Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 100

by Story With Sanjana December 31, 2025
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Pasandida Aurat – 100

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

देर रात अवनि अपने फ्लेट पर पहुंची। सुरभि उदयपुर गयी हुई थी इसलिए अवनि अकेली थी। उसने कपडे बदले और अपने लिए चाय बनाने किचन में चली आयी। जयपुर में दो दिन अवनि के बहुत अच्छे गुजरे , उसने एग्जाम दिया , जयपुर घूमी , कितने ही नए लोगो से मिली और उनके साथ वक्त बिताया। अवनि ये सब सोचते हुए चाय बना रही थी और चाय लेकर हॉल में चली आयी। सोफे पर बैठी अवनि चाय पीते हुए अपने फोन में आये नोफिकेशन चेक कर रही थी , उसने देखा इस वक्त रात के 11 बज रहे थे , नोटिफिकेशन देखते हुए सहसा ही अवनि का मन बेचैनी से घिर गया।

उसे याद आया कि कितने दिन गुजर गए लेकिन पृथ्वी को उसकी याद तक नहीं आयी। अवनि पृथ्वी के बारे में सोच ही रही थी कि उसका फोन बजा। स्क्रीन पर “पापा” नाम देखकर अवनि का दिल जोरो से धड़कने लगा। उसकी आँखों में नमी उभर आयी और चेहरे पर उदासी के भाव तैर गये। फोन बजे जा रहा था अवनि ने काँपती उंगलियों से फोन को रिसीव किया और कान से लगाकर काँपती आवाज में कहा,”हेलो”

“हेलो अवनि , कैसी हो बेटा ?”,दूसरी तरफ से विश्वास जी की आवाज उभरी
अवनि ने जैसे ही विश्वास जी के मुँह से अपने लिए बेटा सुना , उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये , उसने अपना हाथ अपने मुँह पर रखा और फफक पड़ी। आज कितने दिनों बाद विश्वास जी ने उसे खुद फोन किया था जिसकी उम्मीद अवनि छोड़ चुकी थी।

“अवनि , मुझे माफ़ कर दो बेटा,,,,,,,,,,,मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी , मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ बेटा”,विश्वास जी ने उदासी भरे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो उसका दबा हुआ दर्द और ज्यादा उभरकर बाहर आया और उसने रोते हुए कहा,”मैं थोड़ी देर में आपको फोन करती हूँ”
“हाँ , हां ठीक है”,विश्वास जी ने कहा तो अवनि ने फोन काट दिया और अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर जोर जोर से रोने लगी।

अपने पापा से दूर होकर अवनि  हमेशा उनके फोन का इंतजार करती थी , उन्हें याद करके आँसू बहाती थी लेकिन आज जाकर उनका फोन आया और उसमे भी वे अवनि से माफ़ी माँग रहे थे। जिस दर्द को अवनि ने अपने मन में दबा रखा था आज वह आँसुओ में बह गया। अवनि की आँखों के सामने बीते वक्त के वो सारे पल चलने लगे जिन्होंने उसे सबसे ज्यादा तकलीफ दी थी। अवनि ने अपनी हथेलियों से अपना चेहरा हटाया और नम आँखों के साथ बालकनी के दरवाजे की तरफ देखा जहा पृथ्वी अपने हाथो को बांधे , चौखट से पीठ लगाए , मुस्कुराते हुए अवनि को देख रहा था।

अवनि अवाक् सी उसे देख रही थी और तभी पृथ्वी की आवाज उसके कानों में पड़ी “मैडम जी ! मैंने कहा था एक दिन आपके पापा को अपनी गलती का अहसास होगा और वो खुद आपको फोन करेंगे”
अवनि उठी और बदहवास सी बालकनी की तरफ बढ़ते हुए बोली,”तुमने सही कहा था पृथ्वी , तुमने सही कहा था,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी अब भी मुस्कुरा रहा था और अवनि ने जैसे ही उसे छूने के लिए अपना हाथ बढ़ाया वह हवा में गायब हो गया। अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी वहा नहीं था वह बस उसका भरम था।

