Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 90

by Story With Sanjana December 15, 2025
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Pasandida Aurat – 90

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पनवेल , मुंबई
सुबह पृथ्वी उठा तो सबसे पहले अपना फोन देखा , उसने अपना मेल बॉक्स ओपन किया और आज पुरे एक महीने बाद वह मुस्कुराया लेकिन नम आँखों के साथ , पुरे एक महीने बाद अवनि ने उसे मेल किया था और पिछले एक महीने से हर गुजरने वाले दिन के साथ पृथ्वी को शायद इसी मेल का इंतजार था वरना हर रोज कैलेंडर की एक एक तारीख मिटाना किसे याद रहता है। उसने जल्दी से मेल खोला और पढ़ने लगा

“Dear पृथ्वी !
जानती हूँ तुमने बात करने से मना किया है लेकिन आज मैं खुद को रोक नहीं पायी ! कुछ महीनो पहले जब मेरे जन्मदिन पर मैं अकेली थी तब तुम मेरे साथ थे। तुमने मेरे उस मायूस दिन को ख़ास बनाया था और आज तुम्हारा जन्मदिन है लेकिन मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँ ! ये मेल मैंने तुम्हे आज तुम्हारे जन्मदिन की बधाई देने के लिए किया है। “जन्मदिन मुबारक हो पृथ्वी ! महादेव तुम्हे खुश रखे और तुम्हे वो सब दे जो तुम्हारे लायक है , जो तुम डिजर्व करते हो” आज का दिन मेरे लिए बहुत ख़ास है , तुम्हारे लिए प्रार्थना करने मंदिर जाउंगी ,

आज इस खास मौके पर तुम्हारे लिए अपने हाथो से एक खत लिखूंगी , एक तोहफा भी खरीदा है तुम्हारे लिए जो कि बहुत खास है और मुझे उम्मीद है तुम्हे पसंद आएगा। ये तोहफा तुम्हे कब मिलेगा ये तो नहीं जानती पर हाँ इतना यकीन है कि एक दिन ये तुम्हारे हाथो में जरूर होगा। तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना कोई इत्तेफाक नहीं था पृथ्वी , पर क्या तुम यकीन करोगे कुछ लोग हमारी जिंदगी में तब आते है जब हम अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे होते है और गलत हाथो में होते है।

महादेव ने तुम्हे मेरी जिंदगी में उसी पल भेजा था ताकि तुम मुझे गलत हाथो में जाने से बचा सको और इसके लिए मैं जिंदगीभर तुम्हारी शुक्रगुजार रहूंगी,,,,,,,,,,,,मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है बल्कि मैं चाहूंगी तुम सब भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो और कोई अच्छी लड़की देखकर शादी कर लो ! उस दिन तुमने सच ही कहा था कि “मैडम जी ! देखना एक दिन आप मुझे बहुत याद करने वाली है” , बीते एक महीने में ऐसा कोई दिन नहीं गया पृथ्वी जब मैंने तुम्हे याद ना किया हो , मैं कितनी भी कोशिश करू कुछ न कुछ मुझे तुम्हारी याद दिला ही देता है ,,

कभी तुम्हारी कही बातें तो कभी तुम्हारा नाम,,,,,,तुम बहुत अच्छे लड़के हो पृथ्वी तुम एक अच्छी लड़की डिजर्व करते हो ,, आज तुम्हारा दिन है इसलिए हो सके तो अपनी पसंदीदा हरे रंग की शर्ट पहनना , अपने पसंदीदा चिकन नूडल्स खाना और खूब इंजॉय करना इस से आगे कुछ लिखा तो रो दूंगी , अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,,,महादेव तुम्हे हमेशा खुश रखे”
“अवनि मलिक”

