Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 99

by Story With Sanjana December 30, 2025
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Pasandida Aurat – 99

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा पृथ्वी पीछे छूटते स्टेशन को देख रहा था , उसके हाथ में अवनि की तस्वीर थी जिसे वह अपने पर्स में रखा करता था। ट्रेन ने रफ़्तार पकड़ ली और पृथ्वी की आँखों के सामने विश्वास जी का चेहरा आने लगा। दो दिनों में विश्वास जी ने पृथ्वी को जो प्यार और मान-सम्मान दिया वो सब पृथ्वी की आँखों के सामने आने लगा। अब पृथ्वी को समझ आ रहा था कि आखिर क्यों विश्वास जी उसे “आप” कहकर बुला रहे थे , क्यों उन्होंने पृथ्वी को अपने घर में इतना मान-सम्मान दिया।  

विश्वास जी जानते थे कि पृथ्वी कही न कही अवनि से जुड़ा है और इसी वजह से उन्होंने पृथ्वी से अवनि के बारे में बात की वरना कोई पिता किसी अनजान लड़के के सामने अपनी बेटी का जिक्र क्यों करेगा ?
पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और बालों में से हाथ घुमाकर अंदर चला आया। पृथ्वी को किसी तरह का डर या घबराहट नहीं थी वह बस इस बात को लेकर परेशान था कि आखिर विश्वास जी ने अब तक उसे सच क्यों नहीं बताया ? पृथ्वी अपनी सीट पर आ बैठा और खिड़की से बाहर देखने लगा।

सफर लंबा था इसलिए उसने अपने कानो में ईयर फ़ोन लगाया और अपने फ़ोन में कोई गाना चलाकर सर पीछे झुकाया और आँखे मूँद ली ! गाने की हर लाइन , हर धुन उसे अवनि की याद दिला रही थी। अवनि के साथ बिताया वक्त आज भी उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त था।

नवी मुंबई , सुबह का समय
सुबह 11 बजे पृथ्वी मुंबई पहुंचा , वह सीधा अपने फ्लैट पर चला आया। सफर की वजह से थका हुआ था लेकिन उसे ऑफिस भी जाना था इसलिए वह नहाने चला गया। फ्लैट में कुछ कपडे रखे थे पृथ्वी ने जींस टीशर्ट उठाया और पहन लिया हालाँकि हमेशा वह ऑफिस फॉर्मल कपड़ो में ही जाता था या फिर जींस के साथ प्रॉपर शर्ट पहनकर लेकिन आज पहली बार पृथ्वी ने जींस और टीशर्ट पहना। शीशे के सामने आकर उसने जैसे ही बाल बनाने के लिए हाथ उठाया सहसा ही उसकी नजर अपनी पर्सनालिटी पर चली गयी।

आज कितने दिनों बाद पृथ्वी खुद को इतने प्यार से देख रहा था। अवनि से दूर होने के बाद पृथ्वी ने जिम जाना छोड़ दिया था , उसने अपनी बाँह उठाकर अपने मसल्स को देखा और अगले ही पल वह मुस्कुरा उठा जब उसे अवनि का ख्याल आया। पृथ्वी हमेशा अवनि के सामने अपनी पर्सनालिटी और सुंदरता की तारीफ किया करता था और अवनि हर बार उसे वाहियात कहकर टाल दिया करती  

जिन ख्यालो पर पृथ्वी पहले दुखी हो जाया करता था अब उन्ही ख्यालो पर मुस्कुराने लगता। यकीनन दर्द जब हद से गुजर जाता है तो सुकून का रूप ले लेता है यही अवनि और पृथ्वी के साथ हो रहा था। एक दूसरे से बिछड़ने का जो दर्द पृथ्वी और अवनि को था वो अब एक दूसरे के ख्याल के साथ सुकून बन चुका था। तैयार होकर पृथ्वी ऑफिस के लिए निकल गया आज उसके चेहरे पर ख़ुशी के भाव थे और साथ ही इन कपड़ो में वह अच्छा भी लग रहा था।

पृथ्वी ऑफिस चला आया जयदीप ने जब पृथ्वी को देखा तो खुश हो गया और उसके पास आकर ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”अवनि से मिले तुम ?”
 पृथ्वी ने हैरानी से जयदीप को देखा क्योकि इस वक्त वह ऑफिस में सबके बीच खड़ा था और जयदीप के मुँह से अवनि सुनकर सब उसकी तरफ ही देख रहे थे।

