Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 59

by Story With Sanjana November 16, 2025
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Pasandida Aurat – 59

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि को मैसेज करके पृथ्वी सोने चला गया। आज उसे नींद भी जल्दी ही आ गयी। अगली सुबह पृथ्वी उठा और अपना फ़ोन देखा लेकिन अवनि का कोई जवाब नहीं आया , आता भी कैसे भी अवनि ने अभी तक पृथ्वी का मैसेज देखा ही नहीं था। पृथ्वी ने फ़ोन रखा और अपने लिए चाय बनाने किचन की तरफ चला आया।  चाय पीकर पृथ्वी फ्लेट से बाहर निकल गया और घर चला आया।


पृथ्वी ऑफिस जाने के लिए तैयार हुआ तब तक लता ने उसके लिए नाश्ता और टिफिन बना दिया। आज पृथ्वी ने लाइट ब्लू जींस और सफेद शर्ट पहनी थी। शर्ट की बाजु फोल्ड करते हुए पृथ्वी डायनिंग टेबल पर आ बैठा। नाश्ता करने के बाद पृथ्वी ने अपना बैग उठाया  
और जाने लगा तो लता ने कहा,”दो मिनिट रुक ना बाबा तेरा टिफिन पैक करके लाती हूँ”
“क्या बनाया है आपने ?”,पृथ्वी ने पूछा
“आलू- भिंडी और चपाती रखा है”,लता ने किचन के अंदर से कहा


भिंडी का नाम सुनते ही पृथ्वी का मुँह बन गया लेकिन बेचारा कुछ बोल नहीं सकता था वरना सुबह सुबह लता का लेक्चर सुनना पड़ता। अवनि ने मैसेज का जवाब दिया होगा सोचकर पृथ्वी ने  अपना फोन निकालकर देखा लेकिन अवनि का कोई जवाब नहीं था। पृथ्वी उदास हो गया , अब तो उसे भी लगने लगा कि अवनि को लेकर उसकी भावनाये एकतरफ़ा है। अवनि जैसी लड़की भला उसके मैसेज का जवाब क्यों देगी ?


“अच्छा पृथ्वी ! नीलम भुआ जो लड़की बता रही थी उसके बारे में कुछ सोचा है तुमने , देखो मना मत करना मैंने नीलम भुआ से बात करके लड़की को मिलने बुलाया है”,लता ने टिफिन पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा
अवनि को लेकर मायूस पृथ्वी ने आज पहली बार लता से बहस ना करके कहा,”ठीक है मिल लूंगा”
“हाँ ! तुम सच कह रहे हो , मैं अभी जाकर नीलम भुआ से बात करती हूँ”,लता ने खुश होकर कहा और वहा से चली गयी। पृथ्वी ने भी फोन जेब में रखा और ऑफिस के लिए निकल गया।

 ऑफिस आकर पृथ्वी ने खुद को काम में व्यस्त कर लिया ताकि अवनि के बारे में न सोचे। काम करते हुए उसे खुद पर ही खीज हो रही थी कि उसने अवनि को ऐसा मैसेज भेजा ही क्यों ? पृथ्वी आज अपने केबिन में अकेला बैठा था। अंकित और कशिश आज मीटिंग के लिए बाहर गये थे। तान्या छुट्टी पर थी    

लंच के बाद अपनी डेस्क पर बैठी अवनि अपना फोन देख रही थी , आज बैंक में काम कम था। अवनि ने इंस्टाग्राम खोलकर देखा कुछ मैसेज के साथ QNA में कई सारे सवाल थे लेकिन अवनि की नजर पड़ी “पृथ्वी उपाध्याय” नाम की ID पर जिसने सवाल की जगह अवनि को लिखकर भेजा था  “Marry Me”


ये पढ़कर अवनि मुस्कुरा उठी क्योकि आज से पहले उसकी किसी पोस्ट पर इतना अजीब जवाब तो किसी ने नहीं दिया था। अवनि को समझ आया कि उस ने जो लाइन्स लिखी थी पृथ्वी ने उनके जवाब में उसे “Marry Me” लिखकर भेजा है। अवनि कुछ देर उन दो शब्दों को देखते रही और फिर लिखकर भेजा
“अच्छा मजाक है,,,,,,,,!!”
 
