Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 60

by Story With Sanjana November 17, 2025
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Pasandida Aurat – 60

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

सिद्धार्थ का मैसेज देखकर अवनि फिर दुखी हो गयी। आज उसका जन्मदिन था और आज भी सिद्धार्थ उस से इस तरह की बाते कर रहा था। अवनि ने अपना फ़ोन बैग में रखा और खिड़की के बाहर देखने लगी। डेढ़ घंटे बाद वह दूसरे शहर पहुंची। अवनि बस से नीचे उतरी और मंदिर की तरफ चल पड़ी। मंदिर 1 किलोमीटर दूर था और वहा तक जाने के लिए लम्बी लाइन लगी थी। अवनि भी सबके साथ लाइन में लग गयी। यहाँ आकर अवनि का मन फिर शांत हो गया और होता भी क्यों नहीं आज वह अपने जन्मदिन पर अपने महादेव के मंदिर जो आयी थी।

लाइन में लगी अवनि सबके साथ आगे बढ़ रही थी। उसका फोन बजा तो देखा पृथ्वी का मैसेज था “पहुँच गए आप मंदिर ?”
“हाँ ! क्या तुमने कभी मणि महेश्वर मंदिर देखा है ?” अवनि ने लिखकर भेजा
“नहीं ! मैं कभी राजस्थान नहीं आया” पृथ्वी ने लिखकर भेजा  
“बहुत अच्छा मंदिर है , कहते है यहाँ आकर दर्शन करने से हर मन्नत पूरी होती है। मैं तुम्हे विडिओ कॉल करुँगी तुम भी दर्शन कर लेना” अवनि ने लिखकर भेजा।


अवनि का मैसेज देखकर पृथ्वी का दिल धड़कने लगा। अवनि उसे सीधा विडिओ कॉल करने वाली थी , ख़ुशी से उसका चेहरा चमक रहा था और होंठो से मुस्कुराहट जाने का नाम नहीं ले रही थी। वह बिस्तर पर पड़े पड़े अवनि से बात कर रहा था और जैसे ही अवनि ने विडिओ कॉल का कहा पृथ्वी जल्दी से उठा और कबर्ड की तरफ आया। वह जल्दी जल्दी कबर्ड में कुछ ढूंढने लगा। पृथ्वी को जो चाहिए था वो उसे नहीं मिला तो पृथ्वी ने कबर्ड के सारे कपडे बाहर निकाले और बिस्तर पर फैला दिए।

पीले रंग की एक टीशर्ट उसे मिली पृथ्वी ने उसे उठाया और जल्दी जल्दी पहनकर , अपने बालों को सही किया। शक्ल तो उसकी अच्छी थी ही चमक विडिओ कॉल का सुनकर पहले ही आ चुकी थी।

पृथ्वी अपने फ्लेट से बाहर निकल गया। आज संडे था तो उसे ऑफिस भी नहीं जाना था। सोसायटी के फुटपाथ पर घूमते हुए वह अवनि के फोन का इंतजार कर रहा था। भीड़ के साथ चलती अवनि मंदिर के पास पहुंची और पृथ्वी को फोन लगा दिया। अवनि ने फोन का बेक केमेरा ऑन रखा जिस से पृथ्वी भी उसके साथ दर्शन कर पाए। पृथ्वी ने धड़कते दिल के साथ कॉल रिसीव किया लेकिन स्क्रीन पर अवनि नहीं बल्कि कई सारे अनजान लोग नजर आये। पृथ्वी तो अवनि को देखना चाहता था उसे भला दर्शन से क्या लेना देना ?


मंदिर में पहुंचकर अवनि ने महादेव के दर्शन किये और पृथ्वी को भी विडिओ कॉल से दर्शन करवाया। फोन चालू था और अवनि साइड में चली आयी। मंदिर की दीवारों पर अलग अलग के कांच के टुकड़ो से बहुत ही सुन्दर डिजाइन बनाया हुआ था। अवनि अपने फोन को पकडे जैसे ही उस दिवार के सामने आयी। उसका अक्स उन शीशों दिखा और पलभर के लिए पृथ्वी की धड़कने रुक गयी। वह अपलक अवनि के उस अक्स को देखता रहा। आज तक उसने अवनि को बस तस्वीरों में देखा था आज वह उसे लाइव देख रहा था।