पृथ्वी ने जयदीप को घूरकर देखा तो जयदीप को अहसास हुआ कि सब उसे और पृथ्वी को ही देख रहे है इसलिए उसने जल्दी से बात सम्हालकर कहा,”अह्ह्ह मेरा मतलब अवनीश के साथ तुम्हारी जो मीटिंग थी वो कैसी रही ? वैसे तुम काफी थके थके लग रहे हो जाकर एक स्ट्रांग कॉफी पीओ मैं तुमसे बाद में मिलता हूँ”
जयदीप पृथ्वी को सबकी नजरो का निशाना बनाकर वहा से निकल गया , पृथ्वी खामोश खड़ा देखता रहा तभी उसके जूनियर लड़के ने कहा,”पृथ्वी सर ! बॉस ने पहले अवनि कहा था ना ?”


पृथ्वी ने लड़के की तरफ देखा और बिना किसी भाव के कठोरता से कहा,”काम पर ध्यान दो,,,,,वीकेंड से पहले मुझे सारी रिपोर्ट चाहिए”
“जी सर,,,,,,!!”,लड़के ने घबराकर कहा और अपने काम में लग गया
पृथ्वी अपने केबिन की तरफ बढ़ गया। वह केबिन में आकर अपनी टीम से मिला , आज कितने दिनों बाद सब ने पृथ्वी को खुश और नॉमल देखा तो सभी खुश हो गए। पृथ्वी ने कुछ जरूरी काम निपटाए और फिर फाइल लेकर जयदीप के केबिन में चला आया।

पृथ्वी अपनी चारो उंगलिया जयदीप को दिखाते हुए उसकी तरफ आया और दबी आवाज में कहा,”आपको इस कम्पनी में बॉस किसने बनाया ? थोड़ी भी समझ नहीं है आप में कब कहा क्या बोलना है ? और आपको मेरी पर्सनल लाइफ में इतनी दिलचस्पी क्यों है ? मैं उस से मिला या नहीं ये मैं आपको क्यों बताऊ ?”


पृथ्वी को चिढ़ा हुआ देखकर जयदीप खामोश हो गया और बहुत मुश्किल से थूक निगला क्योकि वह अच्छे से जानता था इस वक्त कुछ बोलना आग में घी डालने का काम करेगा इसलिए उसका चुप रहना ही बेहतर है जबकि जयदीप को चुप देखकर पृथ्वी और चिढ गया और कहा,”thankyou आपने मेरी हेल्प की लेकिन
इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है आपको मेरी लव स्टोरी में इंटरफेयर करने की परमिशन मिल चुकी है”


“ओह्ह्ह तो तुम अवनि के प्यार में हो,,,,,हाह ! कमाल है तुम्हारे जैसा लड़का किसी के प्यार में है जानकर ही कितना अच्छा लग रहा है”,जयदीप ने खुश होकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे अहसास हुआ कि उसने खुद ही जयदीप के सामने ये बात स्वीकार की है कि उसकी प्रेम कहानी है। एकदम से पृथ्वी की चिढ कम हो गयी और वह हताश हो गया।

उसने जयदीप की तरफ देखा और उदासी भरे स्वर में कहा,”मुझ जैसा लड़का किसी के प्यार में है ये कमाल की नहीं बहुत ही अफ़सोस की बात है”
जयदीप ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और फिर उसकी तरफ आकर कहा,”अह्ह्ह ये सब छोडो ये बताओ तुम उस से मिले कि नहीं ? कैसी है वो ? तुम्हे एकदम से अपने सामने देखकर खुश हो गयी होगी ना वो,,,,,,,काश मैं भी वो पल देख पाता , एक्चुली मुझे लव स्टोरी देखना बहुत पसंद है”


“मैं उस से नहीं मिला इन्फेक्ट मैंने उसे देखा तक नहीं,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने भारी मन के साथ कहा , उसके शब्दों से उसकी तकलीफ साफ झलक रही थी
जयदीप ने सुना तो चौंका और कहा,”मिले नहीं ? तो फिर तुम वहा क्यों गए थे ? आखरी बार तुम उस से 7-8 महीने पहले मिले थे ना और अब जब उसके शहर गए तो उसे देखा तक नहीं,,,,,,,,,,!!”
“8 महीने 13 दिन और 16 घंटे”,पृथ्वी ने कहा और ये कहते हुए एक दर्द उसके चेहरे पर उभर आया जिसे जयदीप साफ देख पा रहा था। जयदीप उदास हो गया और कहा,”तुम्हे उस से मिलना चाहिए था”


