Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 105

by Story With Sanjana January 7, 2026
written by Story With Sanjana January 7, 2026 1 comment
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Pasandida Aurat – 105

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

मयंक की जगह अर्थी को कंधा देने वाला सख्स कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी था। हॉस्पिटल में बैठी सुरभि ने उस वक्त पृथ्वी को ही मैसेज किया था और जैसे ही पृथ्वी को विश्वास जी के गुजर जाने की खबर मिली वह अपना सब काम छोड़-छाड़ कर सीधा उदयपुर चला आया। पृथ्वी ख़ामोशी से अर्थी को कंधा दिए आगे बढ़ रहा था। उसकी आँखों के सामने विश्वास जी के साथ बिताये पल आ रहे थे।

उदयपुर स्टेशन पर वो पहली मुलाकात , पृथ्वी का विश्वास जी के घर आना , उनके साथ बैठना , हँसना , बाते करना , बाहर टहलना और आखरी मुलाकात जब विश्वास जी ने पृथ्वी को उसकी पसंदीदा औरत की तस्वीर लौटाई ,, पृथ्वी को
गले में चुभन का अहसास होने लगा। उसका मन भारी होने लगा और आँखों में नमी तैर गयी। आँखों में भरे आँसुओ को आँखों में ही रख लिया और आगे बढ़ता रहा।

सभी श्मशान पहुंचे , सिद्धार्थ एक जरुरी फोन आने की वजह से साइड में चला आया और पृथ्वी उसे नहीं देख पाया। दोनों एक ही जगह मौजूद थे लेकिन एक दूसरे से नहीं मिल पाए। विश्वास जी को चिता पर लेटाया गया और सभी जरुरी संस्कारो के बाद कार्तिक से मुखाग्नि देने को कहा। घर में अवनि के बाद कार्तिक ही था जो विश्वास जी के सबसे ज्यादा करीब था। जैसे ही उसने चिता को अग्नि देने के लिए हाथ उठाया उसका हाथ काँपने लगा और आँखों से झर झर आँसू बहने लगे।

पास खड़े पृथ्वी ने जब कार्तिक को कमजोर पड़ते देखा तो वह उसके पास आया और उसका हाथ थामकर चिता को अग्नि दी। पृथ्वी का भले ही विश्वास जी से कोई रिश्ता ना हो लेकिन पृथ्वी को याद था कि विश्वास जी ने उसे “बेटा” कहकर बुलाया था। आज असल मायनो में पृथ्वी ने अपने बेटे होने का फर्ज निभाया था। कार्तिक रोते हुए पृथ्वी के गले आ लगा। यहाँ पृथ्वी भी खुद को रोक नहीं पाया और उसकी आँखों से आँसू बहकर गालों पर लुढ़क आये। पृथ्वी कार्तिक को साइड में ले आया। चिता जलने तक सभी वहा रुके और फिर घर के लिए निकल गए।

पृथ्वी की घर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योकि वह अवनि को बिखरा हुआ देखना नहीं चाहता था इसलिए पृथ्वी घर ना जाकर बाहर ही रुक गया। सिद्धार्थ पृथ्वी के बगल से ही निकला लेकिन दोनों ने एक दूसरे को नहीं देखा। घर के बाहर बैठा पृथ्वी विश्वास जी और उनके परिवार के बारे में सोच रहा था। अवनि अब शांत हो चुकी थी , वह इतना रो चुकी थी कि अब उसमे हिम्मत ही नहीं बची थी। वह बेसुध और निढाल सी त्रिवेणी भुआ की गोद में दुबकी हुई थी। सीमा के कहने पर सुरभि चाय का कप अवनि के लिए लेकर आयी लेकिन अवनि ने नहीं पीया।

“बिटिया लाओ मुझे दो मैं इसे पिला देती हूँ”,त्रिवेणी भुआ ने कहा तो सुरभि ने चाय का कप उन्हें थमा दिया।
सुरभि साइड में चली आयी उसने देखा कि पृथ्वी का कोई जवाब नहीं आया ना कोई मैसेज ना कोई कॉल ,, आज पहली बार सुरभि को पृथ्वी पर गुस्सा आया और वह बड़बड़ायी,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! क्या तुमने सच में अवनि को भुला दिया है , आज तुम यहाँ होते तो तुम देखते तुम्हारी अवनि कितने दर्द में है , क्या ऐसे वक्त में तुम्हे उसके साथ उसके पास नहीं होना चाहिए था,,,,,,,,,,,!!”  