अवनि ने सामने देखा तो उसे नजर आया कि उसके फोन का बेक केमेरा ऑन है तो उसने फ्रंट केमेरा ऑन किया और इस बार अवनि पृथ्वी को साफ दिखाई दे रही थी। उसका दिल ट्रेन के इंजन की भांति तेज तेज चल रहा था। वह कुछ बोल ही नहीं पाया , वह बस खोया हुआ सा अवनि को देख रहा था। मुस्कुराता चेहरा , काली गहरी आँखे , होंठो पर हल्की लिपस्टिक , कानों में झुमके , खुले बाल , सर पर दुपट्टा ये देखकर तो पृथ्वी को लगा जैसे उसका दिल बाहर आ गिरेगा।


“हेलो,,,,,,,!!”,अवनि ने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर कहा तो पृथ्वी को होश आया और उसने अपना हाथ हिलाकर काँपते स्वर में कहा,”हा हाय,,,,,,,,!!”
“दर्शन किये ना तुमने ?”,अवनि ने पूछा
“अह्ह्ह ठीक से नहीं हुए”,पृथ्वी ने झूठ कहा ताकि अवनि थोड़ी देर और विडिओ कॉल पर रहे और वह उसे थोड़ी देर और देख सके


“ओह्ह्ह , रुको मैं तुम्हे सामने से दर्शन करवा देती हूँ , यहाँ से ठीक दिखेगा”,अवनि ने थोड़ा साइड में आकर कहा। उसने अभी भी फ्रंट कैमरा ही ऑन रखा था और उसके ठीक बगल में महादेव की बड़ी सी प्रतिमा थी। पृथ्वी ने एक नजर महादेव् को देखा और फिर उसके बाद उसकी नजरें अवनि पर ठहर गयी। वह क्या बोल रही थी पृथ्वी को सुनाई नहीं दे रहा था , उसके आस पास कौन था पृथ्वी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था , वह बस देख पा रहा था तो सिर्फ अवनि को,,,,,,,!!”


40 सेकेण्ड के बाद कॉल कट गया और पृथ्वी ने अपना फोन अपने सीने से लगाकर एक गहरी साँस ली और आँखे मूँद ली। ऐसे लग रहा था जैसे वह आखरी के 40 सेकेण्ड अपनी साँसे रोक कर खड़ा था।

 मंदिर से बाहर निकलकर अवनि ने एक बार फिर पृथ्वी को विडिओ कॉल लगा दिया। पृथ्वी अब तक सामान्य हो चुका था इसलिए जल्दी से फोन उठा लिया।
“वो मंदिर में ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था इसलिए फोन कट किया , वैसे तुमने भगवान से जो मांगना था वो मांगा ना ?”,अवनि ने चलते चलते कहा


“हाँ,,,,,,,बस मुझे मिल जाए”,पृथ्वी ने अवनि को देखते हुए बड़े प्यार से कहा लेकिन अवनि का ध्यान कही और था और फिर उसने पृथ्वी को देखकर कहा,”अरे जरूर मिलेगा ! कहते है यहाँ सच्चे मन से जो माँगो वो मिलता है। तुम कभी राजस्थान आओ तो यहाँ जरूर आना,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“हाँ,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा वह मैसेज में अवनि से ढेर सारी बातें कर लेता था लेकिन अब अवनि के सामने बोलने में उसे शर्म आ रही थी। एक तो उसकी धड़कने इतनी तेज कि पृथ्वी को साँस लेने के लिए भी मेहनत करनी पड़ रही थी।


अवनि पृथ्वी से बात करते हुए एक रेस्रो में चली आयी। अंदर आकर उसने पानी की बोतल के सहारे अपना फोन रख दिया और खुद उसके सामने आ बैठी। अवनि पृथ्वी से विडिओ कॉल पर बात करते हुए इतनी सहज थी लग रहा था जैसे दोनों एक दूसरे को सालों से जानते है। सोशल मीडिआ पर बहुत सोच समझकर अपनी तस्वीरें पोस्ट करने वाली अवनि बिल्कुल साधारण मेकअप खुले बालों में पृथ्वी के सामने थी। उसमे कोई झिझक नहीं थी ना आज उसे ये फर्क पड़ रहा था कि वह कैसी दिख रही होगी बल्कि वह हँसते मुस्कुराते हुए पृथ्वी से बात कर रही थी।