“वो कहती है हमारी किस्मत में होगा तो हम जरूर मिलेंगे,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एक ठंडी आह भरकर कहा
“और तब तब तक तुम कोशिश भी नहीं करोगे,,,,,,पृथ्वी तुम्हे नहीं लगता तुम अपनी कहानी को और ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड बना रहे हो”,जयदीप ने कहा पृथ्वी से ज्यादा अब उसे दुःख था कि पृथ्वी अवनि से क्यों नहीं मिला ?
“मेरी कहानी है सर मैं खुद देख लूंगा आप वो फाइल देखिये और उसे अप्रूव कीजिये आज शाम क्लाइंट के साथ मीटिंग है आपकी,,!!”,पृथ्वी ने एकदम से अपना लहजा और चेहरे के भाव बदलकर कहा जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

जयदीप समझ गया कि पृथ्वी उसके सवाल का जवाब देना नहीं चाहता , उसने अपना सर झटका और अपनी टेबल की तरफ चला आया। जयदीप ने फाइल उठायी और पन्ने पलटने लगा। सभी जरुरी डिटेल्स चेक करने के बाद जयदीप ने फाइल पर साइन करके उसे अप्रूव किया और पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”क्लाइंट के साथ मीटिंग कितने बजे है ?”
“आप ये कम्पनी बेच क्यों नहीं देते ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“मतलब ?”,जयदीप ने पूछा


“मतलब ये कि इस कम्पनी में बॉस आप है या मैं ? आपकी कौनसी मीटिंग कब है ये सब मुझे कैसे पता होगा ? मैं आपका पर्सनल सेक्रेटरी नहीं हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“ओह्ह्ह हाँ तुम सही कह रहे हो , रीमा को पता होगा,,,,,,,,वैसे तुम अवनि से क्यों नहीं मिले ?”,जयदीप अब भी वही अटका था और ये देखकर पृथ्वी ने अफ़सोस में अपना सर झटका और वहा से चला गया
“हे पृथ्वी सुनो ! मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई है,,,,,!!”,पृथ्वी को जाते देखकर जयदीप ने कहा लेकिन पृथ्वी वहा से चला गया


जयदीप अपने ही विचारो में उलझ गया तभी रीमा वहा आयी और कहा,”आपने मुझे बुलाया सर,,,,,!!”
“हाह ! मैं उसकी लव स्टोरी में सपोर्टिव रोल बनना चाहता हूँ और वो मुझे विलीन समझ रहा है,,,,,,,आखिर वो उस से मिला क्यों नहीं ?”,जयदीप ने रीमा से कहा और उसकी बाते रीमा के सर के ऊपर से गयी।
“सर आप क्या कह रहे है , आप ठीक है ना ?”,रीमा ने असमझ की स्तिथि में कहा
रीमा को अपने सामने देखकर जयदीप की तंद्रा टूटी और उसने अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”अह्ह्ह लगता है मुझे ये कम्पनी अब बेच ही देनी चाहिए,,,,,,!!”


पृथ्वी अपने केबिन में आया और काम में बिजी हो गया। दिनभर काम में व्यस्त रहने के बाद पृथ्वी घर के लिए निकल गया। स्टेशन से बाहर आकर पृथ्वी पैदल ही चल पड़ा।  राजस्थान जाकर भी वह अवनि से मिलना तो दूर उसे देख तक नहीं पाया और इस बात का पृथ्वी को दुःख था लेकिन वह एकदम से अवनि के सामने जाकर उसकी परेशानिया बढ़ाना नहीं चाहता था। चलते चलते पृथ्वी शिव मंदिर के सामने से निकला और सहसा ही उसके कदम मंदिर की सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए।

सच ही कहा था अवनि ने पृथ्वी धीरे धीरे महादेव् में विश्वास करने लगा था हालाँकि उसे महादेव से शिकायत अब भी थी कि महादेव उसकी सुन क्यों नहीं रहे ? पृथ्वी कुछ देर मंदिर में रुका उनसे प्रार्थना की और घर चला आया।
सोसायटी के फुटपाथ पर चलते हुए नकुल उसे मिल गया वह पृथ्वी के पास आया और कहा,”तुम कब आये एंड वहा सब ठीक है न ?”
“हाँ अब वहा सब ठीक है”,पृथ्वी ने कहा
“तुम अवनि से मिले ?”,नकुल ने साथ चलते हुए पूछा


