Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 72

by Story With Sanjana November 29, 2025
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Pasandida Aurat – 72

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी का मैसेज देखकर अवनि फिर उदास हो गयी। अब तक उसने ना जाने कितनी ही बार पृथ्वी को ना कहा होगा और पृथ्वी फिर भी हर बार बहुत ही प्यार से उस से शादी का पूछता और अवनि ना कह देती। अवनि का कोई जवाब ना पाकर पृथ्वी ने लिखकर भेजा
“अगर मैं कभी राजस्थान आया तो मुझे बस आपके 12 घंटे चाहिए”
– वो किसलिए ?
“उन 12 घंटो में हम 5 डेट पर जायेंगे”
– कौनसी 5 डेट ?

“आप स्प्रिचुअल है तो पहली डेट आपके शहर के किसी लोकल मंदिर में , दूसरी टी -डेट क्योकि आपको चाय बहुत पसंद है , तीसरी डेट स्ट्रीट फ़ूड लाईक गोलगप्पे , आइक्रीम और जो आपको पसंद हो स्ट्रीट फ़ूड में , चौथी डेट एक लॉन्ग ड्राइव और पांचवी वाक डेट , साथ साथ चलते हुए बातें करते हुए,,,,,,बस इस से ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए”
पृथ्वी की इन प्यारी सी डेट के बारे में पढ़कर अवनि मुस्कुरा उठी , उसने कुछ भी दिखावटी बातें नहीं लिखी वह बहुत ही छोटी छोटी चीजे करने की बात कर रहा था और वह ये क्यों चाहता था ये जानने के लिए अवनि ने लिखकर भेजा

– और ये सब डेट किसलिए  ?
“ताकि उन 12 घंटो में आप ये जान सके कि आपको मुझे हाँ क्यों कहना चाहिए ?”
– पृथ्वी
“प्लीज मैडम जी ! ज्यादा नहीं मांग रहा आपसे , इतना हक़ तो जाता सकता हूँ ना आप पर,,,,,,,,मैं बस एक बार मिलना चाहता हूँ आपसे उसके भी अगर आपको लगे कि मैं आपके लायक नहीं तो,,,,,,,,,,,!!”
– तो ?

“तो एक बार और मेरे साथ 12 घंटे बिता लेना,,,,,,,,मैं आपको पसंद आ जाऊंगा”
पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि हंस पड़ी और लिखा
– अजीब हो तुम , मुझे लगा तुम कहोगे कि मैं आपकी जिंदगी से चला जाऊंगा और फिर कभी आपको परेशान नहीं करूंगा
“मैंने कभी हार मानना नहीं सीखा मैडम जी , मैं बस अपनी जिंदगी में एक ही रूल फॉलो करता हूँ “Never Give Up”
– अच्छी बात है , हमेशा ऐसे ही रहना
“तो मैं कब आउ ?”
– कहा ?
“राजस्थान”

– तुम तो ऐसे पूछ रहे हो जैसे मेरे घर रिश्ता लेकर आ रहे हो
“आप हाँ कहकर तो देखिये , अभी सब काम छोड़कर अगली फ्लाइट पकड़कर सीधा राजस्थान आऊंगा , आपके घरवालों से आपका हाथ मांगूंगा , पहले कोर्ट मैरिज करूंगा ताकि आप बदल ना जाओ और फिर सीधा मुंबई उसके बाद आकर घरवालों को बताऊंगा,,,,,,,,आपके हाँ बोलने के बाद मैं एक मिनिट भी वेस्ट नहीं करूंगा मैडम जी”

अवनि ने पृथ्वी के मैसेज में जब घरवालों का नाम देखा तो उदास हो गयी , उसे याद आया पिछले कितने ही महीनो से वह अपने घर नहीं गयी थी। विश्वास जी ने उस से ऐसा मुँह मोड़ा कि कभी पलटकर नहीं देखा और बाकि सब घरवाले तो पहले ही अवनि से खफा थे। अवनि ने लिखकर भेजा,”घरवाले तो तब मानेंगे ना पृथ्वी जब मैं अपने घर जाउंगी,,,,,,,,,,सिरोही आने के बाद मैं आज तक कभी अपने घर नहीं गयी,,,,,,,,,,पापा ने हमेशा के लिए मुझसे मुँह मोड़ लिया है”

