Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat

Pasandida Aurat – 78

by Story With Sanjana December 3, 2025
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Pasandida Aurat – 78

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि ने अपने और पृथ्वी के लिए खाना आर्डर किया और थोड़ी देर बाद खाने की थाली पृथ्वी और अवनि के बीच थी। पृथ्वी ने देखा थाली में बहुत सारा खाना परोसा गया है। उसे उलझन में देखकर अवनि ने उसे बताया कि थाली में दाल , दो तरह का चूरमा , सादा बाटी , मसाला बाटी , कढ़ी , गट्टे की सब्जी , कैर सांगरी की सब्जी , लहसुन की चटनी , घेवर , खीर , जीरा आलू के साथ चपाती और पूरी थी
“इतना सारा खाना,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ ! तुम खा लोगे न ?”,अवनि ने पूछा

पृथ्वी ने शर्ट की बाजु ऊपर चढ़ाते हुए कहा,”खा लूंगा अभी आपने मुझे ठीक से जाना नहीं है , मैं बहुत बड़ा फूडी हूँ”
“तो फिर शुरू करो”,अवनि ने कहा
“हाँ लेकिन इसे खाना कैसे है ?”,पृथ्वी ने बाटी हाथ में उठाकर अनजान बनते हुए कहा जबकि उसे सब पहले से पता था।
अवनि ने बाटी का एक निवाला तोडा उस पर दाल डाली उसे चूरकर एक निवाला बनाते हुए पृथ्वी को समझाया , पृथ्वी इस इंतजार में था कि अवनि अब ये निवाला उसे खिलाएगी लेकिन अवनि ने तो वह निवाला खुद खा लिया और बेचारा

पृथ्वी उसे देखता ही रह गया। पृथ्वी ने अवनि को देखा और मन ही मन कहा,”हाह ! इतनी रोमांटिक कहानिया लिखती है लेकिन असल जिंदगी में तो इसे रोमांस का R भी नहीं पता , तुझे बहुत मेहनत करनी पड़ेगी पृथ्वी,,,,,,,,,!!”
“क्या हुआ खाओ ना ?”,पृथ्वी को खोया देखकर अवनि ने कहा
“हाँ खाता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और फिर अवनि से बाते करते हुए खाना खाने लगा। पृथ्वी को खाना अच्छा लगा लेकिन उसे बहुत ज्यादा तीखा खाने की आदत थी और ये थोड़ा नार्मल था।

उसने देखा सामने प्लेट में कुछ हरी मिर्च रखी है तो उसने उसमे से एक उठायी और जैसे ही खाने लगा अवनि ने कहा,”अरे ये मत खाओ ! ये बहुत तीखी है”
“मैडम जी ! मैं मुंबई से हूँ वहा ये सब नार्मल है , हाँ आप मत खाना आप झेल नहीं पायेगी”,पृथ्वी ने हसंते हुए कहा
अवनि ने सुना तो उसे थोड़ा बुरा लगा उसने प्लेट से मिर्च उठायी और सीधा ही चबाकर खाने लगी , पृथ्वी ने अभी तक नहीं खायी थी इसलिए उसे नहीं पता था मिर्च तीखी है या नहीं , वह बस अवनि को देख रहा था।

गुस्से में आकर अवनि ने एक के बाद एक मिर्च खाना शुरू कर दिया उसकी आँखे आँसुओ से भर गयी और चेहरा लाल हो गया पृथ्वी ने जब देखा तो अवनि का हाथ पकड़कर उसे रोकते हुए कहा,”छोड़िये इसे ये क्या कर रही है आप ?”
अवनि ने नम आँखों से पृथ्वी को देखा , उसका मुँह जल रहा था , आँखे लाल और चेहरा भी लाल , आँसू किसी भी वक्त गालों पर लुढ़क सकते थे। पृथ्वी ने वही रखा पानी का गिलास उठाया और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”पीजिये इसे”