दोपहर तक पृथ्वी काम में व्यस्त रहा। दोपहर होते होते पृथ्वी थक गया तो लेपटॉप बंद कर आँखे मूँदकर कुछ देर के लिए सर सीट से लगा लिया लेकिन आँखे बंद करते ही फिर वही अवनि के ख्याल और उसकी लिखी बातें याद आने लगी। कुछ ही पल गुजरे और पृथ्वी के फोन का रिंग बजा जो की इंस्टाग्राम मैसेज का रिंग था। पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली और जल्दी से अपना फोन उठाकर देखा। .स्क्रीन पर अवनि का मैसेज देखकर पृथ्वी का दिल धड़क उठा उसने मैसेज खोलकर देखा और मुस्कुरा उठा। उसका दिल धड़क रहा था , उंगलिया काँप रही थी और आँखों में ख़ुशी थी। अवनि का जवाब पढ़कर पृथ्वी ने लिखकर भेजा


“मजाक नहीं है मैडम ! मैंने आपकी सारी कहानिया पढ़ी है”
पृथ्वी का मैसेज देखकर अवनि ने जवाब में लिखा,”Thankyou !”
पृथ्वी ने अवनि का फिर एक और मैसेज देखा तो उसे अच्छा लगा , पहली बार उसकी अवनि से बात हो रही थी लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बात करे ? वह पहली बार किसी लड़की के सामने थोड़ा नर्वस हो रहा था। पृथ्वी ने धड़कते दिल के साथ लिखकर भेजा,”मैंने कभी सोचा नहीं था आप मेरे मैसेज का जवाब देंगी”


अवनि ने पढ़ा तो मुस्कुरा उठी और लिखकर भेजा,”ऐसी बात नहीं है , कभी कभी जेनुअन मैसेज के जवाब दे देती हूँ”
“Thankyou Ma’am”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा अपने ख्यालो में भले ही वह अवनि से कैसे भी बात करे लेकिन यहाँ वह अवनि को Ma’am और आप बोलकर बात कर रहा था।
“वैसे क्या करते है आप ? उपाध्याय जी”,अवनि ने लिखकर भेजा
“मुंबई की एक Pvt कम्पनी में मैनेजर हूँ,,,,,,!!”,पथ्वी ने लिखकर भेजा


“अच्छा है”,अवनि ने लिखकर भेजा वह अब इस बातचीत को खत्म करने का सोच ही रही थी कि तभी पृथ्वी ने उसे एक साथ 5-6 तस्वीरें भेज दी। अवनि ने हैरानी से उन तस्वीरों को खोलकर देखा तो उसे और ज्यादा हैरानी हुई। पृथ्वी ने अवनि को अपने ड्राइविंग लायसेंस , आधार कार्ड , ऑफिस कार्ड की ID और पेन कार्ड की फोटो भेजी थी।
“आप ये सब मुझे क्यों भेज रहे है ?”,अवनि ने लिखकर भेजा


“ताकि आपको ये ना लगे कि मैं आपसे अपने बारे में कुछ छुपा रहा हूँ या झूठ बोल रहा हूँ , ये सब मेरे ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स है”,पृथ्वी ने लिख भेजा
पृथ्वी का मैसेज पढ़कर अवनि हंस पड़ी वह पहली बार ऐसे अजीब लड़के से मिल रही थी जो पहली बातचीत में उसे अपना ID प्रूफ भेज रहा था। अवनि ने कुछ देर पृथ्वी से बात की और फिर काम में व्यस्त होने का कहकर ऑफलाइन हो गयी।