“नहीं मैडम जी ! हो सकता है उन्होंने मजबूर होकर ऐसा किया हो या कोई और वजह रही हो , वरना कोई भी बाप ऐसा नहीं करता और फिर आपने तो कुछ गलत किया भी नहीं है देखना वो आपसे बात भी करेंगे और आपको घर भी बुलाएँगे,,,,,,,,,आप बस कभी अपने मन में उनके लिए गलत ख्याल मत आने देना”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा
पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि को सिद्धार्थ की कही बात याद आ गयी जब उसने उसे अपना पास्ट बताया था तो सिद्धार्थ ने उसे विश्वास जी से दूर रहने को कहा था और साथ ही उनके लिए बुरा भला भी कहा था

वही आज पृथ्वी विश्वास जी को ना जानते हुए भी अवनि को उनके लिए अच्छा सोचने को कह रहा था। आज पहली बार अवनि को सिद्धार्थ और पृथ्वी में एक फर्क नजर आया।
– मैं उस दिन का इंतजार करुँगी जब पापा मुझे घर आने के लिए कहेंगे,,,,,,,वो दिन सच में मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन होगा
“ऐसा ही होगा , वैसे मैं भी उनसे मिलना चाहता हूँ”
– अब तुम्हे उन से क्यों मिलना है ?

“उन से मिलकर मैं उन से आपके बारे में पूछूंगा , लाईक आप बचपन में कैसी थी ? आपने क्या क्या शैतानिया की है ? आप पढाई में कैसी थी ? क्या क्या शौक थे आपको ? अभी तो आप ठीक ठाक दिखती है लेकिन मुझे उनसे जानना है बचपन में आप कैसी दिखती थी ? ऐसी बहुत सारी बातें है जो मैं उन से पूछूंगा और एक बार वो मुझसे मिले न तो देखना मैं उन्हें पसंद भी आ जाऊंगा”
– तुम सच में उनसे ये सब पूछना चाहते हो ?

“हाँ , मुझे आपके बारे में हर छोटी छोटी बात जाननी है”
अवनि एक बार फिर ख़ामोशी से फोन की स्क्रीन देखने लगी ये पहला लड़का था उसकी जिंदगी में जो उसके बारे में ये सब जानना चाहता था। आज तक कभी सिद्धार्थ ने अवनि की जिंदगी के बारे में जानने की कोशिश नहीं की। ना कभी उसने अवनि की पसंद नापसंद के बारे में पूछा , वह तो बस अपनी पसंद नापसंद अवनि पर थोपने में विश्वास रखता था।  

अवनि का जवाब ना पाकर पृथ्वी ने लिखकर भेजा “आप मुझसे मिलेंगी ना ?”
अवनि पृथ्वी को जवाब दे पाती इस से पहले ही मैनेजर ने उसे फ़ोन करके अपने केबिन में आने को कहा और अवनि पृथ्वी को जवाब दिए बिना ही अपना फोन टेबल पर रखकर चली गयी। पृथ्वी जवाब के इंतजार में फोन की स्क्रीन देख रहा था और बगल में खड़ा जयदीप उसे काफी देर तक जब अवनि का कोई जवाब नहीं आया तो हताश होकर पृथ्वी ने अपने बगल में देखा और जैसे ही नजर जयदीप पर पड़ी

