Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 96

by Story With Sanjana December 21, 2025
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Pasandida Aurat – 96

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

विश्वास जी ने हाथ में पकड़ी सिगरेट पृथ्वी की तरफ बढ़ाई तो पृथ्वी ने सिगरेट ले ली। विश्वास जी एकटक उसे देखने लगे लेकिन अगले ही पल पृथ्वी ने सिगरेट को नीचे नाली में फेंका और विश्वास जी की तरफ पलटकर कहा,”माफ़ करना सर पर सिगरेट आपकी हेल्थ के लिए सही नहीं है , उस वक्त तो बिल्कुल भी नहीं जब आप किसी गहरे सोच-विचार में हो”
विश्वास जी ने सुना तो हलके से मुस्कुराये और कहा,”मुझे लगा आप मुझे कम्पनी देंगे , आजकल के नोजवानो के लिए शराब-सिगरेट पीना आम बात है,,,,,,!!!”

“मैं इन सब में यकीन नहीं रखता सर , अपने दिमाग को शांत करने के लिए मुझे शराब और सिगरेट का सहारा लेना पड़े तो यकीन मानिये मेरा जीवन बेकार है,,,,,मैं सिगरेट नहीं पीता सर न ही कभी शराब को हाथ लगाया है और ये दोनों गुण मुझमे मेरे बाबा की वजह से आये है”,पृथ्वी ने गंभीरता से कहा
विश्वास जी ने सुना तो वे पृथ्वी से काफी इम्प्रेस हुए और दुकानवाले की तरफ बढ़ गए क्योकि चाय तैयार थी। विश्वास जी ने एक गिलास पृथ्वी को दिया और दूसरा खुद लेकर वही सड़क किनारे लगी बेंच पर आ बैठे , पृथ्वी भी उनके बगल में आ बैठा।

चाय पीते हुए पृथ्वी ने विश्वास जी की तरफ देखा और कहा,”अब बताईये सर ! आपने अवनि से मिलने की कोशिश क्यों नहीं की ?”
अवनि का नाम सुनकर विश्वास जी की आँखों के सामने एक बार फिर बीते वक्त की घटना आने लगी। वे कुछ देर खामोश रहे और कहने लगे,”जब भरे  मंडप में अवनि ने अपनी शादी तोड़ दी तब मुझे बहुत दुःख हुआ , साथ ही मेरे मन को एक ठेस पहुंची। मैं अपने घमंड और झूठी इज्जत के सामने ये देख ही नहीं पाया कि उस दिन अवनि गलत नहीं थी उसने जो किया अपने पापा के लिए किया ,

उनके मान सम्मान के लिए किया लेकिन मैं समाज और खानदान में अपनी झूठी शानो-शौकत बनाये रखने के लिए उसे ही गलत समझ बैठा। मैं कभी नहीं चाहता था अवनि इस घर से चली जाए लेकिन इस घर के अपनों के मन में उसके खिलाफ जहर और नफरत देखी तो अपना दिल कठोर करके उसे खुद से इस घर से दूर भेज दिया। मैं उस से नहीं मिला क्योकि मैं चाहता था सबसे दूर रहकर वह खुद की अहमियत समझे , अपनी एक पहचान बनाये ,

खुद को इतना मजबूत बना ले कि उसे कभी अपनों की कमी महसूस ना हो,,,,,,,,मैं उस से मिलता तो वह मुझे देखकर कमजोर पड़ जाती बस इसलिए हमेशा उस से दूर रहा,,,,,,,,,,!!
एक वजह ये भी रही कि मैंने सच में उसके साथ बहुत गलत किया और उसके बाद मुझमे कभी इतनी हिम्मत नहीं हुई कि मैं उसके सामने जाकर उस से माफ़ी मांग सकू या उसे घर ला सकू,,,,,,,मैं चाहता भी नहीं वो इस घर में वापस आये क्योकि इस घर के लोग आज भी उस से सिर्फ नफरत करते है,,,,,,,,,,,!!”

