Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 92

by Story With Sanjana December 17, 2025
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Pasandida Aurat – 92

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

रात के 2 बज रहे थे और पृथ्वी सोसायटी की बेंच पर बैठा था। उसके हाथ में वही कागज था जिस पर उसने अवनि के लिए अपनी फीलिंग्स लिखी थी। पृथ्वी जो  हमेशा वक्त पर सो जाया करता था अब उसकी नींदे उड़ चुकी थी। नींद ना आने की जो शिकायत पहले अवनि उस से किया करती थी वही हाल अब पृथ्वी का था। पृथ्वी ने महसूस किया वह धीरे धीरे अवनि जैसा बन गया है। उसकी तरह ईश्वर में विश्वास करने लगा है , शांत रहने लगा है , नींद से दुश्मनी कर चुका है और हर चीज में उदासी महसूस करने लगा है।

अपार्टमेंट के गार्ड ने जब इतनी रात में पृथ्वी को बेंच पर अकेले बैठे देखा तो उसके पास आया और कहा,”अरे पृथ्वी ! इस वक्त तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? जाओ घर जाओ”
गार्ड की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी उसने घडी में समय देखा रात के 2 बज रहे थे। वह उठा और जाने लगा तो उसके हाथ में कागज देखकर गार्ड ने कहा,”ये तुम्हारे हाथ में क्या है ?”
“आपने कभी किसी से प्यार किया है ?”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में पूछा

“अरे नहीं बेटा , हम कहा किसी से प्यार करेंगे , माँ बाप ने जिसे पसंद किया उस से शादी कर ली और खुश है उनके साथ,,,,,,,,,!!”,गार्ड ने मुस्कुरा कर कहा
“तो फिर आप नहीं समझेंगे,,,,,,,,गुड नाईट”,पृथ्वी ने उदासी भरे स्वर में कहा और वहा से चला गया
“कितना खुशमिजाज लड़का था , अचानक से क्या हो गया है इसे,,,,,,,,बप्पा इसकी जो भी परेशानी है उसको दूर कर देना अच्छा लड़का है”,गार्ड जाते हुए पृथ्वी को देखकर बड़बड़ाया और फिर अपनी कुर्सी पर आ बैठा

पृथ्वी अपने फ्लेट में आया। उस कागज को बहुत ही प्यार से अवनि की लिखी किताब के बीच रखा और फिर उस किताब को अपने सीने से लगाकर सो गया। कुछ देर बाद उसे नींद आ गयी और कुछ देर के लिए ही सही पृथ्वी के जहन में चल रही उलझनों को एक ठहराव मिल गया।

 अवनि ने अपनी लिखी कविता सुरभि को गाकर सुनाई तो सुरभि मुस्कुरा उठी और कहा,”तुमने कितना अच्छा लिखा है अवनि पर,,,,,,,,,,,!!”
“पर ?”,अवनि ने उस खत को समेटकर लिफाफे में रखते हुए कहा
“पर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम्हे भी धीरे धीरे पृथ्वी से प्यार होने लगा है,,,,,,!!”,सुरभि ने एक एक शब्द पर जोर देकर कहा

अवनि ने सुना तो आज उसे सुरभि का ये सब कहना बुरा नहीं लगा , वह मुस्कुराई और खत को लिफाफे में डालकर उस पर तारीख लिखी और बंद करके दराज में रख दिया। अवनि सुरभि की तरफ पलटी और कहा,”मेरे पास तुम्हारी बात का कोई जवाब नहीं है सुरभि पर हाँ मैं इतना जरूर कहूँगी कि मैं जिंदगीभर उस इंसान की शुक्रगुजार रहूंगी।”

“वो तो तुम्हे होना ही चाहिए , वो ही है इतना अच्छा कि क्या कहू ,, सच अवनि मैंने अपनी जिंदगी में कभी ऐसा लड़का नहीं देखा जो इतनी शिद्दत से किसी को चाहे। मैं दिल से चाहती हु अवनि कि पृथ्वी तुम्हारी जिंदगी में आये। पता नहीं क्यों पर मुझे लगता है सिर्फ वही है जो तुम्हारा दर्द कम कर सकता है , तुम्हे समझ सकता है और तुम्हे प्यार में फिर से यकीन दिला सकता है”,सुरभि ने कहा