अवनि का मेल पढ़कर पृथ्वी को गले में चुभन का अहसास हुआ और उसकी आँखों से निकलकर आँसू की बुँदे फ़ोन की स्क्रीन पर आ गिरी।  
पृथ्वी समझ गया कि ये मेल टाइप करते हुए अवनि को कितनी तकलीफ हुई होगी , इसे लिखते हुए वह ना जाने कितनी ही बार उदास हुई होगी , रोई भी होगी। उसके पास ना होते हुए भी पृथ्वी उसके पास था। पृथ्वी ने अपने आँसू पोछे , फोन की स्क्रीन साफ की और एक ठंडी आह भरकर काँपती उंगलियों से अवनि के लिए मेल लिखा

मेल लिखते हुए पृथ्वी का मन भारी हो रहा था , आँखों में नमी थी और गले में चुभन का अहसास , उसने मेल लिखकर अवनि को भेज दिया और आखिरकार पुरे एक महीने बाद पृथ्वी ने लता की दी कसम को तोड़ दी ! अवनि का प्यार उसके लिए आज सबसे ऊपर हो चुका था,,,,,,,,,,,,,!!!”

आज अवनि की छुट्टी थी , सुबह की चाय लेकर वह अपने लेपटॉप के सामने आ बैठी ताकि अपनी किताब को पूरा कर सके। अवनि ने जैसे ही लेपटॉप खोला पृथ्वी का मेल उसे मिला जिसे देखकर अवनि का दिल धड़क उठा क्योकि अवनि को पृथ्वी से जवाब की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। उसने चाय का कप साइड में रखा और मेल खोलकर पढ़ने लगी  

“Dear मैडम जी !
मैं जानता था आज आप मुझे मेल जरूर करेगी , पिछले एक महीने से रोज कैलेंडर की तारीखे मिटाकर इस दिन का इंतजार कर रहा था। बहुत याद आती है आपकी , बात करने का दिल करता है लेकिन नहीं कर पाता मैं आपको फिर से तकलीफ देना नहीं चाहता इसलिए हर बार खुद को रोक लेता हूँ। पिछले एक महीने से तरस गया हूँ आपके मुंह से “वाहियात” सुनने के लिए , आपकी ना सुनने के लिए ,, रोज आपके भेजे पुराने मैसेज पढता हूँ , बस दिमाग में यही चलता रहता है कि आप ठीक होंगी या नहीं ,

उस शाम के बाद कैसे सम्हाला होगा आपने खुद को ? मैं ठीक हूँ मैडम जी बस अब कही मन नहीं लगता , किसी से बात करने का दिल नहीं करता , क्रिकेट खेलना छोड़ दिया है , बस खुद को ऑफिस के काम में बिजी रखता हूँ ताकि आपकी याद ना आये,,,,,,,,,मैं अब शादी नहीं करने वाला मैडम जी , मैं भी आपकी तरह अकेले ही ठीक हूँ,,,,,,,,मैं नहीं जानता हमारी किस्मत में मिलना लिखा है या नहीं लेकिन मैं आपको कभी भूल नहीं पाऊंगा,,,,,,,,,,अपना ख्याल रखना मैडम जी और बस खुश रहना”  

पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि के चेहरे पर उदासी छा गयी , उसे लगा था कि पृथ्वी उसे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गया होगा लेकिन पृथ्वी तो आज भी वही था जहा अवनि ने उसे छोड़ा था। पृथ्वी की लिखी बातो में वह उसका दर्द साफ साफ महसूस कर पा रही थी। पृथ्वी जिसे क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था उसने वो खेलना भी छोड़ दिया जानकर अवनि को बहुत दुःख हुआ , अवनि जिस चीज से डरती थी वही हुआ उस से दूर जाकर पृथ्वी ने पहले की तरह जीना ही छोड़ दिया ,, हँसना मुस्कुराना छोड़ दिया ,

