Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 77

by Story With Sanjana December 2, 2025
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Pasandida Aurat – 77

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी सुरभि के लिए कचौरी लेने लेने चला गया और सुरभि अवनि के सामने खड़ी उसे घूर रही थी। सुरभि को अवनि पर गुस्सा था आखिर क्यों अवनि अब भी सिद्धार्थ की यादों को अपने दिल से लगाकर बैठी है। सुरभि अवनि से कुछ कह पाती इस से पहले पृथ्वी हाथ में प्लेट लिए वहा चला आया और सुरभि की तरफ बढाकर कहा,”यहाँ के लोग काफी इंट्रेस्टिंग है”
“वो कैसे ?”,सुरभि ने प्लेट लेकर पूछा
“मैंने उस से टिशू माँगा तो उसने मुझे न्यूजपेपर का टुकड़ा दे दिया,,,,,,!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा

सुरभि ने देखा तो पृथ्वी की मुस्कान में खोकर रह गयी , मुस्कुराते हुए पृथ्वी कितना प्यारा और मासूम लग रहा था। सुरभि को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ ? खाओ ना या तुम्हारी भी इस जगह से कोई मेमोरी जुडी है,,,,,,,,!!”
कहते हुए सहसा ही पृथ्वी अवनि की तरफ देखने लगा। अवनि की नजर जब पृथ्वी पर मिली तो उसे एक चुभन का अहसास हुआ , अवनि ने अपनी नजरे घुमा ली दूसरी तरफ देखने लगी। पृथ्वी के सामने सिद्धार्थ की बात करने की तकलीफ अवनि को अब समझ आ रही थी।

अवनि को उदास देखकर पृथ्वी को अच्छा नहीं लगा इसलिए वह अवनि के बगल में आकर खड़ा हो गए और सामने खड़ी सुरभि से बाते करने लगा। सुरभि तो थी ही बातूनी वह कुछ ही देर में पृथ्वी के साथ सहज हो गयी। अवनि बस अपने हाथो को बांधे उन दोनों की बात पर मुस्कुरा रही थी। सुरभि को पृथ्वी पहले ही पसंद था लेकिन आज उस से मिलकर वह उसे और ज्यादा पसंद करने लगी थी। पृथ्वी जैसा अंदर था वैसा ही बाहर था , उसकी बातो में कोई मिलावटीपन नहीं था , उसकी परवाह में कोई दिखावा नहीं था और ना ही सुरभि को उस से कोई नेगेटिव वाइब आयी।

बातो बातो में पृथ्वी ने अपनी ऊँगली से अवनि और अपनी तरफ इशारा करके सुरभि से इशारो इशारो में पूछा कि दोनों साथ में कैसे लगते है ? सुरभि पृथ्वी का इशारा समझ गयी और इशारो इशारो में ही उसने पृथ्वी को जवाब भी दे दिया। पृथ्वी मुस्कुराया और अपना हाथ सीने पर रखकर आँखे मूँद ली।  
कचौरी खाने के बाद सुरभि ने प्लेट रखी और फिर तीनो साइड में चले आये। सुरभि ने पृथ्वी की तरफ हाथ बढ़ाया और कहा,”Nice to meet you मिस्टर पृथ्वी , तुम से मिलकर अच्छा लगा , और उस दिन वाली टक्कर के लिए मैंने तुम्हे माफ़ किया”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और सुरभि से हाथ मिलाकर कहा,”मेहरबानी आपकी,,,,,,,,,मुझे भी आपसे मिलकर अच्छा लगा , कभी अपनी दोस्त को लेकर मुंबई आईये ना”
“दोस्त को लेने तो आपको पुरे ताम-झाम के साथ राजस्थान ही आना पडेगा मिस्टर”,सुरभि ने कहा तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा और अवनि ने सुरभि की बाँह खींचकर दबी आवाज में कहा,”क्या बकवास कर रही हो ?”
“अच्छा मैं अब चलती हूँ मुझे किसी जरुरी काम से जाना है”,सुरभि ने कहा