अवनि पृथ्वी की तरफ देखने लगी तो इस बार पृथ्वी ने अवनि को थोड़ी डांट लगाकर कहा,”पीजिये इसे ! मैंने मजाक में कहा और आपने इतनी सारी मिर्च खा भी ली,,,,,,,,सच में पागल है आप , लीजिये पानी पीजिये”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने गिलास लिया और एक साँस में पानी पी लिया , उसका मुँह , होंठ सब जल रहे थे। पृथ्वी बस ख़ामोशी से उसे देख रहा था , पानी पीकर भी अवनि को शांति नहीं मिली। पृथ्वी ने पास ही पड़ी मिठाई से एक टुकड़ा उठाकर अवनि की तरफ बढ़ा दिया तो अवनि ने उसे देखा और ना जाने क्यों उस वक्त अवनि को अजीब सी घुटन का अहसास हुआ और वह उठकर वहा से चली गयी।

पृथ्वी ने मिठाई नीचे रखी और अवनि के पीछे बाहर आया तो देखा अवनि अपनी कमर पकडे आसमान में देखकर सी सी करते हुए गहरी सांसे ले रही है और ये देखकर पृथ्वी को तकलीफ होने लगी। वह अवनि के पास आया उसका हाथ पकड़ा और उसे लेकर एक बेंच के पास आया और उसे वही बैठने को कहा। उसने वेटर से शहद लाने को कहा। कुछ देर में वेटर शहद लेकर आया तो पृथ्वी ने अवनि से वह खाने को कहा। अवनि ने दो चार चम्मच शहद खाया और अब उसकी जलन कुछ कम हुई।

पृथ्वी ने उसके हाथ से शहद की कटोरी लेकर वेटर को वापस दे दी और खुद कुछ दूरी बनाकर उसके बगल में आ बैठा। अवनि खामोश थी और पृथ्वी भी , अवनि के मन में क्या रहा था ये तो पृथ्वी नहीं जानता था लेकिन अभी कुछ देर पहले अवनि ने जो किया वह उसकी वजह से बिल्कुल नहीं था ये बात भी पृथ्वी जान गया इसलिए कहा,”मैं जानता हूँ ये गुस्सा मेरे मजाक की वजह से बिल्कुल नहीं था , क्या कुछ ऐसा है जो आपको अंदर ही अंदर परेशान कर रहा है ?”

अवनि ने सुना तो नम आँखों से हैरानी के साथ पृथ्वी को देखने लगी , वह हैरान थी कि आखिर पृथ्वी इतनी आसानी से उसके मन की बात कैसे जान सकता है ? अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी उसकी तरफ पलटा और कहा,”खुद को तकलीफ देकर क्या आप सच में उस पास्ट को भुला सकती है जो महज आपकी जिंदगी में एक हादसा था , जिसका अब कोई अस्तित्व तक नहीं है। मैं जानता हूँ भूलना इतना आसान नहीं होता लेकिन हम जिंदगी भर खुद को एक हादसे से बांधकर तो नहीं रख सकते ना , ना ही जिंदगीभर उसका बोझ ढो सकते है।

मैं ये नहीं पूछूंगा क्या हुआ था ? पर हो सकता है बीते हुए कल में कभी न कभी आपने ऐसे इंसान के साथ बैठकर खाना खाया होगा जिसके साथ खाना खाते हुए आपको घुटन का अहसास हुआ हो”
अवनि अब और ज्यादा हैरान थी उसने धीरे से कहा,”तुम किसी का दिमाग कैसे पढ़ सकते हो ?”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और धीरे से कहा,”जब हम किसी के दर्द से जुड़ जाते है तो हम वो सब महसूस करने लगते है जो सामने वाला कर रहा है।

मैं आपका दर्द महसूस कर सकता हूँ मैडम जी , आपने तीखा मुझे गलत साबित करने के लिए नहीं खाया बल्कि अपने अंदर की घुटन कम करने के लिए खाया क्योकि पहले भी आपको कोई इस तरह से टोक चुका है फर्क सिर्फ ये है कि वो बस मजाक में नहीं था”

