Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 95

by Story With Sanjana December 20, 2025
written by Story With Sanjana December 20, 2025 3 comments
1

Pasandida Aurat – 95

Pasandida Aurat

पृथ्वी चाट खा ही रहा था कि तभी किसी ने आकर उसके कंधे को थपथपाया और जैसे ही पृथ्वी ने पलटकर देखा निवाला उसके मुँह में ही रह गया और उसका अनजाने डर से उसका दिल धड़कने लगा। सामने सुरभि खड़ी थी जो कि पृथ्वी ने सपने में भी नहीं सोचा था क्योकि उसके हिसाब से तो अवनि और सुरभि दोनों इस वक्त सिरोही में होनी चाहिए थी लेकिन अवनि अपने कॉम्पिटिशन के लिए दो दिन जयपुर गयी तो सुरभि दो दिन के लिए घर चली आयी लेकिन यहाँ मिला उसे सबसे बड़ा सरप्राइज वो भी पृथ्वी के रूप में ,

सिरोही में हुई छोटी सी मुलाकात के बाद सुरभि पृथ्वी से आज मिल रही थी। पृथ्वी को हक्का बक्का देखकर सुरभि ने उसकी कलाई पकड़ी और उसे साइड में लाकर कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“चाट खा रहा हूँ”,पृथ्वी के मुँह से निकला
“अह्ह्ह्ह ! मेरा मतलब उदयपुर में क्या कर रहे हो ?”,सुरभि ने कहा
“वो एक लम्बी कहानी है कभी फुर्सत में सुनाऊंगा,,,,,,,,वैसे तुम यहाँ अचानक ?”,पृथ्वी ने कहा

सुरभि ने देखा पृथ्वी के हाथ में चाट की जो प्लेट है वह बहुत ही लजीज दिख रही थी उसने पृथ्वी के हाथ से चम्मच लिया और एक निवाला खाकर कहा,”अवनि दो दिन के लिए जयपुर गयी है अपनी रायटिंग को लेकर और मेरी दो दिन की छुट्टी थी इसलिए मैं घर चली आयी लेकिन तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? तुम फिर से कुछ गड़बड़ करने का तो नहीं सोच रहे ना पृथ्वी,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह कही तुम अवनि के पापा से तो नहीं मिलने वाले,,,,,,,,,,देखो तुम ऐसा करने का सोच रहे हो तो बिल्कुल मत करना अवनि को पता चलेगा तो वो बहुत गुस्सा होगी”

“मैं उन से मिल चूका हूँ , इन्फेक्ट मैं उनके घर पर ही रुका हूँ”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“हाह ! क्या ? तुमने उन्हें अपने और अवनि के बारे में तो कुछ नहीं बताया ना ?”,सुरभि ने घबराकर कहा
“नहीं , मैं यहाँ किसी और वजह से आया हूँ”,पृथ्वी ने उतनी ही सहजता से कहा
“कौनसी वजह ?”,सुरभि ने फिर एक चम्मच खाते हुए कहा
“तुम इतने सवाल क्यों करती हो ? बस है कोई वजह जिसके लिए मुझे यहाँ आना पड़ा एंड डोंट वरी मेरी वजह से अवनि को कोई तकलीफ नहीं होगी”,पृथ्वी ने कहा

“हम्म्म ठीक है लेकिन मुझे जानना है वो वजह क्या है ?”,सुरभि ने तनकर कहा
“ये तुम मुझसे रिक्वेस्ट कर रही हो या मुझे धमकी दे रही हो ?”,पृथ्वी ने अपनी भंव चढ़ाकर पूछा
“अरे मेरी इतनी हिम्मत कहा जो मैं आपको धमकी दू , मैं तो आपसे रिक्वेस्ट कर ही हूँ जी जा जी,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने जीजाजी पर कुछ ज्यादा ही जोर देते हुए कहा

