Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 67

by Story With Sanjana November 24, 2025
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Pasandida Aurat – 67

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

देखते ही देखते एक हफ्ता गुजर अवनि पृथ्वी को समझाती रही और पृथ्वी अपनी जिद पर अड़ा रहा। अवनि ने उसे इंस्टाग्राम पर ब्लॉक किया तो पृथ्वी ने उसे मेल करना शुरू कर दिया लेकिन पीछे नहीं हटा। वह अवनि को अपना को अपना मान चुका था बस अवनि ही इस रिश्ते में आगे बढ़ने से खुद को रोक रही थी।

सिद्धार्थ के दिए जख्म अभी भी ताजा थे और अवनि उन्हें और बढ़ाना नहीं चाहती थी। अवनि पृथ्वी को अच्छा दोस्त समझती थी और वह नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से पृथ्वी की जिंदगी में कोई परेशानी आये।

दिन गुजर रहे थे और अवनि खुश थी क्योकि अगले हफ्ते सुरभि उसके साथ रहने आने वाली थी। पृथ्वी से भी अवनि की बातें हो रही थी और अब तक पृथ्वी अवनि के बारे में काफी कुछ जानने लगा था। पृथ्वी के बार बार रिक्वेस्ट करने पर अवनि ने उसे इंस्टाग्राम पर फिर अनब्लॉक कर दिया  , वह दिनभर अवनि को परेशान करता , उसे हँसाने के लिए उलटे सीधे मैसेज भेजता , कभी दोनों में लम्बी बहस होती तो कभी दोनों एक दूसरे की बाते ध्यान से सुनते समझते।

एक शाम पृथ्वी ऑफिस में बैठा अपना काम कर रहा था तभी उसका फोन बजा। फोन घर से था ये देखकर पृथ्वी को थोड़ी हैरानी हुई क्योकि लता उसे इस वक्त कभी फोन नहीं करती थी। पृथ्वी ने फोन उठाकर कान से लगाया और कहा,”हेलो आई ! क्या हुआ , इस वक्त फोन किया आपने ?”
“रुषाली आयी है , तुम से मिलना चाहती है”,लता ने कहा

पृथ्वी ने जैसे ही सुना उसका मन बेचैनी से घिर गया। इतने दिनों बाद रुषाली उस से मिलने घर आयी है आखिर ऐसी क्या बात होगी ? रुषाली ने घर आने से पहले ना पृथ्वी को फोन किया ना ही कोई मैसेज किया। पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने कहा,”ठीक है मैं , मैं आता हूँ”
पृथ्वी ने फोन रखा और जयदीप से बात करके एक घंटा पहले ऑफिस से घर के लिए निकल गया।

रास्तेभर पृथ्वी बस रुषाली के बारे में ही सोच रहा था , उसकी आँखों के सामने बीते वक्त की सारी घटनाएं चलने लगी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि रुषाली वापस आएगी। इसी उधेड़बुन में पृथ्वी घर चला आया। अंदर आकर उसने देखा रुषाली हॉल में बैठी है। उदास चेहरा , सूखे होंठ , आँखों में पीलापन और पहले से काफी कमजोर भी लग रह थी।  

रुषाली का पृथ्वी के घर आना जाना था और दोनों के घरवालों को दोनों की दोस्ती के बारे में भी पता था इसलिए लता ने रुषाली के आने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। पृथ्वी ने अपना बैग रखा और लता से कहा,”अह्ह्ह्ह आई ! मेरे कमरे में दो कप चाय भिजवा देंगी आप ?”
“हम्म्म ठीक है”,लता ने कहा और किचन में चली गयी
पृथ्वी रुषाली के साथ अपने कमरे में आ बैठा। पृथ्वी बिस्तर पर बैठा था और रुषाली सामने पड़ी कुर्सी पर , दोनों खामोश थे।

पृथ्वी नहीं जानता था रुषाली यहाँ क्यों आयी है और ना ही उसे समझ आ रहा था कि वह रुषाली से क्या बात करे ? आख़िरकार हिम्मत करके पृथ्वी ने कहा,”तुम ठीक हो ?”
पृथ्वी के इतना कहते ही रुषाली फफक कर रो पड़ी। रुषाली को रोते देखकर पृथ्वी को अजीब लगने लगा , उसे रुषाली का रोना ना बुरा लग रहा था न ही उसके मन में रुषाली के लिए दया भावना जैसा कोई भाव आ रहा था वह बस ख़ामोशी से रुषाली को देख रहा था।

वह चाहता था रुषाली रोकर अपनी तकलीफ कुछ कम करे और उसके बाद वह उस से बात करे। रुषाली का रोना जब बंद नहीं हुआ तो पृथ्वी ने कहा,”शांत हो जाओ रुषाली और सबसे पहले रोना बंद करो ,, ये बताओ बात क्या है ? तुम आज अचानक यहाँ ?”