अवनि को याद आया कि उसे विश्वास जी को वापस फ़ोन भी करना है तो वह वाशबेसिन के सामने चली आयी। उसने अपना मुँह धोया और हॉल में आकर विश्वास जी को फोन लगा दिया। पहली ही रिंग में विश्वास जी ने फोन उठा लिया शायद वे अपना फोन हाथ में लेकर ही बैठे थे।
“हेलो ! हाँ अवनि बेटा , तुम ठीक हो ना ?”,विश्वास जी ने पूछा
“अब ठीक हूँ पापा”,अवनि ने हल्का सा मुस्कुरा कर कहा

“अवनि जो कुछ हुआ मैं उसके लिए बहुत शर्मिंदा हूँ बेटा , मैं जानता हूँ मैंने जो बर्ताव तुम्हारे साथ किया वो बहुत गलत था। उस वक्त मैं समाज और परिवार की झूठी इज्जत और मान सम्मान में उलझा हुआ था पर अब समझ आया बेटा कि मेरा असली सम्मान तो तुम हो,,,,,,,,,,मुझे माफ़ कर दो बेटा”,विश्वास जी ने उदासी भरे स्वर में कहा
“पापा ! आप माफ़ी मत मांगिये , जो कुछ हुआ वो हम सबकी जिंदगी में बस एक बुरा वक्त था जो गुजर चुका है। आपने मुझे फ़ोन किया मैं इसी में बहुत खुश हु , मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है पापा”,अवनि ने सहजता से कहा भला वह अपने पापा से नाराज कैसे हो सकती थी।

“भाईसाहब ! अवनि है क्या ? मुझे भी बात करवाईये”,विश्वास जी के पास खड़े मयंक ने कहा , वही मयंक जो अवनि पर गुस्सा करने का एक मौका नहीं छोड़ता था आज वह अवनि से बात करने के लिए एक्साइटेड था। विश्वास जी उसे फ़ोन देते इस से पहले मयंक ने खुद ही उनके हाथ से फोन लेकर ख़ुशी से चहकते हुए कहा,”हेलो अवनि ! कैसी हो बेटा ? तुम ठीक हो ना , गुस्से में आकर मैंने तुम से जो भी कहा उसके लिए मैं शर्मिंदा हूँ बेटा मुझे माफ कर दो,,,,,,,हम सब ने बहुत गलत किया तुम्हारे साथ,,,,,,!!”

अवनि ने मयंक के मुँह से ये सब सुना हैरान हुई लेकिन साथ ही खुश भी कि वक्त के साथ घरवालों की ग़लतफ़हमी दूर हो चुकी थी। अवनि मयंक की बात का जवाब दे पाती इस से पहले सीमा ने फोन छीन लिया और कहा,”हेलो अवनि ! मैंने आज ही तुम्हारे लिए बाजार से ताजा निम्बू मंगवाए है , तुम्हे निम्बू का अचार बहुत पसंद है ना इस बार मैं दो डिब्बे भरकर रखूंगी तुम रोज खाना और अपने साथ भी ले जाना”

अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये , ये वही सीमा चाची थी जो अवनि के ज्यादा अचार मांगने पर उसे डांट दिया करती थी। अवनि उन्हें भी कुछ बोल नहीं पायी और फ़ोन कार्तिक ने लेकर कहा,”हेलो अवनि दी ! घर कब आ रही है आप ? हम सब आपको बहुत मिस कर रहे है,,,,,,!!”
“जल्दी आउंगी”,अवनि ने अपनी आँखों के किनारे साफ करके कहा