हड़बड़ाकर पृथ्वी ने जल्दी से अपना फोन टेबल पर उलटा रखा और खड़े होकर कहा,”अह्ह्ह सर आप”
“अवनि मलिक , हम्म्म्म अच्छा नाम है”,जयदीप ने कहा क्योकि पृथ्वी के फोन में वह अवनि का नाम जो देख चुका था।
पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन जयदीप को कोसा और बाहर से खुद को सामान्य दिखाकर कहा,”आप जो समझ रहे है वैसा कुछ नहीं है”
“मैं बिल्कुल सही समझ रहा हूँ और मैंने तुम्हारी 2 दिन की छुट्टी अप्रूव कर दी है”,जयदीप ने कहा
“दो दिन की छुट्टी ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा

“अब राजस्थान पनवेल में तो है नहीं जो तुम शाम में जाकर सुबह वापस आ जाओगे , इतनी दूर जाने में टाइम तो लगेगा ना”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी शरमाकर अपना सर खुजाने लगा। आज पहली बार उसे जयदीप पर गुस्सा नहीं आ रहा था।
जयदीप ने पृथ्वी को शरमाते देखा तो कहा,”मैंने तुम्हारी छुट्टी अप्रूव की है , अवनि के साथ तुम्हारा रिश्ता पक्का नहीं किया है जो इतना शरमा रहे हो”

पृथ्वी ने सुना तो सीधा खड़ा हो गया और हाथ नीचे कर लिया। जयदीप ने हाथ में पकड़ी फाइल पृथ्वी की तरफ बढ़ाई और कहा,”जाने से पहले मुझे इसकी रिपोर्ट चाहिए,,,,,,,,एंड ये मंथ खत्म होने में अभी एक हफ्ता बाकि है लेकिन मैं तुम्हरी सैलरी आज ही रिलीज कर रहा हूँ , तुम्हे जरूरत पड़ेगी”
पृथ्वी ने सुना तो उसे अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था लेकिन मन ही मन वह जयदीप को थैंक्यू भी कह रहा था क्योकि नकुल के बाद जयदीप ही था जिसने पृथ्वी की भावनाओ को समझा

पृथ्वी ने फाइल ली और कहा,”ये मैं आज शाम तक कर दूंगा”
जयदीप ने हामी में गर्दन हिलायी और केबिन के दरवाजे की तरफ बढ़ गया। जयदीप ने दरवाजा खोला और जाते जाते पलटकर कहा,”पृथ्वी”
“जी सर,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“लड़कियों को फूल बहुत पसंद होते है , उसके लिए फूल ले जाना मत भूलना”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं आये बस उसने धीरे से हाँ में गर्दन हिला ही और जैसे ही जयदीप केबिन से बाहर निकला

पृथ्वी ख़ुशी से भरकर अपनी कुर्सी पर बैठा और अपने हाथ की उंगलिया होंठो से लगाकर मुस्कुराने लगा। वह चाहकर भी अपनी ख़ुशी छुपा नहीं पा रहा था और बस मुस्कुराये जा रहा था।  रिपोर्ट बनाने से पहले उसे एक कप चाय की जरूरत थी इसलिए वह उठा और केंटीन की तरफ बढ़ गया। मुस्कुराहट उसके होंठो पर अभी भी कायम थी और उसका मन ख़ुशी से भरा जा रहा था। पृथ्वी ने चाय ली और वेटिंग एरिया की खिड़की के पास आकर चाय पीने लगा।

केंटीन वाले लड़के ने कोई बहुत ही खूबसूरत गाना चलाया हुआ था जो कि पृथ्वी के कानो में भी पड़ रहा था और पृथ्वी उसे गुनगुनाने लगा क्योकि इस वक्त गाने के बोल और पृथ्वी के दिल का हाल एक जैसा ही था।
“उस पार तू है , इस पार मैं
लगता डूबूँगा , इस बार में
जाने कहा ले चला , इश्क़ तेरा
सारे जहा से जुदा  इश्क़ तेरा”