अवनि ने गहरी साँस ली और कहा,”कभी कभी हम सामने वाले की कड़वी बातो को भी सिर्फ इसलिए नजरअंदाज कर देते है क्योकि हम उनका असली चेहरा नहीं देखना चाहते,,,,,,,,,हम आजीवन इस भरम में जीना स्वीकार कर लेते है कि हमारे आस पास जो घट रहा है वो प्रेम का ही हिस्सा है और ऐसा करते हुए ना जाने कितनी ही बार खुद को आहत करते है”
“आज के बाद नहीं करना है,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कठोरता से लेकिन धीमे स्वर में कहा
“हक़ जाता रहे हो ?”,अवनि ने पूछा

पृथ्वी ने सुना तो अवनि की आँखों में देखने लगा और कुछ देर खामोश रहने के बाद कहा,”हक़ ही तो नहीं जता सकता मैडम जी , हक़ होता तो मजाल है आपकी आँख से एक आँसू गिरने देता,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी , अवनि का यू एकटक देखना पृथ्वी के दिल को बैचैन कर गया इसलिए उसने सामने देखा और उदासी भरे स्वर में कहा,”हो सकता है मेरी ये बात किसी हिंदी फिल्म का कोई घिसा पिटा डायलॉग लगे लेकिन , लेकिन आपके आँसू बहुत कीमती है मैडम जी , इन्हे ऐसे इंसान के लिए तो बिल्कुल मत बहना जिन्हे इनकी कदर ना हो”

अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में फिर आँसू भर आये और मन भारी हो गया। उसका हाथ सहसा ही बगल में बैठे पृथ्वी के हाथ पर चला गया और उसने धीरे से कहा,”मैं रोने से डरती हु पृथ्वी इसलिए नहीं कि जब मैं रोउंगी तो मेरे आँसू पोछने वाला कोई नहीं होगा बल्कि इसलिए कि अगर मै रोई तो मुझे हर वो घटना याद आएगी जहा मुझे रोना चाहिए था और मैंने खुद को रोक लिया,,,,,,,,!!”
“आप रो सकती है,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपना दिल मजबूत करके कहा

अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा , पृथ्वी ने अवनि को देखा और कहा,”हाँ ! आप रो सकती है लेकिन एक शर्त पर कि इसके बाद आप दोबारा उन घटनाओ को याद करके नहीं रोयेंगी जो आपके जीवन घट चुकी है,,,,,,,,,आप रो सकती है क्योकि मैं आपके साथ हूँ और मैं आपके आँसू बिल्कुल नहीं पोछना चाहूंगा बजाय इसके कि वो बह जाये,,,,,,,आप रो सकती है क्योकि आप जिंदगीभर किसी दर्द को अपनी आँखों में आँसुओ के रूप में जमा नहीं रख सकती , और आप रो सकती है क्योकि आप एक इंसान है,,,,,,,,!!”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि का मन पहले से भी ज्यादा भारी हो गया , रोना उसके गले तक आ कर ठहर गया , आँखों में आयी नमी मोटे मोटे आँसुओ में बदल गयी और चेहरा उदासी से भर गया। उसने देखा वह पृथ्वी के साथ जहा बैठी थी वह कितने ही लोग मौजूद थे , कुछ घूम रहे थे , कुछ खाना खा रहे थे , कुछ पास ही बेंच पर बैठे थे और पृथ्वी सबके सामने उसे रोने के लिए कह रहा था।

अवनि को वो रात याद आ गयी जब वह सिद्धार्थ के बर्ताव से बुरी तरह हर्ट होकर रोने लगी थी और सिद्धार्थ ने उस से कहा था कि वह सबके सामने रोकर उसका तमाशा न बनाये। वह पल याद आते ही अवनि का मन और दुखी हो गया और उसने रोआँसा होकर कहा,”सब मुझे रोते हुए देखेंगे तो तुम्हे यहाँ मेरे साथ बैठकर अजीब नहीं लगेगा ?”
पृथ्वी ने सुना तो अपने हाथ की तरफ देखा जिस पर अवनि का हाथ अभी तक था ,