“तुम कहा जा रही हो ?”,अवनि ने कहा
“मैं D-मार्ट जा रही हूँ , घर का और अपना कुछ पर्सनल सामान लेने,,,,,,,,,वैसे भी मुझे तुम दोनों के बीच कबाब में हड्डी नहीं बनना”,सुरभि ने कहा
“अह्ह्ह्ह ऐसा नहीं , आप चाहो तो हमे ज्वाइन कर सकती है”,अवनि से पहले पृथ्वी ने कहा
“थैंक्यू पृथ्वी ! मैं जरूर रूकती अगर मुझे बाहर जाना नहीं होता,,,,,,फिर मिलेंगे”,कहकर सुरभि अवनि की तरफ झुकी और धीरे से कहा,”अवनि भाव खाना बंद करो , इतना अच्छा लड़का तुम्हारे साथ है वो भी सिर्फ कुछ घंटो के लिए,,,,,,,,,,फिर वो चला जायेगा इसलिए Be nice with him”

अवनि कुछ कहती इस से पहले सुरभि वहा से चली गयी।
अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी और कहा,”सुरभि की किसी बात का बुरा मत मानना एक्चुली उसे बहुत ज्यादा बात करने की आदत है”
“समझदार लड़की है”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी। सुरभि सिर्फ 20 मिनिट उन लोगो के साथ थी और पृथ्वी ने ये पता लगा लिया कि वो समझदार है। अवनि को सुरभि की कही बात याद आयी तो उसने कहा,”तुमने कभी जलेबी रबड़ी खाई है ?”

“अह्ह्ह्हह दोनों अलग अलग तो खायी है,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने याद करके कहा
“चलो तुम्हे साथ खिलाती हूँ”,अवनि ने कहा
“साथ में टेस्ट अजीब नहीं लगता”,अवनि के बगल में चलते हुए पृथ्वी ने पूछा
“खुद ही खाकर देख लेना”,अवनि ने प्यार से कहा तभी बगल से एक गाडी साइड से निकली और पृथ्वी दूसरी तरफ आकर चलने लगा।

अवनि पृथ्वी को लेकर दूसरी दुकान पर पहुंची और यहाँ भी काफी भीड़ थी। उसने दो प्लेट रबड़ी जलेबी ली और एक प्लेट पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी। पृथ्वी ने देखा प्लेट में चार गर्मागर्म जलेबी के ऊपर ठंडी ठंडी रबड़ी थी साथ में ड्रायफ्रूट्स भी थे। ठन्डे और गर्म का एक साथ कॉम्बिनेशन पृथ्वी तो पहली बार ही देख रहा था। अवनि ने उस से खाने का इशारा किया तो पृथ्वी ने एक जलेबी उठायी और रबड़ी के साथ मुंह में रख ली।  
“अहम्म्म्म काफी अच्छा है , ये मैं पहली बार खा रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि मुस्कुरा दी।

जलेबी रबड़ी के बाद अवनि ने पृथ्वी को दाल-पकवान , मिर्ची बड़ा और केसर कुल्फी खिलाई। इतना सब खाकर पृथ्वी का पेट भर चुका था तो उसने अवनि से कहा,”बस अब मैं और नहीं खा पाऊंगा”
“अरे तुम तो इतनी जल्दी थक गए , अभी तो दाल बाटी चूरमा , बेसन गट्टा , केर सांगरी , मलाई घेवर , मोहन हलवा , कलाकंद , मावा कचोरी , मालपुआ और बालूशाही तो बाकि है,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“अरे बस बस मेरा तो नाम सुनकर ही पेट भर गया , फिलहाल मैं कुछ नहीं खा पाउँगा , ये सब लंच के लिए रखते है”,पृथ्वी ने हाथ जोड़कर प्यार से कहा