“मुझे माफ़ कर दो पृथ्वी ! मैंने तुम्हे गलत समझा , तुम्हारा दिल तोड़ा , तुम्हे ठेस पहुंचाई। तुम्हे छोड़कर मैंने राज को चुना और उसने , उसने मुझे धोखा दे दिया। वो किसी और से शादी कर रहा है पृथ्वी उसने मुझे छोड़ दिया। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू ? मैं उसे कभी माफ़ नहीं करुँगी पृथ्वी,,,,,,,,,!!”,रुषाली ने रोते हुए कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे बुरा लगा साथ ही रुषाली के लिए दुःख भी हुआ , जिस रुषाली पर उसने अपने 8 साल खर्च किये थे उसने उसे छोड़कर किसी और को चुना और आज वही लड़का रुषाली का दिल तोड़कर चला गया। कितना अजीब इत्तेफाक था रुषाली को अपनी गलती समझ आयी भी तो इतनी देर से , पृथ्वी ने रुषाली की तरफ देखा और कहा,”उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था रुषाली ! तुम बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ ?”

रुषाली ने नाम आँखों से पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”हमारे बीच जो कुछ हुआ उसे भूलकर हम फिर से एक हो जाते है पृथ्वी , मैं चाहती हूँ मुझे एक मौका और दो , इस बार मैं तुम्हे छोड़कर नहीं जाउंगी पृथ्वी। हम हम शादी कर लेंगे और सब भूलकर फिर से एक नयी शुरुआत करेंगे,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने जैसे ही सुना उसका दिमाग फट गया , रुषाली की बात सुनकर उसे सबसे पहला ख्याल अवनि का आया।  
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले लता उन दोनों के लिए चाय ले आयी। लता ने चाय रखी और वापस जाते हुए पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने पलकें झपकाकर उन्हें आश्वासन दिया कि सब ठीक है। लता ने हामी में गर्दन हिलायी और वहा से चली गयी। पृथ्वी ने रुषाली से चाय लेने का इशारा किया लेकिन रुषाली तो आज अपने मजबूत इरादों के साथ आयी थी इसलिए रोते हुए कहा,”प्लीज पृथ्वी न मत कहना , मुझे अपनी गलती का अहसास हो चुका है तुम्हे छोड़कर मैंने बहुत बड़ी गलती की।

तुम सही थे पृथ्वी मैंने ही तुम्हारा दिल तोड़कर तुम्हे खो दिया लेकिन अब अब मैं तुम्हे फिर से खोना नहीं चाहती। प्लीज पृथ्वी मुझसे शादी कर लो , मुझे अपना लो , मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती , प्लीज”
कहकर रुषाली ने अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाया और रोने लगी। पृथ्वी पहले से और ज्यादा उलझ गया वह समझ नहीं पा रहा था कि रुषाली को कैसे समझाए ?

रुषाली जो कह रही थी वह पृथ्वी के लिए मुमकिन नहीं था वह अवनि को चाहने लगा था और रुषाली को भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका था।

रुषाली को रोते देखकर पृथ्वी को बेचैनी और घुटन का अहसास होने लगा उसने आगे बढ़कर रुषाली के हाथो को थामा और कहा,”शांत हो जाओ रुषाली , ऐसे मत रो प्लीज मुझे अच्छा नहीं लग रहा। राज ने तुम्हारे साथ गलत किया मैं जानता हूँ और अच्छा हुआ उसका सच जल्दी तुम्हारे सामने आ गया वरना तुम जिंदगीभर परेशान रहती”
“क्या तुमने मुझे माफ़ किया पृथ्वी ?”,रुषाली ने सुबकते हुए कहा

“हाँ मैंने तुम्हे माफ़ किया और मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है , अब चुप हो जाओ प्लीज”,पृथ्वी ने कहा
पृथ्वी की बात सुनकर रुषाली आगे बढ़ी और पृथ्वी के गले लगकर कहा,”थैंक्यू पृथ्वी ! थैंक्यू सो मच मुझे पता था तुम मुझे माफ़ कर दोगे , मैं जानती थी तुम आज भी मुझसे उतना ही प्यार करते हो , आई लव यू पृथ्वी , आई लव यू मच”