अवनि ने सुना तो सुरभि के पास आ बैठी और उसका हाथ अपने हाथो में लेकर बड़े ही प्यार से कहा,”हाँ वो बहुत अच्छा है इतना अच्छा है कि मैं भी उसे कभी ना नहीं कहूँगी लेकिन हम साथ नहीं हो सकते सुरभि,,,,,,,,,,उसकी फॅमिली इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे और उनके खिलाफ जाकर मैं पृथ्वी का साथ नहीं चुन सकती,,,,,,,,,,मैं अपने स्वार्थ , अपनी ख़ुशी के लिए पृथ्वी को उसके घरवालों के खिलाफ नहीं कर सकती”
“और अगर तुम्हारे लिए वो उन सबके खिलाफ चला गया तब , क्या तब भी तुम उसे स्वीकार नहीं करोगी ?”,सुरभि ने बेचैनी भरे स्वर में पूछा

अवनि ने सुना तो ना में अपनी गर्दन हिला दी और कहा,”अगर उसने ऐसा किया तो वो मुझे अपने खिलाफ ही पायेगा,,,,,,,,सुरभि हम जितना सोचते है जिंदगी उतनी भी आसान नहीं होती , किसी एक का प्यार पाने के लिए मैं परिवार , समाज और दुनिया को अपने या उसके खिलाफ खड़ा नहीं कर सकती। मुझे उस से कोई शिकायत नहीं है लेकिन अगर उसने इन सबके खिलाफ जाकर मुझे चुना तो मुझे खुद से शिकायत जरूर होगी”

सुरभि ने सुना तो उदास हो गयी ये कैसी जिद थी दोनों की ? एक सख्स पूरी दुनिया के खिलाफ जाकर अवनि को चुनना चाहता था और दूसरा शख्स उसी के खिलाफ खड़ा था। सुरभि खामोश हो गयी तो अवनि ने प्यार से कहा,”इतना मत सोचो सुरभि , मैं खुश हूँ तुम हो न मेरे साथ और अब तो मैंने खुद को इतना मजबूत बना लिया है कि ये जिंदगी अकेले जी लुंगी वो भी बिना किसी अफ़सोस के,,,,,,,,,!!”

सुरभि ने सुना तो अवनि को साइड से गले लगाकर कहा,”मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ,,,,,,और मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी कि उस पगलू पृथ्वी को वो तुम्हारी ही किस्मत में लिखे फिर चाहे बुढ़ापे में ही क्यों न लिखे”
अवनि ने सुना तो हसने लगी और कहा,”हाँ ताकि हम दोनों फिर एक दूसरे के चश्मों और छड़ी का ख्याल रखे,,,,,,,,!!!”

सुरभि ने सुना तो वह भी हसने लगी और फिर दोनों सहेलिया सोने चली गयी। अवनि का मन शांत था , पृथ्वी का प्यार उसे अब धीरे धीरे महसूस होने लगा था लेकिन उसे सोचकर दुखी होने के बजाय अवनि अब उस प्यार को जीने लगी थी और चाहती थी कि ये अहसास अब यु ही बना रहे। देर रात अवनि सोने चली गयी !

अगली सुबह पृथ्वी की फिर वही जिंदगी शुरू हो गयी। उस एक मेल के बाद अवनि का कोई मेल नहीं आया और पृथ्वी ने भी उसे कोई मेल नहीं किया। अवनि ने जान बूझकर खुद को रोक लिया ताकि उसकी वजह से पृथ्वी को तकलीफ ना हो और वही पृथ्वी भी ये बात जानता था कि अवनि जान बूझकर उसे खुद से दूर कर रही है। फिलहाल दोनों अपनी अपनी दुनिया में थे , पृथ्वी अवनि की यादों को लेकर जितना उदास था वही अवनि पृथ्वी की यादों में उतना ही खुश और खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी।

प्यार के दो रूप थे एक जिसमे कोई तड़प रहा था और दूसरा जिसने तड़प में ही सुकून ढूंढ लिया और इन सब में अगर सबसे ज्यादा खूबसूरत कुछ था तो वो था इंतजार जो दोनों तरफ था। पृथ्वी को इंतजार था सब ठीक होने और अवनि से मिलने का तो वही अवनि को इंतजार था पृथ्वी की जिंदगी में सब ठीक होकर उसके पहले जैसे मुस्कुराने का,,,,,,,,,!!!

