Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 76

by Story With Sanjana December 1, 2025
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Pasandida Aurat – 76

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

मंदिर की सीढ़ियों पर खड़ी अवनि पृथ्वी को देखे जा रही थी। पृथ्वी ने बुजुर्ग आदमी को पानी पिलाया और कहा,”काय काका ? तू ठीक आहेस ना ? ( क्या काका , आप ठीक है न ? )
पृथ्वी एकदम से मराठी बोल गया जो कि बुजुर्ग आदमी को समझ नहीं आयी और वे पृथ्वी का चेहरा देखने लगे तो पृथ्वी ने कहा,”अह्ह्ह्ह मेरा मतलब आप ठीक है ना ?”
“हाँ हाँ बेटा मैं ठीक हूँ , महादेव तुम्हारा भला करे”,बुजुर्ग आदमी ने अपने दोनों हाथो को उठाया और पृथ्वी की तरफ आशीर्वाद के रूम में तानकर कहा

पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए उनके हाथो को थामा और कहा,”अपना ख्याल रखिये”
अवनि ने देखा ऐसा करते हुए पृथ्वी ने ना उन बुजुर्ग आदमी का स्टेटस देखा , ना उनके कपडे और ना ही उनकी दयनीय हालत वह बस उनमे एक इंसान देख रहा था अपने जैसा , अवनि के जैसा और सबके जैसा,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा तो अवनि को खोया हुआ देखकर उसकी आँखों के सामने हाथ हिलाया और अवनि की तन्द्रा टूटी।

“चले ?”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी और पृथ्वी के साथ सीढ़ियों से आगे बढ़ गयी। पृथ्वी ठीक अवनि के बगल में सामने देखते हुए चल रहा था और उसके बगल में चलती अवनि अपने बगल में चलते पृथ्वी को देखते हुए आगे बढ़ रही थी। दोनों मंदिर में चले आये। अवनि ने देखा आज मंदिर में रोजाना की तरह भीड़ नहीं थी बल्कि बहुत कम लोग मौजूद थे। अवनि ने प्रशाद और पूजा की टोकरी मंदिर के पंडित जी की तरफ बढ़ा दी और खुद ने महादेव से प्रार्थना करने के लिए जैसे ही हाथ जोड़े नजर बगल में खड़े पृथ्वी पर पड़ी

जो कि सामने महादेव की मूर्ति को देख रहा था। अवनि ने अपने हाथो से पृथ्वी के दोनों हाथो को उठाकर आपस में मिलाते हुए कहा,”अगर तुम सच्चे दिल से प्रार्थना करोगे और अपनी विश इनसे कहोगे तो ये तुम्हारी बात जरूर सुनेंगे”

“आप कहना चाहता है कि मुझे जो चाहिए वो अगर मैं इन से माँगू तो ये मुझे दे देंगे”,पृथ्वी ने हाथ जोड़े जोड़े पूछा
“जो तुम्हारे लिए बेहतर होगा , तुम्हारे लायक होगा वो ये तुम्हे देंगे”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की आँखों में देखता रहा जिनमे एक विश्वास नजर आ रहा था। पृथ्वी ने धीरे से हामी में गर्दन हिला दी और हाथ जोड़ आँखे मूँद महादेव की तरफ मुँह करके खड़ा हो गया।

अवनि ने भी आँखे बंद की और महादेव से प्रार्थना करने लगी। अवनि ने अपनी प्रार्थना ने क्या कहा ये सिर्फ अवनि जानती थी वही पृथ्वी सिर्फ 10 सेकेण्ड हाथ जोड़े आँखे मूँदे खड़ा रह पाया। कुछ देर बाद जब अवनि ने अपनी आँखे खोली और अपने बगल में देखा तो हैरान रह गयी। पृथ्वी महादेव के बजाय अवनि की तरफ मुँह किये , हाथ जोड़े खड़ा था। उसके होंठ धीरे धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे और चेहरे पर सुकून के भाव थे। अवनि ने पृथ्वी को शिव से मांगने को कहा और पृथ्वी ने उन्हें ही नकार दिया।

पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली तो सामने खड़ी अवनि को हैरान परेशान देखा , वह अवनि से कुछ कहता इस से पहले अवनि ने कहा,”ये सब क्या है पृथ्वी ? तुम मेरे तरफ क्यों खड़े थे ?”
“आपने कहा मुझे जो चाहिए वो मैं उन से मांगू , मेरे लिए बेहतर होगा मेरे लायक होगा तो वो मुझे देंगे,,,,,,,,अब उनका कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है न कि मुझे जो चाहिए वो मुझे  देंगे या नहीं इसलिए मैंने उसी से माँग लिया जो मुझे दे सकता है,,,,,,,,मुझे आपका साथ चाहिए,,,,,,,, जिसके बीच बेहतर या लायक जैसे शब्द ना आये”,पृथ्वी ने सर्द आवाज में कहा

अवनि बस खाली आँखों से पृथ्वी को देखती रही। क्या सच क्या था और क्या वहम अवनि समझ ही नहीं पायी।  कुछ वक्त पहले उसकी जिंदगी में सिद्धार्थ आया था , उसी की

तरह महादेव में विश्वास रखने वाला , मंदिरो में सुकून ढूंढने वाला , हर मंदिर में प्रार्थना करने वाला , जिसे ईश्वर में और उनकी कृपा में विश्वास था और आज वह पृथ्वी से मिल रही थी जिसने ईश्वर को ही नकार दिया और मोहब्बत को अपना ईश्वर मान लिया , जो ना महादेव से कुछ माँगने में विश्वास रखता था ना ही प्रार्थना करने में , ऐसा नहीं था कि ईश्वर को नहीं मानता था बल्कि वह इतना प्रेक्टिकल था कि ईश्वर से कुछ माँगने के बजाय वह उस से मांगने में विश्वास रखता जो सच में उसे यह चीज दे सकता है। अवनि ये सब सोचते हुए पृथ्वी को देखे जा रही थी।

कुछ देर बाद पृथ्वी ने कहा,”आपका साथ मैं महादेव से नहीं मांग सकता अवनि उन्होंने तो पहले ही हमे एक दूसरे की किस्मत में लिख दिया है , बस मुझे आपकी हाँ का इंतजार है”
अवनि ने सुना तो उदास हो गयी और कहा,”जो सपने तुम देख रहे हो वो मैं पहले भी देख चुकी हू पृथ्वी ,, जिस इंसान को मैंने महादेव का आशीर्वाद समझकर अपनाया वही मुझसे दूर हो गया , किस्मत में लिखा सब हमे मिले ये जरुरी तो नहीं”

पृथ्वी ने सुना तो कुछ देर खामोश रहा और कहा,”जो इंसान आपको मंदिरो में माँगने से भी नहीं मिला , ज़रा सोचिये कितना गलत इंसान चुना होगा आपने”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि का दिल धड़क उठा और आँखों में आँसू भर आये। पृथ्वी अवनि की आँखों में आँसू नहीं देख सकता था इसलिए वहा से चला गया। हताश और दुखी होकर अवनि वही मंदिर में बने पत्थर के बेंच पर बैठ गयी और अपना सर झुका लिया। उसकी आँखों में आँसू भरे थे। बहुत कम शब्दों में पृथ्वी  ने कितनी सही बात अवनि के सामने कह दी वो भी बिना किसी लाग लपट के , अवनि का दिल भारी होने लगा।

सिद्धार्थ को चुनने का उसका फैसला गलत था और अब उसे अपने इस फैसले पर तकलीफ हो रही थी जिसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता था। अवनि रोना चाहती थी लेकिन अब वह सबके सामने रोने से  भी डरती थी। अवनि ने खुद को सम्हाला और जैसे ही सर उठाकर सामने देखा नीचे जमीन पर अपने दोनों पैरो को अपने हाथो से थामे पृथ्वी उसके सामने बैठा था और प्यार से उसे देख रहा था। अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और अपने हाथो से अपने दोनों कानों को पकड़ लिया।