कार्तिक आगे बात करता इस से पहले कौशल चाचा ने फोन लिया और कहा,”अवनि बेटा ! कैसी हो ? जब तुम उदयपुर आओगी तो मैं स्टेशन पर तुम्हारा इंतजार करूंगा,,,,,,,,तुम्हे जाने से तो नहीं रोक पाया बेटा लेकिन तुम्हे वापस घर लाने जरूर आऊंगा”  

सभी एक एक करके अवनि से बाते कर रहे थे , आज तो अवनि के पैर मारे ख़ुशी के जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। सब ठीक हो चुका था कोई उस से नाराज नहीं था और सबसे अच्छी बात ये थी कि सब चाहते थे अवनि घर आये। आखिर में फोन एक बार फिर विश्वास जी के हाथ में आया , उन्होंने फोन कान से लगाया और कहा,”हाँ बेटा ! अब बताओ घर कब आ रही हो ? तुम्हे देखने का बड़ा दिल कर रहा है,,,,,,इतने दिन तुम्हे खुद से दूर रखा लेकिन अब नहीं बेटा,,,,,,,,,अब मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ , तुम्हे अपने पास बैठाकर तुम से बात करना चाहता हूँ”

“मैं जल्दी आउंगी पापा”,अवनि ने कहा
“अगले हफ्ते दिवाली है बेटा और घर की लक्ष्मी के बिना दिवाली अधूरी रहती है , इस दिवाली घर आ जाओ बेटा”,विश्वास जी ने कहा
“मैं जरूर आउंगी पापा”,अवनि ने कहा
विश्वास जी ने कुछ देर अवनि से बात की और फिर उसे सोने का कहकर फोन रख दिया। अवनि ने फोन टेबल पर रखा और उठकर घर के मंदिर के सामने चली आयी।

आज अवनि की आँखों में ख़ुशी के आँसू थे और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान थी। उसने अपने हाथो जोड़े और महादेव का शुक्रिया अदा किया। अवनि किचन में चली आयी आज ख़ुशी के मारे उसे ना नींद आ रही थी ना भूख लग रही थी फिर भी कुछ तो खाना ही था इसलिए उसने अपने लिए नूडल्स बनाये और लेकर कमरे में चली आयी। हलकी ठंड थी इसलिए अवनि ने कमरे की खिड़की बंद कर परदे लगा दिए।

वह नूडल्स खाने लगी और एक दो चम्मच खाने के बाद उसे याद आया कि पृथ्वी को भी नूडल्स काफी पसंद है लेकिन साथ ही उसे याद आया वह चिकन नूडल्स खाने का शौकीन है तो अवनि ने नाक चढ़ा ली और कहा,”हाह ! कितना अजीब लड़का है ना वो पर क्या वो मेरे लिए चिकन खाना छोड़ेगा , बिल्कुल नहीं उसे अपने चिकन नूडल्स से बहुत प्यार है” कहते हुए अवनि ने दो चार निवाले और खाये और खुद से ही अपने सवाल का जवाब देते हुए कहा,”वैसे क्यों छोड़े ? जरुरी थोड़ी है कोई मर्द अपनी पसंदीदा औरत के लिए चिकन खाना छोड़ दे , औरत भी तो अपने पसंदीदा मर्द के लिए चिकन बनाना सीख सकती है”

अवनि बातो बातो में बहुत ही गहरी बात कह गयी जिसका अहसास उसे अगले ही पल हो गया और उसने अपने ललाट पर एक चपत मारकर कहा,”तुम तो बिल्कुल उसकी तरह बातें करने लगी हो अवनि”
अवनि अपने ख्यालो से बाहर आयी और खाने लगी , उसने खाना ख़त्म किया और प्लेट धोकर वापस कमरे में चली आयी।