“हम्म्म्म लंच में तो अभी बहुत टाइम है तब तक क्या करेंगे ?”,अवनि ने पूछा
“ड्राइव पर चले ?”,पृथ्वी ने पूछा
अवनि को याद आया कि पृथ्वी की चौथी डेट एक लॉन्ग ड्राइव थी। उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”हम्म्म ठीक है लेकिन जायेंगे कैसे ?”
“मैं कैब बुक कर लेता हूँ”,पृथ्वी ने अपना फोन निकालकर कहा
“वहा सामने रेंटेड बाइक और स्कूटी मिलती है”,अवनि ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखने लगा। अवनि उसके साथ बाइक पर जाना चाहती है ये सुनकर ही पृथ्वी का दिल ख़ुशी से भर उठा। उसने हामी में सर हिलाया और दोनों आगे बढ़ गए।
पृथ्वी ने रेंट पर बाइक लिया और अवनि को साथ लेकर निकल पड़ा हालाँकि वह इतने ध्यान से बाइक चला रहा था कि किसी भी ब्रेक पर अवनि को ये न लगे कि वह जानबूझकर ऐसा कर रहा है। खाली सड़क पर बाइक दौड़े जा रही थी और दोनों खामोश

अवनि को समझ नहीं आ रहा था पृथ्वी से क्या बात करे और वही पृथ्वी भी समझ नहीं पा रहा था कि वह अवनि से क्या कहे ? पृथ्वी और अवनि के बीच पृथ्वी का बैग था जो कि दोनों के बीच एक दिवार का काम कर रहा था। घटेभर घूमने के बाद बाइक एक पहाड़ी रास्ते पर थी।
“वहा ऊपर कुछ है क्या ?”,पृथ्वी ने पूछा
“सनसेट पॉइंट है,,,,,,,,वहा की चाय भी बहुत अच्छी है ऐसा मेरी कलिग ने मुझे बताया था”,अवनि ने कहा
“वैसे मेरा चाय का पीने का बहुत मन हो रहा है तो चले वहा ?”,पृथ्वी ने कहा वह अवनि के साथ बाइक पर कुछ देर और घूमना चाहता था

“मेरे 12 घण्टे आज के लिए तुम्हारे है तो तुम उन्हें जैसे चाहो वैसे खर्च कर सकते हो”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और बाइक पहाड़ी रास्ते की तरफ बढ़ा दी।
यहाँ अवनि को देखने को मिला पृथ्वी का बाइक चलाने का नया हुनर ! आधे घंटे बाद दोनों ऊपर पहुंचे और पृथ्वी ने देखा सच में वो जगह बहुत खूबसूरत थी और वहा से शहर का नजारा और भी खूबसूरत दिखता था। पृथ्वी ने बाइक साइड में रोकी और दोनों नीचे उतरे। उसने हेलमेट निकालकर बाइक के हेंडल में लटका दिया।

सुहावनी धूप थी लेकिन गर्मी का अहसास दिला रही थी इसलिए पृथ्वी ने अपना जैकेट निकाला और उसे भी बाइक पर रख दिया। टी स्टॉल सड़क के उस पार ठीक सामने था इसलिए पृथ्वी ने अवनि से पास बनी बेंच पर बैठने को कहा और खुद चाय लेने चला गया।
बाइक के ठीक आगे एक बेंच लगी थी अवनि वहा आ बैठी। पृथ्वी का बैग भी उसने साइड में रख दिया और सामने टी स्टॉल की तरफ देखने लगी। अपनी बारी का इन्तजार करता पृथ्वी वहा खड़ा कितना प्यारा लग रहा था। अवनि खाली आँखों से उसे देखती रही।

सफ़ेद टीशर्ट जो आज सुबह ही उसने पृथ्वी के लिए खरीदी थी उस पर कितनी जच रही थी। पृथ्वी ने अपने बालों में हाथ घुमाते हुए जैसे ही अवनि की तरफ देखा अवनि ने एकदम से गर्दन घुमा ली। कही पृथ्वी उसे अपनी तरफ देखते हुए ना देख ले। पृथ्वी ने दो गिलास चाय ली और अवनि की तरफ चला आया। उसने एक गिलास अवनि की तरफ बढ़ाया और दूसरा गिलास खुद लेकर अवनि से कुछ दूरी बनाकर बेंच पर आ बैठा।

दोनों फिर खामोश , क्या कहे ? कैसे बात की शुरुआत करे ? दोनों ही नहीं समझ पा रहे थे और आख़िरकार अवनि ने कहा,”तुम सच में पागल हो , मुझसे मिलने इतनी दूर चले आये”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा और अवनि की तरफ देखकर कहा,”अगर नहीं आता तो आपके चेहरे पर ये ख़ुशी देखने को नहीं मिलती”
अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी की तरफ देखने लगी अवनि का यू देखना पृथ्वी की धड़कने बढ़ा देता था इसलिए अवनि से नजरे हटाई और कहा,”वैसे भी आपने पहली बार मुझसे कुछ कहा था , मैं कैसे टाल सकता हूँ”