उसने अपने हाथ को धीरे से हटाया और अवनि के हाथ पर रखकर कहा,”मैं इन लोगो को नहीं जानता , ना ही मुझे इस बात से को फर्क पड़ता है कि ये लोग क्या सोचेंगे ? मैं आपको जानता हूँ और बस इतना जानता हूँ कि आपको अब खुद को इस दर्द से आजाद कर देना चाहिए”
कहते हुए पृथ्वी के हाथ की पकड़ अवनि के हाथ पर थोड़ी और मजबूत हो गयी ताकि अवनि ये महसूस कर सके कि पृथ्वी उसके साथ है। पृथ्वी की बात सुनकर अवनि की आँखों में भरे आँसू बह गए और वह रोने लगी।

एक बार आँसू बहने शुरू हुए तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया इस बीच पृथ्वी ने अवनि की तरफ एक बार भी नहीं देखा वह बस ख़ामोशी से अपनी दाँत भींचे सामने देख रहा था क्योकि इस वक्त उस पर की गुजर रही थी ये तो सिर्फ वही जानता था। अवनि की आँखों से गिरता एक एक आँसू उसके दिल में किसी सुई सा चुभ रहा था , एक एक सिसकी उसे अपने कानों में गर्म लावे सी महसूस हो रही थी और इसी के साथ रोते हुए अवनि के हाथ का वो काँपना पृथ्वी को रह रह कर उस दर्द का अहसास दिला रहा था जो अब तक अवनि को सबसे मिला था।  

रोते रोते अवनि की नाक भी बहने लगी पृथ्वी ने जब ये महसूस किया तो अवनि की तरफ तो नहीं देखा लेकिन उसका हाथ छोड़कर अपने हाथ की बाजु उसके सामने कर दी। अवनि ने अपना नाक पृथ्वी के शर्ट की बाजु पर पोछ दिया तो पृथ्वी हल्का सा मुस्कुरा उठा। उसे खुद पर ही हंसी आने लगी थी कि वह अवनि के प्यार में सच में कितना बदल गया था। पृथ्वी की सलाह काम आयी , रोने के बाद अवनि को अब काफी हल्का महसूस हो रहा था ,

उसने नम आँखो से देखा वहा मौजूद लोग अब भी उसे ही देख रहे थे , फिर उसने पृथ्वी की तरफ देखा जिसके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं थी। अवनि को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”अब ठीक लग रहा है आपको ?”
“हम्म्म्म थैंक्यू”,अवनि ने धीरे से कहा
“अब ये थैंक्यू किसलिए ?”,पृथ्वी ने पूछा

“बस थैंक्यू”,अवनि ने कहा वह वजह बताकर इस थैंक्यू को आम करना नहीं चाहती थी।
अवनि की नम आँखों को देखकर पृथ्वी को चुभन का अहसास हुआ और उसने उठकर कहा,”आप चलकर मुँह धोइये , मैं बिल पे करके आया”
अवनि पृथ्वी को रोकती इस से पहले पृथ्वी वहा से चला गया। अवनि भी बाहर बने वशबेसिन की तरफ मुँह धोने चली आयी।

अंदर आकर पृथ्वी ने बिल पे किया और फिर अंदर बने वाशरूम में चला आया। शीशे के सामने खड़ा पृथ्वी खुद को घूर रहा था और कुछ देर बाद गुस्से से धीमे स्वर में कहा,”वो तुम्हारे सामने रो रही थी और तुम चुपचाप बैठे थे , तुमने उसे चुप करवाना भी जरुरी नहीं समझा,,,,,,,,,,कितने घटिया होंगे वो लोग जिन्होंने अवनि को इतना दर्द दिया कि वह रोने से भी डरती है क्या वह सच में ऐसी जिंदगी डिजर्व करती है,,,,,,,,,,,अरे उसे तो खुश रहने का पूरा हक़ है फिर उसकी जिंदगी में ये सब तकलीफे क्यों ?,,,,,,,,,,!!”