सुरभि के मुँह से अपने लिए जीजाजी सुनकर पृथ्वी पिघल गया और कहा,”ठीक है , कल सुबह 10 बजे मुझे घाट पर मिलना बताता हूँ मैं यहाँ क्यों आया हूँ बट पहले प्रॉमिस करो कि तुम अवनि को इस बारे में नहीं बताओगी , उसे पता नहीं चलना चाहिए मैं यहाँ आया था”
“उम्म्म्म ठीक है नहीं बताउंगी,,,,,,,,,वैसे दाढ़ी में अच्छे लग रहे हो”,सुरभि ने शरारत से कहा  
पृथ्वी ने सुना तो बस मुस्कुरा दिया। पृथ्वी अपनेआप में ही खुश था क्योकि अवनि ना सही पर उस से जुड़े लोग पृथ्वी को पसंद करते थे।

सुरभि अभी पृथ्वी से बातें कर ही रही थी कि तभी कार्तिक पृथ्वी को ढूंढते हुए वहा आ पहुंचा और सुरभि को वहा देखकर खुश भी हुआ और हैरान भी,,,,,,,,!!
“अरे आप यहाँ है मैं आपको वहा ढूंढ रहा था और आप इनके साथ , आप इन्हे जानते है क्या ?”,कार्तिक ने पृथ्वी से कहा
अब बेचारा पृथ्वी कार्तिक से सीधा कैसे कह देता कि वह सुरभि को जानता है इसलिए कहा,”ये मुझसे कोई एड्रेस पूछ रही थी”

कार्तिक ने सुना तो सुरभि की तरफ देखकर हंसा और कहा,”अरे ये क्या एड्रेस पूछेंगी ये तो पूरा उदयपुर जानती है ,, अवनि दीदी है न उनकी दोस्त है सुरभि दीदी,,,,,,,,,,!”
पृथ्वी ने सुना और सुरभि के सामने अनजान बनते हुए उसे देखते हुए कहा,”नमस्ते,,,,,,,!!”
“नमस्ते,,,,,,,!”,सुरभि ने भी बड़ी सी स्माइल देकर कहा
“अवनि दीदी कैसी है ?”,कार्तिक ने सुरभि से पूछा
“वो ठीक है , तुम बताओ कैसे हो और घर में सब कैसे है ?”,सुरभि ने पूछा

“मैं ठीक हूँ दीदी और घर में भी सब ठीक है बस अवनि दीदी के जाने के बाद से ताऊजी थोड़ा कमजोर हो गए है,,,,,,,,,,,आप घर आईये न , ताऊजी आपस मिलकर खुश होंगे”,कार्तिक ने कहा
“हम्म्म आउंगी,,,,,,,,,,फिलहाल तुम मुंबईवाले को उदयपुर घुमाओ”,सुरभि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“आपको कैसे पता ये मुंबई से है ?”,कार्तिक ने हैरानी से पूछा
“अह्हह्ह्ह्ह , वो वो अभी इन्होने मेरे सामने मराठी में बात की ना इसलिए गेस किया”,सुरभि ने कहा

“क्या सुरभि दी ? हर मुंबई वाला मराठी थोड़े बोलता है,,,,,,,,,,,अच्छा मैं चलता हूँ , आप घर आना हां”,कार्तिक ने कहा और पृथ्वी को साथ लेकर वहा से चला गया। जाते जाते पृथ्वी ने अपनी प्लेट सुरभि को थमाई और धीरे से कहा,”लो ठूस लो,,,,,,,,!!!”
सुरभि ख़ुशी ख़ुशी बची हुई चाट खाने लगी और पृथ्वी कार्तिक के साथ वहा से चला गया। पृथ्वी के जाने के बाद सुरभि को याद आया कि उसने पृथ्वी से उसका नंबर तो लिया ही नहीं अब वह कल सुबह घाट पर उसे कहा ढूंढेंगी।