“सुरभि बेटा ! तुम यहाँ क्या कर रही हो ? ज़रा जाकर मीनाक्षी की मदद कर दो”,मयंक ने आकर सुरभि से कहा तो सुरभि वापस अंदर चली गयी। वह पृथ्वी से नहीं मिल पायी जबकि पृथ्वी उस से बस 20 कदम दूर घर से बाहर खड़ा था। दुःख की घडी में मयंक और बाकि घरवालों को भी पृथ्वी का ख्याल नहीं रहा जबकि सिद्धार्थ अंदर था और एक बार फिर कौशल और मयंक की मदद कर रहा था।

सिद्धार्थ को काम करते और सबकी परवाह करते देखकर कौशल और मयंक को भी अच्छा लगा। अब उन्होंने सिद्धार्थ से ये जानने की कोशिश भी नहीं की कि सिद्धार्थ का अवनि से क्या रिश्ता है ? सुरभि का गुस्सा और चिढ भी सिद्धार्थ के लिए कम हो चुकी थी उसे फ़िलहाल अवनि का ख्याल था।

सुबह से दोपहर हुई , दोपहर से शाम और शाम से रात भी हो गयी लेकिन पृथ्वी अंदर नहीं आया वह बाहर ही घूमता रहा। कभी घर के बाहर खड़े होकर वक्त बिताया तो कभी घर के सामने बने सोसायटी पार्क की बेंच पर बैठकर ,, सुबह से खाना तो दूर पानी का एक घूंठ तक पृथ्वी के गले से नीचे नहीं उतरा था।

वह बस अवनि के बारे में सोच रहा था , कितनी मुश्किलों के बाद अवनि को उसके पापा का प्यार मिला था और वही अवनि को छोड़कर चले गए। इसके बाद पृथ्वी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अवनि से नजरे मिला पाए , वह एक बार पहले भी अवनि को रोते हुए देख चुका था और उस वक्त उसे कितनी तकलीफ हुई थी ये बस पृथ्वी ही जानता था और दोबारा वह इस दर्द से गुजरना नहीं चाहता था।

कार्तिक किसी काम से घर से बाहर आया था उसने जब पृथ्वी को घर की दिवार से पीठ लगाए खड़े देखा तो उसे अपनी भूल का अहसास हुआ और उसने पृथ्वी के पास आकर कहा,”माफ़ करना पृथ्वी भैया ! मैं तो भूल ही गया था कि आप भी यहाँ है ,, और आप बाहर क्यों खड़े है अंदर क्यों नहीं आये ? आपने कुछ खाया  ? नहीं खाया होगा,,,,,आई ऍम सो सॉरी,,,,,,,,,,,आप आप अंदर चलिए”
“कार्तिक ! मैं ठीक हूँ वैसे भी दो घंटे बाद मेरी फ्लाइट है तो मैं वापस जा रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा

“ठीक है लेकिन आप अंदर तो आईये , प्लीज चलिए”,कार्तिक ने पृथ्वी का हाथ पकड़ा और जबरदस्ती उसे अंदर ले गया हालाँकि पृथ्वी अभी भी घर के लॉन वाले एरिया में था। सभी किसी ना किसी काम में बिजी थे , कार्तिक ने सामने से गुजरते नितिन को बोलकर एक कप चाय मंगाई और पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”आप ये पीजिये मैं अभी आया”

कार्तिक पृथ्वी को लॉन में छोड़कर चला गया। पृथ्वी ने सुबह से कुछ खाया पीया नहीं था इसलिए उसने चाय का कप होंठो से लगाया और पीने लगा। अवनि को त्रिवेणी भुआ के साथ उसके कमरे में छोड़कर सुरभि नीचे चली आयी। सुबह से सुरभि यही थी उसके घरवालों ने भी उसे ऐसे वक्त में अवनि के साथ ही रहने को कहा और खुद दोपहर बाद अपने घर चले गए। अवनि की तबियत खराब होने लगी थी , उसका सर दर्द से फटा जा रहा था। सुरभि कार्तिक को ढूंढते हुए बाहर चली आयी ताकि उसे दवा लेने भेज सके तभी उसकी नजर लॉन में खड़े पृथ्वी पर पड़ी।

पृथ्वी को देखते ही सुरभि के चेहरे के भाव बदल गए और उसकी आँखों में गुस्सा उतर आया। वह पृथ्वी के सामने आयी और गुस्से से लेकिन धीमे स्वर में कहा,”ओह्ह्ह तो तुम्हे यहाँ आने की फुर्सत मिल गयी ? पृथ्वी क्या तुम्हे सच में अवनि की परवाह है ? आज उसे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी और तुम अब आ रहे हो ,, बस यही था तुम्हारा प्यार ?”