पृथ्वी अपने ऑफिस के कामो में खुद को बिजी रखता , पहले से काफी बदल चुका था और शांत रहने लगा था। उसका अब कही मन नहीं लगता था और उदासी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी , वही अवनि भी दिनभर अपने बैंक के कामो में व्यस्त रहती , घर आकर घर के कामो और सुरभि के के साथ वक्त बिताती और रातभर जागकर अपनी किताब लिखा करती। अवनि को अब भी नींद कम ही आती थी वह मुश्किल से 4-5 घण्टे सोती थी।

पृथ्वी से दूर होने के बाद अवनि ने अपने दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर लिए , अब वह किसी को अपनी जिंदगी में आने देना तो दूर अपने दिल के दरवाजो को खटखटाने देना भी नहीं चाहती थी और यही हाल था पृथ्वी का , वह अवनि को अपने मन में इस कदर बसा चुका था कि अब किसी और के बारे में सोचना तो दूर उसे देखना भी नहीं चाहता था। घरवाले उस पर शादी का दबाव बनाते रहे और वह मना करता रहा।

उदासी भरे दिन गुजर रहे थे और एक शाम पृथ्वी जब ऑफिस से घर आया तो देखा घर के हॉल में दादी बैठी है। उन्हें देखकर आज कितने ही दिनों बाद पृथ्वी के चेहरे पर मुस्कुराहट आयी और वह अपना बैग रखकर उनके पास चला आया। दादी ने पृथ्वी के चेहरे को अपने हाथो में लिया और उसका ललाट चूमकर कहा,”कैसा है पृथ्वी ? तेरे बारे में सुना तो कितना घबरा गयी मैं वहा,,,,,,,,तू ठीक तो है न ?”
“हाँ,,,,,,,,,,आप कैसी है ?”,पृथ्वी ने दादी के नाजुक हाथो को अपने सख्त हाथो में लेकर कहा

“मैं बढ़िया हूँ”,दादी ने मुस्कुराकर कहा
लता सबके लिए चाय ले आयी , रवि जी भी आ चुके थे। नीलम भुआ और घर के कुछ सदस्य भी चले आये। सभी बैठकर बाते करने लगे। दादी उन्हें गाँव के बारे में बता रही थी और इधर उधर की बातें कर रही थी और पृथ्वी ख़ामोशी से सब सुन रहा था हालाँकि पृथ्वी की शादी को लेकर किसी ने कोई बात नहीं की।

रात के खाने के बाद बाकि सब अपने घर चले गए , पृथ्वी भी फ्लेट पर जाने लगा तो दादी ने कहा,”ए पृथ्वी ! रुक , मुझे तुम से कुछ बात करनी है”
“हम्म्म कहिये”,पृथ्वी ने पलटकर कहा
“ऐसे सूखे सूखे कहू , चल कही बढ़िया जगह चाय पीने चलते है , चलते चलते बात करेंगे”,दादी ने अपनी कॉटन की साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए कहा।  

लता ने उन्हें बाहर जाने से रोकना चाहा तो रवि जी ने ना में गर्दन हिला दी क्योकि वे जानते थे दादी ही है जो पृथ्वी को समझा सकती है और इसके लिए उनका अकेले में बात करना ज्यादा जरुरी है। पृथ्वी दादी को लेकर घर से बाहर निकल गया। दोनों साथ साथ सोसायटी की सड़क किनारे चलने लगे।

“आप घर पर भी चाय पी सकती थी फिर इस वक्त बाहर क्यों जा रही है ?”,पृथ्वी ने दादी से पूछा
“मैंने कब कहा मुझे चाय पीनी है ? मुझे तो तुमसे बात करनी थी”,दादी ने पृथ्वी के साथ चलते हुए कहा और कुछ दूर चलकर दोनों एक बेंच पर आ बैठे। पृथ्वी को खामोश देखकर दादी ने एक लिफाफा निकाला और पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”मैंने तेरे लिए एक लड़की पसंद की है अपने गाँव की तरफ से ही है तू देख ले अगर तुझे पसंद आती है तो इसी साल शादी कर देंगे”