ये बात याद आते ही सुरभि ने अपना हाथ अपने ललाट पर मारा और खुद में ही बड़बड़ा कर कहा,”मैंने उसका नंबर तो लिया ही नहीं अब मैं उस से कैसे मिलूंगी ? कल की कल देखेंगे पहले मैं इसे ख़त्म करके घर जाती हूँ वरना मम्मी चिल्लायेगी कि आते ही मैं घूमने निकल गयी”
सुरभि ने चाट खत्म की और अपनी स्कूटी लेकर घर के लिए निकल गयी।

जयपुर , राजस्थान
रायटिंग कॉम्पिटिशन के एग्जाम में बैठी अवनि इत्मीनान से पेपर पर सवालो का जवाब लिख रही थी। सवाल नहीं बल्कि स्क्रिप्ट रायटिंग को लेकर लिखना था। अवनि ख़ामोशी से सब लिखते जा रही थी। उस कमरे में अवनि के साथ और भी कई लोग थे जो अपनी किस्मत आजमाने के लिए यहाँ आये थे। लिखते लिखते अवनि के सामने आखरी सवाल आया जिसमे उसे एक ऐसे “काल्पनिक किरदार” के बारे में लिखना था जिसे लड़किया पाना चाहे। उस किरदार के काल्पनिक नाम से लेकर वो कैसा दिखता है ?

कैसे बात करता है ? उसके क्या सपने हो सकते है ? वह जिंदगी को किस नजरिये से देखता है ? उसकी खूबी क्या है ? उसकी कमी क्या है ? सब अवनि को जवाब में लिखना था
उस सवाल को पढ़कर अवनि के जहन में सबसे पहला नाम आया “पृथ्वी उपाध्याय” का , पृथ्वी कोई काल्पनिक किरदार ना होकर असल दुनिया में रहने वाला लड़का था लेकिन वो बिल्कुल वैसा ही था जिसके सपने हर लड़की देखती है।

अवनि ने पृथ्वी के बारे में लिखना शुरू किया , अब तक वह जितना पृथ्वी को जानती थी , समझती थी वो सब उसने बहुत ही सुन्दर तरीके से लिखा। पुरे पेपर के दौरान अवनि एक बार भी नहीं मुस्कुराई लेकिन पृथ्वी के बारे में लिखते हुए उसकी आँखों में चमक और होंठो पर मुस्कान बनी हुई थी। अवनि ने अपना पेपर पूरा किया और जमा करवाकर कमरे से बाहर आ गयी।
अवनि जैसे ही जाने लगी स्टाफ के एक लड़के ने आकर कहा,”

मैम ! एक छोटा सा इंटरव्यू आज के लिए,,,,,,,,,!!”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा और लड़के के साथ साइड में चली आयी जहा कॉम्पिटिशन में आये बाकि लोगो से भी उनका अनुभव पूछा जा रहा था। अवनि ने भी अपना अनुभव बताया और इन 5 मिनिट में वह आत्मविश्वास से भरी हुई थी। आज से पहले शायद ही उसने खुद को इतना कॉन्फिडेंट पाया हो। अवनि ने सबको थैंक्यू कहा और गैलेरी से होकर बाहर जाने लगी। चलते चलते अवनि ने महसूस किया कि जब वह सिद्धार्थ के साथ थी तब कितनी सहमी और डरी डरी रहती थी।

सिद्धार्थ के साथ रहते हुए अवनि ने खुद में कभी वो आत्मविश्वास देखा ही नहीं जो आज था और ये सब था पृथ्वी की वजह से क्योकि पृथ्वी ने हमेशा अवनि को ये अहसास दिलाया कि वो खास है , उसकी अपनी पहचान है और वो खुद के लिए स्टेण्ड ले सकती है। पृथ्वी अवनि से प्यार करता था , उसे बहुत पसंद करता था लेकिन इस से भी ज्यादा वह अवनि को एक राइटर मानकर उसके काम और मेहनत की रिस्पेक्ट करता था। आज पृथ्वी अवनि के साथ नहीं था लेकिन फिर भी अवनि उसे सोचते हुए खुद को मजबूत और कॉन्फिडेंट महसूस करती थी।