अवनि का दिल किया वह पृथ्वी से पूछे आखिर क्यों वह खुद को ऐसी सजा दे रहा है ? उस पर चिल्लाये , गुस्सा करे , पहले की तरह उसे डांट लगाए लेकिन अवनि ने आज खुद को रोक लिया वह बातों का ये सिलसिला फिर से शुरू करके अपने और पृथ्वी के दर्द को फिर से बढ़ाना नहीं चाहती थी। उसने लेपटॉप बंद कर दिया और पृथ्वी को कोई जवाब नहीं दिया। अवनि का जवाब नहीं मिला तो पृथ्वी ने भी आगे कोई मेल नहीं किया

पृथ्वी अब पूरी तरह ठीक था इसलिए फोन साइड में रखा और नहाने चला गया। नहाकर पृथ्वी ऑफिस के लिए तैयार हुआ और अपना बैग लेकर बाहर चला आया। लता ने नाश्ता लगा दिया। पृथ्वी ने चुपचाप नाश्ता किया , लता ने कुछ पूछा तो जवाब दे दिया। रवि जी और लक्षित भी अपना नाश्ता कर रहे थे। पृथ्वी जाने लगा तो लता उसका टिफिन लेकर आयी और कहा,”डिब्बे में चपाती और कद्दू की सब्जी रखी है,,,,,,,,,तुमको चलेगा न ?”

पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी और टिफिन लेकर चला गया , अब पृथ्वी खाने में नखरे नहीं करता था जो बनता या लता जो देती वह बिना कुछ कहे चुपचाप खा लेता और यही बातें लता को अंदर ही अंदर परेशान करती थी।
लता उदास आँखों से पृथ्वी को जाते हुए देखते रही और फिर किचन में चली गयी। किचन जमाते हुए उन्हें याद आया कि पृथ्वी को कद्दू बिल्कुल पसंद नहीं है पर आज पृथ्वी ने उन्हें कुछ नहीं कहा।

पृथ्वी स्टेशन चला आया , ट्रेन पकड़ी और ऑफिस के लिए निकल गया। पहले मुस्कुराहट हमेशा पृथ्वी के होंठो पर रहती थी , चेहरा खिला हुआ और आँखों में चमक पर अब उन्ही होंठो की रंगत गायब थी , चेहरा मुरझाया हुआ और आँखों में उदासी थी। अब वह ट्रेन में सफर करते हुए पहले की तरह कानों में ईयर फोन लगाकर ना गाने सुनता था , ना ही ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा बाहर की खूबसूरती देखता था। उसे अब कुछ अच्छा नहीं लगता था , उसका मन इतना उदास था उसे हर जगह घुटन महसूस होती।

पृथ्वी ऑफिस चला आया। आज पुरे एक महीने बाद ऑफिस वालो ने जब पृथ्वी को ऑफिस में देखा तो सब खुश हो गए और उसकी तबियत के बारे में पूछने लगे। पृथ्वी सबसे मिला और अपने केबिन में चला आया। केबिन में अंकित और तान्या थे , कशिश आज छुट्टी पर थी और मनीष मीटिंग के लिए बाहर गया था।
पृथ्वी को देखकर अंकित बहुत खुश हुआ और तान्या ने भी उस से तबियत का पूछा। पृथ्वी ने नार्मल दोनों से बात की और फिर अपने डेस्क पर बैठकर काम करने लगा।

काम करते हुए पृथ्वी को वो पल याद आने लगे जब वह इसी जगह बैठकर अवनि को मैसेज करके परेशान किया करता था , उस से बातें करते हुए मुस्कुराता था , हँसता था और उसके ख्यालो में खोकर उसके साथ सपने बुना करता था। ऑफिस में पता चला पृथ्वी का जन्मदिन है तो जयदीप ने उसके लिए केक मंगवाया , जयदीप के बहुत कहने पर पृथ्वी ने केक काटा और सबने उसे बधाईया दी। पृथ्वी के चेहरे पर फिर भी कोई मुस्कराहट नहीं थी वह बस अपनी उदासी को छुपाने की कोशिश कर रहा था।

