Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 110

by Story With Sanjana January 11, 2026
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Pasandida Aurat – 110

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

बेंच के एक किनारे पर पृथ्वी बैठा था और दूसरे किनारे पर नकुल और दोनों खामोश क्योकि पृथ्वी ने आखिर में जो शब्द कहे वो सुनने के बाद नकुल की हिम्मत नहीं हुई उस से कुछ कहने की। पृथ्वी ने अवनि की ख़ुशी के लिए अपने प्यार को भुलना ही बेहतर समझा। पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में वक्त देखा तो नकुल ने कहा,”ये घडी तो बहुत महंगी और एंटीक लग रही है , तुम्हे ये कहा से मिली ?”

पृथ्वी ने अपनी कलाई पर बंधी घडी को देखा , उसे वो पल याद आया जब वह उदयपुर में विश्वास जी से मिला था और विश्वास जी ने उसे ये घडी तोहफे में दी थी। पृथ्वी ने घडी को छूकर देखा और नकुल से कहा,”ये अवनि के पापा ने मुझे दी थी जब मैं उदयपुर में उनसे मिला था”
“लेकिन उन्होंने इतनी महंगी घडी तुम्हे क्यों दी ?”,नकुल ने पूछा
पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुराया,”उन्होंने ये घडी नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी मुझे दी थी”
“कैसी जिम्मेदारी ?”,नकुल ने जिज्ञासा भरे स्वर में पूछा

पृथ्वी ने अपनी कलाई से घडी उतारी और उसे पलटकर नकुल को दिखाया तो नकुल के चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए। घडी के पीछे अवनि का नाम उकेरा गया था। ये देखकर नकुल ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”इसका मतलब अवनि के पापा तुम्हारे और अवनि के बारे में सब जानते थे और उन्होंने पहले ही अवनि की जिम्मेदारी तुम्हे सौंप दी थी”
पृथ्वी ने हामी ने गर्दन हिलाई तो नकुल ने हताश होकर कहा,”फिर भी तुमने अवनि को जाने दिया”

“उसकी ख़ुशी से बढ़कर कुछ नहीं है नकुल,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और घडी वापस अपनी कलाई पर पहन ली। सच जानकर नकुल को बहुत दुःख हुआ वह उदास हो गया। अवनि को वह समझा नहीं सकता था और पृथ्वी को कुछ भी समझाने का अब कोई फायदा नहीं था क्योकि पृथ्वी अवनि की ख़ुशी के लिए अपने कदम खुद ही पीछे ले चुका था।
“मैं अब चलता हूँ”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा और वहा से चला गया। नकुल भी उठा और अपने घर चला गया।

सुख विलास भवन , उदयपुर
अवनि और सिद्धार्थ की शादी में अब सिर्फ दो दिन बचे थे और आज अवनि की हल्दी थी। सुबह से घर में शोर गुल था , सभी तैयारियों में लगे थे। अवनि पीले रंग का सूट पहने अपने कमरे में उदास सी बैठी थी। आज उसकी हल्दी थी लेकिन उसके चेहरे पर कोई ख़ुशी कोई चमक नहीं थी बल्कि आँखों में नमी और चेहरे पर उदासी के भाव थे। सुरभि उसकी इकलौती दोस्त थी लेकिन अवनि के इस फैसले के बाद वह भी उस से दूर हो गयी। सब अवनि को गलत समझ रहे थे और अवनि के इस एक फैसले से कितने ही लोग दुखी थे।

सलोनी अवनि को बुलाने उसके कमरे में आयी तो अवनि ने अपनी आँखों के किनारे साफ़ किये और मुस्कुराते हुए सलोनी की तरफ पलटी तो सलोनी ने उसके पास आकर कहा,”इस सूट में आप बहुत ही प्यारी लग रही है अवनि दीदी , चलिए नीचे सब आपका इंतजार कर रहे है”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और सलोनी के साथ नीचे चली आयी। घर के बाहर लॉन में हल्दी का फंक्शन था सभी मेहमान और घरवाले जमा थे।

अवनि नार्मल शादी चाहती थी इसलिए बस कुछ खास मेहमान ही आये थे और बाकि घरवाले मौजूद थे। अवनि आकर चौकी पर बैठी , उसने नजर घुमाकर चारो तरफ देखा लेकिन उसे सुरभि कही नजर नहीं आयी तो वह उदास हो गयी। पंडित जी ने कुछ पूजा की उसके बाद सभी एक एक करके अवनि को हल्दी लगाने लगे
और अवनि अपने होंठो पर झूठी मुस्कान सजाये सबको देखते रही। आज वह विश्वास जी की कमी महसूस कर रही थी वो आज यहाँ होते तो कितना खुश होते , अवनि की शादी देखने का उनका सपना सपना ही रह गया।