पृथ्वी के लिए तो ये कुछ मिनिट किसी सपने से कम नहीं थे। वह बस मुस्कुराते हुए अवनि को देखे जा रहा था। उसके चेहरे पर चमक थी और मुस्कुराहट होंठो से हटने का नाम नहीं ले रही थी। अवनि ने अपने लिए खाने के लिए चाय और डोसा आर्डर किया था और वेटर वह लेकर आ चुका था। खाना अवनि के सामने रखा था। खुले बालों के साथ वह खाना खा नहीं सकती थी इसलिए उसने अपने बैग से क्लेचर निकाला और उसे अपने होंठो के बीच दबाकर अपने बालों को समेटने लगी।

लड़कियों के लिए ये सामान्य बात हो सकती है लेकिन एक मर्द के लिए अपनी पसंदीदा औरत को ये करते देखना यकींन मानों आज भी इस दुनिया की सबसे खूबसूरत घटनाओ में से एक है। पृथ्वी ने देखा तो बस देखता ही रह गया और उसके दिल से आवाज आयी कि “हाँ ! यही है वो”
अवनि ने देखा पृथ्वी अभी भी कॉल पर है तो उसने उस से बाते करते हुए खाना शुरू किया। पृथ्वी बस प्यार से उसे देख रहा था। खाते हुए अवनि कितनी प्यारी और सुन्दर लग रही थी।

अवनि ने एक दो निवाले खाये और फिर झेंपते हुए कहा,”मैं खाना खा लू ? दरअसल मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया”
पृथ्वी को अहसास हुआ कि वह एकटक अवनि को देखे जा रहा है तो उसने कहा,”हाँ हाँ प्लीज”
“थैंक्यू ! बाद में बात करे ?”,अवनि ने कहा
“हाँ हाँ चलेगा , आप आराम से खाओ”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ने कॉल कट किया और अपना खाना खाने लगी

खाना खाकर अवनि ने बिल चुकाया और रेस्त्रो से बाहर निकल गई। वह मंदिर के आस पास में बने लोकल मार्किट में घूमी और फिर बस स्टेण्ड चली आयी उसे वापस सिरोही भी तो जाना था। बस स्टेण्ड आकर अवनि ने टिकट ली और बस में आ बैठी। गर्मी की वजह से सभी परेशान थे। अवनि बस की सिंगल सीट पर आ बैठी जो कि खिड़की के पास थी। खिड़की से आती हवा से उसे थोड़ी राहत मिली। अवनि ने अपना फ़ोन देखा काफी लोगो ने उसे बर्थडे विश किया था। सुरभि ने तो रात 12 बजे ही फोन करके उसे विश कर दिया था।

अनिकेत और अनुज सर ने भी उसे बर्थडे विश किया था। बैंक में साथ काम करने वालो ने भी उसे बधाई दी अवनि एक एक करके सबको जवाब दे रही थी तभी पृथ्वी का मैसेज आया  “आपने एक चीज नोटिस नहीं की”
“क्या ?”,अवनि ने लिखकर भेजा
“मैंने आज येल्लो टीशर्ट पहना था” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
“मैंने ध्यान नहीं दिया , कुछ स्पेशल था क्या ?” अवनि ने भेजा


“आपने कहा था न आपके पास भी एक येल्लो टीशर्ट है जो आपकी फेवरेट है , सेम टीशर्ट मेरे पास भी था इसलिए मैंने उसे पहना था” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
पृथ्वी का मैसेज पढ़कर अवनि हसने लगी तो बस में बैठे लोग उसे देखने लगे। अवनि झेंप गयी और अपनी हंसी रोककर लिखा “तुम सच में थोड़े से पागल हो”
“हाँ शायद,,,,,,,,!!” पृथ्वी ने लिखकर भेजा


“But you are a nice person तुम से बात करके अच्छा लगा” अवनि ने लिखकर भेजा  
“मुझे भी,,,,,,,,मैंने कभी सोचा नहीं था आपसे इस तरह बात होगी,,,,,,,,Thankyou ma’am !” पृथ्वी ने लिखकर भेजा और इसके बाद अवनि ऑफलाइन हो गयी जिसके पीछे वजह थी उसके फोन की बैटरी का डेड हो जाना। अवनि ने फोन बैग में रखा और आँखे मूंदकर सर सीट से लगा लिया क्योकि सिरोही पहुंचने में अभी उसे एक घंटे से ज्यादा वक्त लगना था।