अवनि बाहर चली आयी और लोकल बस स्टॉप तक पैदल ही चल पड़ी। चलते चलते अवनि बस पृथ्वी के बारे में ही सोच रही थी , जब वो साथ था तब अवनि उस से बात ना करने के बहाने ढूंढती थी और आज जब वो साथ नहीं है तो कितना कुछ था अवनि के पास उसे कहने और बताने के लिए,,,,,,,,,,अवनि बस स्टॉप चली आयी और वहा पड़ी बेंच पर बैठकर बस के आने का इंतजार करने लगी। आज और कल अवनि जयपुर में ही थी इसलिए उसने होटल जाकर कुछ देर आराम करने का सोचा और फिर ये शहर घूमने का,,,,,,,,,,!!!”

कुछ देर बाद बस आयी और अवनि उसमे बैठकर होटल के लिए निकल गयी। खिड़की के पास बैठी अवनि शाम का ढलता सूरज देख रही थी जो इस शहर को अपने पीली रौशनी से नहला रहा था। अवनि अपनी आँखों में आने वाले कल के सपने लिए मुस्कुराते हुए बाहर के नज़ारे देखे जा रही थी और फिर होटल जा पहुंची। फ्रेश होकर अवनि ने कपडे बदले और रात का खाना खाने बाहर निकल गयी।

सुख विलास भवन , उदयपुर
“अरे बस कीजिये , इतना घी तो मैंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं खाया है”,खाने की डायनिंग टेबल पर सबके साथ बैठे पृथ्वी ने अपनी थाली में रखी घी से लबालब रोटी देखकर कहा
“अरे बेटा ! ये तो बहुत सादा खाना है,,,,,,,,आप खाइये”,पृथ्वी के बगल में बैठे विश्वास जी ने कहा
बेचारा पृथ्वी उन्हें ना भी नहीं कर पाया। थाली में दो तरह की सब्जी , दाल , चपाती , चावल , सलाद , अचार और पापड़ रखा था। मीठे में सीमा ने आमरस और इमरती बनाई थी। लड्डू कौशल चाचा बाहर से लेते आये थे। सीमा और मीनाक्षी को छोड़कर बाकी सब डायनिंग पर मौजूद थे।

अंशु तो आज पृथ्वी के बगल में बैठी थी उसे पृथ्वी इतना भा जो गया था और वह अब तक ना जाने कितने ही सवाल उस से पूछ चुकी थी और पृथ्वी उतने ही प्यार से उसके सवालो के जवाब देता। सलोनी जो कि घर में सबसे अलग थी और अपनी ही दुनिया में रहती थी उसे भी पृथ्वी अच्छा लगा और उसने बगल में बैठी दीपिका की तरफ झुककर धीरे से कहा,”जीजी ! मैं तो कहती हूँ उस तन्मय को शादी के लिए मना करो और इस मुंबई वाले को हाँ बोल दो,,,,,कितना अच्छा दिखता है ये और कितना सिंसियर भी है,,,,,,,,,,,,एक ही दिन में सब घरवालों के साथ कैसे घुल मिल गया है”

“चुपचाप खाना खाओ”,दीपिका ने धीरे से सलोनी को झिड़क कर कहा तो सलोनी मंद मंद मुस्कुराने लगी
“अरे आप लोग क्यों खड़ी है ? आप भी बैठिये न”,पृथ्वी ने सीमा और मीनाक्षी को देखकर कहा
“हमारे यहाँ महिलाये शादी के बाद पति से पहले खाना नहीं खाती है , हमेशा उनके खाने के बाद ही खाती है”,मयंक चाचा ने खाना खाते हुए कहा

