Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 71

by Story With Sanjana November 28, 2025
written by Story With Sanjana November 28, 2025 2 comments
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Pasandida Aurat – 71

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि से खत लिखने का कहकर सुरभि सोने चली गयी। अवनि कुछ देर पलकें झुकाये खड़ी रही और फिर अपनी स्टडी टेबल की तरफ चली आयी। अवनि कुर्सी पर आ बैठी। उसने टेबल की दराज खोली और उसमे रखा कोरा खत निकाला। अवनि को याद आया आज से पहले उसने किसी के लिए इस तरह खत नहीं लिखा था बल्कि वह इन खतों को अपने “पसंदीदा मर्द” के लिए लिखना चाहती थी लेकिन अवनि सिद्धार्थ के लिए कभी ये खत लिख ही नहीं पायी। अवनि ने नोटबुक उठायी और हाथ में पकडे कोरे खत को उस पर रख दिया।

अवनि ने पेन होल्डर में से एक पेन निकाला और अजीब बात ये थी कि इस पेन की स्याही हरे रंग की थी। अवनि ने पृथ्वी के लिए खत लिखना शुरू किया। खत लिखते हुए उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे और खत की पहली लाइन थी
“मैं नहीं जानती ये खत कभी तुम तक पहुंचेगा भी या नहीं पर इसे लिखना जरुरी लगा”
अवनि ने उस खत में पृथ्वी से माफ़ी मांगने से लेकर अपनी भावनाये भी लिखी साथ ही आखिर में उसने कुछ ऐसा लिखा जो देखने के बाद यकीनन पृथ्वी उदास होने वाला था।

अवनि ने उस खत को मोड़कर एक लिफाफे में रखा और बंद करके उस लिफाफे पर आज की तारीख डाल दी। अवनि ने कुछ देर तक उस खत को एकटक देखा और फिर बहुत ही प्यार से टेबल की दराज में रख दिया। पृथ्वी के लिए खत लिखने के बाद अवनि काफी हल्का महसूस कर रही थी। उसने घडी में वक्त देखा , रात बहुत हो चुकी थी। अवनि उठी और बिस्तर पर आकर सुरभि के बगल में लेट गयी। कुछ देर बाद ही अवनि को नींद आ गयी लेकिन उसके बगल में लेती सुरभि अभी तक जाग रही थी

उसने धीरे से अपनी आँखे खोलकर अवनि को देखा और मन ही मन कहा,”पृथ्वी के लिए खत लिखते हुए तुम कितनी प्यारी लग रही थी अवनि , ये बिल्कुल तुम्हारी ख्वाबो की दुनिया जैसा ही था। उसे खत लिखते हुए कितना सुकून था तुम्हारे चेहरे पर यकीनन पृथ्वी ही वो इंसान है अवनि जो तुम्हें प्यार में यकीन दिला सकता है , मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी वो जल्द से जल्द तुम्हारे दिल में पृथ्वी के लिए अहसास जगा दे”
अवनि को प्यार भरी नजरो से देखते हुए सुरभि ने भी अपनी आँखे मूँद ली।

आनंद निलय अपार्टमेंट , मुंबई
अपने फ्लेट की बालकनी में खड़ा पृथ्वी आसमान में चमकते चाँद को देखते हुए चाय पी रहा था। आज उसने पहली बार वो किया जो आज तक उसने किसी के लिए नहीं किया था और इस बात को लेकर वह थोड़ा हैरान था और थोड़ा खुश भी। पृथ्वी ने कभी सोचा नहीं था कि एक लड़की के लिए वह ये सब करेगा वो भी उस लड़की के लिए जो उसके प्यार को इतनी बार ना बोल चुकी है। वो लड़की जिस से पृथ्वी अभी तक मिला नहीं था , जिस से बात करने का जरिया सिर्फ मेल और इंस्टाग्राम था