“ऐसी बात नहीं है पृथ्वी , तुम मुझे ना बोल सकते हो,,,,,,,,,मुझे अपने लिए इतना ख़ास भी मत बनाओ पृथ्वी कि मुझे खुद पर गुरुर हो जाये”,अवनि ने कहा
“मैडम जी ! खुद पर गुरुर करने के लिए आपको मेरी या किसी मर्द की जरूरत नहीं , आप पहले ही अपनी जिंदगी में इतनी सफल है कि आपका खुद पर गुरुर करना बनता है,,,,,,,,,!”,पृथ्वी ने कहा
“तुम मेरी कहानियो की बात कर रहे हो ?”,अवनि ने अंदाजा लगाया

“आपने सही समझा , पता है कुछ वक्त पहले तक मैं बहुत बोरिंग लड़का था। सुबह उठना , तैयार होना , नाश्ता करना और ऑफिस चले जाना , वह दिनभर काम करना और शाम को ट्रेन पकड़कर वापस घर आ जाना , घर आकर थोड़ा फॅमिली को टाइम देना , खाना खाना और सो जाना लेकिन जब से आप और आपकी लिखी कहानिया मेरी जिंदगी में आयी है मैं बदल गया हूँ मैडम जी,,,,,,,,,,,अब मेरी बोरिंग सी लाइफ में एक हिस्सा आपकी कहानियो का भी है जो मेरी लाइफ को इंट्रेस्टिंग बनाता है।

मैं कभी किताबे नहीं पढता था , स्कूल कॉलेज में भी नहीं पढ़ी लेकिन आपकी उस एक किताब को मैंने आज भी सम्हालकर रखा है जो मुझे नकुल के बैग से मिली थी”,पृथ्वी ने सामने देखते हुए कहा
“मेरी किताब ?”,अवनि ने हैरानी से पूछा क्योकि आज से पहले पृथ्वी ने कभी उसके सामने किताब का जिक्र किया ही नहीं था
“हाँ मेरे बैग में है , मैं उसे अपने साथ लेकर आया हूँ मुझे उस पर आपका ऑटोग्राफ चाहिए , दोस्ती को अगर साइड में रख दे मैं आपका बहुत बड़ा फैन भी हूँ”,पृथ्वी ने खाली गिलास साइड में रखकर अपना बैग उठाते हुए कहा

उसने बैग से किताब निकाली और अवनि की तरफ बढ़ा दी। अवनि भी अब तक अपनी चाय खत्म कर चुकी थी इसलिए उसने किताब को अपने हाथ में लिया और पृथ्वी से पेन देने का इशारा किया। पृथ्वी बैग में पेन ढूंढने लगा। अवनि ने देखा किताब जगह जगह से चिपकाई हुई है लेकिन सही हालत में है। पृथ्वी ने पेन अवनि की तरफ बढ़ा दिया और किताब की हालत देखकर कहा,”अह्ह्ह एक्चुली वो मेरा छोटा भाई है न लकी , उससे छीनते वक्त ये थोड़ी फट गयी ,, मैंने पूरी रात बैठकर इसके सारे पन्नो को चिपकाया हैं”

“तुम दूसरी भी खरीद सकते थे”,अवनि ने कहा
“हाँ खरीद तो सकता था लेकिन जो अहसास इस किताब से जुड़े है वो दूसरी किताब में नहीं मिलते , इसे पढ़ने के बाद ही तो मुझे आपको जानने का मन हुआ और तब से लेकर आज तक मैंने इसे बहुत सम्हालकर रखा है और आगे भी रखूंगा”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि की आँखों में उदासी तैर गयी और सहसा ही सिद्धार्थ की कही बात उसके जहन में कौंध गयी “अह्ह्ह नहीं मैंने उसे नहीं पढ़ा , मैं तुम्हारी लिखी किताब को फुर्सत से पढ़ना चाहता हूँ अवनि ताकि तुम्हे उसका रिव्यू दे सकू”

