

पृथ्वी कमरे से बाहर चला आया और नकुल को साथ लेकर फ्लेट से बाहर निकल गया। पृथ्वी ने लता और रवि जी को नहीं बताया कि वह कहा जा रहा है। एक घंटे बाद पृथ्वी और नकुल एयरपोर्ट पहुंचे। पृथ्वी के पास नया फोन था नंबर भी नया था और अवनि का नंबर मुँह जबानी याद था लेकिन वह अवनि को फोन करके परेशान करना नहीं चाहता था। पृथ्वी फ्लाइट की तरफ बढ़ गया और नकुल वापस घर के लिए निकल गया।

सुख विलास , उदयपुर
सुबह से घर में चहल पहल थी , आज अवनि की शादी थी और शाम के बजाय सिद्धार्थ ने दोपहर में ये शादी करने की शर्त रखी ताकि शाम तक वह अवनि को लेकर सिरोही जा सके। घरवालों को भला इस से क्या ऐतराज होता। शादी गेस्ट हॉउस में थी इसलिए अवनि के घरवाले बारात और बारातियो के स्वागत में जुट गए जबकि सजी धजी अवनि अपने कमरे में शीशे के सामने बैठी थी। उसने हरे रंग का शादी का जोड़ा पहना था , गहनों से लदी थी बस दो चीजों की कमी थी एक हाथो में चूडियो की और दूसरा पैरो में पायल की

विश्वास जी और अवनि की माँ कविता आज अवनि के साथ नहीं थे इसलिए अवनि ने विश्वास जी की दी पायल उनका आशीर्वाद समझकर एक पैर में पहन ली , दूसरी पायल तो अवनि कब की खो चुकी थी। हाथो में चुडिया नहीं पहनी क्योकि जो चुडिया जोड़े के साथ आयी थी वो काफी बड़ी थी और उन्ही को बदलवाने सुरभि मार्किट गयी थी। अवनि मेहँदी से रचे हाथो को लिए खामोश बैठी थी। सुबह के 11 बज रहे थे और 2 घंटे बाद अवनि की सिद्धार्थ के साथ शादी थी

सिर्फ 2 घंटे और थे अवनि के पास उन अहसासों को जीने के लिए जो उसने पृथ्वी के साथ बिताये थे। अवनि ने धीरे से अपनी आँखे मूँद ली पृथ्वी से हुई पहली मुलाकात से लेकर आखरी बात तक अवनि को सब एक एक करके याद आने लगा। कुछ बाते ऐसी जिन्हे याद कर अवनि के चेहरे पर दर्द उभरा तो कुछ बातें ऐसी जिन्हे याद कर अवनि हल्का सा मुस्कुराई।
“मैडम जी,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि के कानो में पृथ्वी की आवाज पड़ी उसने अपनी आँखे खोली तो देखा खिड़की के पास अपने हाथो को बांधे खड़ा पृथ्वी मुस्कुराते हुए उसे ही देख रहा है।

(  क्या सिद्धार्थ जगा पायेगा अवनि के दिल में अवनि के लिए प्यार ? क्या अवनि निभा पायेगी अपने पापा से किया वादा ? क्या पृथ्वी रोक पायेगा अवनि की ये शादी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Kshmata Chauhan January 12, 2026 - 10:35 am

Dekho jitna mujhe pta hai, uske mutabik Avni aur Siddarth ki shaadi ho jayegi… aur Prithvi k samne hee inn dono ki shadi hogi… Avni aur Prithvi dono hee mazboor honge, lakin kuch kar nhi payenge… kya pta Surbhi Prithvi ko dekh le aur fir usko Avni se shadi k liye force kare…lakin hona na-mumkin hai…hey Mahadev kuch karo Avni aapki bhakar hai aur wo bhi khushi ki haqdar hai jo usko har haal m milni chahiye Mahadev

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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