“मैं सुबह से यही हूँ सुरभि , तुम्हारा मैसेज देखते नहीं पहली फ्लाइट पकड़कर यहाँ चला आया , अवनि को उस हाल में देख नहीं पाता इसलिए सबके साथ शवयात्रा में चला गया”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
सुरभि ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने कहा,”ओह्ह्ह आई ऍम सो सॉरी ! लेकिन तुम अंदर क्यों नहीं आये ?”
“बस ऐसे ही , मैं नहीं चाहता अवनि मुझे यहाँ देखकर परेशान हो”,पृथ्वी ने कहा

“ओह्ह्ह पृथ्वी तुम सच में पागल हो , वो तो इतने दर्द में है कि उसे कुछ होश ही नहीं,,,,,,इस वक्त उस पर जो गुजर रही है वो सिर्फ वही जानती है। अंकल का यू चले जाना सच में उसके लिए बहुत तकलीफदेह है”,सुरभि ने उदास होकर कहा
“वो ठीक तो है न ?”,पृथ्वी ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
सुरभि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”मिलना चाहोगे उस से ?”

“हहहहहहहह हिम्मत नहीं हो रही,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एक गहरी साँस लेकर कहा और ये कहते हुए उसकी आँखों में आँसू भर आये और उसने एकदम से कहा,”8 महीने से उसे देखा तक नहीं है यार,,,,,,उसकी आवाज सुनने के लिए तरस गया हू”
सुरभि ने सुना तो उसकी आँखों में भी आँसू भर आये क्योकि इस वक्त वह पृथ्वी का दर्द जो महसूस कर पा रही थी। सुरभि का यू देखना पृथ्वी को और ज्यादा बैचैन कर गया। वह बाहर जाने के लिए पलटा तो सुरभि ने कहा,”जाने से पहले एक बार उसे देख तो लो पृथ्वी”

पृथ्वी के कदम रुक गए और उसके दिल से आवाज आयी “ए पृथ्वी ! क्या तुम उस से बिना मिले चले जाओगे ?”
“तुम्हे उस से नहीं मिलना चाहिए , अगर मिले तो फिर जा नहीं पाओगे” दिमाग ने कहा
“बिना मिले गए तो मलाल रह जाएगा” दिल ने कहा
“रहता है तो रह जाये तुझे फिर से उस आग में नहीं जलना है , समझा चला जा यहाँ से” दिमाग ने गुस्से से कहा  
“इसकी बात मत सुन पृथ्वी , अवनि को तेरी जरूरत है” दिल ने कहा

“और तेरी जरूरतों का क्या ? मैं कहता हूँ आगे बढ़ और चला जा यहाँ से” दिमाग ने कहा
“एक बार उसे देख लोगे तो शायद मेरी ये बेचैनी कम हो जाये” दिल ने उदास होकर कहा
“और देखने के बाद जो दर्द मिलेगा उसका क्या ?” दिमाग ने कहा
“मोहब्बत में मिला हर दर्द अजीज होता है”  दिल ने कहा
“तेरी वजह से ही आज इसकी ये हालत है” दिमाग ने कहा

“और मैं जानता हूँ उसकी भी यही हालत है , जा पृथ्वी देख के आ उसे” दिल ने कहा
“मत कर” दिमाग ने कहा
लेकिन जैसा कि हमेशा होता था आज फिर पृथ्वी का दिल उसके दिमाग पर भारी पड़ गया और उसने पलटकर सुरभि से कहा,”चल !”
सुरभि ने सुना तो मुस्कुरा उठी। वह पृथ्वी को साथ लेकर अंदर चली आयी और दोनों सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए। 