सिद्धार्थ की कही बात याद आते ही अवनि को चुभन का अहसास हुआ। एक सिद्धार्थ था जिसे अवनि ने खुद अपने हाथो अपनी किताब सौंपी थी , जिसने आज तक उस किताब को खोलकर भी नहीं देखा और दूसरी तरफ पृथ्वी था जो अवनि की किताब को सम्हाले हुए था इतना कि उसके फट जाने पर दूसरी खरीदने के बजाय उसे जोड़ना उसे ज्यादा बेहतर लगा।

अवनि की आँखों में नमी तैर गयी और पृथ्वी उस नमी को देख न ले ये सोचकर अवनि ने किताब को खोला और उसके पहले पन्ने पर मशरूर लेखिका “अमृता प्रीतम” जी की दो लाइन लिखी और उनके नाम के साथ पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया।
पृथ्वी ने किताब ली और अवनि की लिखी लाइन देखी
“अजनबी तुम मुझे जिंदगी की शाम में क्यों मिले ? मिलना था तो दोपहर में मिलते,,,,,,,,,,,!!”

शब्द कम थे लेकिन बात बहुत गहरी थी , अवनि जो कि “अमृता प्रीतम” की लिखी कविताओं की प्रशंसक थी उसने पृथ्वी के लिए ये दो लाइन लिखी जो लाइन कम अवनि के मन का हाल था। पृथ्वी ने पढ़ा और मुस्कुराकर कहा,”अपना नाम लिखने के बजाय आपने किसी और की लाइन और उनका नाम क्यों लिखा ?”
अवनि ने सजल आँखों से पृथ्वी को देखा और कहा,”क्योकि मैं नहीं चाहती तुम कभी किसी अमृता के प्रेम में इमरोज़ बनो”
“मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“कभी वक्त मिले तो “अमृता प्रीतम जी” को पढ़ना , मेरी बात शायद बेहतर समझ पाओ”,अवनि ने कहा
“मैडम जी ! मैंने सिर्फ आपको पढ़ा है और मैं फैसला कर चूका हूँ कि जिंदगीभर आपको ही पढूंगा,,,,,,क्योकि आपने जो लिखा है वो सिर्फ आपकी कल्पना तो नहीं हो सकती,,,,,,,कही न कही कुछ न कुछ तो सच्चाई होगी उनमे,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

पृथ्वी को ऐसी बाते करते देखकर अवनि खामोश हो गयी , पृथ्वी इतनी गंभीर बातें भी करता है अवनि पहली बार सुन रही थी। अवनि को खोया हुआ देखकर पृथ्वी ने कहा,”इतना मत सोचिये मैं बस कभी कभी ऐसी बकवास कर देता हूँ”
अवनि फीका सा मुस्कुराई और कहा,”तुम्हे बाइक चलाना बहुत पसंद है ना ?”
“हम्म्म ! मैं अपनी ड्रीम बाइक लेना चाहता हूँ लेकिन कभी कभी जिम्मेदारियां सपनो भारी पड़ जाती है और वैसे भी मुझे ट्रेन में सफर करना अच्छा लगता है,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“महादेव ने चाहा तो जल्दी ही तुम्हारा हर सपना पूरा हो जायेगा”,अवनि ने उठते हुए कहा
“महादेव ही तो नहीं चाह रहे , वरना आज शाम की ट्रेन से हम दोनों साथ साथ मुंबई जा रहे होते,,,,,,!!”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया
“तुमने कुछ कहा ?”,अवनि ने पूछा तो पृथ्वी ने ना में गर्दन हिला दी और आसमान की तरफ देखा क्योकि उसने जो कहा वो अवनि भले ही ना सुन पाए लेकिन महादेव सुन ले तो कितना अच्छा हो।