कहते हुए पृथ्वी ने दोनों हाथो को प्लेटफॉर्म पर रखा और अपनी गर्दन झुका ली , वह अवनि के सामने खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहता था लेकिन अकेले में उसे अवनि का रोना याद आया और सहसा ही उसकी आँखों में भी आँसू भर आये। आँखों से आँसू टप तप करके प्लेटफॉर्म पर गिरने लगे। कुछ देर पहले जो दर्द अवनि महसूस कर रही थी अब वही दर्द पृथ्वी को महसूस हो रहा था।

पृथ्वी कुछ देर वैसे ही खड़ा रहा और जब उसका मन कुछ हल्का हुआ तो उसने अपना मुंह धोया और रूमाल से साफ कर बाहर चला आया। बाहर अवनि उसका इंतजार कर रही थी उसने अवनि के सामने आकर कहा,”चले ?”
अवनि की नजरे पृथ्वी की आँखों पर चली गयी जो कुछ कुछ लाल और उदास नजर आ रही थी और उसने कहा,”तुम रोकर आये हो ?”
“हहहहह अहह नहीं”,पृथ्वी ने अवनि ने नजरे चुराकर कहा
“फिर तुम्हारी आँखे लाल क्यों है ?”,अवनि ने पूछा

“अच्छा वो , वो आँख में कुछ गिर गया था”,पृथ्वी ने जान बूझकर अपनी आँख मसलते हुए कहा जिस से अवनि को शक ना हो
अवनि उसके थोड़ा करीब आयी और कहा,”दिखाओ मुझे,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि का एकदम से यु करीब आना पृथ्वी की धड़कने बढ़ा गया। अवनि ने उसकी आँख देखी जिसमे कोई कचरा नहीं था फिर भी उसे आराम मिले इसलिए उसने धीरे से उसकी आँख में फूंक मार दी।

अवनि और पृथ्वी के चेहरे के बीच मुश्किल से एक इंच का फासला होगा और इस पर भी पृथ्वी अपनी साँसे रोक के खड़ा था , गनीमत था दोनों साइड में थे और यहाँ उन्हें देखने वाला कोई नहीं था। अवनि को अपने इतने करीब पाकर पृथ्वी ने धीरे से कहा,”अगर आप मेरे इतना ही करीब रही तो मुझे आपसे फिर से प्यार हो जायेगा”
अवनि ने सुना तो एकदम से पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”I think हमे अब चलना चाहिए”
“हम्म्म,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और दोनों वहा से बाहर चले आये।  

अवनि ने ऑटो बुक किया और दोनों उसमे आ बैठे। अवनि का मन अब बहुत शांत था और पृथ्वी का साथ अब उसे अच्छा भी लग रहा था। अब कुछ घंटे और आखरी डेट बची थी और इसी के साथ पृथ्वी का मन कुछ कुछ उदास होने लगा क्योकि अब तक अवनि ने उसके प्यार को स्वीकार नहीं किया था और पृथ्वी को वापस जाना था। रास्तेभर दोनों में बहुत थोड़ी बाते हुयी। दोनों सिरोही मार्किट पहुंचे और एक जगह आकर ऑटो रुक गया क्योकि सामने से कोई बारात गुजर रही थी और इस वजह से जाम लगा था।

पृथ्वी जो अब तक खामोश था एकदम से अवनि की तरफ पलटा और कहा,”आपने कभी किसी अनजान बारात में डांस किया है ?”
“क्या ?”, अवनि ने हैरानी से कहा उसे कुछ समझ आता इस से पहले उसने ऑटो वाले को पैसे दिए और अवनि का हाथ पकड़कर ऑटो से नीचे उतर गया और उसे अपने साथ लेकर बारात की तरफ बढ़ गया जहा कुछ लोग नाच रहे थे।

“पृथ्वी क्या कर रहे हो ? ये लोग हमे नहीं जानते है वापस चलो”,अवनि ने कहा
“मैडम जी ! आप ना डरती बहुत है , ये लोग हमे नहीं जानते इसलिए तो मैं आपको यहाँ लेकर आया हूँ। वैसे भी जिंदगी में कभी कभी वो काम कर लेना चाहिए जो हमने कभी न करने का सोचा हो,,,,,,,,,चलिए मजा आएगा”,पृथ्वी ने कहा और अवनि को साथ लेकर सबके बीच चला आया और डांस करने लगा।

वहा मौजूद लोगो ने दोनों पर इतना ध्यान नहीं दिया सब अपने में मस्त थे। अवनि ने देखा पृथ्वी तो पूरा उन लोगो से घुल मिल गया है और डांस कर रहा है तो वह मुस्कुराते हुए उसे देखने लगी। हँसता मुस्कुराता पृथ्वी बहुत ही प्यारा लग रहा था कि तभी किसी ने गाना बदल दिया और पृथ्वी ने अवनि के बगल में आकर उसके कंधे को अपने कंधे से टकराकर गाते हुए उसकी तरफ देखा
“गम हो या कोई ख़ुशी , पुरवा का झोंका है
इक आये इक जाएगा , क्यों दिल को रोका है ?”