 बर्थडे अवनि का था लेकिन सरप्राइज मिला पृथ्वी को , कहा वह 6 महीने से सिर्फ अवनि की लिखी किताबे पढ़ रहा था और आज अवनि ने उसे सीधा विडिओ कॉल ही लगा दिया। पृथ्वी आज बहुत खुश था वह घूम फिरकर वापस अपने फ्लेट पर चला आया। रह रह कर उसे अवनि से हुई बातचीत के पल याद आ रहे थे लेकिन मंदिर एक वो 40 सेकेण्ड उसके जहन में जम से गए। पृथ्वी हॉल में रखे सोफे पर आ बैठा और अवनि के बारे में सोचने लगा तभी उसका फोन बजा। पृथ्वी ने स्क्रीन पर नकुल का नाम देखकर फोन उठाया और कान से लगा लिया।


“हेलो पृथ्वी ! कहा है तू ? कब से तेरा फोन ट्राय कर रहा हूँ”,नकुल ने कहा
“तू ऑफिस ट्रिप से वापस कब आया ?”,पृथ्वी ने पूछा
“आज सुबह ही , शाम को मैच है तू आ रहा है ना ?”,नकुल ने कहा
“हाँ और मुझे तुम्हे कुछ बताना भी है”,पृथ्वी ने खुश होकर कहा
“क्या ?”,नकुल ने पूछा


“मिलकर बताऊंगा , शाम में मैच के बाद बताऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
“अच्छा ठीक है , अभी मैं रखता हूँ”,नकुल ने कहा और फोन काट दिया। पृथ्वी ने अपना फ़ोन टेबल पर रहा और वही सोफे पर लेट गया। कुछ देर बाद ही उसे नींद आ गई क्योकि संडे का दिन सोने के लिए होता है ऐसा पृथ्वी का मानना था।

सिरोही पहुंचकर अवनि अपने फ्लेट में चली आयी। उसने कपडे बदले और अपने लिए चाय बनाने लगी। चाय बनाते हुए उसकी नजर किचन में रखे उस कॉफी के डिब्बे पर पड़ी जो आधा भरा हुआ था और सिद्धार्थ ने अवनि को दिया था। अवनि ने उस डिब्बे को उठाया और किचन के डस्टबिन में डाल दिया। वह अब  सिद्धार्थ से जुडी कोई याद अपनी जिंदगी में नहीं चाहती थी। अवनि ने चाय कप में छानी और सोफे की तरफ चली आयी। अवनि ने चाय पी और फिर बालकनी में रखे पोधो में पानी देते हुए उन्हें साफ़ करने लगी।

अवनि ने देखा एक गमले में लगे गुलाब के पौधे पर एक गुलाब खिला हुआ है। अवनि उसके पास आयी उसे तोड़ने के बजाय उसे सहलाया और उसे प्यार भरी नजरो से देखने लगी। अवनि को याद आया जब ये पौधा पुराने घर में था तब कैसे मुरझा गया था लेकिन यहाँ लेकर आने के बाद आज इस पर पहली बार कोई फूल खिला था।

अवनि अंदर चली आयी और थोड़ी देर के लिए बिस्तर पर लेट गयी। कुछ देर बाद वह उठी और तैयार होकर सिरोही के ही एक बड़े शिव मंदिर के लिए निकल गयी। अवनि ने शिव मंदिर में आकर दर्शन किये और फिर बाहर चली आयी। बाहर आकर अवनि की आँखे ख़ुशी से चमक उठी जब उसने आसमान में चमकते  रंग बिरंगी रौशनी को देखा।

अवनि वही खड़े होकर उन चमकती रौशनी को देखने लगी। रॉकेट आसमान में जाती और ऊपर जाकर फूटने के साथ ही कुछ सेकेण्ड के लिए एक खूबसूरत आँखों में बसने वाला नजारा छोड़ जाती। अवनि उन्हें देखकर बच्चो की तरह खुश हो रही थी। आज कितने दिनों बाद उसके चेहरे पर ये ख़ुशी थी और वह दिल से मुस्कुरा रही थी। आसमान में ये सुन्दर नजारा काफी देर तक चला और फिर अवनि आगे बढ़ गयी। अवनि को आसमान में होने वाली ये रौशनी बहुत पसंद थी। उसने सामने से गुजरते ऑटो को रोका और उसमे आ बैठी। आज का दिन अवनि के लिए सच में ख़ास बन चूका था