पृथ्वी ने सुना तो फीका सा मुस्कुराया वह समझ गया कि घरवाले जब उसे शादी के लिए मना नहीं पाए तो उन्होंने दादी को घर बुला लिया। पृथ्वी ने सर झुका लिया और धीरे से कहा,”मुझे शादी नहीं करनी दादी”
“पृथ्वी ! तेरे आई-बाबा ने सब बताया मुझे , देख बेटा जब घर में कोई भी उस लड़की के लिए तैयार नहीं है तो फिर तू उसे भूलकर आगे क्यों नहीं बढ़ जाता ? एक लड़की के लिए क्या तू सबके खिलाफ जाएगा ?”,दादी ने पृथ्वी को समझाते हुए कहा

“भूल ही तो नहीं सकता दादी,,,,,,,,मैं उसे बहुत चाहता हूँ और ये भी जानता हूँ कि मेरे बाद वो किसी और को चाह नहीं पायेगी ,, सब उसे पहले ही ठुकरा चुके है दादी अब अगर मैंने भी ठुकरा दिया तो वो जिंदगी में कभी किसी पर भरोसा नहीं कर पायेगी,,,,,,,मैं जिंदगीभर उसकी हाँ का इंतजार करूंगा दादी लेकिन उसकी जगह किसी और को नहीं दे सकता,,,,,,,,,,,मैं किसी और के साथ खुश रह ही नहीं पाऊंगा”,पृथ्वी ने उदासी भरे स्वर में कहा
दादी पहली बार पृथ्वी को इतना उदास और गंभीर देख रही थी।

आज से पहले उन्होंने पृथ्वी को बस हँसते , मुस्कुराते , हंसी मजाक करते और मस्ती करते देखा था लेकिन आज वह पृथ्वी का एक नया रूप देख रही थी। दादी उसकी भावनाये समझ रही थी लेकिन वे ऐसे कैसे किसी लड़की के लिए पृथ्वी का साथ दे दे जिसे वे जानती तक नहीं , जिस से वे कभी मिली नहीं है।
“तुम एक बार ये लड़की का फोटो देख तो लो”,दादी ने एक कोशिश और करके कहा
पृथ्वी ने फोटो देखना तो दूर की बात है लिफाफे की तरफ भी नहीं देखा और कहा,”नहीं दादी ! मैं नहीं पाऊंगा”
“तो क्या जिंदगीभर ऐसे ही रहेगा ?”,दादी ने थोड़ा गुस्से से कहा

“किसी और के साथ रहकर हर पल उसे सोचते हुए जिसके साथ हु उसे धोखा देने से अच्छा है मैं ऐसे ही रह जाऊ,,,,,,,आप सब चाहते है मैं उस लड़की से दूर रहू तो मैं दूर हूँ ये आप सब का फैसला है लेकिन किसी और से शादी ना करने का फैसला मेरा है और मैं अपने इस फैसले को किसी के लिए नहीं बदलने वाला आपके लिए भी नहीं,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी ने दादी की तरफ देखा
पृथ्वी की बात सुनकर दादी खामोश हो गयी और उसकी आँखों में देखने लगी जिनमे किसी के लिए बेपनाह मोहब्बत नजर आ रही थी।

दादी ने जो लिफाफा पृथ्वी की तरफ बढ़ाया था वो वापस अपनी तरफ कर लिया और सामने देखते हुए कहने लगी,”जब तूने फैसला कर ही लिया है तो फिर अपने इस फैसले पर डटे रहना ,, किस्मत में लिखा तो जानवर को भी मिलता है पर तू अपनी किस्मत बदलकर अपनी कहानी खुद लिखना,,,,,,,ताकि जिंदगी में आगे जाकर कोई अफ़सोस ना रहे,,,,,चले जाना सबके खिलाफ अगर तूने जो चुना है वो तेरे लिए सही हो,,,,,,,,,सिर्फ दिल की सुनना और बदल देना अपनी कहानी”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया दादी ने भले ही साफ साफ़ ना कहा हो लेकिन उन्होंने अपनी बातो से पृथ्वी को ये अहसास दिला दिया कि वे पृथ्वी के साथ है।
“अब मुझे क्या देख रहा है , चलकर बढ़िया कड़क चाय पिला”,दादी ने कहा
“अभी तो आपने कहा कि आपको चाय नहीं पीनी”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा

“अब मैं चाय भी तेरे से पूछ के पिऊँगी , चल उठ और लेकर चल मुझे”,दादी ने पृथ्वी को फटकार लगाते हुए कहा तो पृथ्वी ने उन्हें साइड हग किया और साथ लेकर चल पड़ा। दोनों सोसायटी के बाहर बनी टपरी पर चले आये , पृथ्वी ने दो चाय आर्डर की और फिर दोनों वही खड़े होकर चाय पीने लगे। आज कितने दिनों बाद पृथ्वी का मन कुछ हल्का और शांत था।  

दादी कुछ दिन मुंबई में रही और फिर सभी घरवालों से पृथ्वी को उसके हाल पर छोड़ देने को कहकर गाँव चली गयी। दादी भी पृथ्वी को शादी के लिए नहीं मना पायी और धीरे धीरे घरवालों ने पृथ्वी के लिए लड़की देखना और उसे शादी के लिए मनाना बंद कर दिया। रवि जी और लता अब पृथ्वी को टाइम दे रहे थे ताकि वह अवनि की यादो से खुद को बाहर निकाल कर खुद को सम्हाल सके। सबकी जिंदगी एक बार फिर सही ट्रेक पर चलने लगी। पृथ्वी अपने काम में बिजी था और अवनि अपने काम में दोनों एक दूसरे को भूले नहीं थे लेकिन एक दूसरे के सम्पर्क में भी नहीं थे।

देखते ही देखते 6 महीने गुजर गए और इन 6 महीनो में ना पृथ्वी ने कभी अवनि से बात करने की कोशिश की ना ही कभी अवनि ने पृथ्वी को मेल या कॉल किया
जबकि दोनों के मन में अभी भी एक दूसरे के लिए भावनाये थी तभी तो इन 6 महीनो में पृथ्वी ने किसी को अपनी जिंदगी में आने नहीं दिया ना ही अवनि ने किसी के लिए अपने दिल के दरवाजे खोले।

इन 6 महीनो में अगर कुछ बदला तो वो था सिद्धार्थ , सिद्धार्थ पूरी तरह से बदल चुका था , ना वह अब पहले की तरह गुस्सा करता , ना ही चिड़चिड़ाता , हालाँकि उसकी जिंदगी में परेशानिया अब भी कम नहीं थी लेकिन वह बस उन्हें सम्हाल रहा था। सुरभि की उस दिन की बदतमीजी की वजह से सिद्धार्थ की नौकरी चली गयी , कुछ महीने वह घर में ही रहा और फिर नयी जॉब ढूंढ ली लेकिन नई नौकरी में उसका व्यवहार बिल्कुल ही बदल गया वह अब लोगो से नरम होकर मिलने लगा , किसी से कुछ गलती भी होती तो उसे शांति और प्यार से समझाता , सिद्धार्थ में ये बदलाव कब और कैसे आये वह खुद नहीं जानता था ?

एक ही शहर में होने की वजह से इन 6 महीनो में उसका अवनि से 5-6 बार सामना भी हुआ लेकिन ना कभी सिद्धार्थ ने आगे बढ़कर बात की ना ही अवनि ने , बस दोनों एक दूसरे को एक नजर देखते और आगे बढ़ जाते। अवनि के दिल में सिद्धार्थ के लिए अब कोई भावनाये नहीं थी जबकि सिद्धार्थ के दिल में अवनि के लिए प्यार बढ़ता ही जा रहा था।