 नकुल के मुँह से अवनि का नाम सुनकर पृथ्वी उदास हो गया और कहा,”इसी बात का तो दुःख है कि उसके शहर में , उसके घर में होकर भी मैं उस से मिलना तो दूर उसे देख तक नहीं पाया”
पृथ्वी की बात सुनकर नकुल भी उदास हो गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”उदास मत हो , जब उसे पता चलेगा तूने उसके लिए क्या किया है वो खुद तुम से मिलने आएगी,,,,,,,!!”


“क्या बात है तू कब से उसके फेवर में बोलने लगा”,पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखकर कहा
“फेवर नहीं यार अब तो मैं भी चाहता हूँ कि अवनि तुझे मिल जाए , आज से पहले मैंने तुझे किसी लड़की के लिए इतना सब करते नहीं देखा”,नकुल ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा और नकुल को बाय बोलकर आगे बढ़ गया।

रात के खाने के बाद पृथ्वी अपने फ्लेट में चला आया लेकिन नींद आँखों से कोसो दूर , वह अवनि को उसकी खुशिया लौटाने की पूरी कोशिश कर रहा था। वह अवनि से कब मिलेगा ? वो दोनों कभी एक होंगे भी या नहीं पृथ्वी नहीं जानता था वह बस कुछ कर सकता था तो वो था इंतजार , इंतजार सब सही हो जाने का,,,,,,,!!

सिरोही , राजस्थान
देर रात अवनि सड़क पर खड़ी ऑटो का इंतजार कर रही थी। प्राइवेट बस वाले ने उसे शहर के बाहर ही उतार दिया और अवनि ने भी जल्दी में ध्यान नहीं दिया अब वह अकेले खड़ी इस सुनसान रास्ते पर ऑटो का इंतजार कर रही थी। अवनि ने कैब बुक करनी चाही लेकिन देखा कि उसके फोन की बैटरी खत्म होने वाली है उसे खुद पर ही गुस्सा आया और झुंझलाहट भी हुई कि आखिर वह इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है ?


एक दो ऑटो वहा से गुजरे भी लेकिन रुके नहीं , अवनि बार बार अपनी घडी देखती रात बहुत हो चुकी थी और वक्त भाग रहा था। सुनसान सड़क पर यू अकेले खड़े होना अवनि को डरा भी रहा था कि तभी एक कार उसके सामने से गुजरी और कुछ आगे जाकर रुक गयी।

अवनि ने मदद की उम्मीद में गाड़ी को देखा लेकिन अगले ही पल उसने ये ख्याल छोड़ दिया और सामने देखने लगी। गाड़ी में बैठा शख्स कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ था उसने जब इतनी रात में अवनि को ऐसे सड़क पर अकेले खड़े देखा तो गाडी को साइड में रोका और उतरकर अवनि की तरफ चला आया। सिद्धार्थ को वहा देखकर अवनि को हैरानी हुई साथ ही थोड़ी घबराहट भी लेकिन अवनि ने उसे अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और खामोश खड़ी रही।


सिद्धार्थ अवनि के पास चला आया , कुछ देर खामोश रहने के बाद उसने अवनि से कहा,”तुम इतनी रात में यहाँ क्या कर रही हो ? ये जगह सही नहीं है तुम्हे घर जाना चाहिए”
अवनि को लगा सिद्धार्थ उस से बीती बातो के लिए पूछेगा या पहले की तरह उसके साथ बदतमीजी करेगा लेकिन सिद्धार्थ ने ऐसा कुछ नहीं किया उलटा वह अवनि के लिए परवाह जता रहा था। अवनि ने एक नजर सिद्धार्थ को देखा और फिर सामने देखते हुए कहा,”घर जाने के लिए ही ऑटो का वेट कर रही हूँ”


“ये शहर का सबसे शांत इलाका है यहाँ तुम्हे इस वक्त कोई ऑटो नहीं मिलेगा और तो और यहाँ कोई कैब भी नहीं आएगी,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने कहा
अवनि ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे ये देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम ना हो तो मैं तुम्हे घर तक छोड़ सकता हूँ”
“नहीं शुक्रिया ! मैं चली जाउंगी”,अवनि ने बुझे स्वर में कहा  


सिद्धार्थ के चेहरे पर उदासी के भाव तैरने लगे , इतना वक्त गुजर चुका था लेकिन अवनि आज भी उस से नाराज थी। उसने एक गहरी साँस ली और अपने हाथो को बांध साइड में खड़े होकर कहा,”ठीक है फिर जब तक तुम्हे कोई ऑटो नहीं मिलता मैं यहाँ रुक जाता हूँ”
“इसकी कोई,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने इतना ही कहा कि सिद्धार्थ ने उसकी बात काटकर कहा,”अवनि ! इतना हक़ तो दे सकती हो ना मुझे,,,,,,,!!!”