सबने अवनि को हल्दी लगा दी , अवनि को सहसा ही पृथ्वी की याद आयी और उसने देखा सामने हाथो में हल्दी लिए पृथ्वी खड़ा है और मुस्कुराते हुए उसे देख रहा है। अवनि की हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा , उसकी आँखों में नमी तैर गयी तभी सामने खड़े पृथ्वी ने कहा,”क्या मैडम जी ! इतना हक़ तो आप मुझे दे सकती थी न कि हमारी शादी में आपको सबसे पहले हल्दी मेरे हाथो से लगे,,,,,,,,वैसे अच्छी लग रही है आप”

कहते हुए पृथ्वी जैसे ही अवनि की तरफ बढ़ा अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली लेकिन पृथ्वी के हाथो ने अवनि के गालों को छुआ ही नहीं , अवनि ने जल्दी से अपनी आँखे खोली तो देखा कि सामने पृथ्वी है ही नहीं ये तो बस उसका वहम था। उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर बह गए लेकिन हल्दी लगी होने की वजह से किसी का ध्यान नहीं गया। अवनि का मन तकलीफ और घुटन से भर गया। वह जानती थी जो हो रहा है वो गलत हो रहा है लेकिन अवनि फिर भी पीछे नहीं हट पा रही थी।

हताश होकर अवनि ने अपना सर झुका लिया तभी सुरभि की आवाज उसके कानो में पड़ी,”कितनी अजीब लड़की हो ना तुम अवनि , आज तुम्हारी हल्दी है और तुम रो रही हो”
सुरभि की आवाज सुनकर अवनि ने सर उठाकर सामने देखा , उसके सामने सुरभि खड़ी थी ये देखकर अवनि को विश्वास नहीं हुआ क्योकि कुछ देर पहले ही वह पृथ्वी के रूप में एक भरम देख चुकी थी उसने रोआँसा होकर कहा,”क्या तुम सच में आयी हो ?”

सामने खड़ी सुरभि मुस्कुराई और कटोरी से हल्दी लेकर अवनि के गालों पर लगाकर कहा,”मैं नहीं आउंगी तो कौन आएगा अवनि , आखिर हम दोस्त है और दोस्त का फर्ज होता है अपने दोस्त की हर ख़ुशी और गम में शामिल होने का”

अवनि को अहसास हुआ कि सुरभि सच में उसके सामने है तो वह उठी और सुरभि के गले लगकर कहा,”मुझे माफ़ कर दो सुरभि,,,,,,,,,,,,आई ऍम सॉरी”
अवनि को माफ़ी मांगते देखकर सुरभि का दिल पिघल गया और उसने अवनि का सर सहलाते हुए कहा,”मुझे भी माफ़ कर दो अवनि उस दिन मैंने गुस्से में आकर तुमसे कुछ ज्यादा ही कह दिया , मैंने तुम्हारा नजरिया जानने की कोशिश ही नहीं की,,,,,,,,,,,,,आई ऍम सो सॉरी”

दोनों दोस्तों के बीच की गलतफहमी बस एक सॉरी से दूर हो गयी। सुरभि के आने से अवनि को थोड़ी हिम्मत मिली। हल्दी की रस्म के बाद अवनि ने सबके साथ मिलकर थोड़ा वक्त बिताया और फिर नहाने चली गयी।

अवनि के जाने के बाद सुरभि उसके कमरे में आयी और कमरे में यहाँ वहा घूमते हुए खुद में ही बड़बड़ाने लगी,”सुरभि , सुरभि , सुरभि मत सोच इतना बोल दे अवनि को , बता दे सच उसे , तोड़ दे पृथ्वी से किया वादा , अरे जब अवनि की शादी हो जाएगी तब क्या अचार डालेगी पृथ्वी के वादे का,,,,,,,,,और वो गधा पृथ्वी उसने एक बार भी अवनि को सच बताने की कोशिश नहीं की क्या पता सच जान के अवनि का दिल पिघलता और वह सिद्धार्थ से शादी करने का अपना फैसला बदल देती लेकिन नहीं दोनों को महान बनना है , प्यार में क़ुरबानी देनी है।