पृथ्वी ने सुना तो उनकी तरफ देखा और कहा,”ये तो बहुत अजीब बात है , जिन्होंने इतने दिल से इतनी मेहनत से इतना अच्छा खाना बनाया वही सबसे आखिर में खाये ये तो गलत बात है न , आपके घर के रीती रिवाजों का मैं सम्मान करता हूँ पर आज रात के लिए ये हमारे साथ बैठकर खाना खाएंगी तो मुझे अच्छा लगेगा,,,,,,,,,!”
विश्वास जी ने सुना तो महसूस किया कि पृथ्वी के ख्याल कितने सुलझे हुए है। वे मुस्कुरा उठे वही मयंक और कौशल ने मीनाक्षी और सीमा की तरफ देखा और अपनी पलकें झपका दी।

सीमा और मीनाक्षी ने एक दूसरे की तरफ देखा और खाली कुर्सियों पर आ बैठी। शादी के बाद आज पहली बार वे पुरे परिवार के साथ खाना खा रही थी। उनकी थालियों में खाना परोसने की शुरुआत भी पृथ्वी ने की और यहाँ पृथ्वी सीमा और मीनाक्षी दोनों के दिल को भा गया। दीपिका ने देखा पृथ्वी मेहमान होकर ये सब कर रहा है तो उसने कहा,”अरे आप रहने दीजिये मैं करती हूँ”
पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी और अपना खाना खाने लगा तो विश्वास जी ने कहा,”आपकी इस छोटी सी पहल को देखकर लग रहा है आपको अपने माता-पिता से बहुत अच्छे संस्कार मिले है”

“सर ! मैं एक जॉइंट फॅमिली में पला बढ़ा हूँ और मैंने हमेशा सबको साथ देखा है , किसी रस्मो रिवाज के नाम पर औरत मर्द में भेदभाव नहीं देखा,,,,,,,बस इसलिए यहाँ भी नहीं देख पाया”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“खुश रहो बेटा”,विश्वास जी ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा दिया और इसके बाद वह सबसे बाते करते हुए खाना खाने लगा और खाते हुए उसने सीमा और मीनाक्षी के बनाये खाने की इतनी तारीफ की कि दोनों शरमा ही गयी

खाना खाने के बाद पृथ्वी घर से बाहर खड़ा था , सबने मिलकर उसे कुछ ज्यादा ही खिला दिया था बेचारे को और अब उसे साँस नहीं आ रही थी। बाहर खड़ा पृथ्वी अंगड़ाई ले रहा था , अपने हाथो को स्ट्रेच कर रहा था कि तभी विश्वास जी वहा आये और कहा,”क्या हुआ आप यहाँ खड़े है ?”
“अह्ह्ह वो मैंने शायद कुछ ज्यादा ही खाना खा लिया,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा

“तो फिर चलिए सोसायटी में एक चक्कर लगा आते है , इस से खाना भी पच जाएगा और आपसे थोड़ी बातें भी हो जायेगी”,विश्वास जी ने कहा और यही तो पृथ्वी चाहता था विश्वास जी से अकेले में बात करना जिस से वह अवनि के बारे में जान सके और अवनि को लेकर उनकी ग़लतफ़हमी दूर कर सके।

पृथ्वी विश्वास जी के साथ घर से निकल गया। रात का खाना खाकर विश्वास जी रोज टहलने निकलते थे और आज उन्होंने पृथ्वी को भी अपने साथ ले लिया। दोनों धीमे कदमो के साथ ख़ामोशी से आगे बढ़ रहे थे। चलते चलते पृथ्वी ने कहा,”वैसे क्या मैं आपसे एक बात पूछ सकता हूँ ?”
“हाँ पूछो ना”,विश्वास जी ने कहा
“सुबह से मैं कितनी ही बार “अवनि” का नाम सुन चुका हूँ लेकिन मैंने उन्हें कही देखा नहीं , क्या वो यहाँ नहीं रहती ?”,पृथ्वी ने पूछा