रात का 1 बज रहा था लेकिन नींद अवनि की आँखों से कोसो दूर , वह आज बहुत खुश थी लेकिन इस ख़ुशी को किसके साथ बाँटे क्योकि सुरभि सो चुकी थी और दूसरा ऐसा कोई था नहीं जिसके सामने अवनि ख़ुशी जाहिर कर सके। अवनि को कुछ याद आया और वह अपनी स्टडी टेबल की तरफ चली आयी। अवनि कुर्सी पर आ बैठी , उसने लेपटॉप ऑन किया और में पर एक बहुत ही प्यारा पुराना गाना चलाकर छोड़ दिया। दराज खोलकर उसमे से एक कोरा कागज निकाला और खत लिखने लगी।

एक बार फिर ये खत अवनि पृथ्वी के लिए लिख रही थी आखिर वही तो था जिस से खत के जरिये अवनि बातें किया करती थी और अपने मन का हाल लिखा करती थी। आज इस खत में अवनि ने अपनी ख़ुशी जाहिर की ,, मुस्कान उसके चेहरे से हटने का नाम नहीं ले रही थी। अवनि ने खत लिखा और उसे मोड़कर लिफाफे में रख दिया। अवनि ने लिफाफे पर एक तारीख लिखी और उसे बाकि खतो के साथ दराज़ में रख दिया। खत लिखकर अवनि को काफी अच्छा लग रहा था और फिर देर रात वह सोने चली गयी।

अवनि को उसका घर और परिवार लौटकर पृथ्वी खुश था। इतने वक्त बाद अपने घर जाने की ख़ुशी में अवनि भी खुश थी। बैंक में दिवाली की छुट्टियों की घोषणा हो चुकी थी। घर जाने से एक दिन पहले अवनि मार्किट चली आयी और सभी घरवालों के लिए कुछ न कुछ खरीदने लगी और खरीदती भी क्यों नहीं इतने दिन बाद जो घर जा रही थी। पृथ्वी पिछले 8 महीनो में अपने घरवालों से और लता से काफी दूर हो चुका था। लता भी अब पहले की तरह पृथ्वी से हंसी मजाक नहीं कर पाती थी , ना उसके साथ बैठकर घंटो बात कर पाती थी ना ही शादी के नाम पर पृथ्वी से बहस कर पाती थी।

धीरे धीरे पृथ्वी को भी इस बात का अहसास हुआ और दिवाली से तीन दिन पहले वह लता को लेकर मार्किट चला आया। उसने लता के साथ दिवाली की सारी खरीदारी की साथ ही सबके लिए कुछ ना कुछ खरीदा भी,,,,,,,,,,,,पृथ्वी को धीरे धीरे पहले जैसा बनते देखकर लता खुश थी और इसी के साथ उनके दिल में एक उम्मीद भी जगी कि शायद इस दिवाली के बाद पृथ्वी वापस पहले की तरह हसने मुस्कुराने लगे। शाम होने से पहले पृथ्वी लता के साथ घर लौट आया और फिर लक्षित के साथ मिलकर घर  में लाइट्स लगाने लगा ये देखकर रवि जी भी खुश हो गए देर से ही सही पृथ्वी अपने परिवार के पास वापस लौट आया था।

उदयपुर रेलवे स्टेशन
जैसा की कौशल चाचा ने अवनि से वादा किया उसे लेने वे ही स्टेशन आये थे बाकि सबको उन्होंने घर पर अवनि के स्वागत की तैयारी करने को कहा। ट्रेन आकर रुकी , अवनि अपने बैग और सामान के साथ ट्रेन से नीचे उतरी , जब उसने सामने मुस्कुराते कौशल चाचा को देखा तो ना जाने क्यों उसकी आँखों में नमी तैर गयी। सिरोही जाने के बाद आज अवनि पहली बार उदयपुर आयी थी। कौशल चाचा अवनि की तरफ आये और कहा,”कैसी हो अवनि ?”