पृथ्वी को अपने सामने देखकर अवनि का क्या रिएक्शन होगा ये तो सुरभि नहीं जानती थी लेकिन पृथ्वी यहाँ है ये सोचकर ही सुरभि खुश थी। वह पृथ्वी को लेकर अवनि के कमरे के सामने आयी। कमरे का दरवाजा खुला था लेकिन पृथ्वी के कदम कमरे की चौखट पर ही रुक गए और उसके चेहरे पर बेबसी के भाव दिखाई देने लगे। कमरे में अवनि और त्रिवेणी भुआ के साथ सिद्धार्थ भी मौजूद था और वह अपने हाथ में थामी खाने की प्लेट से निवाला उठाकर अवनि से खाने की रिक्वेस्ट कर रहा था।

सुरभि ने सिद्धार्थ और अवनि को देखा और फिर पृथ्वी का चेहरा देखा तो वह समझ गयी कि इस वक्त पृथ्वी पर क्या गुजर रही थी। पृथ्वी का दिल अंदर ही अंदर टूट रहा था और वह बस ख़ामोशी से दोनों को देख रहा था। अंदर मौजूद सिद्धार्थ और अवनि दोनों ने ही पृथ्वी को नहीं देखा। सिद्धार्थ बार बार अवनि से निवाला खाने की रिक्वेस्ट कर रहा था और आख़िरकार अवनि ने उसके हाथ से निवाला खा ही लिया। ये देखकर पृथ्वी का दिल अंदर ही अंदर टूटकर बिखर गया और उसकी मुट्ठी भींच गयी।

“पृथ्वी,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा लेकिन पृथ्वी वहा एक पल और खड़े रहना नहीं चाहता था इसलिए पलटा और वहा से चला गया
सुरभि उसे नहीं रोक पायी और पृथ्वी वहा से चला गया। सुरभि अंदर आयी और सिद्धार्थ के हाथ से प्लेट लेकर कहा,”ये मैं इसे खिला दूंगी तुम नीचे जाओ”
सिद्धार्थ ने कुछ नहीं कहा बस चुपचाप वहा से चला गया। सुरभि अवनि के सामने आ बैठी और उसे खाना खिलाने लगी , त्रिवेणी भुआ के सामने वह अवनि को पृथ्वी के बारे में भी नहीं बता पायी।

पृथ्वी अवनि के घर से बाहर आया और पैदल ही वहा से चल पड़ा। अंदर ही अंदर वह गुस्से और तकलीफ से उबल रहा था और अब ये गुस्सा कही तो निकलना ही था इसलिए उसने चलते चलते अपना हाथ दिवार पर दे मारा। दिवार खुरदरी होने की वजह से पृथ्वी का हाथ छील गया लेकिन उसे फर्क नहीं पड़ा। उसने हाथ नीचे लटकाया और चल पड़ा। सोसायटी से बाहर आकर पृथ्वी ने ऑटोवाले से एयरपोर्ट चलने को कहा।

पृथ्वी की आँखों की सामने बार बार बस वही पल आ रहा था जब सिद्धार्थ अपने हाथ से अवनि को खाना खिला रहा था। पृथ्वी उस पल को बर्दास्त ही नहीं कर पा रहा था। उसकी धकड़ने तेज थी और आँखों में गुस्सा था। उसका फोन बजा स्क्रीन पर सुरभि का नाम देखकर पृथ्वी ने फोन काट दिया और जेब में रख लिया

इस वक्त वह किसी से बात करना नहीं चाहता था ना ही यहाँ रुकना चाहता था। पृथ्वी एयरपोर्ट पहुंचा , फ्लाइट एक घंटे बाद थी पृथ्वी वेटिंग एरिया में चला आया , नजर अपने हाथ पर गयी तो उसे अहसास हुआ कि गुस्से में आकर उसने खुद को चोट पहुंचाई है। उसने जेब से रुमाल निकाला और हाथ पर बांध लिया जिस पर कुछ देर बाद खून के हलके हलके धब्बे नजर आने लगे। पृथ्वी ने अपना सर पीछे झुका लिया और आँखे मूँद ली लेकिन बंद आँखों में भी उसे वही पल नजर आ रहा था जब सिद्धार्थ अवनि के करीब था।

पृथ्वी क्या कोई भी मर्द अपनी पसंदीदा औरत के करीब किसी दूसरे मर्द को नहीं देख पायेगा। सुरभि ने पृथ्वी को कई मैसेज और कॉल किये लेकिन पृथ्वी ने एक का भी जवाब नहीं दिया और उदयपुर से चला गया बिना अवनि से मिले,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