नम आँखों के साथ भी अवनि मुस्कुरा उठी और अपनी जगह से उठकर पृथ्वी से चलने का इशारा किया। पंडित जी ने श्रृंगार का सामान अवनि की तरफ बढाकर कहा,”बिटिया ये सामान माँ गौरी को अर्पित कर दो”
“हम्म्म,,,,,,,,!!”,अवनि पंडित जी की तरफ चली गयी और पृथ्वी उसी बेंच पर आ बैठा जिस पर कुछ देर पहले अवनि बैठी थी। पृथ्वी ने गर्दन घुमाकर महादेव को देखा और मन ही मन कहने लगा,”कितने अजीब हो ना आप भी , एक गलत इंसान ने अवनि के साथ साथ आपके मंदिर में आकर पूजा की , प्रशाद चढ़ाया तो आपने अवनि के दिल में उस गलत इंसान के लिए प्यार जगा दिया।

वो आप पर इतना भरोसा करती है फिर भी आपने उसकी जिंदगी में तकलीफ लिख दी , वो प्रार्थनाओ में विश्वास रखती है इसलिए आपसे प्रार्थना करती है पर उसे ये कौन बताएगा कि उसकी उन प्रार्थनाओ का फल मैं हूँ,,,,,,,,आप भी जानते है कि अवनि के लिए मुझे बेहतर कोई नहीं है लेकिन आप उसके दिल में ये विश्वास नहीं जगायेंगे ये जानता हूँ मैं,,,,,,,,,पर मेरे लिए ना सही उसके लिए तो आप सब बदल सकते है ना,,,,,,,,,

उसे प्यार में यक़ीन मैं दिला दूंगा , उसे अपनी जिंदगी में शामिल भी मैं खुद कर लूंगा , मैं बस इतना कह रहा हूँ कि अब उसकी जिंदगी में कोई दर्द कोई तकलीफ मत लिखना, इस जिंदगी में उसके इतने इम्तिहान काफी है।”
“पृथ्वी,,,,,,,,,!!”,अवनि ने आकर कहा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने सामने देखा। दोनों हाथो में प्रशाद की टोकरी लिए अवनि खड़ी थी तो पृथ्वी उठा और अवनि के साथ मंदिर से बाहर चला आया 

प्रशाद की दुकान पर आकर अवनि ने टोकरी लड़के को दी और सब प्रशाद पैकेट में डलवा लिया। पृथ्वी के साथ चलकर अवनि उस जगह चली आयी जहा उसने अपने चप्पल उतारे थे। पृथ्वी को अब थोड़ी थोड़ी गर्मी लगने लगी थी इसलिए उसने अपना जैकेट उतार दिया और उसे हाथ में लेकर जूते पहनने लगा तो अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! इसे मुझे दे दो”

“थैंक्स”,पृथ्वी ने अपना जैकेट अवनि की तरफ बढाकर कहा और जूते पहनने लगा। अवनि ने अपने पैरों में सेंडल पहनी लेकिन उनका हुक बंद नहीं कर पायी  क्योकि उसके एक हाथ में प्रशाद था और दूसरे हाथ में पृथ्वी का जैकेट वह बस इंतजार कर रही थी पृथ्वी अपने जूते पहनकर हाथ धोकर आये और उसके हाथ से सामन ले ताकि वह अपनी सेंडल्स का हुक बंद कर सके। जूते पहनते हुए पृथ्वी की नजर अवनि के पैरों पर चली गयी तो उसने अवनि के पैरों की तरफ अपने हाथ बढ़ाये और जैसे ही हुक बंद करने लगा अवनि ने अपना पैर पीछे करके कहा,”पृथ्वी ये तुम क्या कर रहे हो ?”