सिरोही , राजस्थान
सुरभि पोस्ट ऑफिस में आकर सबसे मिली , अपने डॉक्युमेंट्स वेरिफाई किये और उसे दो दिन बाद पोस्ट ऑफिस ज्वाइन करने की डेट मिली। सुरभि बहुत खुश थी वह पोस्ट ऑफिस से बाहर चली आयी। कलाई में बंधी घडी में टाइम देखा दोपहर के 2 बज रहे थे और अब तक सुरभि को भूख लगने लगी थी। उसने आस पास देखा तो उसे सड़क के उस पार एक कैफे दिखाई दिया। सुरभि उसकी तरफ बढ़ गयी।

कैफे के बाहर खड़े होकर सुरभि ने उसे देखा और बड़बड़ाई,”हाह ! ये तो काफी महंगा दिख रहा है,,,,,,,ओह्ह्ह सुरभि कम ऑन तुम कब से महंगा सस्ता सोचने लगी , वैसे भी अब तुम कमाने वाली हो तो थोड़ा खर्च करने में कोई हर्ज नहीं है,,,,,,,!”

सुरभि अंदर चली आयी। नीचे भीड़ थी इसलिए सुरभि रूफ टॉप पर चली आयी और एक टेबल पर आ बैठी। सुरभि ने अपने लिए पास्ता और गार्लिक ब्रेड आर्डर किया और फिर बैठकर उसके आने का इंतजार करने लगी। सुरभि ने देखा ये जगह काफी अच्छी थी वह इधर उधर देखने लगी तभी उसकी नजर कॉर्नर टेबल पर पड़ी जहा सिद्धार्थ बैठा था लेकिन सुरभि की हैरानी की वजह थी सिद्धार्थ के साथ बैठी लड़की

सुरभि ने देखा सिद्धार्थ एक लड़की के साथ बैठा था और दोनों बहुत ही सीरियस होकर कुछ बात कर रहे थे जो सुरभि को ना सुनाई दे रही थी ना समझ आ रही थी। सिद्धार्थ को देखते ही सुरभि को अवनि की याद आ गयी , सिद्धार्थ ने अवनि के साथ जो किया उसका बदला अवनि ने तो नहीं लिया लेकिन सुरभि भला सिद्धार्थ को इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकती थी ? सुरभि ने अंदाजा लगाया कि सिद्धार्थ के साथ बैठी लड़की जरूर उसकी नयी गर्लफ्रेंड होगी इसलिए वह उठी और दोनों में झगड़ा करवाने के इरादे से सिद्धार्थ की तरफ बढ़ गयी।

सुरभि सिद्धार्थ के बगल में आयी और अपने दिल पर पत्थर रखकर उसे साइड हग करके बहुत ही प्यार से कहा,”बेबी ! तुम यहाँ हो और मैं तुम्हारा नीचे इंतजार कर रही थी। लास्ट नाईट क्लब में तो तुमने कमाल ही कर दिया सारी लड़कियों की नजर बस तुम पर थी बट मेरे बॉयफ्रेंड को कोई और देखे इट्स नॉट ओके”
सुरभि को अचानक वहा देखकर सिद्धार्थ हैरान रह गया

सामने बैठी लड़की भी अजीब नजरो से सुरभि को देखने लगी। सिद्धार्थ ने जैसे ही कुछ कहना चाहा सुरभि ने अपनी बाँह उसके कंधो पर रखकर अपनी ऊँगली उसके होंठो पर रखी और कहा,”श्श्श्श कुछ मत कहो , आई नो तुम मुझसे बहुत गुस्सा हो बट इसका मतलब ये नहीं कि तुम एक एवरेज दिखने वाली लड़की के साथ डेट पर चले आओ,,,,,,,,बेबी तुम्हारे टेस्ट को क्या हो गया है ? तुम्हे कोई और नहीं मिली”

लड़की ने सुना तो गुस्से से अपनी जगह से उठी और सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा,”मिस्टर सिद्धार्थ ! तो इसलिए आप कल ऑफिस की इम्पोर्टेन्ट मीटिंग में नहीं आये क्योकि आप क्लबिंग में बिजी थे,,,,,,,,आपसे मैं कल ऑफिस में मिलूंगी”