पनवेल , मुंबई
“आज के मैच में तो तुमने कमाल ही कर दिया , दूसरी सोसायटी वाले लड़के याद रखेंगे किसके साथ खेला था ? वैसे आज तू बड़ा खुश दिखाई दे रहा था क्या बात है ?”,पृथ्वी के साथ चलते हुए नकुल ने कहा
“क्रिकेट मेरा फेवरेट है और मुझे हारना पसंद नहीं”,पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखकर कहा
“वो तो है तू बना ही जीतने के लिए है , अच्छा तू मुझे कुछ बताने वाला था , बता क्या बात है ?’,नकुल ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो चलते चलते रुका और नकुल की तरफ पलटकर कहा,”उसने मुझसे बात की ?”
“किस ने ?”,नकुल ने असमझ की स्तिथि में पूछा


“अरे वही ! जिसके बारे में मैंने तुम्हे बताया था”,पृथ्वी ने नकुल को याद दिलाने की कोशिश की
“कौन वो राजस्थान वाली ?”,नकुल ने पूछा तो पृथ्वी ने ख़ुशी से मुस्कुराते हुए हामी में सर हिलाया
“तू अभी तक उसके पीछे पड़ा है ?”,नकुल ने हैरानी से कहा
“पीछे पड़ा है से क्या मतलब , मैं क्या तुझे लोफर दिखता हूँ ?”,पृथ्वी ने नकुल को घूरकर कहा
“अरे नहीं मेरा मतलब , मुझे लगा तू उसे भूल गया होगा”,नकुल ने झेंपते हुए कहा


“भूलना होता तो कब का भूल जाता लेकिन वो यहाँ छप गयी है , इस जिंदगी में तो उसे नहीं भूल पाऊंगा”,पृथ्वी ने अपनी कनपटी पर ऊँगली रखकर कहा। नकुल ने देखा पृथ्वी उसे बदला बदला नजर आ रहा था
“पृथ्वी कही तुम उसे पसंद तो नहीं करने लगे हो ?”,नकुल ने पूछा


पृथ्वी मुस्कुराया और कहने लगा,”लोग मंदिर क्यों जाते है ? ताकि वो ईश्वर से अपनी पसंदीदा चीज और इंसान को मांग सके पर जब मैंने उसे देखा तो वो मंदिर में ही खड़ी थी ईश्वर के सामने , लगा जैसे ईश्वर ने खुद उसे मेरी झोली में डाल दिया है। उसने जब कहा कि “यहाँ सच्चे दिल से मांगने पर सब मिल जाता है” तो मैंने उसे ही मांग लिया क्योकि उसे 40 सेकेण्ड देखने के साथ ही मैं अपनी आने वाली जिंदगी के 40 साल उसके साथ जीने का फैसला कर चुका था”


नकुल ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे आज से पहले उसने पृथ्वी को किसी लड़की को लेकर ऐसी बाते करते तो बिल्कुल नहीं देखा था। उसका पृथ्वी के लिए परेशान होना जायज था क्योकि पहले भी एक बार वह पथ्वी का दिल टूटते देख चुका था।

( अवनि ने पृथ्वी को फोन एक फैन समझकर किया या उसके दिल में भी जगने लगी है पृथ्वी के लिए भावनाये ? क्या उस 40 सेकेण्ड के बाद पृथ्वी को हो गया है अवनि से प्यार ? क्या नकुल की परेशानी सही है और क्या टूटेगा इस बार फिर पृथ्वी का दिल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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3 comments

Kshmata Chauhan November 17, 2025 - 11:21 am

Jaha tak mujhe lagta hai… Avni Prithvi ko ek fan se zyada manti hai… shayad…aur shayad Avni Prithvi se dosti kar le… Avni Prithvi k sath bahot comfortable thi… mujhe nhi lagta ki koi writer apne kisi fan se ese video call karega…lakin yaha inn dono m writer aur fan se zyada hai… umeed hai ki ab Prithvi rajasthan jayega apni dadi se Milne aur kya pta Avni se mil le… Parmatma k plans kuch or hee hote hai

Reply
Shayna khan November 17, 2025 - 11:41 am

Wom amezing part ma’am.Shayed avni our prithwi jitna aaj khush h shayed usse kai zyada mai khush hu thank u so much i hop ki ab aage bahot acha hoga

Reply
Pooja panjwani December 22, 2025 - 2:16 am

Aj part padkr mujhe apse pahli bar msg ki gayi bate yaad gai pata nahi sare readers l jaise hi honge or feel krte honge. Thank you ma’am aj apne pruthvi ke nahi sabhi readers ke jajbaat likhe h jo apki stories pad kr feel krte h ya apko admire krte h …..
Thank you for such a great stories and writing……
We respect you dil se …….

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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