“मदद के बदले मदद कर रहा हूँ वैसे भी एक हुक बंद करने से मैं छोटा नहीं हो जाऊंगा,,,,,,अपना पैर आगे कीजिये”,पृथ्वी ने अवनि के पैरो की तरफ देखते हुए कहा
ना चाहते हुए भी अवनि ने अपने पैर आगे कर दिए। पृथ्वी ने सेंडल के हुक बंद किये और ऐसा करते हुए उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। आस पास खड़े लोग पृथ्वी को देख रहे थे। पास से गुजरती कुछ लड़किया ये देखकर मुस्कुरा भी रही थी।

अवनि की जिंदगी में पृथ्वी वो पहला लड़का था जो उसके पैरो में बैठकर ये कर रहा था जबकि इस से पहले कितनी ही बार अवनि ने सिद्धार्थ के लिए ये सब किया था। पृथ्वी ने देखा अभी भी अवनि के पैर में एक ही पायल है तो उसे याद आया कि वह अवनि की दूसरी पायल लाना भी भूल गया है।
“लगता है अभी हमारी दूसरी मुलाकात बाकी है”,पृथ्वी ने मन ही मन कहा और उठ खड़ा हुआ।

“थैंक्यू,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“आप चाहो तो मैं आपके लिए ये जिंदगीभर कर सकता हूँ,,,,,,,,,बस उसके लिए आपको मुझे हाँ कहना पड़ेगा,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखकर प्यार से कहा तो अवनि ने मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिला दी
“एट्टी सिक्स,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपने हाथो से दिल बनाकर उसे तोड़ते हुए मासूमियत से कहा और हाथ धोने नल की तरफ चला गया।

मंदिर से बाहर आकर पृथ्वी ने कहा,”अच्छा एक बात पुछु ?”
“हम्म्म पूछो”,अवनि ने कहा
“इस शहर के लोग हवा खाकर ज़िंदा रहते है क्या ?”,पृथ्वी ने कहा और अवनि तुरंत उसके कहने का मतलब भी समझ गयी इसलिए कहा,”अरे !  माफ़ करना मैंने तुमसे खाने के लिए पूछा ही नहीं,,,,,,,,,,तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया,,,,,,,,,!!”

“चलो फिर हमारी तीसरी डेट पर चलते है स्ट्रीट फ़ूड”,पृथ्वी ने कहा
अवनि को याद आया 12 घंटो के साथ ही पृथ्वी ने 5 डेट भी बताई थी जो वह अवनि के साथ जाना चाहता था।    

“तुम सुबह सुबह स्ट्रीट फ़ूड खाओगे ?”,अवनि ने सामने से गुजरते ऑटो को रोककर कहा और पृथ्वी से अंदर बैठने का इशारा किया।
“हाँ,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और ऑटो में आ बैठा उस के साथ अवनि भी ऑटो में आ बैठी और इस बार दोनों के बीच दूरी कम थी क्योकि ऑटो में पहले से एक सवारी बैठी थी। अवनि ऑटोवाले से फ़ूड मार्किट चलने को कहा। पृथ्वी के साथ अवनि इतना सहज थी जैसे दोनों पहले भी मिल चुके हो। पृथ्वी तो खुश था ही वह तो चाहता था वक्त कुछ देर के लिए रुक जाए लेकिन घडी की सुईया बस भागे जा रही थी और वक्त जल्दी जल्दी गुजर रहा था।

अवनि पृथ्वी को लेकर फ़ूड मार्किट पहुंची। सुबह के 11 बज रहे थे और भूख लगना जायज था।  अवनि पृथ्वी को लेकर फ़ूड मार्किट में बने कैफे में जाने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”वहा किसलिए ? सामने से कचौरी खाते है न , मैंने सुना है राजस्थान के लोग सुबह नाश्ते में सबसे ज्यादा कचौरी ही खाते है”
अवनि मुस्कुराई और कहा,”सही सुना है , तो फिर कचौरी और चाय”
“हम्म्म्म चलेगा”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि उसे लेकर कचौरी की दूकान पर चली आयी जहा गर्मागर्म कचौरिया बन रही थी। अवनि ने दो प्लेट कचौरी लगाने को कहा और साइड में खड़ी होकर इंतजार करने लगी।