“maam,,,,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने कहा लेकिन तब तक लड़की अपना पर्स लेकर वहा से जा चुकी थी। सिद्धार्थ ने गुस्से से सुरभि को देखा तो सुरभि उस से दूर हटी और अपने हाथो को बांधकर उसे बड़ी सी स्माइल दी जिसे देखकर तो सिद्धार्थ और चिढ गया और कहा,”Are you mad ? वो मेरी बॉस थी और यहाँ एक ऑफिस मीटिंग चल रही थी। तुम , तुम क्या बकवास कर रही थी उनके सामने ? तुम्हारी वजह से मुझे कितनी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ेगी जानती हो तुम ?”

सुरभि ने जब सुना कि सिद्धार्थ के साथ बैठी लड़की उसकी गर्लफ्रेंड नहीं बल्कि उसकी बॉस थी तो उसकी मुस्कुराहट गायब हो गयी पर अगले ही पल उसे याद आया कि उसका मकसद तो बस सिद्धार्थ को परेशान करना था इसलिए वह वापस मुस्कुराई और कहा,”और तुमने जो प्रॉब्लम अवनि की लाइफ क्रिएट की उसका क्या ?”
“ma’am ! आपका आर्डर”,वेटर ने सुरभि को आवाज दी तो सुरभि मुस्कुराते हुए सिद्धार्थ के सामने से गुजरकर टेबल की तरफ चली आयी।

वह कुर्सी पर आ बैठी। खाना देखकर तो उसके मुँह में पानी भर आया। उसने जैसे ही खाने के लिए काँटा उठाया सिद्धार्थ ने उसके बगल में आकर कहा,”अब मैं क्या करूंगा ?”

“पास्ता खाओ”,सुरभि ने बेपरवाही से कहा जैसे कुछ हुआ ही ना हो
सिद्धार्थ कुर्सी खिसकाकर सुरभि के सामने आ बैठा और कहा,”तुम्हे आखिर मुझसे प्रॉब्लम क्या है ?”
“तुम से मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है बल्कि तुम खुद अपने आप में एक प्रॉब्लम हो,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने खाते हुए कहा
“तुमने , तुमने ही मुझे लेकर अवनि को बहकाया होगा , तुम हम दोनों को साथ देखकर खुश जो नहीं हो , बट इसका मतलब ये नहीं है कि तुम इसमें कामयाब हो जाओगी। मैं अवनि को कही नहीं जाने दूंगा”,सिद्धार्थ ने दबे स्वर में गुस्से से कहा

सुरभि खाते खाते रुकी और सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा,”काश मैं उसे तुम्हारे खिलाफ बहका सकती लेकिन तुमने तो पहले ही अवनि के सामने अपना असली रंग दिखा दिया इसलिए बेहतर होगा तुम अवनि को भूल जाओ”
सिद्धार्थ ने सुना तो हसने लगा और कहा,”क्या अवनि मुझे भूल पायी है ? तुम्हे लगता है मैं उसे इतनी आसानी से अपनी जिंदगी से चले जाने दूंगा , मैं उस से प्यार करता हूँ और अपनी पूरी जिंदगी उसके साथ बिताने का फैसला कर चुका हूँ ,,

और तुम्हे यकीन नहीं हो रहा ना तो देखना जल्दी ही मैं उसे शादी के लिए प्रपोज करने वाला हूँ और वो मुझे ना नहीं कह पायेगी क्योकि वो आज भी सिर्फ मुझसे प्यार करती है”
सुरभि ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे , सुरभि भी जानती थी कि अवनि पूरी तरह से खुद को सिद्धार्थ की यादों से दूर नहीं कर पायी है , उसे अब टेंशन होने लगी अगर सिद्धार्थ ने अवनि को शादी के लिए कहा और उसने हाँ कर दी तो सोचकर ही सुरभि खामोश हो गयी।