अवनि ने अपना फोन साइड में रखा और अपना काम करने लगी। काम करते करते ही उसे पृथ्वी के भेजे ID प्रूफ की याद आयी और अवनि हसने लगी ये देखकर दिव्या ने कहा,”क्या हुआ अवनि जी किस बात पर हंस रही है आप ?”
“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं ऐसे ही,,,,,,,,,!!”,कहकर अवनि ने एक बार फिर अपना ध्यान अपने काम पर लगा लिया और पृथ्वी के ख्याल को साइड कर दिया।

अवनि से बात करके पृथ्वी के चेहरे पर जो ख़ुशी थी वह देखने लायक थी। उसका दिल कर रहा था कि वह जोर जोर से चिल्लाकर अपनी ख़ुशी जाहिर करे , उछले-कूदे , नाचे गाये। अवनि के ऑफलाइन होने के बाद पृथ्वी अपनी कुर्सी से उठा और ख़ुशी से उछलकर कहा,”यस,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी बेचारा अपनी ख़ुशी ठीक से एन्जॉय भी नहीं कर पाया कि उसकी नजर अपने केबिन के दरवाजे पर खड़े जयदीप पर पड़ी जो कि मुस्कुराते हुए पृथ्वी को ही देख रहा था।

जयदीप को देखते ही पृथ्वी सामान्य हो गया वह कुछ कहता इस से पहले जयदीप ने कहा,”मैं जानता ही था कि कुछ तो चल रहा है तुम्हारी जिंदगी में,,,,,,,,आज से पहले मैंने तुम्हे इतना खुश कभी नहीं देखा”
“आप यहाँ क्या कर रहे है ?”,पृथ्वी ने पूछा
“मालिक आपकी जानकारी के लिए बता दू ये ऑफिस मेरा है और मैं यहाँ का बॉस हूँ और मुझे इस ऑफिस में कही भी जाने की परमिशन है”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी झेंप गया क्योकि जयदीप सही कह रहा था


पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले जयदीप की पत्नी वहा आयी और कहा,”किस परमिशन की बात कर रहे हो जय ?”
“हेलो मेम ! सर कह रहे है कि ये ऑफिस इनका है और इन्हे इस ऑफिस में कही भी जाने की परमिशन है फीमेल केबिन में भी,,,,,,,,,,,!!”,आखरी शब्दों पर पृथ्वी ने जोर देकर कहा तो जयदीप ने उसे घुरा लेकिन बेचारा पृथ्वी से कुछ कह पाता इस से पहले उसकी पत्नी ने उसे घूरकर कहा,”अच्छा तो ये होता है ऑफिस में,,,,,,,,,,घर चलो तुम्हे तो मैं बताती हूँ”


जयदीप पृथ्वी को घूरते हुए वहा से चला गया और पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ हिला दिया। जयदीप के जाने के बाद पृथ्वी एक बार फिर अपनी कुर्सी पर आ बैठा और अवनि के मैसेज को पढ़ने लगा। उसने उन्हें एक बार पढ़ा , दो बार पढ़ा , बार बार पढ़ा और जितनी बार पढ़ा मुस्कुराहट उसके होंठो पर थी

पृथ्वी आज बहुत खुश था। जिस लड़की की लिखी कहानिया वह पढ़ रहा था , जिसके बारे में दिन रात सोचता रहता था आज उस लड़की ने उस से बात की।  दोपहर बाद पृथ्वी में एक अलग ही एनर्जी और बदलाव था। उसने सभी पेंडिंग काम निपटाये और शाम में घर के लिए निकल गया।

स्टेशन पर आकर उसने अपनी रोजाना वाली ट्रैन पकड़ ली , हमेशा की तरह भीड़ लेकिन आज पृथ्वी इस भीड़ को देखकर ना खीज रहा था ना ही उसे चिढ हो रही थी। वह दरवाजे के पास खड़ा हो गया और कानों में ईयर फोन लगाकर अपने फ़ोन में गाना चलाकर छोड़ दिया। मुस्कुराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। हवा से उड़ते बालों में हाथ घुमाते हुए वह गाने की हर लाइन महसूस कर रहा था। आज बहुत दिनों बाद वह सच में खुश था।