अवनि के घर में रुककर सिद्धार्थ उसके लिए मुश्किलें बढ़ाना नहीं चाहता था इसलिए देर रात वह भी अपनी गाडी लेकर सिरोही के लिए वापस निकल गया। देर रात पृथ्वी मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा और फिर सीधा अपने फ्लेट पर चला आया। फ्लेट का दरवाजा खोलकर पृथ्वी जैसे ही अंदर आया देखा हॉल में सोफे पर रवि जी बैठे है। फ्लेट की एक चाबी हमेशा रवि जी के घर में होती थी और एक पृथ्वी के पास। इतनी रात में रवि जी को यहाँ देखकर पृथ्वी हैरान था और थोड़ा घबराया भी , वह कुछ कहता इस से पहले रवि जी उठे और कहा,”इतनी रात में कहा से आ रहे हो पृथ्वी ?”

“किसी जरुरी काम से बाहर गया था”,पृथ्वी ने साफ़ झूठ कह दिया लेकिन रवि जी की नजर उसके हाथ पर बंधे रुमाल पर पड़ गयी
“और वो जरुरी काम कही मारपीट तो नहीं,,,,,,,,,,आज सुबह से तुम गायब थे , ना ऑफिस गए ना यहाँ थे , तुम गए कहा थे ?”,रवि जी ने पृथ्वी के सामने आकर उसका चोटिल हाथ उठाकर कहा
पृथ्वी खामोश हो गया कहे तो कहे क्या ? रवि जी ठीक उसके सामने खड़े थे और पृथ्वी ने खुद को तैयार कर लिया क्योकि किसी भी वक्त रवि जी का हाथ उसके गाल पर आ सकता था।

वह ख़ामोशी से रवि जी को देखता रहा तो रवि जी उसे अपने साथ लेकर सोफे की तरफ आये उसे वहा बैठाया और खुद हॉल में रखे टेबल की तरफ आये। उन्होंने दवा का डिब्बा उठाया और सोफे की तरफ चले आये।
पृथ्वी समझ नहीं पा रहा था कि आखिर रवि जी क्या करना चाहते है लेकिन इस वक्त कोई सवाल ना करके उसने चुप रहना ही ठीक समझा। रवि जी उसके बगल में आ बैठे और चोट लगे हाथ से रुमाल हटाकर उसे स्परिट से साफ किया।

मारे जलन के पृथ्वी को दर्द तो बहुत हुआ लेकिन उसने अपने दाँत भींच लिए ये देखकर रवि जी ने उसके हाथ को साफ करते हुए कहा,”पृथ्वी ! तुम्हे नहीं लगता इन दिनों तुम कुछ ज्यादा ही कठोर हो गए हो , ये स्परिट है इसे जख्म पर लगाओ तो जलता है और मैं जानता हूँ इस वक्त तुम्हे भी तकलीफ हो रही होगी इसलिए मेरे सामने ये कठोर बनने का नाटक बंद करो”

पृथ्वी ने सुना तो दर्दभरी आह उसके मुंह से निकली और उसने मारे जलन के दो तीन बार अपना हाथ झटका। रवि जी ने उसका हाथ वापस अपनी साइड किया और उस पर दवा लगाकर पट्टी बांधते हुए कहा,”तो आखिरकार तुमने अपनी आई से किया वादा तोड़ ही दिया”

( क्या अवनि और सिद्धार्थ को साथ देखकर पृथ्वी पाल लेगा अपने मन में कोई ग़लतफ़हमी ? क्या सुरभि बता पायेगी अवनि को पृथ्वी का सच ? क्या पृथ्वी बोल पायेगा रवि जी के सामने सच ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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1 comment

Kshmata Chauhan January 7, 2026 - 2:34 pm

Yeh ho kya rha hai… Avni bhi takleef m hai aur Siddarth ko uske hath nivala ko yaad kar Prithvi takleef aur gusse m hai…lakin iss ka jimmedar to Prithvi hee hai na…mana wo nhi janta tha ki Siddarth bhi yahi hai lakin shamsaan se aane k baad wo Avni se mil sakta tha…kasam to usne todi hai na Lata ji ki bhale hee wo Avni se na mila ho ..to wo gussa kyu hai…wo nhi hota to Siddarth hee sahi….na jane kyu esa lag rha hai ki dono chacha Avni aur Siddarth ko na mila de shadi k bandhan m

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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