कहते कहते विश्वास जी का गला भर आया और आँखे नम हो गयी , वे दूसरी तरफ देखने लगे वही ये सब सुनकर पृथ्वी को अपने गले और सीने में चुभन का अहसास हो रहा था।  समाज का नाम लेकर ही उसके घरवालों ने उसे अवनि से दूर किया और समाज के डर से ही विश्वास जी ने अवनि को अपने ही घर से निकाल दिया। पृथ्वी ने महसूस किया की सिर्फ अवनि ही नहीं बल्कि विश्वास जी भी पिछले एक साल से समाज की उस आग में जल रहे थे और उन्हें अवनि को खुद से दूर करने का पछतावा भी था।

विश्वास जी को भावुक देखकर पृथ्वी ने कहा,”और अगर यही घरवाले अपनी नफरत खत्म कर अवनि को पुरे दिल से अपना ले तो क्या अवनि को माफ़ कर देंगे,,,,,,,,,,,!!”
विश्वास जी ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा और,”ये आप क्या कह रहे है बेटा जी ? ऐसा कभी नहीं होगा”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”सर अभी आपने मुझे ठीक से जाना नहीं है , अवनि के लिए घरवालों की नफरत भी “
“अगर सच  में ऐसा हुआ तो मैं खुद अवनि को फोन करूंगा और घर आने के लिए कहूंगा”,विश्वास जी ने नम आँखों के साथ मुस्कुराते हुए कहा

“तो फिर चाय पीजिये”,पृथ्वी ने भी मुस्कुरा कर कहा
ना जाने क्यों पर विश्वास जी को पृथ्वी की बातो में एक उम्मीद नजर आयी और वे चाय पीने लगे पृथ्वी भी अपनी सोच में डूबा चाय पीने लगा। पृथ्वी नहीं जानता था वह अपना सब काम धाम छोड़कर यहां क्यों था ? वह बस अवनि की जिंदगी में सब सही करना चाहता था और उसे उसकी खुशिया वापस लौटाना चाहता था। चाय खत्म कर पृथ्वी विश्वास जी से बाते करते हुए घर के लिए निकल गया।

 पृथ्वी को साथ लेकर विश्वास जी घर चले आये। अंदर आये तो देखा सभी हॉल में बैठे थे। पृथ्वी और विश्वास जी को साथ देखकर कौशल चाचा ने कहा,”अरे भाईसाहब ! आप इनके साथ बाहर गए थे क्या ? मैं इन्हे घर में ढूंढ रहा था”
“तुम पृथ्वी को क्यों ढूंढ रहे थे ?”,विश्वास जी ने पूछा
“अरे भाईसाहब मैं तो बस ऐसे ही,,,,,,,सब यहाँ बैठे थे तो सोचा इन्हे भी बुला ले”,कौशल ने झेंपते हुए कहा

विश्वास जी कुछ कहते इस से पहले उनका फोन बजा , इतनी रात में वकील साहब ने उन्हें फोन क्यों किया है देखकर विश्वास जी पृथ्वी से बैठने को कहकर अपने कमरे की तरफ चले गए। पृथ्वी सोफे पर आ बैठा। कौशल चाचा , मयंक चाचा , सीमा , मीनाक्षी , कार्तिक , दीपिका , सलोनी , नितिन और अंशु सब वही मौजूद थे।
“अरे दीपू ! सबके लिए चाय ले आओ वैसे भी खाना खाये काफी वक्त हो गया”,मयंक चाचा ने कहा
“जी चाचाजी”,कहकर दीपिका वहा से चली गयी
“राजस्थान के लोग चाय से कुछ ज्यादा ही प्यार करते है शायद”,पृथ्वी ने कहा

“अरे पृथ्वी ! मैं तो कहता हूँ चाय को राजस्थान का राज्य पेय घोषित कर देना चाहिए , सुबह जब तक बिस्तर पर एक कप चाय न मिले हम राजस्थानियों की आँखे ही नहीं खुलती है”,मयंक चाचा ने हँसते हुए कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराने लगा और सभी उस से बाते करने लगे , सलोनी तो अपने फोन में बिजी थी उसे पृथ्वी के आने से कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा। अंशु तो अब तक पृथ्वी की अच्छी दोस्त चुकी थी इसलिए उसकी गोद में चली आयी।

वह कभी पृथ्वी के बालों से खेलती कभी उसके गाल खींचती तो कभी उसके हाथ को अपने नन्हे नन्हे हाथो में लेकर उसकी उंगलियों से खेलती। कुछ देर बाद दीपिका सबके लिए चाय ले आयी। उसने सबको चाय दी और कार्तिक के बगल में आ बैठी। पृथ्वी बाहर विश्वास जी के साथ चाय पीकर आया था लेकिन यहाँ भी मना नहीं कर पाया। पृथ्वी ने चाय का एक घूंठ भरा और महसूस किया कि चाय बहुत अच्छी थी उसने दीपिका की तरफ देखा और सहजता से कहा,”चाय बहुत अच्छी बनी है”