सिरोही , अवनि का फ्लेट
घर आकर अवनि ने कपडे बदले और अपने लिए चाय बनाने किचन में चली आयी। अवनि ने चाय बनायीं और बालकनी में चली आयी। घर आकर वह पृथ्वी और उस से हुई बात के बारे में लगभग भूल चुकी थी। अवनि बीते वक्त की तकलीफ तो नहीं भूली लेकिन उसने खुद को सम्हाल लिया। उसने खुद को वक्त देना शुरू कर दिया। एक बार फिर वह अपनी अधूरी किताबो की तरफ रुख मोड़ चुकी थी। आज अवनि का खाना बनाने का मन नहीं था बाहर से मंगवाने का सोचकर वह अपने कमरे में चली आयी और लेपटॉप के सामने आ बैठी।

उसने अपनी अधूरी किताब के फोल्डर को खोला और उस पर काम करने लगी। कुछ देर बाद अवनि को कुछ जरुरी जानकारी लिखनी थी इसलिए उसने दराज खोला और उसमे रखा नोटपेड निकाला। नोटपेड निकालते हुए अवनि की नजर दर्ज में रखे रंग बिरंगे कागजो और लिफाफों पर पड़ी। अवनि को अपने चाहने वाले के लिए खत लिखने थे लेकिन उसे याद आया कि उसने कभी सिद्धार्थ के लिए खत लिखा ही नहीं।

सिद्धार्थ का ख्याल आते ही अवनि के चेहरे पर उदासी तैर गयी और उसे सिद्धार्थ का बुरा बर्ताव याद आने लगा। अवनि ने लेपटॉप बंद कर दिया और अपनी बाँहो को टेबल पर रख अपना सर उन पर टिका लिया और उदास आँखों से दराज में रखे उन खाली कागजों को देखने लगी।

पृथ्वी घर पहुंचा , बाकि दिनों के बजाय आज वह ज्यादा खुश था और उसकी ख़ुशी की वजह थी अवनि। रात का खाना खाकर पृथ्वी अपने फ्लेट पर चला आया वह नकुल को इस बारे में बताना चाहता था लेकिन नकुल एक हफ्ते के लिए ऑफिस ट्रिप पर था। पृथ्वी ने अपना फोन देखा कुछ नया नहीं था ना अवनि ने कोई पोस्ट किया था ना ही कोई नयी स्टोरी , पृथ्वी ने अवनि को सामने से मैसेज करने का सोचा लेकिन रात काफी हो चुकी थी इसलिए अगले दिन करने का सोचकर पृथ्वी सोने चला गया और लेटते ही उसे नींद आ गयी।

अगले दिन पृथ्वी ऑफिस चला आया। वह काम करते हुए बार बार अपना फोन देख रहा थका लेकिन अवनि का कोई मैसेज नहीं था। जब पृथ्वी से नहीं रहा गया तो उसने खुद ही सामने से अवनि को मैसेज कर दिया और कुछ देर बाद ही अवनि का जवाब भी आ गया। मुस्कुराहट ने पृथ्वी के होंठो पर एक बार फिर जगह बना ली और वह मुस्कुराते हुए अवनि से बात करने लगा।

अपने नाम से लेकर एड्रेस , फोन नंबर , फॅमिली में कौन कौन है ? से लेकर अपनी पसंद नापसंद सब उसने अवनि को बता दी। पृथ्वी एक दिन में ही अवनि को अपने बारे में सब कुछ बता देना चाहता था या यू कहे कि वह बीते उन 6 महीनो की भरपाई कर रहा था जो उसने अवनि के बिना गुजारे थे।