अरे ये क़ुरबानी वाला जमाना नहीं है और अगर किसी को क़ुरबानी देनी ही है तो वो चिलगोजा सिद्धार्थ क्यों ना दे ? सबके सामने कितना अच्छा अच्छा बन के घूम रहा है जैसे मैंने तो उसका असली चेहरा देखा ही नहीं है”
चलते चलते अचानक सुरभि का पैर अवनि के बिस्तर से टकराया और वह अपना पैर पकड़कर बिलबिला उठी और कहा,”अह्ह्ह्हह उस चिलगोजे का नाम लिया और नुकसान हो गया , अवनि तो उसके साथ पूरी जिंदगी बिताने वाली है , नहीं नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगी”

सुरभि अपना पैर पकडे पकडे बिस्तर पर आ बैठी और अपना पैर सहलाते हुए कहा,”बस बहुत हो गया मैं अवनि को सब सच बताने वाली हूँ इसके बाद चाहे वो मुझे जूते मारे चाहे गाली दे लेकिन मैं उसकी जिंदगी में ये भसड़ तो बिल्कुल नहीं देख सकती। ओह्ह्ह्ह अवनि तुम्हे पता होना चाहिए कि पृथ्वी ने तुम्हारे लिए क्या क्या किया है ? तुम सिद्धार्थ नहीं बल्कि पृथ्वी के लिए बनी हो वही है तुम्हारी परफेक्ट चॉइस ,, वही है तुम्हारा “पसंदीदा मर्द” जिसके लिए तुम सेंकडो खत लिख सकती हो , वही है तुम्हारा हमसफ़र जो तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ेगा”

सुरभि खुद से बाते कर ही रही थी तभी बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर आयी और सुरभि को बड़बड़ाते देख अपने बालों को पोछते हुए कहा,”तुम्हे खुद से बात करने की बीमारी है क्या ?”
अवनि की आवाज से सुरभि की तन्द्रा टूटी तो उसने अवनि की तरफ पलटकर कहा,”अह्ह्ह्ह नहीं ! मुझे तुमसे कुछ कहना है अवनि , आई मीन तुम्हे कुछ बताना है”
“हम्म्म्म कहो”,अवनि ने कहा  

सुरभि बिस्तर से उठी और अवनि के पास आकर उसका हाथ पकड़कर उसे सामने पड़ी कुर्सी पर बैठाया और कहा,”मैं जो कहने जा रही हूँ उसे ध्यान से सुनना अवनि,,,,,,,,,,,!!”
सुरभि को सीरियस देखकर अवनि ख़ामोशी से उसे देखने लगी। सुरभि ने एक गहरी साँस ली और उसके बाद अवनि को सब सच बता दिया। उसने पृथ्वी से किया वादा तोड़ दिया और अवनि को उसके उदयपुर आने , अवनि के घरवालों को समझाने , मुकुल को सबक सीखाने , विश्वास जी की मौत वाले दिन घर आने वाली सब बातें बता दी और अवनि हैरानी से सब सुनती रही।

अवनि ये सच नहीं जानती थी इसलिए जब उसे पता चला कि उसकी गैरमौजूदगी में पृथ्वी उदयपुर आया था तो वह उदास हो गयी। सुरभि की बातो से अवनि को पता चला कि पृथ्वी विश्वास जी से भी मिल चुका है। सुरभि ने अपनी बात खत्म की और अवनि के सामने आकर कहा,”यही सच है अवनि , वो लड़का तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता है अवनि , उसका दिल मत तोड़ो ये शादी मत करो अवनि,,,,,,,,,!!!”

अवनि की आँखों में आंसू भर आये उसने अपनी आँखे मूँद ली , आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये। सुरभि ने देखा तो अपने हाथो से उन्हें पोछ दिया और कहा,”इस वक्त तुम जिस तकलीफ से गुजर रही हो उस से कई गुना ज्यादा तकलीफ से पृथ्वी गुजरा है अवनि , वो तुम्हे कभी भुला नहीं था , ना कभी उसने तुम्हे खुद से दूर किया था वह बस सब सही करना चाहता था। मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिए बेइंतहा मोहब्बत देखी है अवनि,,,,,,,,,,वो तुम से बहुत प्यार करता है , प्लीज अवनि , प्लीज पृथ्वी को एक मौका दो अपना प्यार साबित करने का,,,,,,,,,,,,,!!”