“thankyou ! ये मैंने अवनि दीदी से बनाना सीखी है,,,,,,,,,,,,वो बहुत अच्छी चाय बनाती है”,दीपिका ने कहा लेकिन साथ ही वह ये भूल गयी कि घर में अवनि को लेकर अब कोई बात नहीं करता , उसने देखा सब उसे ही देख रहे है।  
दीपिका उठी और कहा,”सलोनी , अंशु , चलो रात बहुत हो गयी है”
दीपिका सलोनी और अंशु को अपने साथ लेकर वहा से चली गयी। कार्तिक भी चुपचाप उठा और नितिन को अपने साथ लेकर वहा से चला गया।

हॉल में अब बस कौशल चाचा , मयंक चाचा , सीमा और मीनाक्षी बचे थे और उनके सामने बैठा था पृथ्वी , दीपिका के मुँह से अवनि का नाम सुनकर हॉल में शांति फ़ैल गयी। पृथ्वी ने सबको खामोश देखा और कहा,”माफ़ करना ये आपके घर का निजी मामला है पर मेरा एक सवाल है , सुबह से मैं इस घर में दो बार “अवनि” नाम सुन चुका हूँ और मैंने देखा कि अवनि के जिक्र पर दोनों ही बार सब खामोश हो गए ,, ऐसा क्यों ?”

कौशल चाचा ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगे , कौशल चाचा , मयंक और सीमा इस बारे में बात करना नहीं चाहते थे लेकिन मीनाक्षी तो मीनाक्षी है वह एकदम से बोल पड़ी,”क्योकि अवनि भाईसाहब की बेटी है और उसने इस घर की इज्जत को मिटटी  में मिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है,,,,,,,,,,!!”
“मीनाक्षी,,,,,,,!!”,मयंक ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसकी मुट्ठी भिंच गयी , अपनी पसंदीदा औरत के लिए भला वह ऐसी बाते कैसे सुन सकता था लेकिन इस वक्त वह जहा बैठा था वहा उसे ये सब बर्दास्त करना था क्योकि उसने विश्वास जी से सब सही करने का वादा जो किया था। पृथ्वी ने मयंक की तरफ देखा और कहा,”विश्वास अंकल ने मुझे सब पहले ही बता दिया है इसलिए आप मेरे सामने खुलकर इस बारे में बात कर सकते है। वैसे आप सब को देखकर मुझे लगा नहीं था कि आप लोग इतनी बड़ी बेवकूफी करेंगे”
“क्या मतलब ?”,कौशल ने पूछा

“विश्वास अंकल आपके बड़े भाई है और उनकी सिर्फ एक बेटी है जो कि उनके साथ नहीं रहती है। विश्वास अंकल के बाद उनका सब आपका ही है फिर भी आप सब अवनि के खिलाफ हो गए जबकि आप उसे सपोर्ट करके उसे अपनी तरफ रख सकते थे”,पृथ्वी ने अपनी बातो का जाल फेंका
“क्या फायदा ? भाईसाहब ने पहले ही सब अवनि के नाम कर दिया है यहाँ तक के ये घर भी,,,,,,,!!”,सीमा ने कहा

“यही तो आप लोग नहीं समझ पाए ,, इन सब बातो पर ध्यान देने के बजाय अगर आप सबने मिलकर अवनि को उसके दुःख से बाहर निकाला होता , उसे हिम्मत दी होती तो वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाती , आप लोगो के साथ और प्यार से उसके दिल पर लगे जख्म भर जाते और फिर कोई अच्छा लड़का देखकर वह अपना घर बसा लेती,,,,,,,,,,,उसे अगर विश्वास अंकल की जायदाद या इस घर में इंट्रेस्ट होता तो वह कभी यहाँ से नहीं जाती,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

पृथ्वी की बातें धीरे धीरे उन चारो को समझ आ रही थी लेकिन इतनी जल्दी वे पृथ्वी की बात से कैसे सहमत हो जाते इसलिए कौशल चाचा ने कहा,”अच्छा शादी के बाद क्या अवनि भाईसाहब की जायदाद पर हक़ नहीं जमाती ? भाईसहाब ने भी तो सब एकदम से उसके नाम कर दिया”
पृथ्वी ने कौशल चाचा की तरफ देखा और कहा,”अभी जिन्होंने चाय बनाई थी वो आपकी ही बेटी है ना ?”
“हाँ क्यों ?”,कौशल चाचा ने पृथ्वी को घूरकर देखते हुए कहा