पृथ्वी एक समझदार , सोच समझकर बोलने वाला लड़का था लेकिन अवनि के सामने वह एकदम से अपनी समझदारी भूल गया और उसे अपने बारे में सब ऐसे बता रहा था जैसे कोई छोटा बच्चा अपने पसंदीदा इंसान को देखकर उस से सब बाटने लगता है। पृथ्वी से बात करते हुए अवनि भी सहज थी और ऐसा क्यों था वह खुद नहीं समझ पायी , जबकि आज से पहले उसने किसी अनजान से इतनी बाते नहीं की थी। अवनि बात ख़त्म करने की कोशिश करती और पृथ्वी फिर कोई सवाल पूछकर उसे रोक लेता।

अपना अपना काम करते हुए दोनों बीच बीच में एक दूसरे को जवाब दे देते। आज का दिन भी पृथ्वी के लिए बहुत अच्छा गुजर रहा था। दो दिन में पृथ्वी ने अवनि को लगभग अपने बारे में सबकुछ बता दिया यह तक के रुषाली के बारे में भी और ये जानकर अवनि को दुःख हुआ क्योकि वह खुद भी उसी दर्द से गुजर रही थी पर जब पृथ्वी ने उसे बताया कि अवनि की कहानियो ने पृथ्वी की इस से निकलने में बहुत मदद की तो उसे इस बात की ख़ुशी भी हुई।


यू तो अवनि की लिखी कहानियो और किताबो को अब तक लाखो लोगो ने पढ़ा था लेकिन अवनि की इतनी बातें सिर्फ पृथ्वी से हो रही थी लेकिन पृथ्वी से बात करते हुए वह सहज थी हालाँकि उसने अभी तक पृथ्वी से अपने बारे में ज्यादा बात ज्यादा बात नहीं की थी सिवाय अपने रहने और अपने काम को लेकर , ना उसने सिद्धार्थ का जिक्र किया।

देखते ही देखते 2 दिन गुजर गए और आज अवनि का जन्मदिन था लेकिन पृथ्वी ये बात नहीं जानता था न अवनि ने उसे बताया। आज अवनि अपना ये दिन अकेले बिताना चाहती थी। सुबह से वह बार बार अपने फोन की स्क्रीन देख रही थी उसे ना जाने क्यों आज सिद्धार्थ के मैसेज का इंतजार था ? अवनि को अब भी लगता था कि सिद्धार्थ को अपनी गलतियों का अहसास होगा और वह लौट आएगा। अवनि इंतजार करती रही लेकिन ना सिद्धार्थ का मैसेज आया और ना ही कोई फ़ोन ,

मायूस होकर अवनि ने फोन रखा और कबर्ड से अपना लहरिये का बहुत ही सुन्दर नया सूट निकाला और साथ में हलके गुलाबी रंग का राजस्थानी दुपट्टा निकाल लिया। अवनि ने सूट पहना और शीशे के सामने चली आयी। उसने अपने लम्बे बालों की सीधी माँग निकाली और दोनों तरफ के थोड़े थोड़े बाल लेकर पीछे क्लेचर में फंसा लिया। कानो में मैचिंग झुमके पहने जो कि अवनि के पसंदीदा थे। ललाट पर आज कितने दिनों बाद काली बिंदी लगायी जिसे सिद्धार्थ के कहने पर लगाना छोड़ चुकी थी क्योकि सिद्धार्थ को काली बिंदी पसंद नहीं थी।

आँखों में हल्का काजल लगाया , होंठो पर लिपस्टिक लगायी और कलाई पर घडी पहन ली। अवनि तैयार थी उसने गले में दुपट्टा डाला और अपने पर्स में जरुरी सामान रखकर फ्लेट से बाहर चली आयी।
सिद्धार्थ का मैसेज तो नहीं आया लेकिन पृथ्वी का मैसेज आया जिसमे वह अवनि को “Birthday Wish” कर रहा था। अवनि की उदासी मुस्कान में बदल गयी। जो दिल के करीब था उसे अहसास भी नहीं था और जिसे अवनि जानती तक नहीं थी उसने उसे विश किया।