लंच टाइम में अंकित , तान्या और मनीष ने जब उसे कद्दू खाते देखा तो तीनो ख़ामोशी से एक दूसरे को देखने लगे लेकिन पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं था वह बस चुपचाप अपना खाना खा रहा था। खाना खाकर पृथ्वी ने एक रिपोर्ट तैयार की और फाइल जयदीप को देने उसके केबिन में चला आया।

जयदीप फोन पर किसी से बात कर रहा था उस ने पृथ्वी को देखा और केबिन में रखे सोफे पर बैठने को कहा। पृथ्वी फाइल लेकर सोफे पर आ बैठा और जयदीप का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद जयदीप ने फोन रखा और पृथ्वी से कुछ दूरी बनाकर सोफे पर आ बैठा।

“ये वर्मा ग्रुप्स एंड कम्पनी की फाइल है , मैंने इसका रिपोर्ट तैयार कर दिया है आप एक बार देख लीजिये”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
जयदीप एकटक पृथ्वी को देख रहा था , पृथ्वी का उतरा चेहरा , उदास आँखे और बुझा स्वर ,, जयदीप को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”सर , ये फाइल”
जयदीप की तंद्रा टूटी उसने फाइल और साइड में रखकर कहा,”इसे मैं बाद में देख लूंगा पहले मुझे ये बताओ “क्या चल रहा है ?”

“कुछ भी नहीं , सब ठीक है”,पृथ्वी ने खुद को सामान्य दिखाते हुए कहा
“पथ्वी माना कि मैं तुम्हारा बॉस हूँ और तुम मुझे कभी अपना दोस्त नहीं मानोगे लेकिन मैंने आज से पहले तुम्हे इतना उदास और परेशान नहीं देखा , उस दिन जब मैंने तुम से अवनि के बारे में पूछा तब भी तुमने कुछ नहीं कहा,,,,,,,कुछ ऐसा हुआ है क्या पृथ्वी जो तुम एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे हो ?”,जयदीप ने अपनेपन से कहा लेकिन जैसा पृथ्वी का नेचर था वह जल्दी किसी से अपनी परेशानी या मन का हाल शेयर नहीं करता था

उसने बुझे स्वर में कहा,”मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी सर,,,,,,,आप ये फाइल देख लीजिये फिर मैं मिस्टर वर्मा से मिलकर मीटिंग डन कर देता हूँ”
“वर्मा से मीटिंग मैं कर लूंगा आज रात वो मुझसे डिनर पर मिल रहा है , तुम इतने दिनों बाद ऑफिस आये हो एक दिन में सारा काम करके फिर से बीमार पड़ने का इरादा है क्या ?”,जयदीप ने कहा


पहले पृथ्वी की इन बात पर उस से बहस कर लेता था , चिढ़ता था लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं हुआ वह उठा और कहा,”ठीक है फिर मैं चलता हूँ”

पृथ्वी ने जयदीप के जवाब का इंतजार भी नहीं किया और दरवाजे की तरफ बढ़ गया तो जयदीप ने सोफे से उठते हुए कहा,”पृथ्वी”
पृथ्वी पलटा तो जयदीप ने आगे कहा,”मैं जानता हूँ इस वक्त तुम बहुत तकलीफ में हो और किसी से भी अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करना नहीं चाहते लेकिन कभी भी तुम्हे मेरी जरूरत पड़े तो बेझिझक मुझसे कहना,,,,,,,,,,,,,ये जो मैं तुम्हे बार बार दोस्त कहता हूँ तो एक बार अपनी दोस्ती निभाने का मौका जरूर देना”
“हम्म्म जरूर”,पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलाकर कहा और वहा से चला गया।