“अगर कल को उस से कोई गलती हो जाए तो क्या आप उसे घर से निकाल देंगे ? देखिये विश्वास अंकल ने गुस्से में आकर जो फैसला किया उसमे आप सबने भी बढ़ावा दिया लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि वो अवनि से नफरत करते है , अगर उन्हें अवनि से नफरत होती तो वो अपना सबकुछ अवनि के नाम कभी नहीं करते”,पृथ्वी ने कहा  

पृथ्वी की बात सुनकर चारो एक दूसरे को देखने लगे उन्हें अब सब समझ आ रहा था। अब तक चारो बेवजह अवनि से नफरत करते आ रहे थे और इस ग़लतफ़हमी में थे कि विश्वास जी भी अवनि से नफरत करते है इसलिए उसे घर से निकाल दिया जबकि विश्वास जी ने तो अवनि को इन सब से और इस घर से दूर भेजकर इन सबकी नफरत से सुरक्षित रखा था। कौशल चाचा को खुद पर ही शर्मिंदगी महसूस होने लगी क्योकि विश्वास जी के बाद वही थे जिन पर अवनि बहुत ज्यादा भरोसा करती थी।

वही मयंक चाचा को भी अहसास हुआ कि उन्होंने अवनि को कितना बुरा कहा था जब वो यहाँ थी उनका चेहरा उतर गया। सीमा और मीनाक्षी भी एक दूसरे को देखकर खामोश हो गयी
सबको खामोश देखकर पृथ्वी ने आगे कहा,”आप सब चाहते तो अवनि को जाने से रोक सकते थे लेकिन आप लोगो ने नहीं रोका क्योकि वो आपकी बेटी नहीं थी   .एक गलत इंसान से शादी तोड़कर उसने कुछ गलत नहीं किया लेकिन आप सबकी झूठी शान और इज्जत ने उसे गलत बना दिया ,

उसे अकेले रहने पर मजबूर कर दिया , जिसका कोई नहीं होता उसे अनाथ कहते है पर अवनि वो तो आप सबके होते हुए भी अनाथो जैसी जिंदगी जी रही है,,,,,,,अगर उसकी जगह दीपिका सलोनी या अंशु होती तब भी क्या आप लोग यही करते ? नहीं कर पाते , दुनिया का कोई भी बाप नहीं कर सकता लेकिन विश्वास अंकल को ऐसा करने पर आप सबने मजबूर कर दिया। उस लड़की ने एक बार अपने बारे में क्या सोचा आप सब उसके खिलाफ खड़े हो गए ?

माफ़ करना मुझे ये सब कहने का कोई हक़ नहीं है लेकिन अवनि के जाने के बाद क्या आप लोग सच में खुश है ? बड़े भाई की जायदाद और घर के लिए अपने अवनि के साथ अपना रिश्ता ही भुला दिया। विश्वास अंकल उसके पिता है लेकिन आप दोनों उसके चाचा है और पिता के बाद चाचा भी पिता का ही रूप होते है , उसने अपनी माँ को नहीं देखा लेकिन आप दोनों के रूप में उसे दो दो माँ एक साथ मिली थी आप चाहती तो उसे भी वो ममता वो प्यार दे सकती थी जिसकी कमी उसे हमेशा खलती रही,,,,,,,,,मैं आप सबके लिए अनजान हूँ ,

आप मुझसे पहली बार मिल रहे है और मैं इस घर में बस एक मेहमान हूँ ,, मेरे साथ जब आप सब इतने अच्छे से पेश आ सकते है तो फिर अपने ही घर की बेटी के साथ इतना बुरा बर्ताव क्यों सिर्फ इसलिए कि उसने अपना आत्मसम्मान चुना , पर क्या आप सबने कभी ये जानने की कोशिश की उसके चुने आत्मसम्मान में आप सब का सम्मान भी था , उसने अपने पापा का सम्मान चुना , आपका सम्मान चुना , इस घर का सम्मान चुना और साथ ही चुनी अपने लिए आप सबकी नफरत,,,,,,,,,,,!!”