पृथ्वी रुषाली से दूर हटा और गंभीर स्वर में कहा,”रुषाली ! तुम गलत समझ रही हो मैंने तुम्हे माफ़ किया लेकिन,,,,,,,,,!!”
रुषाली ने पृथ्वी के हाथो को थामा और घबराये हुए स्वर में कहा,”प्लीज पृथ्वी ! ये मत कहना कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते , मैं बहुत उम्मीद लेकर तुम्हारे पास आयी हूँ।

तुम्हारे अलावा अब मैं किसी और से शादी नहीं कर सकती , प्लीज पृथ्वी मुझे एक मौका दो मैं मैं सब सही कर दूंगी,,,,,,,,,मैं फिर से तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ पृथ्वी , आई लव यू,,,,,,,,,,आई रियली लव यू”

पृथ्वी ने सुना तो वह और ज्यादा उलझ गया रुषाली इस वक्त कुछ सुनने को तैयार नहीं थी और पृथ्वी उसे अवनि के बारे में बताकर और चीजों को और ज्यादा उलझाना नहीं चाहता था। उसने रुषाली की तरफ देखा और कहा,”रुषाली ! मैं कल तुम से मिलता हूँ , बैठकर बात करते है।

अभी शाम हो चुकी है तुम्हे घर जाना चाहिए , तुम्हे ऐसे देखकर आई बाबा परेशान होंगे,,,,,,,,,!!”
“हम्म्म्म , तुम कल पक्का आओगे ना पृथ्वी ?”,रुषाली ने आस भरे स्वर में पूछा
“हम्म्म्म , मैं तुम से कल मिलता हूँ”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा

रुषाली को तसल्ली मिली , उसने चाय का कप उठाया और ख़ामोशी से पीने लगी , पृथ्वी के दिमाग में इस वक्त एक साथ कई ख्याल चल रहे थे वह काफी उलझा हुआ महसूस कर रहा था। जब से अवनि उसकी जिंदगी में आयी थी सब कितना अच्छा चल रहा था और आज अचानक से रुषाली वापस आ गयी।

ये पृथ्वी की जिंदगी में उथल पुथल मचाने के लिए काफी था। चाय पीने के बाद पृथ्वी रुषाली को छोड़ने घर के बाहर तक आया। रुषाली के जाने के बाद उसने राहत की साँस ली और जैसे ही पलटा पीछे खड़ी लता को देखकर चौंक गया।

“वो यहाँ क्यों आयी थी उसके साथ कुछ हुआ है क्या ?”,लता ने परेशानी भरे स्वर में पूछा
“नहीं आई ! वो बस उसके घर में थोड़ी प्रॉब्लम है तो उसी को लेकर परेशान थी”,पृथ्वी ने वाशबेसिन की तरफ आकर मुँह धोते हुए कहा

“ओह्ह्ह ! मुझे लगा तुम्हारे और उसके बीच कुछ झगड़ा हुआ है , खैर अभी ठीक है ना वो ?”,लता ने रुषाली के लिए चिंता जताते हुए कहा
“हाँ वो ठीक है , बाबा नहीं आये अभी तक ?”,पृथ्वी ने लता का ध्यान रुषाली से हटाने के लिए पूछा

“वो देर से आएंगे , तुम्हारे लिए खाना लगा दू ?”,लता ने किचन की तरफ जाते हुए पूछा
“हम्म्म,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और डायनिंग टेबल के पास आ बैठा। पृथ्वी का दिमाग काफी उलझा हुआ था। एक तरफ अवनि थी तो दूसरी तरफ रुषाली वापस आ चुकी थी। एक पृथ्वी के साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहती थी और दूसरी के साथ पृथ्वी अपने आने वाले कल के सपने देख चुका था।

खाना खाकर पृथ्वी अपने फ्लेट पर चला आया। उसे समझ नहीं आ रहा था वह रुषाली को अवनि के बारे में कैसे बताये ? अगर अवनि के बारे में जानकर रुषाली ने कोई तमाशा किया तो वह कैसे सम्हालेगा ? पृथ्वी इसी सोच विचार में उलझा था कि तभी उसका फोन बजा। आज पहली बार अवनि ने सामने से पृथ्वी को मैसेज किया था।

पृथ्वी ने मैसेज खोलकर देखा तो उसमे लिखा था “मिस्टर उपाध्याय ! तुम ठीक तो हो ना ?”
“हाह ! इसे कैसे पता मैं ठीक नहीं हूँ ? अब मैं इसे इत्तेफाक समझू या हमारे बीच का कनेक्शन,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी बड़बड़ाया और फिर लिखकर भेजा