वो लड़की जो हर बार पृथ्वी को खुद से दूर रहने की बाते करती थी , तारीफ के नाम पर पृथ्वी की हर तस्वीर को वाहियात कहती थी , वो बात बात पर चिढ जाती थी। पृथ्वी को खुद पर ही हंसी आ रही थी और वह बस मुस्कुरा रहा था। पृथ्वी ने खाली कप साइड में रखा और बालकनी की रेलिंग से पीठ लगाकर खड़ा हो गया। उसने अपने हाथो को बाँधा और गर्दन घुमाकर आसमान में चमकते चाँद को देखने लगा। हर रोज चाँद से दूर दिखने वाला सितारा आज चाँद के थोड़ा करीब था और चाँद की रौशनी में वो भी चमक रहा था।

पृथ्वी मुस्कुराया और सामने खाली पड़े हॉल को देखकर कहा,”हाह ! कब आएगा वो दिन जब मेरे यहाँ खड़े होने पर तुम मुझे इस हॉल में यहाँ वहा घूमती नजर आओगी। कभी तुम खाने में क्या बनाऊ को लेकर परेशान नजर आओगी , कभी मुझसे शिकायत करती कि ये गीला टॉवल मैंने यहाँ सोफे पर क्यों डाला है ? कभी प्यार से मुझे ऑफिस से घर जल्दी आने को कहती हुयी नजर आओगी , कभी यहाँ बैठकर इत्मीनान से अपनी लिखी किसी किताब का हिस्सा मुझे सुनाती हुई और मैं बस यहाँ खड़े होकर प्यार से तुम्हे देखा करूंगा,,,,,,,,,,,

अह्ह्ह्हह लेकिन कब आएगा वो दिन , जिस तरह से तुम मुझे सता रही हो ना , मुझसे सॉरी नोट लिखवा रही हो , सच में मुझे तुम्हे अपना बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। हो सकता आज मैंने जो किया वो तुम्हे अजीब लगे या फिर तुम्हे लगे कि मैंने तुम्हे इम्प्रेस करने के लिए ये सब किया तो ऐसा नहीं है अवनि “28 साल लोगो के बीच रहकर दुनियादारी सीखने के बाद समाज में बद्तमीज और कठोर बनकर रहने से ज्यादा आसान मुझे अपनी गलतियों पर तुम्हारे सामने आज्ञाकारी और नर्म बनकर रहना लगा और ये सिर्फ तुम ही कर सकती हो

तभी तो स्कूल टाइम में पनिशमेंट में मिलने वाले नोटस ना लिखने वाला मैं तुम्हारे कहने से सफ़ेद पन्ने पर नीली स्याही से सैंकड़ो बार Sorry लिख रहा था” ये प्यार नहीं तो और क्या है अवनि ? सच कहता है नकुल मैं बदल गया हूँ , पर तुम्हारे लिए खुद को बदलना भी अच्छा लग रहा है,,,,,,,,,,,,,मैं तुम से मिलना चाहता हूँ अवनि , तुम्हे बताना चाहता हूँ मेरे दिल में तुम्हारे लिए कितना प्यार है , तुम से बातें करना चाहता हूँ , उस हर सपने के बारे में तुम्हे बताना चाहता हूँ जिसे मुझे  तुम्हारे साथ पूरा करना है

तुम्हे अतीत की यादों से बाहर लाना चाहता हूँ , ये यकीन दिलाना चाहता हूँ कि बारिश आज भी दुनिया की सबसे खूबसूरत घटना है। एक गलत इंसान की वजह से तुम प्यार करना कैसे छोड़ सकती हो ? खुश रहना कैसे छोड़ सकती हो ? सपने देखना कैसे छोड़ सकती हो अवनि ? सच कहू तो मुझे उस इंसान पर आज भी गुस्सा है और मैं चाहता हूँ कि वो मेरे सामने कभी ना आये वरना मैं उसे पक्का मारूंगा , फिर इसके लिए चाहे तुम मुझे जो चाहो वो सजा देना मुझे मंजूर है,,,,,,,,,,तुम सही कहती हो