अवनि ने अपनी आँखे खोली और नम आँखों से सुरभि को देखकर कहा,”वो अपना प्यार पहले ही साबित कर चुका है सुरभि,,,,,,,मैं जिंदगीभर उसकी अहसानमंद रहूंगी लेकिन मैं उस से शादी नहीं कर सकती,,,,,,,,मैं उसके घरवालों के खिलाफ नहीं जा सकती सुरभि , मैं एक बेटे को उसके माँ बाप से दूर नहीं कर सकती सुरभि , आज अगर मैंने पृथ्वी को अपना भी लिया तो जिंदगीभर इस गिल्ट में रहूंगी कि मेरे लिए वो अपने घरवालों के खिलाफ चला गया,,,,,,,,,,,मैं उसे नहीं अपना सकती सुरभि,,,,,,,,नहीं अपना सकती”

सुरभि ने सुना तो उसका दिल टूट गया , उसे लगा सच जानकर अवनि पृथ्वी को अपना लेगी लेकिन उसे अब समझ आया कि अवनि ने पृथ्वी को छोड़कर सिद्धार्थ को क्यों चुना क्योकि वह पृथ्वी के घरवालों के खिलाफ जाना नहीं चाहती थी। सुरभि बदहवास सी आकर बिस्तर पर बैठ गयी उसे नहीं समझ आ रहा था वह ऐसा क्या करे जिस से सब ठीक हो जाये ? अवनि ने सुरभि को खामोश देखा तो अपने आँसू पोछे और सुरभि के पास आकर उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर कहा,”अब तक तुमने मेरा बहुत साथ दिया है सुरभि आज एक अहसान और कर दो मुझ पर,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

“हम्म्म्म,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा
अवनि ने अपना दिल मजबूत किया और कहा,”आज के बाद मेरे सामने पृथ्वी का जिक्र मत करना”
सुरभि ने सुना तो उसकी आँख से आँसू की एक बूँद निकलकर गाल पर बह गयी। अवनि ने जो कहा उसे सुनकर सुरभि को जितनी तकलीफ हुई उस से कई गुना ज्यादा तकलीफ अवनि को ये बात कहते हुए हुई थी।

 मौर्या Pvt Ltd , नवी मुंबई
अपने केबिन में लेपटॉप के सामने अकेला बैठा पृथ्वी किसी गहरी सोच में डूबा था। दो दिन बाद अवनि की शादी थी और वह हमेशा हमेशा के लिए किसी और की  हो जाएगी ये सोचकर ही पृथ्वी का दिल बैठा जा रहा था और उसे अपने सीने में हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था। पृथ्वी ने नकुल से तो कह दिया कि वह अवनि की ख़ुशी के लिए उस से दूर हो जाएगा पर क्या वह सच में ऐसा कर पायेगा ? वो पृथ्वी जो अवनि के नाम के साथ किसी और का नाम तक बर्दास्त नहीं कर पाता था क्या वह अवनि को किसी और के साथ बर्दास्त कर पायेगा ?

यही सब ख्याल पृथ्वी के जहन में चल रहे थे। वह तो ये तक नहीं जानता था कि अवनि उस से प्यार करती है भी या नहीं क्योकि आज तक अवनि ने कभी पृथ्वी से ये कहा ही नहीं,,,,,,,,,,,पृथ्वी का मन उदास हो गया उसे अवनि के साथ बिताये पल याद आने लगे। अवनि से हुई पहली मुलाकात से लेकर उस से लेकर उस से हुई पहली बात तक , उसका अवनि को पहली बार विडिओ कॉल पर देखना और उस से शादी करने का फैसला करना , अवनि से उटपटांग बातें करना , अवनि के कहने पर गंवार फली खाना ,

अवनि की दी पनिशमेंट में सॉरी नोट लिखना , सिरोही उस से मिलने आना , अवनि के साथ पूरा दिन बिताना , उसे रोते हुए देखना , उसे अपने हाथो से झुमके पहनाना , उसके लिए सिद्धार्थ से मार खाना , घरवालों से अवनि के लिए लड़ना , सब एक एक करके पृथ्वी को याद आ रहा था और अंत में याद आये अवनि के कहे आखरी शब्द “मैंने तुम्हे ये बताने के लिए फोन किया है कि अगले महीने मेरी शादी है , तुम मेरी शादी में आओगे न पृथ्वी”