 कुछ देर बाद अवनि का आर्डर तैयार था उसने एक प्लेट पृथ्वी की तरफ बधाई और दूसरी खुद ले ली। पृथ्वी ने एक निवाला खाया , उसे वह इतनी अच्छी लगी कि उसने कहा,”मैंने आज से पहले इतना अच्छा स्ट्रीट फ़ूड नहीं खाया , ये बहुत टेस्टी है”
“ये सिरोही की सबसे पुरानी दूकान है , मैं और सिद्धार्थ,,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्हह आई ऍम सॉरी”,अवनि ने एकदम से सिद्धार्थ का नाम लिया और सहसा ही उसे अहसास हुआ कि वह पृथ्वी के साथ खड़ी है।

सिद्धार्थ का नाम सुनकर पृथ्वी को अजीब सी बेचैनी का अहसास हुआ और उसने दुसरा निवाला खाकर कहा,”हम्म्म्म थोड़ा नमक ज्यादा है बस”
अवनि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा तो सिद्धार्थ दूसरी तरफ देखकर खाने लगा। अवनि ने कचौरी के साथ चाय आर्डर की थी इसलिए वे भी आ गयी। अवनि ने पास ही की स्टेंडिंग टेबल पर चाय के कप रखे और पृथ्वी से वही आने को कहा

पृथ्वी ने अपनी प्लेट टेबल पर रखी और अब आराम से खड़े होकर खाने लगा। वह अवनि से कुछ बात कर पाता इस से पहले अवनि का फोन बजा। स्क्रीन पर सुरभि का नाम देखकर अवनि ने पृथ्वी से कहा,”मैं एक कॉल अटेंड करके आयी”
“हम्म्म ठीक है”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि फोन कान से लगाकर साइड में चली गयी और यहाँ पृथ्वी को मौका मिला अपनी प्लेट को अवनि की प्लेट से बदलने का। पृथ्वी ने अवनि की प्लेट उठाकर अपने सामने रख ली और उसमे से खाने लगा। वो नहीं जानता था वो ये सब क्यों कर रहा था बस उसे ये सब करना अच्छा लग रहा था।

अवनि ने सुरभि का फोन उठाकर कान से लगाया और कहा,”हेलो अवनि मैडम ! क्या बात है डेटिंग शेटिंग ,, कैसा लगा उस से मिल के ? बातें वाते हुई कि नहीं , उसे शहर घुमाया , कुछ खिलाया पिलाया कि नहीं,,,,,,,,!!”
“तुम्हे उसकी इतनी परवाह हो रही है तो तुम ही क्यों नहीं आ जाती ?”,अवनि ने कहा
“ओह्ह्ह ऐसा है क्या , ज़रा पीछे देखना”,सुरभि ने कहा और अवनि जैसे ही पलटी उसने अपना सर पीट लिया पीछे सुरभि खड़ी थी। अवनि ने देखा पृथ्वी का ध्यान खाने पर है तो वह सुरभि के पास आयी और कहा,”तुम यहाँ क्या कर रही हो ?”

“अपने होने वाले जीजा से मिलने आयी हूँ”,सुरभि ने अवनि को साइड कर पृथ्वी की तरफ जाते हुए कहा
“हैं ? जीजा , तो तुम्हारा जीजा नहीं है,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने उसके पीछे आते हुए कहा
“नहीं है तो बन जाएगा,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा और अवनि उसे रोक पाती इस से पहले सुरभि पृथ्वी के सामने जा पहुंची और कहा,”हेलो जी”

पृथ्वी ने सर उठाकर सामने खड़ी सुरभि को देखा तो उसे बनारस की वो घटना याद आयी जब सुरभि मंदिर में उस से टकराई थी और पृथ्वी ने उसे पहले सम्हाला और फिर नीचे गिरा दिया था। निवाला पृथ्वी के गले में अटक गया और वह बुरी तरह खाँसने लगा।  अवनि ने देखा रो जल्दी से पृथ्वी की तरफ आयी और पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”लो पानी पीओ , तुम्हे खाते टाइम बात नहीं करनी चाहिए थी”