मैं सच में थोड़ा अजीब हूँ ये सब बातें मुझे तुम्हारे सामने बैठकर तुम से करनी चाहिए लेकिन मैं खुद से कर रहा हूँ,,,,,,,मैं बीमार हूँ काश तुम यहाँ होती मेरे लिए कुछ अच्छा बनाती और मुझे अपने हाथो से खिलाती , मेरे सिरहाने बैठती और मेरे सर पर पानी की पट्टिया रखती , मुझे दर्द में देखकर परेशान होती और मैं तुम्हारी गोद में सर रखकर सुकून की नींद सोता,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह काश ऐसा होता”

पृथ्वी खुद से ही बातें कर रहा था और ऐसा करते हुए वह बहुत ही प्यारा लग रहा था। क्योकि एकदम से वह सीरियस हो जाता और एकदम से मासूम चेहरा बना लेता , एकदम से मुस्कुराता और एकदम से उदास हो जाता। पृथ्वी कुछ देर वही खड़ा रहा और फिर उसे उबासी आने लगी , वह अपने कमरे में चला आया और बिस्तर पर आ गिरा उसे नींद आ गयी।

सिरोही , राजस्थान
अगली सुबह सुरभि अवनि से पहले ही उठ गयी। अवनि परेशान थी और देर से सोई थी इसलिए सुरभि ने उसे नहीं उठाया। कमरे का दरवाजा बंद किया और बाहर हॉल , किचन की सफाई कर दी। दूधवाले से दूध लिया लेकर अपने और अवनि के लिए चाय बनाने लगी। अवनि उठकर बाहर आयी , घर साफ देखा और फिर जब किचन में सुरभि को चाय बनाते देखकर कहा,”अरे मुझे उठा देती”

“मैडम मैं यहाँ मेहमान बनकर नहीं बल्कि तुम्हारी फ्लेट पार्टनर बनकर आयी हूँ इसलिए अब काम बाटने में कैसी शर्म ? ये छोडो ये लो गरमागर्म अदरक वाली चाय पिओ”,सुरभि ने चाय के कप लेकर अवनि की तरफ आते हुए कहा
अवनि ने चाय का कप लिया और कहा,”थैंक्यू”
अवनि सोफे पर आ बैठी और सुरभि नीचे ही पसर गयी और चाय पीते हुए कहा,”अच्छा अवनि तुमसे एक बात पुछु”
“हम्म्म पूछो”,अवनि ने कहा

“अगर पृथ्वी तुम से मिलने सिरोही आये तो क्या तुम उस से मिलोगी ?”,सुरभि ने गंभीरता से कहा
पृथ्वी का नाम सुनकर अवनि का हाथ रुक गया और उसने सुरभि से नजरे चुराकर कहा,”नहीं ! मैं उस से कभी मिलना नहीं चाहूंगी”
“हाँ तुम्हे डर है कही उस से मिलने के बाद तुम्हे उस से प्यार ना हो जाये”,सुरभि ने अवनि की तरफ देखकर कहा  
“ऐसा कुछ भी नहीं है सुरभि,,,,,,,और मुझे उस से प्यार क्यों होगा ?”,अवनि ने चिढ़कर कहा

“क्योकि वो प्यार करने लायक है अवनि , पृथ्वी जैसे लड़के तुमने अपनी किताबो के अलावा कही देखे है , नहीं ना इसलिए आई ऍम डेम स्योर तुम उस से मिली तो तुम्हे उस से प्यार जरूर हो जाएगा”,सुरभि ने अवनि को परेशान करते हुए कहा और ये सुनकर अवनि थोड़ी परेशान हो भी गयी और कहा,”नहीं होगा , कभी नहीं होगा”
“अच्छा तो फिर तुमने उस से मिलने से इंकार क्यों किया ?”,सुरभि ने कहा
“क्योकि मुझे उस से नहीं मिलना और वैसे भी वो मुझसे मिलने इतनी दूर राजस्थान क्यों आएगा ?”,अवनि ने कहा

“अरे अवनि मैडम जो लड़का आज के टाइम में तुम्हारे कहने पर तुम्हारे लिए 100 टाइम सॉरी नोट लिख सकता क्या वो तुम से मिलने राजस्थान नहीं आएगा , वैसे भी मोहब्बत में लोग 7 समंदर पार चले जाते है मुंबई से राजस्थान तो फिर भी 800-900 किलोमीटर है ,, तुम उसे आवाज देकर तो देखो देखना वो जरूर आएगा”,सुरभि ने पृथ्वी पर विश्वास दिखाते हुए कहा