विश्वास जी ने सुना और कुछ देर ख़ामोश रहने के बाद कहा,”अवनि मेरी बेटी का नाम है एक साल पहले मैंने ही उसे इस घर से जाने को कह दिया”
पृथ्वी ने विश्वास जी के चेहरे की तरफ देखा जिस पर उदासी और पछतावे के भाव थे।
“लेकिन आपने उन्हें जाने को क्यों कहा ? आई ऍम सॉरी मैं आपके फॅमिली मेटर को लेकर सवाल कर रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा

“अरे नहीं नहीं बेटा ! इतने महीनो में कभी किसी ने उसके बारे में जानने की कोशिश ही नहीं तुमने पूछा अच्छा लगा,,,,,,,,,,,,,,,!!”,इतना कहकर विश्वास जी पृथ्वी को अवनि के बारे में बताने लगे। अवनि की शादी तय होने से लेकर उसे इस घर से निकल जाने की सारी बातें विश्वास जी पृथ्वी को बताते रहे और पृथ्वी ख़ामोशी से उनके साथ चलते हुए सब सुनता रहा। पृथ्वी ये सब बाते अवनि के मुँह से पहले भी सुन चुका था और तब उसे बहुत तकलीफ हुई थी , आज विश्वास जी के मुँह से वही बातें फिर सुनकर उसका दिल अंदर ही अंदर टूट रहा था।

जिस लड़की से वह प्यार करता था उसने अपनी जिंदगी में कितनी तकलीफ देखी थी ये जानकर पृथ्वी का मन उदास हो गया। वह एक ही कहानी दोबारा सुन रहा था लेकिन इस बार विश्वास जी के नजरिये से,,,,,,,,और जब विश्वास जी उसे अवनि के बारे में बता रहे थे तो पृथ्वी ने देखा कितनी ही बार दर्द और पछतावे के भाव उनके चेहरे पर उभरे।

विश्वास जी ने अपनी बात खत्म की तो पृथ्वी ने कहा,”आपने कभी उस से मिलने की कोशिश क्यों नहीं की ?”
विश्वास जी ने सुना तो उनकी आँखों में नमी उभर आयी वे सामने देखने लगे , कुछ ही दूर चाय की दूकान थी और उसे देखकर पृथ्वी समझ गया कि इस वक्त विश्वास जी को एक ब्रेक की जरूरत है इसलिए खुद ही आगे बढ़कर बोला,”आप चाय पिएंगे ?”

“आओ,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने कहा और पृथ्वी को साथ लेकर दुकान पर चले आये। विश्वास जी ने दो चाय बनाने को कहा , दुकानवाला विश्वास जी को बहुत अच्छे से जानता था इसलिए उनके बिना मांगे ही सिगरेट का डिब्बा उनकी तरफ बढ़ा दिया। विश्वास जी ने सिगरेट निकाली और जलाकर होंठो के बीच रख ली। पृथ्वी बस ख़ामोशी से उन्हें देख रहा था। उन्होंने सिगरेट का कश मारा और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी , पृथ्वी ने उनके हाथ से सिगरेट ली और विश्वास जी एकटक उसे देखने लगे।

( क्या पृथ्वी बताएगा सुरभि को अपने उदयपुर आने की असल वजह ? क्या पृथ्वी दूर कर पायेगा अवनि के लिए घरवालों की नाराजगी दूर ? क्या विश्वास जी की ऑफर की सिगरेट होंठो से लगाएगा पृथ्वी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95

Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95Pasandida Aurat – 95

  • Continue With Pasandida Aurat – 96
  • Visit http://sanjanakirodiwal.com
  • Follow Me On http://instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
#Banaras#haanYeMohabbatHai#Love-You-Jindgi#Lovestory#MainTeriHeer#Manmarjiyan#Romantic_novel#romanticLoveStory#SanjanaKirodiwalsanjanakirodiwal
Share 0 FacebookTwitterPinterestEmail
Story With Sanjana

मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

previous post
Pasandida Aurat – 94
next post
Pasandida Aurat – 96

You may also like

Pasandida Aurat – 112

January 12, 2026

Pasandida Aurat – 111

January 12, 2026

Pasandida Aurat – 110

January 11, 2026

Pasandida Aurat – 109

January 10, 2026

Pasandida Aurat – 108

January 9, 2026

Pasandida Aurat – 107

January 9, 2026

Pasandida Aurat – 106

January 8, 2026

Pasandida Aurat – 105

January 7, 2026

Pasandida Aurat – 104

January 6, 2026

Pasandida Aurat – 103

January 6, 2026

3 comments

Kshmata Chauhan December 20, 2025 - 10:51 pm

Prithvi Vishwas Ji se lee hui cigarette ko fek dega…quki wo khud cigarette nhi pita hai isliye wo Vishwas Ji ko bhi nhi peene dega…waise yeh bhi sahi hai ki Prithvi ki mulakat Surbhi se ho gai…ab I think Surbhi wapas Sirohi jakar Avni ko Prithvi k uske ghar aane ki baat btayegi…. waise Prithvi sach m bahot sweet hai…

Reply
Sarva December 21, 2025 - 10:27 am

Please Upload Next Episode…..

Reply
Aashi December 21, 2025 - 11:06 am

Next part plzz

Reply

Leave a Comment Cancel Reply

Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.

Loading

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

Categories

  • Aa Ab Lout Chale (7)
  • Aakashwani (1)
  • Aur Pyar Ho Gaya (26)
  • Badalte Ahasas (14)
  • Banaras Blog (2)
  • Benam Sa Ak Rishta (1)
  • Bepanah Ishq (17)
  • Funny Story With Sanjana Kirodiwal (3)
  • Geetanjali (1)
  • Haan Ye Mohabbat Hai (49)
  • Haan Ye Mohabbat Hai – Season 2 (51)
  • Haan Ye Mohabbat Hai – Season 3 (102)
  • Hamari Adhuri Kahani (1)
  • Ishq Ak Junoon (7)
  • Ishq Ka Rang Safed (1)
  • Kitni Mohabbat Hai (54)
  • Kitni Mohabbat Hai Season 2 (1)
  • Lette hi neend aagyi (10)
  • Love Story (6)
    • 2nd Marriage (1)
    • Ak Plate Biryani (1)
    • Is This love ? (1)
    • Ladke Rote Nahi (1)
    • My Crazy Lover (1)
    • Piya Bawre (1)
  • Love You Zindagi (100)
  • Love You Zindagi Season 3 (49)
  • Main Teri Heer (90)
  • Main Teri Heer Season 2 (40)
  • Main Teri Heer Season 3 (45)
  • Main Teri Heer Season 4 (89)
  • Main Teri Heer Season 5 (90)
  • Manmarjiyan Season 1 (53)
  • Manmarjiyan Season 3 (99)
  • Manmarjiyan Season 4 (67)
  • Manmarjiyan Season 5 (42)
  • Meri Aakhari Mohabbat (25)
  • Pakizah Ak Napak Jindagi (50)
  • Pasandida Aurat (113)
  • Pasandida Aurat Season 2 (106)
  • Pasandida Aurat Season 3 (63)
  • Poem (1)
  • Ranjhana (61)
  • Sakinama (29)
  • Shah Umair Ki Pari (49)
  • Story (188)
    • Ak Dard Apna Sa – 1 (1)
    • Kashmir Ki Panaho Me (3)
    • Short Story (4)
      • Ik Ladki Bhigi-Bhagi Si (1)
      • Mera Pahla Or Aakhri Sawan (1)
      • Mere Papa-Bachpan Ki Naw (1)
    • Soulmates aren't just lovers (11)
    • मोहल्ला 24 बट्टे 7 (1)
  • Tere Ishq Me (21)
  • Tere Shahar Me (1)
  • मनमर्जियाँ season 1 (47)
  • मनमर्जियाँ season 2 (98)
  • साक़ीनामा Poetry (1)
  • Facebook
  • Instagram
  • Youtube

@2026 - All Right Reserved. Sanjana Kirodiwal

Sanjana Kirodiwal