पृथ्वी की ख़ासी रुकने का नाम नहीं ले रही थी , उसका चेहरा लाल पड़ने लगा और आँखों में आँसू भर आये। उसे बुरी हालत में ये देखकर अवनि ने उसकी पीठ थपथपाना शुरू किया जिस से गले में अटका निवाला निकल जाए और ऐसा हुआ भी पृथ्वी  खाँसी रुक गयी और वह सीधे खड़े होकर गहरी सांसे लेने लगा। अवनि ने हाथ में पकड़ी बोतल पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी जिस से वह अपना मुँह धो सके।

बेचारी सुरभि आयी तो यहाँ अपने होने वाले जीजा से मिलने और उलटा उसके साथ ही कांड हो गया। पृथ्वी ने जेब से अपना रूमाल निकाला और मुँह पोछकर अवनि की तरफ देखा। अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव देखकर पृथ्वी ने कहा,”रिलेक्स ! मैं ठीक हूँ”
“आई ऍम सो सॉरी , मेरी वजह से,,,,,,,!!”,सुरभि ने पृथ्वी की तरफ आकर कहा
“इट्स ओके,,,,,,,,,,,,हम शायद पहले भी मिल चुके है”,पृथ्वी ने सुरभि की तरफ देखकर कहा
“हाँ बनारस में और तुमने मुझे नीचे भी गिरा दिया था”,सुरभि ने मुँह बनाकर कहा

“आई ऍम सो सॉरी ! मुझे नहीं पता था ना मैं आपसे दोबारा मिलूंगा,,,,,,,,,,,,वैसे आप कचौरी खायेगी ? अभी कुछ दूर पहले ये बता रही थी कि इस शहर की सबसे पुरानी दूकान है और ये अक्सर सिद्धार्थ के साथ यहाँ खाने आती थी,,,,,,,,,,मैं लेकर आता हूँ”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और सुरभि से ये बात कहते हुए उसने सिद्धार्थ पर उसने कुछ ज्यादा ही जोर दिया था जिसे सुनकर अवनि समझ गयी कि कही न कही उसने पृथ्वी के सामने सिद्धार्थ का जिक्र करके उसे ठेस पहुंचाई है।

सुरभि ने सुना तो उसने घूरकर अवनि को देखा और दबी आवाज में थोड़ा गुस्से से कहा,”तुमने उसके सामने सिद्धार्थ का नाम क्यों लिया ? क्या वो उसके बारे में जानता है ?”
“हम्म्म्म,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“ओह्ह्ह्ह अवनि why ? तुमने उसे सिद्धार्थ के बारे में क्यों बताया यार ? वो इतनी दूर तुमसे मिलने आया है और तुम उसके सामने सिद्धार्थ का गुणगान कर रही हो उसे कितना बुरा लगेगा यार,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा
“मैं चाहती हूँ उसे बुरा लगे,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और ये कहते हुए उसके चेहरे पर उदासी और आँखों में नमी थी।

( क्या महादेव सुनेंगे पृथ्वी की प्रार्थना या अभी बाकि है अवनि के इम्तिहान ? क्या सुरभि को पसंद आएगा पृथ्वी का साथ या वह कर देगी उसे अवनि के लिए रिजेक्ट ? आखिर सिद्धार्थ के नाम पर क्यों चाहती है अवनि पृथ्वी को ठेस पहुँचाना ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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1 comment

Kshmata Chauhan December 1, 2025 - 11:40 am

Avni k muh se bool se nikal gaya Siddharth ka naam Prithvi k samne…lakin wo usko hert to bilkul bhi nhi Krna chahati hai… Avni bhi Prithvi ko pasand krne lagi, but Siddharth k diye dard se wo darti hai ki kahin fir se uska dil na toot jaye…prithvi ko ab Avni ko yakeen dilana hoga fir se pyar m aur khud m… Surbhi ab Avni ko or daant pilayegi… Prithvi sab m bahot innocent hone k sath sath samajdar bhi hai…

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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