अवनि ने कुछ नहीं कहा हाथ में पकडे बैग के हत्थे को छोड़ा और आगे बढकर उनके सीने से लगी और रोआँसा होकर कहा,”आप सबने मुझे उदयपुर बुलाने में इतनी देर क्यों की चाचाजी ?”
कौशल चाचा ने सुना तो उनकी आँखों में भी नमी तैर गयी , आखिर अवनि को सबसे ज्यादा धोखे में तो उन्होंने ही रखा था  
कौशल जी ने अवनि का सर सहलाया और कहा,”कभी कभी बड़ो से भी गलती हो जाती है बेटा , आओ घर चलते है सब तुम्हारी राह देख रहे है”

अवनि दूर हटी और अपनी आँखों के किनारे साफ कर कौशल के साथ स्टेशन से बाहर चली आयी। कौशल चाचा गाड़ी लेकर आये थे उन्होंने सामान पीछे रखा और अवनि उनकी बगल में आ बैठी। रास्तेभर कौशल चाचा अवनि को घरवालों के बारे में बताते रहे लेकिन बीते वक्त में घर में क्या क्या हुआ ये सब नहीं बताया क्योकि विश्वास जी ने उन्हें पहले ही ये सब बताने से मना कर दिया था।

अवनि को तो पता भी नहीं था कि उसके जाने के बाद घर में क्या क्या हुआ था ? हालाँकि सुरभि उदयपुर में ही थी और अवनि ने उसे फ़ोन पर सब बताया था , सुरभि पहले तो बहुत हैरान हुयी लेकिन बाद में बहुत खुश हुई। वह भी आज सुख विलास में सभी घरवालों के साथ अवनि का इंतजार कर रही थी।

गाड़ी सुख विलास भवन के बाहर आकर रुकी। अवनि का दिल धड़कने लगा , वह समझ नहीं पा रही थी कैसे सब घरवालों से मिलेगी ? कौशल चाचा और अवनि गाडी से नीचे उतरे और अंदर चले आये। अंदर घर के दरवाजे पर सभी घरवाले खड़े थे। अवनि उनके सामने चली आयी , अवनि के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह शून्य हो चुकी थी लेकिन उसके सामने खड़े सभी लोगो के चेहरे ख़ुशी से चमक रहे थे , सबके होंठो पर मुस्कान थी और आँखों में अवनि के घर आने की ख़ुशी , मीनाक्षी तो पूजा की थाली लिए सबसे आगे खड़ी थी।

अवनि को देखकर वह थोड़ा आगे आयी और जैसे ही आरती उतारने लगी वही पास ही खड़ी सुरभि ने कहा,”अरे चाची ! एक मिनिट”
सभी हैरानी से सुरभि की तरफ देखने लगे तो सुरभि के पास खड़े कार्तिक ने टेप आगे किया और सुरभि ने उसका बटन ऑन किया तो उसमे गाना बजने लगा।
“आपके आने से घर में कितनी रौनक है , आपको देखे कभी अपने घर को देखे हम,,,,,,,,,,,,!!”

गाना सुनकर सभी हंस पड़े और मीनाक्षी अवनि की आरती उतारने लगी। ये सब देखकर अवनि की आँखों में नमी तैर गयी। इसी घर से सबने उसे कितना बुरा कहा था और अपने आत्मसम्मान के लिए अवनि को ये घर छोड़कर जाना पड़ा था और आज इसी घर के लोग उसके स्वागत में खड़े है। अवनि ने आसमान की तरफ देखा और आँखों ही आँखों में अपने महादेव् का शुक्रिया अदा किया।

विश्वास जी आगे आकर अवनि से मिले तो अवनि कुछ कहने के बजाय उनके सीने से आ लगी , आज कितने दिनों बाद एक सुकून विश्वास जी के चेहरे पर नजर आया वे अवनि को साथ लेकर अंदर चले आये और बाकि सब भी उनके पीछे आ गए।  