अवनि ने Thankyou लिखकर भेजा और पृथ्वी का मैसेज आया “आज का क्या प्लान है ? कैसे सेलिब्रेट करने वाली है आप अपना Birthday ? अगर आपको बुरा ना लगे तो क्या मैं आपके लिए एक केक आर्डर कर दू ?”
“अरे नहीं नहीं ! तुमने विश किया वही काफी है। आज का दिन मैं कुछ मंदिरो में भगवान् के दर्शन करके बिताने वाली हूँ , घर से दूर हूँ और यहाँ मेरा कोई दोस्त भी नहीं है तो यही बेस्ट है”,अवनि ने लिखकर भेजा


अवनि का मैसेज पढ़कर पृथ्वी उदास हो गया। आज का दिन अवनि की जिंदगी में ख़ास था लेकिन वह अकेली थी। पृथ्वी ने उसे ध्यान से जाने को कहा और कुछ देर बाद अवनि ऑफलाइन हो गयी।

अवनि शहर से बाहर शिव मंदिर जा रही थी उसने बस स्टेण्ड आकर टिकट ली और बस में आ बैठी। अवनि का मन शांत था उसके लिए आसान नहीं था लेकिन फिर भी वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी। अभी बस कुछ ही दूर चली थी कि उसका फोन बजा। अवनि ने फोन देखा स्क्रीन पर सिद्धार्थ का नाम देखकर अवनि का दिल धड़कने लगा। अवनि ने मैसेज खोलकर देखा और जैसे ही पढ़ा अवनि की आँखों में नमी तैर गयी और चेहरा एक बार फिर उदासी से घिर गया। सिद्धार्थ ने लिखा था


“जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाये अवनि ! I Wish महादेव तुम्हारी जिंदगी में ढेर सारी खुशिया लेकर आये और तुम्हे वो सब मिले जो तुम डिजर्व करती हो। मैं दुआ करूंगा महादेव मुझ जैसे लोग तुम्हारी जिंदगी में ना लाये”

( अवनि और पृथ्वी की ये बातचीत आगे बढ़ेगी या लग जाएगा इन पर फुलस्टॉप ? क्या पृथ्वी जान पायेगा अवनि का दर्द और निकाल पायेगा उसे इस दर्द से बाहर ? अवनि को इमोशनल मैसेज करके क्या सिद्धार्थ करना चाहता है उसे फिर से शर्मिंदा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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3 comments

Shayna khan November 16, 2025 - 11:21 am

Nice part mam .ham bahot khush h ki aap ne prithwi ko avni se mila diya i am so happy wow. And ye siddhart kitna bura insan h thankgod ki ye khud apni ajeeb harkat krke khud avni se picha chudha liya.Nhi to bechari avni ka kya hal hota.And next plzz….

Reply
Surbhi kumari November 16, 2025 - 12:49 pm

Thank you… Thank you… Thank you so much…
Aaj jitni smile prithvi kr rha utni hi mai v kr rhi…
Mai aise smile kr rhi aur mere ghrwale meri smile dekhkr sk kr rhe… Pr mai apni smile nhi chhupa rhi..
Thank you for this beautiful feeling 🙏🙏
You are the best
Love you 😘😘😘

Reply
Kshmata Chauhan November 16, 2025 - 12:53 pm

Baat Avni aur Prithvi ki hui hai…aur khushi mujhe ho rhi hai…khar kuch bhi ho but Prithvi ne Avni ko apne bare m sab kuch sach aur saaf bta kar sahi kiya…aur yeh bhi best hua ki last m Siddharth ne Avni se birthday wish kar bola ki Mahadev uske jaise logo ko Avni ki zindagi m bheje…iska matlab to saaf hai ki Siddharth khud ab Avni ko nhi chahata hai aur I think uski life m koi or ladki aa chuki hai…bhaad m jaye Siddharth…hum to apne hero Prithvi k liye bahut khush hai

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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