अवनि ने महसूस किया कि गाने के बहाने पृथ्वी उस से सवाल कर रहा है और ये बात पृथ्वी की आँखे बया कर रही थी। अवनि ने भी उदास चेहरे के साथ गाने की लाइन गुनगुनाते हुए पृथ्वी के सवाल का जवाब दिया
“इस दिल को हमने नहीं , हमे दिल ने रोका है
कोई बता जरा , क्या सच क्या धोखा है ?”

इतना सुनकर पृथ्वी भला कहा पीछे रहने वाला था वह अवनि के सामने आया और उसके झुके सर को ठुड्डी पकड़कर ऊपर उठाते हुए कहा
“ये दुनिया सारी  , बड़ी है प्यारी , यही इक सच है , ये रंग बड़े सुहाने है।
गाते हुए वह पीछे गया और वह मौजूद लोगो के साथ डांस करते हुए सबके साथ गाने लगा
“हम तेरे दीवाने है , हम आशिक़ मस्ताने है”

अवनि की मुस्कुराहट वापस लौट आयी क्योकि अब सिर्फ पृथ्वी ही नहीं बल्कि उसके खड़े सभी लड़के अवनि की तरफ देखकर ही गा रहे थे और अवनि को नजर आ रहा था बस हँसता मुस्कुराता पृथ्वी , हवा में उड़ते उसके बाल , चमकती आँखे और होंठो की मुस्कुराहट

( क्या अवनि निकाल पायेगी अपने दिल से सिद्धार्थ की कड़वी यादो को ? क्या मुंबई वापस जाने से पहले पृथ्वी कर पायेगा अवनि से अपने प्यार का इजहार ? क्या अवनि को भी होने लगा है पृथ्वी से प्यार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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मैं कोई Writer नहीं , बल्कि एक चोर हु जो लोगो का समय चुराती है !

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3 comments

Shayna khana December 3, 2025 - 12:28 pm

Amezing part.And next

Reply
Kshmata Chauhan December 3, 2025 - 5:27 pm

Jab koi positive insaan hamari zindagi m aata hai to zindagi kitni achchi ho jati hai…wahi abhi Avni k sath ho rha hai…jab se wo 12 ghanto k liye Prithvi k sath hai to kitni khush hai…wo Prithvi k sath itni comfortable hai ki wo rone k baad uske shirt k baju se naak bhi puch rhi hai…ab to Avni ko samaj Jana chahiye ki uska jo kuch bhi hai, wo sirf Prithvi hai…aur koi nhi… Prithvi k sath 12 ghante bitane k sath bhi agar Avni Prithvi ko haan nhi bolti hai aur Siddharth k sath uski compare krti hai to wo Prithvi ki insult k sath hee ek achche jeevansathi ko koo degi

Reply
Chaitali amdavadi December 8, 2025 - 2:26 pm

Jab koy kahani apke dil se jud jati hai to us kahani ke ahesas bhi apse jud jate hai or ap use jeene lag jate ho jese kahani ke patro ke dukh or khusi ko ap bhi mahsus karne lag jate ho
Best part hi ye ab tak ki kahani ka

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अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

अकेली लड़की in जयपुर" को एक कहानी ना कहकर "मेरा अनुभव" कहा जाए तो बेहतर होगा। एक ऐसी लड़की की कहानी जो अपने हुनर और जरूरतों के बीच पिसती नजर आती है। जो अपने सपनो को पूरा करने के लिए हर बार एक नयी कोशिश करती है बस हार नहीं मानती , अकेलेपन से एकांत का ये सफर आपको सोचने पर मजबूर कर देगा और अंत में आप खुद को अपने सपनो के करीब पाएंगे,,,,,,,,!!

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