 हॉल में रखे सोफे पर अवनि बैठी थी और सभी घरवाले उसके इर्द गिर्द थे। कोई उसके हाल चाल पूछ रहा था , कोई उसे अपने हाथ से मिठाई , कचोरी , मठरी नमकीन खिला रहा था , कोई उस से अपने किये की माफ़ी मांग रहा था , सलोनी और दीपिका उस से सिरोही के बारे में पूछ रही थी , अंशु उसे अपनी स्कूल की बातें बता रही थी तो कार्तिक उसे वापस सिरोही ना जाकर हमेशा के लिए यही रहने को कह रहा था। सीमा और मीनाक्षी अवनि के लिए नाश्ता और चाय ले आयी , दोनों उसके अगल बगल आ बैठी और अपने हाथो से खिलाने लगी।

इतने सालो में अवनि माँ के जिस लाड दुलार के लिए तरस गयी थी वो आज उसे मिल रहा था। सबमे इतना बदलाव देखकर अवनि खुश थी पर वो नहीं जानती थी कि इस बदलाव के पीछे की असली वजह “पृथ्वी” था। वह बस सबके साथ खुश थी। सुरभि मुस्कुराते हुए सब देख रही थी और मन ही मन पृथ्वी का शुक्रिया अदा भी कर रही थी आखिर आज उसी की वजह से तो अवनि की जिंदगी में खुशिया वापस आयी थी लेकिन सुरभि मजबूर थी वह चाहकर भी अवनि को सच नहीं बता सकती थी क्योकि उसने पृथ्वी से वादा जो किया था।

चाय नाश्ता करने और सबसे मिलने के बाद सीमा ने अवनि से अपने कमरे में जाकर फ्रेश होने को कहा ताकि बाद में सब साथ बैठकर आराम से एवं से बातें कर सके। मीनाक्षी दीपिका के साथ मिलकर अवनि की पसंद का खाना बनाने की तैयारी में लग गयी और सीमा अवनि की पसंद की ताज़ा सब्जिया लेने कार्तिक के साथ मार्किट चली गयी। सुरभि नीचे सबके साथ बैठकर बातें कर रही थी और अवनि अपने कमरे में चली गयी। इतने दिनों बाद अपने कमरे में आकर अवनि ने एक गहरी साँस ली , उसे बहुत सुकून मिला।

उसने कमरे की बंद खिड़की खोल दी तो हवा का झोंका अंदर आया और अवनि के बाल उड़कर उसके चेहरे पर आये। अपने बालों को समेटते हुए अवनि पलटी तभी उसकी नजर दिवार पर पड़ी , अगले ही पल अवनि के चेहरे के भाव बदल गए वह दिवार के पास आयी और उस पर लगी तस्वीरों को देखा , एक तस्वीर वहा नहीं थी और ये अवनि के बचपन की इकलौती तस्वीर थी। ये देखकर अवनि कमरे से बाहर आयी और नीचे हॉल में आकर कहा,”पापा ! मेरे जाने के बाद कोई यहाँ आया था क्या ?”
अवनि का सवाल सुनकर सब ख़ामोशी से उसे देखने लगे और चाय का कप सुरभि के हाथ में ही रह गया।

( क्या सच में बदल गया है पृथ्वी या कर रहा है बदलने का दिखावा ? क्या सिरोही छोड़कर हमेशा के लिए उदयपुर आने वाली है अवनि ? क्या घरवाले बताएँगे अवनि को पृथ्वी के बारे में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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2 comments

Kshmata Chauhan December 31, 2025 - 2:41 pm

Aaj ka part kitna achcha hai… Avni ko uske papa Visvas ji ne khud pho kiya aur apne kiye bure bartav k liye maafi mangi…iske baad sabne usse baat ki aur ghar aane ko bola…fir Ghar aakar bhi uska shandar welcome hua…aur jisne yeh sab kiya usne khud k bare m Avni ko Btane k liye manaa kiya…to ab ko. Btayega Avni ko ki uski bachpan wali photo kaha gai…

Reply
Arati R Puranik December 31, 2025 - 2:44 pm

Nice chapter ❤️

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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