दोपहर के 2 बज रहे थे और दोनों को भूख भी लगने लगी थी इसलिए अवनि ने चलने को कहा। दोनों पहाड़ी से नीचे आये और बाइक वापस देकर ऑटो से चल पड़े। अवनि पृथ्वी को लेकर एक बहुत ही प्यारी सी जगह आयी। ये राजस्थानी रेस्त्रो था जिसका इंट्रेरियर बिल्कुल गांव जैसी फीलिंग दे रहा था और यहाँ की वाइब बहुत अच्छी थी। पृथ्वी तो ये सब पहली बार देख रहा था और राजस्थान का कल्चर भी वह पहली बार ही देख रहा था क्योकि आज से पहले वह राजस्थान कभी नहीं आया था।

पृथ्वी ने देखा इनडोर में नीचे बैठने की जगह थी और आउटडोर में लकड़ी और रस्सी से बने मचान जिन के बीचो बीच टेबल जैसा हिस्सा था ताकि उस पर खाना परोसा जा सके। खूबसूरत डिजाइन से साथ इस रेस्त्रो को तैयार किया गया था और वह पानी का कुआ भी बना था जैसा गाँवो में होता है।
वहा काफी लोग पहले से खाना खा रहे थे। दोनों अंदर चले आये , स्टाफ ने अवनि और पृथ्वी को बैठने को जगह दी और अवनि ने मेनू पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया

“जो आप खिलाये मैं खा लूंगा”,पृथ्वी ने मेनू कार्ड वापस अवनि की तरफ करके कहा
“करेला चलेगा ?”,अवनि ने शरारत से पूछा
करेले का नाम सुनते ही पृथ्वी का मुँह बन गया और उसने कहा,”आप चाहे तो मैं आपसे चार थप्पड़ खा लूंगा लेकिन करेला नहीं प्लीज,,,,,,,,,आप कभी अपने हाथ से बनाकर खिलाएगी तो मैं मना नहीं करूंगा”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और स्टाफ से दो राजस्थानी थाली लगाने को कहा

“सोच क्या है रहा है पृथ्वी , बोल बोल बोल न”,पृथ्वी के दिल से आवाज आयी
“ए तू मत बोलना पिट जाएगा”,दिमाग ने कहा
“अरे बोल पिट भी गया तो क्या हुआ वो कौनसा गैर है अपनी ही तो है”,दिल ने कहा
“अपनी नहीं वो अवनि है , ए तू इसकी मत सुन उसको बुरा लगा तो बिना खाये जाना पड़ेगा यहाँ से”,दिमाग ने कहा
“भाई बोल दे वैसे भी पता नहीं फिर कब ये मौका मिले”,दिल ने पृथ्वी को बहलाया

“मत बोल”,दिमाग ने कहा
“ए तू इसको घास चरने भेज और बोल , बोल न”,दिल ने थोड़ा गुस्से से कहा और पृथ्वी के मुँह से निकला,”अह्ह्ह अवनि”
पहली बार पृथ्वी के मुँह से अवनि का नाम निकला और अवनि ने भी हैरानी से उसे देखा तो स्टाफ रुक गया और पृथ्वी ने कहा,”क्या हम दोनों एक प्लेट में खा सकते है ?”
अवनि कुछ देर खामोश रही और फिर कहा,”इतनी सी बात बोलने के लिए तुम इतना सोच रहे थे,,,,,,,,खा सकते है”
पृथ्वी ने सुना तो राहत की सांस ली और अवनि ने स्टाफ से कहा,”भैया ! खाना दो लोगो के लिए ही लाना है बस एक प्लेट में परोसना है”

“जी मेम”,स्टाफ ने कहा और वहा से चला गया , पृथ्वी तो ये सोचकर ही खुश हो रहा था कि उसे अवनि के साथ खाना खाने को मिलेगा वो भी एक थाली में और वही पृथ्वी को देखते हुए अवनि के जहन में आयी उसकी की लिखी बात जो उसने किसी रोज अपनी कहानी में लिखी थी
“पसंदीदा औरत के सामने सख्त रहने वाला मर्द भी बच्चो सा मासूम बन जाता है”

( क्या अवनि को नजर आ रहा है सिद्धार्थ और पृथ्वी में फर्क ? क्या पृथ्वी जाहिर कर पायेगा अवनि के सामने अपनी भावनाये ? क्या अवनि के साथ एक थाली में खाते हुए पृथ्वी चाहता है खाना अवनि के हाथ से एक निवाला ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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