कहकर पृथ्वी कुछ देर के लिए खामोश हो गया। पृथ्वी की बातें सुनकर कौशल चाचा की आँखों के सामने वो पल आ गया जब अवनि ने सबसे छुपकर उनके बुरे वक्त में उन्हें पैसे दिए और कहा कि दीपिका सलोनी की तरह वह भी उनकी बेटी है,,,,,,,,,,,,वही मयंक चाचा को याद आया वो पल जब देर रात मयंक चाचा को कुछ खाने का मन होता तो अवनि फटाफट बिना किसी शिकायत के उनके लिए चटपटा बना दिया करती थी,,,,,,,,,,,,सीमा को याद आया कैसे अवनि किचन उसकी और मीनाक्षी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती थी और जब भी सीमा के पैर दर्द करते तो वह उन्हें दबा दिया करती थी,,,,,,,,,,,

यू तो मीनाक्षी हमेशा अवनि से चिढ़ती थी लेकिन आज पृथ्वी की बातें सुनकर उसे भी वो पल याद आ गया जब अवनि मीनाक्षी के मांगने पर उसे अपना सामान ऐसे ही दे दिया करती थी। सबको चुप देखकर पृथ्वी उठा और कहा,”रात बहुत हो गयी है , मैं चलता हूँ”
पृथ्वी अवनि बातो से सबके मन में अवनि के लिए ख्याल डाल चुका था , वह सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया और सोने के लिए अवनि के कमरे में चला आया।

कौशल चाचा , मयंक चाचा , सीमा और मीनाक्षी भी उठकर चुपचाप अपने अपने कमरों में चले गए। इन चारो के अलावा कोई और भी था जो अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ा पृथ्वी की बातें सुन रहा था और वो थे विश्वास जी। विश्वास जी की आँखों में आँसू थे। उन्होंने अपने कमरे का दरवाजा बंद किया और अंदर चले आये। अंदर आकर विश्वास जी अपनी आरामकुर्सी पर बैठे और उस पर झूलते हुए अवनि के बारे में सोचने लगे।  

यही हाल बाकि चारो का था , अब तक सब अवनि से नफरत का बहाना ढूंढ रहे थे लेकिन अब उन चारो को अवनि के साथ बिताया अच्छा वक्त याद आ रहा था। देर रात सभी सोने चले गए बस कोई जाग रहा था तो वो था पृथ्वी , अवनि के कमरे की खिड़की के पास खड़ा पृथ्वी बाहर आसमान में चमकते चाँद को देख रहा था और अवनि के बारे में सोच रहा था। उदयपुर आकर उसने सही किया या गलत वह नहीं जानता था वह बस कुछ जानता था तो ये कि उसे अब अवनि को इस दर्द से हमेशा के लिए आजाद करना था और इसके लिए उसे चाहे जो करना पड़े वह करने को तैयार था।

सुबह सुबह वकील साहब घर आये और विश्वास जी को कुछ पेपर्स देकर चले गए। विश्वास जी हॉल में आये और सबको बुलाया। विश्वास जी ने अपनी जायदाद का जो जो हिस्सा घर के बाकि बच्चो के नाम किया था उनके पेपर्स उन्हें दिए और कौशल के सामने चले आये। विश्वास जी ने इस घर को दो हिस्सों में बाँटकर कौशल और मयंक के नाम कर दिया और जब पेपर दोनों भाईयो को दिए तो कौशल और मयंक पेपर पढ़कर हैरानी से उन्हें देखने लगे,,,,,,,,,,,,,,!!!

( क्या अवनि के घरवालों पर होगा पृथ्वी की बातों का असर ? आखिर विश्वास जी ने क्यों अपना सब कुछ कर दिया अपने भाईयो के नाम ? क्या मयंक और कौशल स्वीकार करेंगे ये उन्हें अपने किये का होगा पछतावा ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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1 comment

Kshmata Chauhan December 21, 2025 - 12:19 pm

Aaj to Vishwas ji ne wo kar diya, jiski kisi ne kalpana bhi nhi ki hogi… apne khoon paseene se banaye gaye iss ghar ko Vishvash ji ne Mayank aur Kaushal Chacha k naam kar diya…itna hee nhi apni baki ki property bhi unhone unke bhaiyo k bachche k naam kar dee…ab to sach m Mayank aur Kaushal Chacha ko doob kar mar jana chahiye…jis bade bhai aur uski beti ko koste the…aaj unhone hee apna sab kuch bhaio k naam kar diya…aur Prithvi tumne unn logo ko aaina dikhaya…lakin wo lalachi log samjhe iss baat ko…dekhna hoga next part m dono bhai aur unko family ka kya reaction hoga…part emotional tha…

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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