रुषाली घर आयी थी ! बहुत रो रही थी और वो चाहती है कि हम दोनों फिर एक हो जाये”
पृथ्वी का मैसेज देखकर अवनि के दिल में ना जाने क्यों एक मीठी सी चुभन का अहसास हुआ , उसने लिखकर भेजा “तो फिर तुमने क्या सोचा है ?”
“मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है , जब वो मेरी जिंदगी से चली गयी थी फिर अब वापस क्यों आयी है ? उसे नहीं आना चाहिए था”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा

अवनि हल्का सा मुस्कुराई और लिखा “पृथ्वी ! तुम किस्मतवाले हो कि जिस लड़की से तुमने प्यार किया , जिसे अपनी जिंदगी के आठ साल दिए वो तुम्हारी जिंदगी में वापस आना चाहती है। तुम्हे उसे अपना लेना चाहिए , बहुत कम लोगो को उनका प्यार मिलता है पृथ्वी , तुम्हे रुषाली को एक मौका और देना चाहिए”

पृथ्वी ने अवनि का मैसेज पढ़ा तो आज उसे पहली बार अवनि पर थोड़ा गुस्सा आया लेकिन वह दिखाना नहीं चाहता था इसलिए लिखकर भेजा “फ़िलहाल मैंने उसे कल मिलने को कहा है , देखते है क्या होता है ?”

“मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी कि तुम दोनों साथ रहो और खुश रहो”,अवनि ने लिखकर भेजा जबकि उसके दिल में अब भी कुछ चुभ रहा था
“ऐसा मत कहो ma’am , खैर मैं आपसे कल बात करता हूँ”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा और ऑफलाइन हो गया।
अवनि के चेहरे पर उदासी के भाव झिलमिलाने लगे।

बीते कुछ दिनों में वह और पृथ्वी अच्छे दोस्त बन चुके थे जबकि पृथ्वी तो ना जाने कितनी ही बार अपनी भावनाये अवनि के सामने जाहिर कर चुका था लेकिन अवनि ने हमेशा उसे ना कहा।

आज रुषाली के वापस आने की बात सुनकर अवनि को ना जाने क्यों अजीब सी घुटन का अहसास हो रहा था , ऐसा लग रहा था जैसे सबकी तरह पृथ्वी भी उसे छोड़कर चला जाएगा।

अवनि ने पृथ्वी से ये तो कह दिया कि वह उसके और रुषाली के लिए महादेव से प्राथर्ना करेगी पर क्या वह सच में ऐसा कर पायेगी ? दूसरी तरफ पृथ्वी परेशान था वह इस बारे में अवनि से बात करके उसे तकलीफ देना नहीं चाहता था इसलिए जानबूझकर कल बात करने को कहा। पृथ्वी बिस्तर पर पीछे गिर गया , उसके पैर बिस्तर से नीचे लटक रहे थे और वह खुली आँखों से एकटक कमरे की छत को देख रहा था। उसे कल रुषाली से मिलना था और एक कठिन फैसला लेना था जिसके बाद उसकी जिंदगी बदलने वाली थी।

पृथ्वी से बात करने के बाद अवनि का मन भारी हो गया। उसने बेमन से खाना खाया और फिर सोने चली गयी। ना आज उसने लेपटॉप पर अपना काम किया , ना ही उसने फोन में आये मेल्स और नोटिफिकेशन चेक किये वह बस आँखे मूँदकर नींद आने का इंतजार कर रही थी ताकि जितनी जल्दी हो सके कुछ देर के लिए ही सही इस घुटन और बेचैनी से निजात पा सके लेकिन नींद नहीं आयी उलटा पृथ्वी की बातें उसे रह रहकर याद आ रही थी जो अब तक उसने उसे कही थी , साथ ही याद आया रुषाली का उसकी जिंदगी में वापस आना।

अवनि ने कसकर अपनी आँखों को बंद कर लिया और खुद में ही सिमटकर सोने की कोशिश करने लगी और कुछ देर बाद उसे सच में नींद आ गयी

अगली सुबह अवनि ने देखा पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं था। अवनि ने अपना काम खत्म किया और बैंक चली आयी। आज कितनी ही बार उसने अपना फोन चेक किया लेकिन पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं था। अवनि उदास हो गयी , उसने जो सोचा था वही हुआ। पृथ्वी भी अब उसे छोड़कर जाने वाला था। अवनि ने खुद को काम में व्यस्त कर लिया और शाम में घर के लिए निकल गयी।