जैसा की अवनि ने पृथ्वी से कहा था कि आज उसके जन्मदिन पर वह उसके लिए मंदिर जाकर प्रार्थना करेगी तो अवनि तैयार हुई और बाल बनाने के लिए शीशे के सामने चली आयी। इत्तेफाक से आज अवनि ने भी हरे रंग का सूट पहना था , हरा रंग पृथ्वी को बहुत पसंद था। अवनि ने अपने बालों की चोटी बनायीं , कानों में छोटे छोटे बुँदे पहने , ललाट पर काली बिंदी लगायी और ड्रेसिंग पर रखी लिपस्टिक उठाकर जैसे ही होंठो पर लगाने लगी उसे पृथ्वी की कही बात याद आयी

“आप ये डार्क लिपस्टिक मत लगाया करो , आप ऐसे ही ज्यादा अच्छी लगती है”
ना जाने क्यों पर अवनि ने उस लिपस्टिक को वापस नीचे रख दिया बस होंठो पर हल्का सा लिप ग्लॉस लगाया और मुस्कुराई ,, आज कितने दिनों बाद अवनि मुस्कुराई थी। उसका मन शांत था और उसे ख़ुशी थी कि पृथ्वी उसे भुला नहीं है। उसने अपना बैग उठाया और कमरे से बाहर तो देखा सुरभि सोफे पर बैठी है
“तुम साथ नहीं चल रही ?”,अवनि ने पूछा

“मैं मंदिर नहीं जा पाऊँगी यू नो न गर्ल्स प्रॉब्लम,,,,,,,तुम जाकर आओ मैं घर पर हूँ”,सुरभि ने कहा
“मैं तुम्हारे पास रुक जाती हूँ”,अवनि ने कहा
“ओह्ह्ह अवनि मैं ठीक हूँ बीमार नहीं हूँ , बस वापसी में मेरे लिए पेस्ट्री लेते आना”,सुरभि ने कहा
अवनि ने हामी भरी और वहा से चली गयी। अपार्टमेंट से बाहर आकर अवनि ने ऑटो रोका और उसमे आ बैठी। उसने ऑटोवाले को पता बता और ऑटो आगे बढ़ गया।

अवनि शिव मंदिर चली आयी। उसने दर्शन किये , पृथ्वी के लिए प्रार्थना की , पृथ्वी के नाम से उसकी लम्बी उम्र के लिए प्रशाद और पूजा का सामान अर्पित किया , मंदिर में ही बने शिवलिंग की तरफ चली आयी ताकि उन्हें जल अर्पित कर सके। अवनि चौकड़ी के पास आ बैठी जिसके बीचोंबीच शिवलिंग स्थापित था। सहसा ही उसे पृथ्वी का ख्याल आया , पृथ्वी के साथ उसने कभी शिवलिंग पर जल अर्पित नहीं किया था। अवनि ने कलश को पानी से भरा और जैसे ही शिवलिंग पर अर्पित करने लगी उसके कानो में आवाज पड़ी “पृथ्वी”

अवनि के हाथ रुक गए और उसका दिल धड़क उठा , चेहरे पर बेचैनी के भाव और आँखों में कभी ना खत्म होने वाला इंतजार झिलमिलाने लगा

( आखिर क्यों तोड़ दी पृथ्वी ने अवनि के लिए लता की दी कसम ? क्या पृथ्वी लेगा कभी अपनी कहानी में जयदीप की मदद ? क्या महादेव ने सुन ली अवनि के दिल की बात और पृथ्वी को बुला लिया फिर से सिरोही ?” जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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काम करते हुए पृथ्वी को वो पल याद आने लगे जब वह इसी जगह बैठकर अवनि को मैसेज करके परेशान किया करता था , उस से बातें करते हुए मुस्कुराता था , हँसता था और उसके ख्यालो में खोकर उसके साथ सपने बुना करता था। ऑफिस में पता चला पृथ्वी का जन्मदिन है तो जयदीप ने उसके लिए केक मंगवाया , जयदीप के बहुत कहने पर पृथ्वी ने केक काटा और सबने उसे बधाईया दी। पृथ्वी के चेहरे पर फिर भी कोई मुस्कराहट नहीं थी वह बस अपनी उदासी को छुपाने की कोशिश कर रहा था।

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