सिद्धार्थ की बात सुनकर अवनि खामोश हो गयी , वह सिद्धार्थ से आगे कोई बात करना नहीं चाहती थी इसलिए दूसरी तरफ देखने लगी। सिद्धार्थ भी अवनि से कुछ दूर खामोश खड़ा ऑटो का इंतजार करने लगा , साथ ही उसने कैब बुक करने का भी सोचा लेकिन कोई बुक ही नहीं हुआ। देखते ही देखते 10 मिनिट गुजर गए और मौसम खराब होने लगा , अगले ही पल कुछ हलकी बूंदा बांदी शुरू हो गयी। अवनि भीगने लगी और साथ ही सिद्धार्थ भी


“मुझे नहीं लगता तुम्हे इस वक्त कोई ऑटो मिलेगा , बारिश भी शुरू हो गयी है ज्यादा देर यहाँ रुकोगी तो बीमार पड़ जाओगी , मैं तुम्हे आगे तक छोड़ देता हूँ उसके बाद तुम ऑटो से चली जाना”,सिद्धार्थ ने कोशिश की
“और ये सब क्यों कर रहे हो तुम ? तुम्हे मेरे लिए परवाह दिखाने की जरूरत नहीं है सिद्धार्थ , मैं ठीक हूँ और मैं चली जाउंगी”,अवनि ने थोड़ा गुस्से से कहा


सिद्धार्थ ने सुना तो उसे बुरा लगा और उसने कहा,”क्या तुम थोड़ी देर के लिए अपने ईगो को साइड में नहीं रख सकती ?  मैं तुम्हारे लिए कोई परवाह नहीं दिखा रहा अवनि और जानता हूँ कि मेरी इस एक मदद से हमारे बीच सब सही नहीं हो जायेगा। मैं बस तुमसे रिक्वेस्ट कर रहा हूँ अवनि”
अवनि ने सुना तो सिद्धार्थ को लेकर उसका गुस्सा कुछ कम हुआ और वह चुपचाप सिद्धार्थ की गाड़ी की तरफ बढ़ गयी। सिद्धार्थ अवनि के साथ आया और उसके लिए गाडी का पिछला दरवाजा खोला दिया


अवनि ने ख़ामोशी से सिद्धार्थ को देखा आज से पहले अवनि हमेशा इस गाड़ी की आगे वाली सीट पर बैठी थी आज खुद सिद्धार्थ ने उसके लिए पीछे का दरवाजा खोला , अवनि अंदर जा बैठी। सिद्धार्थ भी ड्राइवर सीट पर आ बैठा और गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। रास्तेभर दोनों खामोश रहे , बारिश पहले से तेज हो चुकी थी। सिद्धार्थ अवनि को लेकर शहर के अंदर आया , उसने अवनि के लिए ऑटो बुक किया और उसे भेजकर खुद अपने घर के लिए निकल गया। ऑटो में बैठी अवनि रास्तेभर सिद्धार्थ के बारे में सोचती रही। जिस सिद्धार्थ को वह जानती थी वो सिद्धार्थ आज उसे कितना ही अलग नजर आया।

( अवनि को उसका परिवार लौटाने के बाद अब आगे क्या करेगा पृथ्वी ? अवनि की मदद करके क्या सिद्धार्थ फिर से जीतना चाहता है अवनि का दिल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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1 comment

Kshmata Chauhan December 30, 2025 - 11:24 pm

Humko ab Prithvi aur Avni sath m chahiye .. Siddharth nhi… Prithvi ne bina kisi dikhawe k Avni k liye itna kuch kiya, kya wo ab Avni ka sath deserve nhi krta hai…plz writer Sahiba ji ab to 7 maheene se zyada ho chuke hai, ab to Prithvi aur Avni ko milna chahiye

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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