“मुझे लगता है सुबह सुबह तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है , वो यहाँ आया तो उसकी लाइफ में प्रॉब्लम बढ़ जाएगी और मैं ये बिल्कुल नहीं चाहती इसलिए तुम  ख्याल अपने दिमाग से निकाल दो”,अवनि ने उठते हुए कहा वह अपनी चाय खत्म कर चुकी थी।
“अवनि अवनि अवनि , आखिर क्या कमी है उस में ?”,सुरभि ने अवनि के पीछे आते हुए कहा
अवनि पलटी और कहा,”क्योकि हम दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अलग है”
सुरभि ने सुना तो कहा,”अच्छा बताओ क्या अलग है ?”

अवनि समझ गयी कि सुरभि ऐसे उसका पीछा नहीं छोड़ेगी इसलिए किचन के प्लेटफॉर्म से अपनी पीठ लगा ली और अपने हाथो को बांधकर कहा,”वो उम्र में मुझसे 2 साल छोटा है”
“तो क्या हुआ आजकल इतना फर्क तो चलता है इसके अलावा क्या प्रॉब्लम है ?”,सुरभि ने भी अपने हाथो को बांधकर प्लेटफॉर्म से पीठ लगाकर कहा  
दोनों एक दूसरे के आमने सामने खड़ी थी और एक वाक युद्ध दोनों में छिड़ चुका था
“मैं राजस्थान से हूँ और वो मुंबई से है , भाषा से लेकर खाने तक सब अलग है”,अवनि ने कहा

“ओह्ह्ह अवनि तुम किस दुनिया में जी रही हो , पृथ्वी के साथ तुम्हे राजस्थान से बाहर जाने को मिलेगा वैसे भी तुम्हारी मंजिल वही है “मुंबई” और भाषा का क्या है तुम उसे राजस्थानी सीखा देना वो तुम्हे मराठी सीखा देना और वैसे भी प्यार की कोई भाषा नहीं होती वो तुम दोनों बिना बोले भी जाता सकते हो। रही बात खाने की तो अच्छा है न तुम उसे “दाल-बाटी-चूरमा” खिलाना वो तुम्हे अपने वहा का “वडा-पाव” खिलायेगा। ये वजह भी केंसल है नेक्स्ट,,,,,,,,!!”,सुरभि तो आज जैस हाथ धोकर अवनि के पीछे पड़ गयी थी।

“उसे मेरे पास्ट से कोई प्रॉब्लम नही है”,अवनि ने उलझन भरे स्वर में कहा
 सुरभि ने सुना तो हैरानी से अवनि को देखा और कहा,”इस बात पर हँसना है या रोना है ? अवनि उसे तुम्हारे पास्ट से प्रॉब्लम नहीं है इस से ज्यादा अच्छी बात भला और क्या हो सकती है ? जो इंसान तुम्हे तुम्हारे पास्ट से जज नहीं कर रहा सोचो वो तुम्हे सिर्फ तुम्हारा आज देखकर एक्सेप्ट कर रहा है”
“हाँ लेकिन कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है कि उसे मेरे पास्ट से फर्क न पड़े ?”,अवनि ने अपने मन की उलझन सुरभि के सामने रखी

“ओह्ह्ह अवनि ! तुमने अब तक अपनी जिंदगी में बुरे लोग देखे है ना इसलिए,,,,,,,,इसलिए तुम्हे ये अजीब लग रहा है,,,,,,,,,,और बताओ क्या प्रॉब्लम है ?”,सुरभि ने अवनि को समझाते हुए कहा
“उसकी फॅमिली मुझे कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी”,अवनि ने कहा
“अपनी फॅमिली को मनाना उसका काम है उसकी टेंशन तुम मत लो , आगे बोलो”,सुरभि ने कहा
“वो बिल्कुल भी स्प्रिचुअल नहीं है , महादेव से तो हमेशा शिकायत रहती है उसे”,अवनि ने कहा