ये बात याद आते ही पृथ्वी की आँखों में आँसू भर आये और वह रो पड़ा , वह चाहकर भी खुद को अवनि से दूर नहीं कर सकता था। इन दो सालो में उसने अवनि को लेकर अपनी पूरी जिंदगी सोच ली थी और आज वही अवनि उस से दूर जा रही थी। पृथ्वी ऑफिस में था और रो रहा था हालाँकि उसके केबिन में कोई नहीं था।

कुछ देर बाद जयदीप अपने हाथ में कोई किताब थामे पृथ्वी के केबिन में आया जब उसने पृथ्वी को रोते देखा तो उसके पास आया और कहा,”हे पृथ्वी ! तुम ठीक हो ना ?”
पृथ्वी ने जयदीप को वहा देखा तो जल्दी से अपने आँसू पोछे और सुबकने लगा। आज से पहले वह किसी के सामने इतना कमजोर नहीं पड़ा सिवाय नकुल के लेकिन आज जयदीप ने भी उसे इस हाल में देख लिया।

पृथ्वी को नजरे चुराते देखकर जयदीप ने पास पड़ी कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा। उसने टेबल पर रखे लेडलाइन से केंटीन में फोन कर दो कप चाय भेजने को कहा।
जयदीप ने रिसीवर रखा और पास पड़ी पानी की बोतल पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी। पृथ्वी ने बोतल लिया और दो घूंठ पानी पीकर बोतल वापस साइड में रख दी।
जयदीप ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगा , पृथ्वी अब ठीक था उसने अपने आपको सम्हाला और जयदीप की तरफ देखकर धीरे से कहा,”वो शादी करने जा रही है , किसी और से,,,,,,,,,,सब कहते है मैं उसे भूल जाऊ , लेकिन,,,,,,,,,,,,,,मैं उसे नहीं भूल सकता”

कहते हुए पृथ्वी की आँखों में फिर आँसू भर आये ये देखकर जयदीप हल्का सा मुस्कुराया और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”अगर लोग ये कह दे कि वो तुम्हारे नसीब में नहीं है , भूल जाओ उसे और तुम उसे भूलकर आगे बढ़ जाओ तो यकीन मानों तुम मोहब्बत में नहीं बल्कि एक भरम में थे जिसे तुम जैसे ही एक कमजोर इंसान ने आकर तोड़ दिया। “पसंदीदा औरत” के लिए जान नहीं दे सकते पर आखरी साँस तक उसे पाने की कोशिश तो कर सकते हो न और वैसे भी कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती”

जयदीप की बात सुनकर पृथ्वी ने उसकी तरफ देखा तो जयदीप ने अपने हाथ में पकड़ी किताब उठाकर पृथ्वी को दिखाकर कहा,”ये मैं नहीं वो कहती है और उसका कहना काफी है”
पृथ्वी ने देखा जयदीप के हाथ में अवनि की लिखी किताब थी जिसका नाम था “पसंदीदा औरत”
पृथ्वी को एकटक अपनी ओर देखते पाकर जयदीप ने किताब उसकी तरफ बढ़ा दी और कहा,”अवनि मलिक की लिखी नई किताब , पिछले हफ्ते ही लॉन्च हुई है और इस सबसे खूबसूरत बात ये है कि इसके हीरो का नाम “पृथ्वी” है” जयदीप इतना कहकर उठा और पृथ्वी का कंधा थपथपा कर वहा से चला गया।

( आखिर विश्वास जी ने पृथ्वी को ही क्यों सौंपी अवनि की जिम्मेदारी ? क्या अवनि की ख़ुशी के लिए पृथ्वी देगा हर वो क़ुरबानी जो अवनि चाहती है ? आखिर अवनि ने अपनी नयी किताब में क्यों लिखा “पृथ्वी” का नाम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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2 comments

Manisha January 11, 2026 - 10:27 am

Please Avani and parthvi ko mila do yaar aisa kuch kro jises ye sadness khatam ho in dono ki life m happyness aa jaye

Reply
Kshmata Chauhan January 11, 2026 - 1:40 pm

Yr yeh Avni to kuch bhi samjhne ko tayar nhi hai… Surbhi ne usko sab kuch bta diya…uske baad bhi wo Siddarth se shadi kar rhi hai…manti hon ki Prithvi k parents ki bina haan k wo Prithvi se shadi nhi kar sakti hai, lakin wo Prithvi se apne pyar ka izhaar to kar sakti hai na…ya wo bhi uske liye muskil hai…Surbhi ko usne bol to Diya hai ki uske

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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