सुरभि को खमोश देखकर सिद्धार्थ ने कहा,’क्या हुआ अभी से हम दोनों को शादी के मंडप में इमेजिन करने लगी क्या तुम ? तुम अवनि को मुझसे दूर करने की जितनी चाहे उतनी कोशिश कर लो सुरभि लेकिन मैं उसको हासिल करके रहूंगा”
सिद्धार्थ उठा और जाने लगा तो सुरभि उठी और थोड़ा गुस्से से कहा,”शादी के मंडप में मैं अवनि को इमेजिन तो कर रही हूँ लेकिन तुम्हारी जगह वहा कोई और है,,,,,,,,,,और सुन वो दिमाग से थोड़ा खिसका हुआ है उसे अगर पता चला कि उसके और अवनि के बीच तू है तो फिर तेरे तो लग जाने है,,,,,,,,!!!”

“देख लेंगे मिस सुरभि,,,,,,,,,,!!”,कहकर सिद्धार्थ वहा से चला गया
“देख लेंगे तो ऐसे बोलकर गया है जैसे सच में देख ही लेगा , लेकिन मैंने भी ये क्या बोल दिया ? अवनि तो पृथ्वी को भाव तक नहीं देती है ओह्ह्ह्ह सुरभि ये सिद्धार्थ का बच्चा अवनि को शादी के लिए प्रपोज करे इस से पहले अपना दिमाग चला और कुछ कर”,बड़बड़ाते हुए सुरभि पास्ता और ब्रेड खाने लगी।

सिद्धार्थ को अवनि से दूर रखने के बारे में सोचते हुए सुरभि घर चली आयी। अवनि को आने में अभी वक्त था इसलिए उसने कपडे बदले और हॉल में घूमते हुए सोचने लगी कि सिद्धार्थ से पीछा कैसे छुटाये ? क्योकि सुरभि इतना तो जानती थी जब तक अवनि नहीं चाहेगी सिद्धार्थ उसकी जिंदगी में आता जाता रहेगा। घूमते घूमते सुरभि की नजर अवनि के लेपटॉप पर पड़ी और उसके दिमाग की बत्ती जली। सुरभि लेपटॉप के सामने आ बैठी और उसे ऑन करते हुए कहा,”अब तो एक ही इंसान मेरी मदद कर सकता है”

सुरभि ने पृथ्वी का प्रोफाइल खोला तो आखरी मैसेज उसके सामने आया “”आप मुझसे मिलेंगी ना ?”
पृथ्वी का मैसेज देखते ही सुरभि ने अपनी पाँचो उंगलियों को होंठो से लगाकर एक चुम्मा पृथ्वी की तरफ उछालकर कहा,”मुह्हह्हआ ! क्या सही टाइम पर एंट्री मारी है मेरे हीरो,,,,,,अवनि तुम से जरूर मिलेगी”
कहकर सुरभि ने पृथ्वी को लिखकर भेजा “कल सुबह 7 बजे at सिरोही रेलवे स्टेशन”

( क्या अवनि को नजर आने लगा है सिद्धार्थ और पृथ्वी में फर्क ? क्या सिद्धार्थ अवनि को शादी के लिए मना पायेगा ? क्या सुरभि के मैसेज को अवनि का जवाब सुनकर पृथ्वी आएगा राजस्थान उस से मिलने ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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1 comment

Kshmata Chauhan November 29, 2025 - 12:01 pm

🤣🤣🤣 yr Surbhi jaise dost sabko milni chahiye… matlab ki wo apni hee dost ki setting karwane k liye kuch bhi karengi…aur ab to usko kuch na kuch zarur Krna padega.. nhi to Siddharth sach m Avni se shadi kar lega…aur Avni itni emotional hai ki wo Siddharth ko na bhi bol nhi payegi…bhale hee wo usse kitni bhi nafrat kare…but yr Prithvi kitni achchi baate krta hai…I love Prithvi…kash sach m ese ladke hote

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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