“हो सकता है वो प्रेक्टिकल हो,,,,,,,,,वैसे भी जब तुम उसकी जिंदगी में चली जाओगी तो वह स्प्रिचुअल भी हो जायेगा और महादेव को भी मानने लगेगा,,,,,,,,और ?”,सुरभि ने मुस्कुराकर कहा क्योकि अब तक अवनि एक भी ऐसी वजह नहीं बता पायी जो सुरभि को जायज लगे
कुछ देर खामोश रहने के बाद अवनि ने कहा,”वो नॉन-वेजेटेरियन है”
“छोड़ देगा,,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने इतना कॉन्फिडेंस से कहा कि एक बारगी तो अवनि भी हैरानी से उसे देखने लगी साथ ही शक भरी नजरो से भी कि कही सुरभि पृथ्वी से मिली हुई तो नहीं है

“अह्ह्ह्हह मेरा मतलब तुम कहोगी तो वो छोड़ देगा,,,,,इतना तो कर लेगा वो तुम्हारे लिए,,,इसके अलावा कोई वजह है तुम्हारे पास उसे रिजेक्ट करने की ?”,सुरभि ने अपने नाखुनो पर फूंक मारते हुए कहा  
बेचारी अवनि खामोश हो गयी। पृथ्वी के खिलाफ बोलने के लिए उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन अवनि फिर भी नहीं चाहती थी कि पृथ्वी उसकी जिंदगी में आये इसलिए कहा,”सच कहू तो उसे रिजेक्ट करने की मेरे पास कोई वजह नहीं है , वो बहुत अच्छा इंसान है लेकीन मैं फिर भी नहीं चाहूंगी कि हम कभी मिले,,,,,,,,,,,,,!!”

“लेकिन क्यों अवनि ? तुम कब तक खुद को ऐसे बांधकर रखोगी ? एक इंसान ने तुम्हारे साथ गलत किया इसका मतलब ये नहीं है कि तुम अब किसी और को मौका ही ना दो,,,,,,,,,पृथ्वी अच्छा लड़का है अवनि उसे जाने मत दो , वो सच में तुम से बहुत प्यार करता है”,सुरभि ने उदास होकर कहा
“प्लीज सुरभि,,,,,,,प्लीज”,अवनि ने कहा और ये कहते हुए उसकी आँखों में आँसू भर आये ये देखकर सुरभि ने आगे बढ़कर अवनि को गले लगाया और उसकी पीठ सहलाते हुए कहा,”मुझे माफ़ कर दो,,,,,,,लेकिन मैं तुम्हे ऐसे नहीं देख सकती अवनि”

“मैं ऐसे खुश हूँ सुरभि , मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मेरे पास मेरा काम है , मेरी किताबे है , तुम हो और मेरे महादेव है , इसके अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए,,,,,,,,,,मैं इन सबके साथ खुश हूँ और मैं खुश हूँ क्योकि तुम मेरी दोस्त हो। मेरे लिए बस इतना काफी है,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा तो सुरभि ने अवनि से आगे कोई जिद नहीं की और उस से दूर होकर कहा,”हाह ! तुम कितनी बुरी हो सुबह सुबह खुद भी रो रही हो और मुझे भी रुला रही हो , आज पोस्ट ऑफिस में मेरा पहला दिन है और मैं वहा ये डाक जैसी शक्ल लेकर बिल्कुल नहीं जाना चाहती”

सुरभि की बात सुनकर अवनि हंस पड़ी और कहा,”सच में पागल हो तुम , जाओ नहा लो मैं तब तक नाश्ता बना देती हूँ” 
सुरभि नहाने चली गई और अवनि ने नाश्ता बनाया। दोनों खा पीकर अपनी अपनी मंजिल के लिए निकल गयी। सुरभि अपने पोस्ट ऑफिस कुछ डाक्यूमेंट्स वेरिफाई करने और अवनि अपने बैंक , बैंक आकर अवनि ने सभी जरुरी काम देखे और फिर कम्प्यूटर के सामने बैठकर अपना काम करने लगी तभी उसका फोन बजा। अवनि ने देखा पृथ्वी का मैसेज था।