दूसरी तरफ पृथ्वी सुबह से ही जयदीप और टीम मेम्बर्स के साथ मीटिंग में बिजी था , आज पूरा दिन वह ऑफिस से बाहर था और जयदीप के साथ था। रुषाली के लौट आने की वजह से पृथ्वी खुद थोड़ा उदास था और वह इस बारे में बात करके अवनि को परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए उसने आज अवनि को कोई मैसेज नहीं किया।

ऑफिस खत्म होने के बाद पृथ्वी रुषाली से मिलने उसी पुराने रेस्त्रो चला आया जहा वह पहले रुषाली के साथ आया करता था। रुषाली पृथ्वी से पहले ही वहा आ चुकी थी और उसका इंतजार कर रही थी। पृथ्वी को देखते ही रुषाली के चेहरे पर मुस्कान तैर गयी। पृथ्वी उसके पास आया और रुषाली ने जैसे ही उसे गले लगाने की कोशिश की पृथ्वी ने उसे रोक दिया और रुषाली से बैठने को कहा। पृथ्वी ने रुषाली से बात की , बीती शाम की तरह रुषाली यहाँ भी कई बार इमोशनल हुई और पृथ्वी से माफ़ी मांगी।

घंटेभर बाद पृथ्वी ने रुषाली से घर जाने को कहा।
“तुम घर नहीं जा रहे ?”,रुषाली ने पूछा
“मैं थोड़ी देर अकेले यहाँ बैठना चाहता हूँ”,पृथ्वी ने कहा तो रुषाली वहा से चली गयी।


पृथ्वी वही बैठा ख़ामोशी से टेबल को देखता रहा। रुषाली का उसकी जिंदगी में लौट आना किसी घटना से कम नहीं था। पृथ्वी ने अपना फोन निकाला और अवनि के लिए एक मैसेज लिखा “मुझे लगता है मुझे रुषाली को एक और मौका देना चाहिए”

लेपटॉप के सामने बैठी अवनि ने जब पृथ्वी का मैसेज देखा तो न चाहते हुए भी उसे अपने सीने में चुभन का अहसास हुआ और उसने लिखकर भेजा “जानकर अच्छा लगा , मैं तुम दोनों के लिए बहुत खुश हूँ पृथ्वी ! तुम्हे सब भूलकर रुषाली के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए ,, Best of luck”


पृथ्वी ने जब अवनि का जवाब देखा तो गले में कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ और आँखों में हल्की सी नमी तैर गयी। उसने भारी मन के साथ लिखकर भेजा “अपना ख्याल रखना मैडम जी”

अवनि ने देखा तो उसकी आँखों में नमी तैर गयी और ये नमी क्यों थी वह नहीं जानती थी ?

( क्या रुषाली को दूसरा मौका देकर पृथ्वी कर रहा है गलती ? रुषाली के लौटकर आने की बात सुनकर क्यों उदास हुई अवनि ? क्या आखरी थी पृथ्वी और अवनि की ये बातचीत ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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2 comments

Prarthna November 24, 2025 - 11:28 am

Ab ye kya hogya! Kahan surbhi ke aane ka darr tha aur rushali ne aake ye kaam bigaad diya pr Prithvi ka faisla? Usse esi ummeed nhi thi ab kahan gya wo pyaar jiske daave wo avni se krta tha, ya shayad ye uska tarika ho avni ke man ki baat jaanne ka

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Kshmata Chauhan November 24, 2025 - 2:14 pm

Kamaal ki baat hai…koi phele se hee hert hai, fir unki zindagi m aate hai bina bulaye…aur fir yeh yakeen dilate hai ki tum uske kitni jaruri ho…aur wo ladki m apne zakhmo ko bool kar fir se darte huye ek nai suruvat Krna chahati hai aur wo bhi tumhre bharose…lakin tum phele usko btate ho ki ek ladki usko dekhne aai…but usne uss ladki ko manna kar diya, quki main tumse pyar krta hun…wo ladki fir khush ho jati hai, par darti bhi hai ki fir se usko dhoka na mile…par ek baar fir uske sath wahi hota hai… aakhir kya fark rha gaya Prithvi aur Siddharth m…dono ne usko pyar m yakeen diyala aur fir uska dil tod diya… Kya Prithvi nhi rushali ko fir se moka dekar wo Avni ko apni zindagi se door kar rha hai…aur wo yeh baat Avni ko bta rha hai ki wo rushali ko ek moka dega…kitni bar Avni ka dil tootega writer Sahiba…maanti Avni Prithvi ko kuch nhi bola…lakin umeed to Prithvi be Avni ko dee na…khar lagta hai ki Avni ko abhi aur hert hona hoga…quki yeh uski kismat hai…abhi to Siddharth usko nhi chodega aur confuse Prithvi ka kuch pta nhi…

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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