अवनि के जाने के बाद से ही सिद्धार्थ उदास रहने लगा था , गिरिजा ने कितनी ही बार सिद्धार्थ से कहकर अवनि से बात करनी चाही लेकिन सिद्धार्थ ने मना कर दिया वह अब अवनि को और तकलीफ देना नहीं चाहता था , वह बस खामोश रहकर अवनि का इंतजार कर रहा था। अब तक अवनि ने हर मंदिर में खड़े होकर सिद्धार्थ का साथ माँगा था और अब सिद्धार्थ हर मंदिर में ईश्वर से अवनि का साथ माँग रहा था।

वक्त गुजर रहा था लेकिन तीन लोग आज भी वही खड़े थे अवनि के लौट आने के इंतजार में सिद्धार्थ , प्यार और परिवार के बीच झूंझता पृथ्वी और सब सही हो जाने के इंतजार में अवनि,,,,,,,,,,,ऐसा लग रहा था इनकी कहानी खुद महादेव लिख रहे थे तभी तो इनकी जिंदगी में इतनी परीक्षाएं थी।

एक शाम अपने ऑफिस में लेपटॉप के सामने बैठा पृथ्वी अपनी और अवनि की पुरानी चैट पढ़ रहा था कि तभी उसकी आँखों के सामने अवनि का एक मैसेज आया “”घरवाले तो तब मानेंगे ना पृथ्वी जब मैं अपने घर जाउंगी,,,,,,,,,,सिरोही आने के बाद मैं आज तक कभी अपने घर नहीं गयी,,,,,,,,,,पापा ने हमेशा के लिए मुझसे मुँह मोड़ लिया है”

ये मैसेज 7 महीने पहले पुराना था जब पृथ्वी और अवनि की बातें होती थी। इस मैसेज को पढ़कर पृथ्वी की नजरे उस पर टिक गयी उसने अपना फोन बंद किया और जेब में रखकर केबिन से बाहर निकल गया। वह केंटीन की तरफ आया और अपने लिए एक कप चाय लेकर खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया। अगले महीने दिवाली थी और इसी के साथ हलकी ठंड होने लगी थी। दिन सुहावने और धुप भी अब अच्छी लगने लगी थी।

चाय पीते हुए पृथ्वी ने खुद से कहा,”जानता हूँ वो कभी मेरी फॅमिली के खिलाफ नहीं जाएगी और सबकी सहमति से मैं कभी उसे अपनी जिंदगी में शामिल नहीं कर पाऊंगा। वो अपनी जगह गलत भी तो नहीं है , अपनी अब तक की जिंदगी में उसने जो देखा है , सहा है उसके सामने मेरा दर्द कुछ भी नहीं,,,,,,,,,वो बेशक मुझे ना मिले लेकिन मैं उसकी जिंदगी का दर्द का तो कम कर सकता हूँ ना,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने मन ही मन कोई फैसला किया और चाय पीकर केंटीन से बाहर निकल गया

( क्या अवनि और पृथ्वी का इंतजार होगा कभी खत्म या रह जाएगी उनकी प्रेम कहानी अधूरी ? क्या अवनि से दूर जाकर सिद्धार्थ को हो रहा है अपनी गलतियों पर पछतावा ? पृथ्वी कैसे करेगा अवनि की जिंदगी का दर्द कम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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1 comment

Kshmata Chauhan December 17, 2025 - 11:44 am

Prithvi kya Naya krne wala hai… kya wo Avni k ghar walo se milega ya fir wo viswas ji se mulakat kar Avni k liye uske ghar aane ka rasta kolega…jo bhi Krna Prithvi soch samaj kar Krna… taki Avni ko koi dikkat na ho… Prithvi k ghar walo ne Prithvi ko uske haal pe chod diya hai…lakin ek baar bhi unhone yeh nhi socha ki ek baar Avni se bhi milkar dekh le…ki aakhir usme esa kya hai ki jo Prithvi itna badal gaya hai aur shadi ko lekar kisi ki sunne ko tayar nhi hai…wo apni zid par ade hai…aur idhar Avni usne to Prithvi ki baato ko jeene ka tarika bana liya hai khud k liye…dono ko mile huye 7 maheene beet chuke hai… umeed hai ki jaldi se sab kuch thik hoga…lakin Prithvi ko ek baar dadi ki pasand wali ladki ki photo ko dekhna tha…kahin wo Avni to nhi thi?

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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