“क्या आप अभी तक मुझसे नाराज है ?”
“नहीं , एंड कल रात के लिए Sorry”,अवनि ने लिख भेजा
“अरे आप सॉरी मत कहिये , मुझे अच्छा लगा आपने पहली बार मुझ पर हक़ जताया”
– पर मुझे सच में बुरा लगा , मेरे कहने पर तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था।
“अगर आपको बुरा लग रहा है तो फिर मुझे क्या करना चाहिए ?”
– तुम चाहो तो बदले में मुझे भी पनिशमेंट दे सकते हो

“हम्म्म्म बात तो सही है , आपने मुझे 100 बार सॉरी लिखने को कहा तो अब आपको भी 100 बार वो कहना होगा जो मैं कहूंगा”
– क्या ?
“नहीं मुझे शर्म आ रही है , फिर कभी बताऊंगा , जब हमारी शादी हो जाएगी तब , तब मैं आपसे ये बोलने के लिए कहूंगा और आपको कहना पडेगा”
– मैं तुम से शादी नहीं करने वाली , तुम दिन में सपने देखना बंद करो और तुम्हारे ऑफिस में काम नहीं होता तुम दिनभर ऑनलाइन रहते हो ?

“ऐसी बात नहीं है मैडम जी ! मैं काम भी करता हूँ लेकिन क्या करू बीच बीच में आपकी याद आ जाती है”
– लेकिन मुझे नहीं आती और मेरे ऑफिस में काम ही काम है
पृथ्वी ने सुना तो मुँह बनाया और लिखकर भेजा,”मैडम जी एक दिन आप मुझे बहुत याद करोगे”
– नहीं मैं तुम्हे याद नहीं करुँगी , और कुछ ?
“हाँ वो मुझे आपसे कुछ पूछना था”
– पूछो
“मैडम जी ! क्या आप मुझसे शादी करेंगी ?”
– नहीं

अवनि की ना सुनकर अब पृथ्वी को बुरा नहीं लगता था , ना ही दुःख होता था अब तक तो उसे अवनि से ना सुनने की आदत हो चुकी थी इसलिए उसने लिखकर भेजा,”देखना मैडम जी एक दिन ऐसा आएगा जब आप खुद मुझसे पूछेंगी “पृथ्वी ! मुझसे शादी करोगे ?” और देखना तब मैं भाव खाऊंगा”
अवनि ने पृथ्वी का मैसेज पढ़ा और मुस्कुरा उठी , उसने लिखकर भेजा “पृथ्वी तुम किस मिटटी के बने हो , क्या मेरा बार बार ना कहना तुम्हे बुरा नहीं लगता ?”

“बुरा लगता है मैडम लेकिन बाद में मैं खुद को समझा लेता हूँ वैसे भी आपकी ना सुनकर मेरा विश्वास और पक्का हो जाता है कि इस जिंदगी में आना तो आपको ही है”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा और इस बार अवनि मुस्कुराई नहीं बस उदास आँखों से उस मैसेज को देखती रही।

( क्या सुरभि जगा पायेगी अवनि के दिल में पृथ्वी के लिए अहसास ? क्या पृथ्वी आएगा अवनि से मिलने राजस्थान ? क्या पृथ्वी की जिंदगी में आएगा वो दिन जब अवनि पूछेगी उस से “पृथ्वी ! क्या तुम मुझसे शादी करोगे ?” जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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2 comments

Kirti sharma November 28, 2025 - 1:25 pm

Sanjana ji kya apko banaras city bahut jayada pasand hai y sirf ap apne kisse kahaniyon m hi iska jikr krti hai . Me ek baar us city m ho kr aa chuki hu or shyad second time jane k plan hai hamara .

Reply
Kirti sharma November 28, 2025 - 1:29 pm

Sach me ap ek chor hai bcoz apki story padne ke liye me apna jayada se jayada time apki story hi hi padne m lagati hu i like ur all Stories. Apki stories padke maja aa jata hai or use bich m chodne k bilkul man nahi karta. I wish ap hamesha aese hi hum sab readers ke liye fabulous stories likti rhe. Har Har Mahadev ,shri shivay namastubhyam.

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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